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Why ganga river  is pure  #गंगा_ही_का_पानी_निर्मल_क्यों                                  Ganga nadi ki pavitrta..⛲संत रा...
23/01/2025

Why ganga river is pure

#गंगा_ही_का_पानी_निर्मल_क्यों




Ganga nadi ki pavitrta..

⛲संत रामपाल जी महाराज जी ने ही गंगा जल का रहस्य बताया है कि गंगा का ही पानी निर्मल क्यों है व गंगा सतलोक से आयी वहां से आकर शिव जी के लोक में एक बहुत बड़ा सरोवर है जिसका नाम जटा कुंडली है उसको 6 महीने में भर कर फिर यह नीचे गिरकर वाष्प रूप बन जाती है और फिर हिमालय के ऊपर आकर के यह बर्फ रूप धारण कर लेती है। और फिर वहां से जल बनकर निकलती है।
सतलोक का कोई भी पदार्थ खराब नहीं होता। इसलिए गंगा जल भी कभी खराब नहीं होता।

⛲ गंगा का ही पानी निर्मल क्यों है व गंगा नदी का रहस्य संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि यह पवित्र जल की नदी सतलोक से आई है।

⛲गंगा का ही पानी निर्मल है क्योंकि
गंगा नदी एक ऐसे अमरलोक (सतलोक) से आई है जहां की प्रत्येक वस्तु अमर है, कभी खराब नहीं होती। वहां की हंस आत्माएं भी अमर हैं। उनकी कभी जन्म-मृत्यु नहीं होती।

⛲प्रश्न: गंगा का ही पानी निर्मल क्यों है ?
उत्तर: गंगा नदी का पानी सतलोक से आया हुआ है , सतलोक अविनाशी स्थान है। वहां की कोई वस्तु खराब नहीं होती।

⛲ गंगा ऐसे लोक से आई है जहाँ दूध की नदियां बहती हैं, सदाबहार वृक्ष हैं। जहां की कोई वस्तु खराब नहीं होती। इसी कारण गंगा नदी का जल भी हमेशा एक जैसा बना रहता है।

⛲ गंगा नदी वास्तव में कबीर परमेश्वर की देन है। गंगा नदी का जल सतलोक से ब्रह्मलोक, ब्रह्मा, विष्णु के लोकों में होते हुए शिव लोक में बने जटा कुंडली डैम में आया वहां से ओवर फ्लो होकर हिम रूप में हिमालय पर्वत पर आया और आगे पिंघल कर जल का रूप धारण कर नीचे की ओर पृथ्वी पर नदी रुप में बहने लगा। यह प्रक्रिया निरंतर चल रही है।

⛲ गंगा नदी शिव की जटाओं से नहीं निकली बल्कि सतलोक से चल कर अन्य लोकों में होते हुए शिव लोक में बने जटा कुंडली नाम के बने बांध (डैम) से ओवरफ्लो होकर निकलती है।

⛲ भ्रांति- गंगा शिव की जटाओं से भागीरथ की प्रार्थना से आई !
सत्य:- कबीर परमेश्वर के विधि विधान अनुसार गंगा सतलोक से चली शिव लोक में आकर जटा कुंडली डैम को भरा फिर हिम रूप में हिमालय से निकली।

⛲ गलत धारणा - गंगा में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं!
तथ्य - गंगा में स्नान करने से पाप नहीं धुलते पाप का नाश तो पूर्ण सतगुरु की बताई सतभक्ति से होता है।

⛲ मिथक - गंगा में शुभ घड़ी में स्नान करने से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त हो जाता है!
तथ्य - गंगा में स्नान करने से कभी मोक्ष नहीं हो सकता, जहां से गंगा आई है उस लोक में सतभक्ति करके पहुंचने पर मोक्ष होगा।

⛲ मिथक - गंगा नदी भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर पृथ्वी पर आई।
तथ्य - पूर्ण परमेश्वर के विधि विधान के अनुसार गंगा पृथ्वी पर आई उस समय भागीरथ भी तपस्या कर रहे थे जिसका श्रेय उनका मिल गया जबकि गंगा को आना ही था।

⛲ गंगा नदी इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि पृथ्वी से अन्य ऊपर एक अविनाशी लोक है जिसे सतलोक कहते हैं , हम सभी सतलोक के ही वासी हैं।

⛲सतलोक अमर स्थान है!
वहां की हंस आत्माएं भी अमर हैं। उनकी कभी जन्म-मृत्यु नहीं होती। वहां की एक वस्तु सैंपल रुप में यहां काल के लोक में कबीर परमेश्वर जी ने गंगा नदी के रूप में दे रखी है।

⛲गंगा नदी का जल सतलोक से ब्रह्मलोक,ब्रह्मा,विष्णु के लोकों में होते हुए शिव लोक में बने जटा कुंडली डैम में आया वहां से ओवर फ्लो होकर हिम रूप में हिमालय पर्वत पर आया और आगे पिंघल कर जल का

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 #गंगा_ही_का_पानी_निर्मल_क्यों                                  ⛲संत रामपाल जी महाराज जी ने ही गंगा जल का रहस्य बताया है...
23/01/2025

#गंगा_ही_का_पानी_निर्मल_क्यों




⛲संत रामपाल जी महाराज जी ने ही गंगा जल का रहस्य बताया है कि गंगा का ही पानी निर्मल क्यों है व गंगा सतलोक से आयी वहां से आकर शिव जी के लोक में एक बहुत बड़ा सरोवर है जिसका नाम जटा कुंडली है उसको 6 महीने में भर कर फिर यह नीचे गिरकर वाष्प रूप बन जाती है और फिर हिमालय के ऊपर आकर के यह बर्फ रूप धारण कर लेती है। और फिर वहां से जल बनकर निकलती है।
सतलोक का कोई भी पदार्थ खराब नहीं होता। इसलिए गंगा जल भी कभी खराब नहीं होता।

⛲ गंगा का ही पानी निर्मल क्यों है व गंगा नदी का रहस्य संत रामपाल जी महाराज ने बताया कि यह पवित्र जल की नदी सतलोक से आई है।

⛲गंगा का ही पानी निर्मल है क्योंकि
गंगा नदी एक ऐसे अमरलोक (सतलोक) से आई है जहां की प्रत्येक वस्तु अमर है, कभी खराब नहीं होती। वहां की हंस आत्माएं भी अमर हैं। उनकी कभी जन्म-मृत्यु नहीं होती। वहां की एक वस्तु सैंपल रुप में यहां काल के लोक में कबीर परमेश्वर जी ने गंगा नदी के रूप में दे रखी है।

⛲प्रश्न: गंगा का ही पानी निर्मल क्यों है ?
उत्तर: गंगा नदी का पानी सतलोक से आया हुआ है , सतलोक अविनाशी स्थान है। वहां की कोई वस्तु खराब नहीं होती।

⛲ गंगा नदी वास्तव में कबीर परमेश्वर की देन है। गंगा नदी का जल सतलोक से ब्रह्मलोक, ब्रह्मा, विष्णु के लोकों में होते हुए शिव लोक में बने जटा कुंडली डैम में आया वहां से ओवर फ्लो होकर हिम रूप में हिमालय पर्वत पर आया और आगे पिंघल कर जल का रूप धारण कर नीचे की ओर पृथ्वी पर नदी रुप में बहने लगा। यह प्रक्रिया निरंतर चल रही है।

⛲ गंगा नदी शिव की जटाओं से नहीं निकली बल्कि सतलोक से चल कर अन्य लोकों में होते हुए शिव लोक में बने जटा कुंडली नाम के बने बांध (डैम) से ओवरफ्लो होकर निकलती है।

⛲ भ्रांति- गंगा शिव की जटाओं से भागीरथ की प्रार्थना से आई !
सत्य:- कबीर परमेश्वर के विधि विधान अनुसार गंगा सतलोक से चली शिव लोक में आकर जटा कुंडली डैम को भरा फिर हिम रूप में हिमालय से निकली।

⛲ गलत धारणा - गंगा में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं!
तथ्य - गंगा में स्नान करने से पाप नहीं धुलते पाप का नाश तो पूर्ण सतगुरु की बताई सतभक्ति से होता है।

⛲ मिथक - गंगा में शुभ घड़ी में स्नान करने से मनुष्य मोक्ष को प्राप्त हो जाता है!
तथ्य - गंगा में स्नान करने से कभी मोक्ष नहीं हो सकता, जहां से गंगा आई है उस लोक में सतभक्ति करके पहुंचने पर मोक्ष होगा।

⛲ मिथक - गंगा नदी भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर पृथ्वी पर आई।
तथ्य - पूर्ण परमेश्वर के विधि विधान के अनुसार गंगा पृथ्वी पर आई उस समय भागीरथ भी तपस्या कर रहे थे जिसका श्रेय उनका मिल गया जबकि गंगा को आना ही था।

⛲ गंगा नदी इस बात का जीता जागता उदाहरण है कि पृथ्वी से अन्य ऊपर एक अविनाशी लोक है जिसे सतलोक कहते हैं , हम सभी सतलोक के ही वासी हैं।

⛲सतलोक अमर स्थान है!
वहां की हंस आत्माएं भी अमर हैं। उनकी कभी जन्म-मृत्यु नहीं होती। वहां की एक वस्तु सैंपल रुप में यहां काल के लोक में कबीर परमेश्वर जी ने गंगा नदी के रूप में दे रखी है।

Sat saheb
22/01/2025

Sat saheb

 #गुरुनानकजी_के_गुरु_कौन   #हक्काकबीर_करीम_तू                       सूक्ष्मवेद में बताया गया है किझांकी देख कबीर की नानक...
19/01/2025

#गुरुनानकजी_के_गुरु_कौन

#हक्काकबीर_करीम_तू

सूक्ष्मवेद में बताया गया है कि

झांकी देख कबीर की नानक किती वाह।
वाह सिक्खां दे गल पड़ी कौन छुड़ावै ता।।

अर्थात कबीर साहेब को सतलोक में सर्व सृष्टि के रचनहार के रूप में देखने के बाद श्री नानक जी के मुख से "वाहेगुरु" शब्द निकला। क्योंकि नानक जी को जिंदा महात्मा के रूप में कबीर साहेब ही मिले थे जो उनके गुरु थे। सत साहिब ।।

https://youtu.be/LmC9DoBbe4cFull video on youtube
27/09/2024

https://youtu.be/LmC9DoBbe4c
Full video on youtube

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https://youtu.be/20MlpokWUrc?feature=shared
14/09/2024

https://youtu.be/20MlpokWUrc?feature=shared

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