03/07/2020
तलाशिये कौन नहीं चाहता आपका कद बढ़े.......!
मध्यप्रदेश के मंत्रिमंडल विस्तार में इंदौर को एक और मंत्री सुश्री उषा ठाकुर के रूप में मिला। उनका हक़ भी बनता है। तीन बार अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से विपरीत परिस्थितियों में चुनाव लड़ना आसान नहीं था। मुझे याद है, जब पहली बार उषा दीदी (इंदौर में लगभग सभी लोग उन्हें इसी तरह संबोधित करते है) को इंदौर के एक नंबर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा ने मैदान में उतारा था, तो पार्टी के लिए अनुकूल स्थिति नहीं थी। उनकी उम्मीदवारी की घोषणा चुनाव के कुछ दिनों पूर्व ही की गई थी। यह अवधि एक नंबर विधानसभा में बदलाव करने के लिए किसी भी सूरत में पर्याप्त नहीं लग रही थी। मैं अपने कैमरापर्सन के साथ उषा दीदी के घर पहुंचा, तो पता चला वे विश्राम कर रही है। सर पर चुनाव और उषा दीदी का यूं बेफिक्र आराम करना मुझे अजीब लगा। मैंने जाते ही पूछ लिया-दीदी इतनी बेफिक्री कैसे..... ! वे सहजता से बोली-'मुझे चुनाव कहां लड़ना है। पार्टी लड़ रही है। पार्टी का हर कार्यकर्ता लड़ रहा है। हम सब मिलकर लड़ेंगे और जीतेंगे।' दीदी ने वह चुनाव जबर्दस्त तरीके से लड़ा और कांग्रेस के हलक से जीत निकाल ली। विधायक बनने के बाद भी उषा दीदी में कोई बदलाव नहीं आया। जिम्मेदारियां बड़ी जरूर, लेकिन उनकी जिंदादिली और सहजता पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने अपना कार्यकाल बेबाकी से पूरा किया। एक बार फिर चुनाव का मौसम आया और इस बार एक नंबर की बजाय इंदौर की सबसे छोटी लेकिन असहज सीट तीन नंबर से उन्हें मोर्चा संभालने का पार्टी का आदेश आया। यहां भी वे जी जान से जुट गई और तमाम कयासों के विपरीत चुनाव में बाज़ी मारकर राजनीति के धुरंधरों को चौका दिया। इस सीट पर भी उनका कार्यकाल चर्चा में रहा। बावजूद इसके उषा दीदी का राजनीतिक सफर दायरे में सीमित कहां रहना था। तीसरा चुनाव आया तो राजनीतिक हलचल ने बता दिया कि दीदी को तीन नंबर सीट भी छोड़ना होगी। राजनीति के जानकार अनुमान लगा रहे थे कि संभवतः इंदौर की ही किसी दूसरी सीट पर दीदी को अवसर मिल जाएगा , लेकिन पार्टी ने उन्हें महू विधानसभा की जिम्मेदारी देकर एक नई चूनौती खड़ी कर दी। एक बार तो लगा कि यह उनके राजनीतिक विरोधियों का बिछाया जाल है, जिसमे से निकलना आसान नहीं होगा। लेकिन जब इस सीट का परिणाम आया तो राजनीति के दिग्गज भी चौंक गए। महू सीट पर जीत हासिल कर सुश्री उषा ठाकुर ने बता दिया कि वे भी राजनीति की माहिर और उम्दा खिलाडी बन चुकी है। ऐसे में यदि आज उन्हें शिवराजसिंह चौहान की कैबिनेट में सहजता से और सम्मानजनक जगह मिली है, तो इस पर चौंकने की जरुरत नहीं है। ....... जहां तक अन्य दावेदारों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर चीख-पुकार मच रही है, तो उन्हें ही तलाशना चाहिए कि कौन उनके राजनीतिक कद को बढ़ने नहीं देना चाहता......!
- निर्मल सिरोहिया