05/06/2026
बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव: क्या स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भुलाया जा रहा है?
भोपाल स्थित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने के प्रस्ताव ने एक नई बहस को जन्म दिया है। यह केवल किसी संस्थान के नाम का प्रश्न नहीं है, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले एक महान क्रांतिकारी के सम्मान से भी जुड़ा हुआ विषय है।
मौलाना प्रोफेसर बरकतउल्लाह भोपाली भारत के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों में से थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संघर्ष किया। उनका जीवन देश की आज़ादी के लिए समर्पित था।
बरकतउल्लाह भोपाली के प्रमुख योगदान:
• उनका जन्म भोपाल में हुआ था, इसलिए उन्हें “बरकतउल्लाह भोपाली” के नाम से जाना जाता है।
• वे अनेक भाषाओं के ज्ञाता थे और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए एशिया, यूरोप तथा अमेरिका सहित कई देशों की यात्राएँ कीं।
• वर्ष 1915 में अफ़ग़ानिस्तान के काबुल में स्थापित भारत की निर्वासित (Provisional) सरकार में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उन्हें उस सरकार का प्रधानमंत्री माना जाता है।
• उनका संबंध गदर आंदोलन तथा विदेशों में सक्रिय भारतीय क्रांतिकारी नेटवर्क से भी रहा।
• उनके ऐतिहासिक योगदान के सम्मान में वर्ष 1988 में भोपाल विश्वविद्यालय का नाम बदलकर बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय रखा गया था।
अब विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इसका नाम बदलकर “वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय” करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया है। अंतिम निर्णय राज्य सरकार तथा अन्य संवैधानिक प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के बाद लागू होगा।
प्रश्न यह है कि क्या किसी स्वतंत्रता सेनानी के नाम को हटाना केवल एक प्रशासनिक निर्णय है, या फिर यह हमारे इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान की उपेक्षा भी है?
बरकतउल्लाह भोपाली उन महान क्रांतिकारियों में थे जिन्होंने भारत की आज़ादी के लिए देश की सीमाओं से बाहर रहकर भी संघर्ष किया। उनके योगदान को इतिहास में सम्मानपूर्वक याद रखा जाना चाहिए।