04/08/2026
दतिया और बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम - सन्दर्भ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी)
नमस्कार
मै संतोष के गुप्ता प्रैक्टिसिंग टैक्स एडवोकेट छतरपुर मप्र
दोस्तो,भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी पहचान केवल चुनाव जीतने वाली पार्टी की नहीं रही, बल्कि एक कार्यकर्ता आधारित वैचारिक संगठन की रही है। वर्षों तक यह कहा जाता रहा कि भाजपा में व्यक्ति से बड़ा संगठन है, संगठन से बड़ा विचार है और विचार से बड़ा राष्ट्रहित। यही उसकी सबसे बड़ी शक्ति थी।
लेकिन हाल के वर्षों में एक प्रश्न लगातार उठ रहा है—क्या हम कार्यकर्ता आधारित दल की जगह धीरे-धीरे नेता आधारित दल की ओर बढ़ रहे हैं ?
यदि इस प्रश्न का उत्तर वास्तव में ईमानदारी से खोजा जाए, तो आत्ममंथन की आवश्यकता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
पहले संगठन में किसी कार्यकर्ता की पहचान उसके समर्पण, परिश्रम और वैचारिक निष्ठा से होती थी। आज अनेक स्थानों पर यह धारणा बनती जा रही है कि किसी कार्यकर्ता का मूल्यांकन उसके कार्य से अधिक इस आधार पर होता है कि वह किस नेता के निकट है। जब विचार की जगह व्यक्ति और संगठन की जगह व्यक्तिगत पसंद-नापसंद निर्णयों का आधार बनने लगे, तो संगठन की मूल आत्मा प्रभावित होती है।
भाजपा का इतिहास बताता है कि यह दल सामूहिक नेतृत्व, संगठनात्मक अनुशासन और विचार आधारित निर्णयों के कारण देश की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति बना। यदि निर्णयों में कार्यकर्ताओं की भावना, स्थानीय संगठन की राय और वैचारिक प्रतिबद्धता की उपेक्षा होने लगे, तो कार्यकर्ता स्वयं को उपेक्षित महसूस करने लगता है। यही स्थिति धीरे-धीरे संगठन की ऊर्जा को कम करती है।
उपचुनावों और स्थानीय चुनावों के परिणाम भी कई बार यही संकेत देते हैं कि केवल लोकप्रिय नेतृत्व पर्याप्त नहीं होता। चुनाव अंततः बूथ का कार्यकर्ता ही जीतता है। यदि वही कार्यकर्ता सम्मान, संवाद और सहभागिता से वंचित महसूस करे, तो उसका उत्साह प्रभावित होना स्वाभाविक है।
यह भी ध्यान रखना होगा कि नेतृत्व आवश्यक है, लेकिन नेतृत्व तभी प्रभावी होता है जब उसके पीछे प्रेरित और सम्मानित कार्यकर्ताओं की शक्ति खड़ी हो। नेता संगठन को दिशा देता है, पर संगठन को गति कार्यकर्ता ही देता है।
आज आवश्यकता किसी व्यक्ति विशेष की आलोचना नहीं, बल्कि संगठनात्मक आत्मचिंतन की है। हमें स्वयं से पूछना होगा—
क्या निर्णय प्रक्रिया में कार्यकर्ताओं की बात सुनी जा रही है?
क्या विचारधारा आज भी सर्वोच्च प्राथमिकता है?
क्या योग्यता और समर्पण को व्यक्तिगत समीकरणों से ऊपर स्थान मिल रहा है?
क्या संगठन में संवाद पहले जैसा जीवंत है?
यदि इन प्रश्नों के उत्तर संतोषजनक नहीं हैं, तो सुधार की शुरुआत यहीं से होनी चाहिए।
भाजपा की वास्तविक शक्ति उसके शीर्ष नेताओं में नहीं, बल्कि उन लाखों निष्ठावान कार्यकर्ताओं में है जो बिना किसी व्यक्तिगत अपेक्षा के विचार और राष्ट्रहित के लिए कार्य करते हैं।
जब विचार सर्वोपरि रहता है, तब संगठन मजबूत होता है।
जब व्यक्ति विचार से बड़ा हो जाता है, तब संगठन धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है।
इसलिए समय की मांग है कि संगठन पुनः अपने मूल मंत्र की ओर लौटे—"व्यक्ति नहीं, विचार; पद नहीं, संगठन; नेतृत्व नहीं, कार्यकर्ता ही सबसे बड़ी शक्ति है।"
ऐसा आत्ममंथन केवल किसी एक दल के लिए नहीं, बल्कि किसी भी कार्यकर्ता-आधारित लोकतांत्रिक संगठन की दीर्घकालिक मजबूती के लिए आवश्यक है।
Narendra Modi Amit Shah Bharatiya Janata Party (BJP) BJP Madhya Pradesh Hemant Khandelwal Dr. Virendra Kumar