22/04/2026
पुरानी फिल्मो के review section में आज हम धुंद फिल्म का review करने की कोशिश करेंगे
धुंद ( - 1973) बी. आर. चोपड़ा (B. R. Chopra) द्वारा निर्देशित एक बेहतरीन और कल्ट 'मर्डर मिस्ट्री' (Murder Mystery) फिल्म है। यह फिल्म मशहूर ब्रिटिश लेखिका अगाथा क्रिस्टी (Agatha Christie) के नाटक "द अनएक्सपेक्टेड गेस्ट" (The Unexpected Guest) पर आधारित थी। अगर आपको सस्पेंस और 'हूडनिट' (Whodunit - कातिल कौन है?) फिल्में पसंद हैं, तो यह बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन थ्रिलर फिल्मों में से एक है।
यहाँ धुंद का विस्तृत रिव्यू (समीक्षा) दिया गया है:
1. कहानी (The Story)
कहानी एक घने कोहरे (Dhund) वाली रात से शुरू होती है। एक मुसाफिर चंद्रशेखर (नवीन निश्चल) की कार का एक्सीडेंट हो जाता है। मदद मांगने के लिए वह पास के ही एक आलीशान बंगले में घुसता है। अंदर का नज़ारा देखकर उसके होश उड़ जाते हैं—व्हीलचेयर पर एक आदमी की लाश पड़ी है, और उसके ठीक सामने एक बेहद खूबसूरत औरत रानी (ज़ीनत अमान) हाथ में बंदूक लिए खड़ी है।
रानी बताती है कि वह आदमी उसका क्रूर और जालिम पति ठाकुर रंजीत सिंह (डैनी डेंजोंगप्पा) है, जो उसे रोज़ टॉर्चर करता था, और हाथापाई में गोली चल गई। चंद्रशेखर को उस पर तरस आ जाता है और वह पुलिस को चकमा देने के लिए इस कत्ल को एक 'डकैती' का रूप देने में रानी की मदद करता है।
लेकिन जब इंस्पेक्टर जोशी (मदन पुरी) जांच शुरू करते हैं, तो पता चलता है कि कहानी इतनी सीधी नहीं है। रानी का एक वकील प्रेमी सुरेश (संजय खान) भी है। बंगले में रहने वाला हर इंसान (नौकर से लेकर परिवार तक) रंजीत सिंह से नफरत करता था। क्या रानी ही असली कातिल है, या चंद्रशेखर ने किसी अनजान साज़िश में खुद को फंसा लिया है? फिल्म का सस्पेंस अंत तक आपको बांधे रखता है।
2. अभिनय (Performances)
डैनी डेंजोंगप्पा (ठाकुर रंजीत सिंह): डैनी का किरदार भले ही फिल्म की शुरुआत में मर जाता है, लेकिन फ्लैशबैक में उनका खौफनाक और क्रूर अभिनय रोंगटे खड़े कर देता है। एक अपाहिज लेकिन जालिम पति के रूप में उन्होंने फिल्म में जान डाल दी।
ज़ीनत अमान (रानी): ज़ीनत अमान ने एक डरी हुई, लेकिन रहस्यमयी पत्नी का किरदार बहुत ही खूबसूरती से निभाया। सस्पेंस फिल्मों में उनकी ग्लैमरस स्क्रीन प्रेजेंस हमेशा कमाल की रही है।
नवीन निश्चल (चंद्रशेखर): एक अनजान मुसाफिर के रूप में उनका अभिनय बहुत ही सधा हुआ था, जो बिना किसी स्वार्थ के एक औरत की मदद करता है।
संजय खान (सुरेश): रानी के प्रेमी के रूप में संजय खान का रोल अहम था और उन्होंने इसे बखूबी निभाया।
अशोक कुमार (पब्लिक प्रोसिक्यूटर): फिल्म के क्लाइमेक्स (अदालत के दृश्य) में अशोक कुमार की एंट्री और उनकी दलीलें फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाती हैं।
देवेन वर्मा: उन्होंने एक डरे हुए नौकर के रूप में इस सीरियस फिल्म में थोड़ी सी बेहतरीन कॉमेडी का तड़का लगाया है।
3. संगीत (Music)
सस्पेंस फिल्मों में गानों की गुंजाइश कम होती है, लेकिन रवि (Ravi) का संगीत और साहिर लुधियानवी के बोल इस फिल्म के गंभीर माहौल में पूरी तरह फिट बैठते हैं:
"संसार की हर शय का इतना ही फसाना है": महेंद्र कपूर की आवाज़ में यह एक बहुत ही दार्शनिक (Philosophical) और हिट गीत है।
"उलझन सुलझे ना": आशा भोसले का गाया यह गाना रानी की उलझी हुई मानसिक स्थिति और फिल्म के सस्पेंस को बखूबी दर्शाता है।
4. निर्देशन और प्रभाव (Direction & Impact)
बी. आर. चोपड़ा ने इस फिल्म को बिल्कुल हॉलीवुड थ्रिलर के स्तर का बनाया। कोहरे वाली रात का माहौल, बंगले का डरावना सन्नाटा और हर किरदार पर शक की सुई—चोपड़ा साहब का डायरेक्शन इतना कसा हुआ था कि दर्शक एक पल के लिए भी स्क्रीन से नज़रें नहीं हटा पाते। इसमें कोई फालतू मेलोड्रामा नहीं है, सिर्फ प्योर सस्पेंस है।
5. निष्कर्ष (Final Verdict)
धुंद एक ऐसी मास्टरक्लास थ्रिलर है जो आज के दौर की मिस्ट्री फिल्मों को भी कड़ी टक्कर दे सकती है। अगर आप जानना चाहते हैं कि 70 के दशक में बिना वीएफएक्स (VFX) और बिना शोर-शराबे के एक असली 'मर्डर मिस्ट्री' कैसे बनाई जाती थी, तो यह फिल्म आपके लिए एक 'मस्ट वॉच' है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐½ (4.5/5) - अगाथा क्रिस्टी की कहानी और बी.आर. चोपड़ा का सस्पेंस से भरा मास्टरपीस (A Gripping Murder Mystery)