shayar. Mr. A .K

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22/02/2026

बहुत समय पहले एक घने जंगल में एक विशाल हाथी और एक तेज़ व चतुर बाघ रहते थे। हाथी का नाम गजराज था। वह शांत स्वभाव का था और...
22/02/2026

बहुत समय पहले एक घने जंगल में एक विशाल हाथी और एक तेज़ व चतुर बाघ रहते थे। हाथी का नाम गजराज था। वह शांत स्वभाव का था और सभी जानवरों की मदद करता था। बाघ का नाम शेरू था। वह ताकतवर तो था, लेकिन थोड़ा घमंडी भी था। उसे अपनी शक्ति पर बहुत अभिमान था।
एक दिन जंगल में भयंकर सूखा पड़ गया। नदी और तालाब सूखने लगे। सभी जानवर पानी के लिए परेशान हो गए। गजराज को जंगल के एक पुराने कुएँ का पता था, जिसमें अभी भी पानी था। वह रोज़ अपनी सूंड में पानी भरकर छोटे जानवरों तक पहुँचाता था।
शेरू यह सब देख रहा था। उसने सोचा कि वह सबसे ताकतवर है, इसलिए पहले पानी उसी को मिलना चाहिए। वह गुस्से में गजराज के पास गया और बोला, “यह जंगल मेरा है, पहले पानी मैं पियूँगा!” गजराज ने शांत स्वर में कहा, “जंगल सबका है, और पानी भी सबका है।”
बात बढ़ गई और शेरू ने गजराज पर हमला कर दिया। लेकिन गजराज ने समझदारी से अपनी सूंड से शेरू को उठाकर दूर रख दिया। उसने उसे चोट नहीं पहुँचाई, बस समझाया, “ताकत का सही उपयोग दूसरों की रक्षा के लिए होता है, न कि उन्हें डराने के लिए।”
उसी समय कुछ शिकारी जंगल में आ गए। शेरू उनके जाल में फँस गया। उसकी दहाड़ सुनकर गजराज दौड़ा आया। उसने अपनी ताकत से जाल तोड़ दिया और शेरू को बचा लिया। शेरू को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने गजराज से माफी माँगी और वादा किया कि वह अब घमंड नहीं करेगा।
उस दिन के बाद दोनों अच्छे मित्र बन गए। जंगल में फिर से शांति लौट आई। कहानी की सीख है — सच्ची ताकत दया और समझदारी में होती है।

शीर्षक: खरगोश और कछुए की एक कहानीचलो बच्चों अब मैं तुम्हें एक खरगोश और एक कछुए की कहानी सुनाती हूँ। एक सुंदर जंगल में बह...
22/02/2026

शीर्षक: खरगोश और कछुए की एक कहानी
चलो बच्चों अब मैं तुम्हें एक खरगोश और एक कछुए की कहानी सुनाती हूँ। एक सुंदर जंगल में बहुत सारे जानवर रहते थे और वे सभी दोस्त थे। इन सब में से एक खरगोश और कछुआ भी था। खरगोश कछुए को चिढ़ाता था कि तुम इतना धीरे चलते हो और देखो मैं कितनी तेजी से चलता हूं और दौड़ता हूं। कछुए ने कहा; मैं क्या कर सकता हूं? खरगोश कहता है कि चलो एक दौड़ करते हैं और आप पाएंगे कि आप कितनी धीमी गति से चलते हैं। कछुआ मान गया और पहाड़ तक जाने के लिए दौड़ का फैसला किया गया। उनके सभी पशु मित्र भी दौड़ देखने आए।

जब दौड़ शुरू हुई और खरगोश इतनी तेजी से भागा और उसने इतनी दूर जाकर पीछे मुड़कर देखा लेकिन उसे कछुआ दूर तक नहीं दिखाई दिया। उसने कुछ आराम करने का फैसला किया क्योंकि मौसम बहुत सुंदर और ठंडी हवा वाला था । आराम करते हुए खरगोश सो गया। जैसे ही वह उठा तो वह पहाड़ की ओर भागने लगा और उसने देखा कि कछुआ वहाँ पहले से ही था। वह बहुत शर्मिंदा हुआ और उसने कछुए से कहा, कृपया मुझे माफ कर दो मेरे दोस्त। मैं अहंकार से भरा था और तुम्हें नीचे गिरा दिया था। तो बच्चों हम इस कहानी से सीखते हैं कि हमें अपने बारे में इतना डींग नहीं मारना चाहिए। हर जीव में कुछ गुण होते हैं और हमें उनका सम्मान करना चाहिए। हमें एक दूसरे से प्यार करके जीना चाहिए। सही है न बच्चों? शुक्रिया!!

Hare krishna
22/02/2026

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