Vivek kumar Tiwari

Vivek kumar Tiwari विशेष संवाददाता पंजाब केसरी

15/04/2023

उत्तर प्रदेश के कुख्यात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई के मर्डर का लाइव वीडियो

06/12/2022

निवाड़ी के ढिल्ला में हाथ में देशी तमंचा लेकर स्टेज पर लड़की का डांस ,कानून व्यवस्था हवा हवाई,दस्टोन के कार्यक्रम में बुलाई गई थी बालाएं

05/12/2022

मीडियाकर्मी नहीं दिखे तो जनसंपर्क अधिकारी पर गुस्सा हुए सीएम शिवराज , नसरुल्लागंज क्षेत्र के ग्राम छीपानेर पहुंचे थे सीएम #शिवराज

20/08/2021

ये उज्जैन का नजारा है, जहाँ लगे तालिबान जिंदा.... के नारे, बेहद शर्मनाक

13/06/2021

पहली लात में निर्माण कार्य ध्वस्त दूसरी में मंत्री खुद गिरते गिरते बचे दरअसल प्रधुम्न सिंह तोमर ग्वालियर में जानने निकले थे की बीच सड़क पर निर्माण कैसा हो रहा है पर दो लात में गुणवत्ता उन्होंने खुद ही जान ली....

13/06/2021

मुंबई में कुछ इस तरह देखते ही देखते कुएं में समा गई कार

23/05/2021
गुजराती कवियत्री पारुल खक्कड़ ने अपनी महज चौदह पंक्तियों से विश्व गुरु का सिंहासन डगमगा दिया है। पारुल खक्कड़ की कविता का ...
16/05/2021

गुजराती कवियत्री पारुल खक्कड़ ने अपनी महज चौदह पंक्तियों से विश्व गुरु का सिंहासन डगमगा दिया है। पारुल खक्कड़ की कविता का हिंदी अनुवाद ह्यास शैख़ ने किया है।

एक साथ सब मुर्दे बोले ‘सब कुछ चंगा-चंगा’
साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा

ख़त्म हुए शमशान तुम्हारे, ख़त्म काष्ठ की बोरी
थके हमारे कंधे सारे, आँखें रह गई कोरी
दर-दर जाकर यमदूत खेले
मौत का नाच बेढंगा
साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा

नित लगातार जलती चिताएँ
राहत माँगे पलभर
नित लगातार टूटे चूड़ियाँ
कुटती छाति घर घर
देख लपटों को फ़िडल बजाते वाह रे ‘बिल्ला-रंगा’
साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा

साहेब तुम्हारे दिव्य वस्त्र, दैदीप्य तुम्हारी ज्योति
काश असलियत लोग समझते, हो तुम पत्थर, ना मोती
हो हिम्मत तो आके बोलो
‘मेरा साहेब नंगा’
साहेब तुम्हारे रामराज में शव-वाहिनी गंगा

14/05/2021

पापियों को पनाह देते ये अनगिनत बंगले..जहाँ से लोगो को लगते हैं मौत के कांटे,आप भी जानिए इन बंगलो को..

(विवेक तिवारी।)यह बंगला लोगो के लिए शूल बन गया है ,यह बंगला लोगों को कांटे चुभा रहा है, यह बंगला आप को दर्द दे रहा हैं ,इस बंगले वाले को थोड़ी भी शर्म नहीं है, इस बंगले वाले को लोगों के दर्द को देखकर थोड़ी सी भी माथे में शिकन नहीं होती यह बंगला अब लोगों के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है, हर बार इस बंगले पर सवाल उठते हैं लेकिन ये बंगला वाला अपने ऊपर इन सवालों को कभी हावी नही होने देता , वह भूल जाता है कि जो सवाल उठ रहे हैं वह उस से ताल्लुक ही नहीं रखते लेकिन जनता जनार्दन आप जान जाइए यह जितने भी सवाल उठ रहे हैं आपके मन में उन तमाम सवालों का जवाब उस बंगले में ही मौजूद है। कोरोना काल में भी यह बंगला और इस बंगले में रहने वाले लोगों ने अपने चेहरे को चमकाने के लिए बहुत कोशिश की लेकिन अपने चेहरे चमकाने की कोशिश में इन्होंने दूसरों के चेहरे मुरझा के रख दिये है किसी मां का बेटा चला गया किसी पत्नी का पति चला गया लोग अनाथ हो गए लेकिन इस बंगले में कभी उदासी नजर नही आई इस बंगले की पनाह में मौतों का सौदा हुआ और अभी भी उन मौत के सौदागरों को बचाने के लिए पूरी कोशिश जारी है एक शब्द इन मौतों पर उस बंगले पर नही गूंजे , ऐसे अनगिनत बंगले हैं लेकिन कभी-कभी मनहूसियत वाले बंगलो की बात सभी करते हैं यह मनहूसियत बंगले की गलती नहीं होती है यह मनहूसियत उस बंगले वाले व्यक्ति की होती है जो उस बंगले में सकारात्मक ऊर्जा का संचार नहीं कर पाता है नकारात्मक उर्जा के बीच घिरा रहता है और फिर वही नकारात्मक ऊर्जा बंगले से निकलकर समाज को भी बर्बाद करने में तुली होती है मैं यहां पर संदर्भ न भी लिखूं तो लोग तो समझदार हो रहे हैं जो मेरे समस्त दर्द को समझ भी जाएंगे अगर आप जबलपुर के हैं तो आप भी उस बंगले वालों को जानते ही होंगे भोपाल में हैं तो वहां पर भी बंगले वाले हैं ,दिल्ली भी बंगला बन रहा है बस उसका नाम दूसरा है उनको भी जानते होंगे वह आपके लिए कोरोना काल में क्या कर सके, मैं यह भी नहीं कहता कि सारे बंगले वाले बुरे हैं लेकिन ऐसे बंगले वाले भी हैं जिन्हें हम बुरे की श्रेणी में रखे नहीं सकते हैं वह हैवान हो चुके हैं उनके बंगलों में हैवान लोगों को पनाह दी जाती है यह सिलसिला इतिहास के पन्नों में भी दर्ज है भारत का इतिहास भी महलों में पनाह पाता रहा है उन महलों में भी इसी तरह से पाप पनपते थे जो आधुनिक युग में इन बंगलों में पनपने लगे हैं जबलपुर में भी हम देखते हैं तो अखबारों की सुर्खियों में बंगले की कहानी निकल कर आ गई किसी ने लिखा कि नर पिशाच को पहले भी बचाया गया था तब उसने अपने आका को प्रसन्न करने के लिए बंगला दे दिया जाहिर सी बात है उस बंगले की कृपा उस पर अभी भी होगी कुछ लोग यह बोले कि अब एक और बंगला हो गया, जहां पर भी पनाह दी जा रही है ऐसे पापियों को और ये पापी 1 जिले से निकलकर अब चारों तरफ फैलते जा रहे हैं नीचे जो मैंने एक गाना (कांटा लगा हाय लगा ) आप गाना सुनेंगे तो उसको आप समझ जाएंगे यह गाना आपके मनोरंजन के लिए हो सकता है इस गाने में तो एक दर्द है उन सब को महसूस होगा जो इस बंगले के जरिए पनाह पाने वाला नर पिसाच उन्हें मिला है और उसने लाशों के ढेर लगा दिए, मेरा मकसद यहां यही है कि सब बंगले ऐसे हैं, लेकिन कुछ ऐसे ही है लिहाजा खुद को तैयार कर लीजिए इन बंगले वालों से बचाने के लिए क्योंकि यह बंगले वाले पापियों को पनाह देना नहीं छोड़ेंगे,क्योकि ये भी पाप के भागीदार है..

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