14/02/2026
‘वेलेंटाइन’ क्या होता है, कोई राज्यवर्धन शर्मा से सीखे; लगभग 14 वर्षों तक कोमा में पड़ी पत्नी की मृत्यु होने तक करते रहे अनवरत सेवा...
1980 बैच रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं श्री शर्मा।
मेरे हाथों ही लिखी थी सेवा इसलिए भगवान ने बनायी जोड़ी: राज्यवर्धन।
पटना। 14 फरवरी को प्रत्येक वर्ष ‘वेलेंटाइन-डे’ मनाया जाता है। नई पीढ़ी के युवाओं में इस दिवस का एक खास आकर्षण और महत्त्व होता है। वेलेंटाइन के मौके पर प्यार का इजहार करने के अलग-अलग तरीके हैं। वेलेंटाइन का मतलब होता है निष्कपट प्यार! यूँ तो इस दिवस को साल में एक दिन यानी 14 फरवरी को ही मनाते हैं पर बिहार में एक ऐसे रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी हैं जिनकी कोमा में पड़ी पत्नी के लिए, उनके द्वारा पत्नी की मृत्यु होने तक अहर्निश की गई सेवा वेलेंटाइन-डे मनाने के पीछे का असली मकसद बताती है। तेरह वर्षों से कोमा में पड़ी पत्नी जयश्री शर्मा के लिए उनके द्वारा पत्नी की जा रही सेवा उनके लिए सालों वेलेंटाइन-डे के समान तो है ही, नई पीढ़ी के युवाओं और युवा दंपत्तियों के लिए एक प्रेरणा और उदाहरण भी है। ये अधिकारी हैं 1980 बैच के बिहार कैडर के रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी राज्यवर्धन शर्मा। पुलिस विभाग में रहते हुए राज्यवर्धन शर्मा को एक कड़क पर इमानदार छवि वाला अधिकारी माना जाता रहा पर इस अधिकरी के सीने में कितना दर्द छिपा है यह कोई नहीं जानता। यहां तक कि आज तक उन्होंने अपना व्यक्तिगत दर्द और व्यक्तिगत परेशानियों को भी किसी से शेयर नहीं किया।
पटना में ही पदस्थापना के दौरान वर्ष 2007 में राज्यवर्धन शर्मा की धर्मपत्नी जयश्री शर्मा को पारालाइसिस अटैक हुआ जिसके कुछ दिन बाद ब्रेन हेमरेज के कारण वह कोमा में चली गईं। ब्रेन हेमरेज के कारण जयश्री शर्मा बोलने, सोचने और चलने से लाचार हो गईं। उस वक्त राज्यवर्धन शर्मा का एकमात्र पुत्र व पुत्री अमरिका में पढ़ाई कर रहे थे। बच्चों की पढ़ाई डिस्टर्ब नहीं हो इस कारण राज्यवर्धन शर्मा ने तब बच्चों को इसकी कोई जानकारी दिए बिना इस विश्वास के साथ पत्नी की सेवा में जुटे रहे कि आज न कल उनकी पत्नी ठीक हो जाएगी। कई जिलों के एसपी, पटना के जोनल आईजी सहित कई प्रमुख पदों पर रहते हुए राज्यवर्धन शर्मा 30 सितम्बर 2011 को एडीजी, सीआईडी के पद से रिटायर्ड हुए। सरकार ने ने उनके सेवाकाल में उनकी ईमानदारी, योग्यता और काम के प्रति पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए 8 नवम्बर 2011 को उन्हें बिहार लोक सेवा आयोग(बीपीएससी) जैसे महत्त्वपूर्ण आयोग का सदस्य बनाया, जिस पद पर सरकारी काम के बोझ के बावजूद पत्नी सेवा राज्यवर्धन शर्मा की दिनचर्या बनी रहीं जो क्रम मृत्यु होने तक जारी रही।
सरकारी सेवा काल में सुबह उठकर बिछावन पर ही कोमा में पड़ी अपनी पत्नी को नित्यकर्म से फारिग करवाना, उनका मुँह-हाथ धोकर भोजन नली में लगे पाइप के सहारे पेट तक तरल पदार्थ पहुंचाने के बाद ही राज्यवर्धन शर्मा कार्यालय के लिए निकलते रहे। दोपहर लंच टाइम और शाम में वापस आवास आने के बाद उनका अधिकांश समय पत्नी की सेवा में ही बीतता रहा। पत्नी को कोमा स्थिति में रहते हुए राज्यवर्धन शर्मा ने अमरिका में लेक्चरर अपने पुत्र और वहीं चिकित्सक अपनी बेटी की शादी पटना से की; पर दुर्भाग्य की कोमा में पड़ी उनकी पत्नी न तो अपनी बहू के बारे में कुछ जान सकीं और न ही दामाद के बारे में और ना ही उनका चेहरा देख सकीं।
सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी राज्यवर्धन शर्मा की पत्नी जयश्री का 2020 में निधन हो चुका है, पर एक पति के रुप में राज्यवर्धन शर्मा मृत्यु तिथि तक भी अपने दायित्वों और पतिधर्म का पालन करते रहे। राज्यवर्धन शर्मा जब घर में नहीं होते थे तो उनकी बूढ़ी मां और एक युवक जो मेडिकल टेक्नीशियन भी है, राज्यवर्धन शर्मा की पत्नी की सेवा और उनकी देख-रेख करती थी। लगभग 14 वर्षों तक बिछावन पर जिन्दा लाश बनकर रही उनकी पत्नी जयश्री शर्मा और राज्यवर्धन शर्मा बिहार ही नहीं पूरे देश और विश्व की युवा पीढ़ी के साथ साथ वैसे दंपत्तियों के लिए एक मिशाल हैं, जो सही मायने में ‘वेलेंटाइन’ का अर्थ समझना चाहते हैं।
चौदह वर्षों तक कोमा में पड़ी एक नेक दिल इंसान की पत्नी अगर कोमा के बावजूद जीवित रही तो उसका कारण है पति द्वारा की गई अनवरत सेवा और पत्नी के प्रति उनका अपार स्नेह और प्यार और समर्पण। पत्नी की गंभीर बीमारी और बेटा-पतोहू व बेटी-दामाद के विदेश में रहने के कारण किस तरह पत्नी की सेवा करते वे अपना दिन काटते रहे, इस प्रश्न पर राज्यवर्धन शर्मा कहते हैं कि ‘पत्नी की हालत देख दु:ख तो बहुत होता था पर अपना गम और दर्द यह सोचकर भूल जाता था कि शायद भगवान ने जयश्री की सेवा करने के लिए हमारी जोड़ी बनायी थी।’
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी कहते हैं कि ‘जब पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहार बाजपेयी, पूर्व रक्षा मंत्री स्व. जॉर्ज फर्नांडीस की बीमारी के बारे में सोचता था तो काफी कुछ दर्द भूल जाता था।’ उन्होंने कहा कि ‘कोई भी व्यक्ति जीवन में इस तरह का तकलीफ नहीं चाहता। पर ऊपर वाले की मर्जी के आगे किसी की नहीं चलती।’ इस वेलेंटाइन-डे के अवसर पर ऐसे अधिकारी के जज्बे को पत्रकार और पत्रकारिता जगत का सलाम और भगवान से यह प्रार्थना कि लोग उनकी सेवा भावना से सीखे और प्रेरणा लें कि प्रेम क्या होता है और अपनों के प्रति समर्पण किसे कहते हैं।
साभार:- खबर मंथन(विनायक विजेता)(पोस्ट लेखक वरिष्ठ पत्रकार अब दिवंगत हैं।)