Jaynagar News Express

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15/08/2026

जयनगर महादेव स्थान जयनगर 13वा महा लंगर के मुख्य अतिथि थे। खजौली विधान सभा के राजद उम्मीदवार श्री ब्रजकिशोर यादव जी ने उन्होंने दो शब्द कहा यह आस्था हमेशा बनी रहे। और भोले नाथ हमेशा खुश रहे। धन्यवाद

आप सभी को80वा स्वतंत्रता दिवस कि हार्दिक शुभकामनाएं बधाई।
15/08/2026

आप सभी को80वा स्वतंत्रता दिवस कि हार्दिक शुभकामनाएं बधाई।

रोटी बैंक जयनगर और महिला विकास मंच मधुबनी की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रहिका चौक पर शिव भक्तों के लिए सेवा, विश्रा...
15/08/2026

रोटी बैंक जयनगर और महिला विकास मंच मधुबनी की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रहिका चौक पर शिव भक्तों के लिए सेवा, विश्राम, चिकित्सा एवं भोजन शिविर का आयोजन...

रोटी बैंक जयनगर और महिला विकास मंच मधुबनी से प्रेरणा लेकर और कार्यक्रम के थीम की कॉपी कर जयनगर में भी कुछ संस्थाओं/डमी संस्था द्वारा आयोजन...

15/08/2026

नवयुवक सेवा समिति बेला कमला पूर्वी तट जयनगर

15/08/2026
15/08/2026

आर्य कुमार पुस्तकालय जयनगर जैसे सीमित मतदाता वाले चुनाव में भी मीडिया माहौल बनाने के लिए प्रेस कांफ्रेंस इत्यादि में जमकर बहाया गया पैसा, जमकर उड़ाया गया खैरात; प्रेस कांफ्रेंस में शामिल लोगों ने खोला पोल.

गुजरांवाला के एक लाला बलवंत की सात बेटियां... एक कुआं... एक जमीन...!जय किशन कर्णवाल की लेखनी से...गुजरांवाला...सरदार हरि...
15/08/2026

गुजरांवाला के एक लाला बलवंत की सात बेटियां... एक कुआं... एक जमीन...!

जय किशन कर्णवाल की लेखनी से...

गुजरांवाला...
सरदार हरिसिंह की भूमि व पाकिस्तान पंजाब का एक शहर, जहां कभी एक पंजाबी हिंदू खत्री जमींदार लाला जी उर्फ बलवंत खत्री का परिवार एक शानदार कोठी में भरे-पूरे परिवार के साथ अपनी पत्नी प्रभावती, सात बेटियां और एक बेटा सहित रहता था।

एक परिवार...
लाला जी के बेटे बलदेव की उम्र तब 20 साल थी। उससे छोटी लाजवंती (लाजो) 19 साल, राजवती (रज्जो) 17, भगवती (भागो) 16, पार्वती (पारो) 15, गायत्री (गायो) 13 व ईश्वरी (इशो) 11 बरस की थी। सबसे छोटी उर्मिला (उर्मी) 9 बरस की थी। प्रभावती पेट से थीं और जल्द ही फिर से कोठी में किलकारियां गूंजने वाली थी।

एक साल...
1947 में भारत का बंटवारा हो गया था और जिन्ना ने 'डायरेक्ट एक्शन डे' का ऐलान कर दिया था। गुजरांवाला के आसपास के इलाकों से हिंदू-सिखों के कत्लेआम की खबरें आने लगी थी। 'अल्लाह हू अकबर' और 'ला इलाहा इल्लल्लाह' का शोर करती भीड़ यलगार करती - काफिरों की औरतें भारत न जा पाएं। उन्हें हम हड़प लेंगे।

एक उम्मीद...
पर लाला जी गांधीजी से प्रभावित व बेफिक्र थे। उन्हें लगता था ये कुछ मजहबी मदांध हैं, जो दो-चार दिन में शांत हो जाएंगे और गुजरांवाला तो जट, गुज्जरों और राजपूत मुसलमानों का शहर है, जो 'अव्वल अल्लाह नूर उपाया' गाने वाले हैं। बाबा बुल्ले शाह और बाबा फरीद की कविताएं पढ़ते हैं। सूफी मजारों पर जाते है और सब भाई हैं। एक-दूसरे का खून नहीं बहाएंगे।

एक तारीख...
18 सितंबर 1947 को एक सिख डाकिया हांफते हुए हवेली पहुंचा और चिल्लाया - लाला जी इस जगह को छोड़ दो। तुम्हारी बेटियों को उठाने के लिए वे लोग आ रहे हैं। लज्जो को सलीम ले जाएगा। रज्जो को शेख मुहम्मद। भगवती को… लाला बलवंत ने उस डाकिए को जोरदार तमाचा जड़ा। कहा- क्या बकवास कर रहे हो। सलीम, मुख्तार भाई का बेटा है और मुख्तार भाई हमारे परिवार के सदस्य की तरह हैं।

एक चेतावनी...
पर डाकिये का जवाब था - "मुख्तार भाई ही भीड़ लेकर निकले हैं, लाला जी। सारे हिंदू-सिख भारत भाग रहे हैं। 300-400 लोगों का एक जत्था घंटे भर में निकलने वाला है। परिवार के साथ शहर के गुरुद्वारे पहुंचिए।"
यह कहकर सिख डाकिया सरपट भागा। शायद उसे दूसरे घर तक भी खबर पहुंचानी थी।

एक संवाद...
लाला जी पीछे मुड़े तो सात माह की गर्भवती प्रभावती ने सारी बात सुन ली, उसके आंसू बह रहे थे। उसने कहा - लाला जी हमें निकल जाना चाहिए। मैंने बच्चों से गहने, पैसे व कागज बांध लेने को कहा है।

पर लाला जी का मन मानने को तैयार नहीं था। सरदार झूठ बोल रहा है, हम कहीं नहीं जाएंगे। मुख्तार भाई ऐसा नहीं कर सकते। मैं खुद उनसे बात करूंगा।

प्रभावती ने बताया - वे पिछले महीने घर आए थे। कहा कि सलीम को लाजो पसंद है। वे चाहते हैं कि दोनों का निकाह हो जाए। लज्जो ने भी बताया था कि सलीम अपने दोस्तों के साथ उसे छेड़ता है। इसी वजह से उसने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया।

लाला बलवंत - तुमने यह बात पहले क्यों नहीं बताई? मैं मुख्तार भाई से बात करता। प्रभावती - आप भी बहुत भोले हैं। मुख्तार भाई खुद लज्जो का निकाह सलीम से करवाना चाहते हैं। अब उसे जबरन ले जाने के लिए आ रहे हैं।

एक गुरुद्वारा...
गुरुद्वारा हिंदू-सिखों से खचाखच भरा था, जिनमें पुरुषों के हाथों में तलवारें थी। गुजरांवाला पहलवानों के लिए मशहूर था। कई मंदिरों और गुरुद्वारों के अपने अखाड़े थे। हट्टे-कट्टे हिंदू-सिख गुरुद्वारे के द्वार पर सुरक्षा में मुस्तैद थे। कुछ लोग छत से निगरानी कर रहे थे। कुछ लोग कुएं के पास रखे पत्थरों पर तलवारों को धार दे रहे थे।महिलाएं, लड़कियां और बच्चे दहशत में थे। माएं नवजातों और बच्चों को सीने से चिपकाए हुईं थी।

एक भीड़...
अचानक एक भीड़ की आवाज आनी शुरू हुई। यह भीड़ बड़ी मस्जिद की तरफ से आ रही थी। वे नारा लगा रहे थे,
★ पाकिस्तान का मतलब क्या, ला इलाहा इल्लल्लाह
★ हंस के लित्ता पाकिस्तान, खून नाल लेवेंगे हिंदुस्तान
★ कारों, काटना असी दिखावेंगे
★ किसी मंदिर विच घंटी नहीं बजेगी हून
★ हिंदू दी जनानी बिस्तर विच, ते आदमी श्मशान विच

एक निशाना...
प्रभावती एक खिड़की के पास बेटियों के साथ बैठी थी। इकलौता बेटा मुख्य दरवाजे के बाहर मुस्तैद था। अचानक भीड़ की आवाज शांत हो गई। फिर मिनट भर के भीतर ही 'ला इलाहा इल्लल्लाह' का वही शोर शुरू हो गया। हर सेकेंड के साथ शोर बढ़ती जा रही थी। भीड़ में शामिल लोगों के हाथों में तलवार, फरसा, चाकू, चेन और अन्य हथियार थे, उनका निशाना गुरुद्वारा था।

एक प्रतिज्ञा...
गुरुद्वारे का प्रवेश द्वार अंदर से बंद था। कुछ लोग द्वार पर तो कुछ दीवार से सट कर हथियारों के साथ खड़े थे।

अचानक पुजारी और पहलवान सुखदेव शर्मा की आवाज गूंजी - "वे हमारी मां, बहन, पत्नी और बेटियों को लेने आ रहे हैं। उनकी तलवारें हमारी गर्दन काटने के लिए है। वे हमसे समर्पण करने और धर्म बदलने को कहेंगे। मैंने फैसला कर लिया है। झुकुंगा नहीं। अपना धर्म नहीं छोड़ूंगा। न ही उन्हें अपनी स्त्रियों को छूने दूंगा।"

चंद सेकेंड के सन्नाटे के बाद 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल, वाहे गुरु जी दा खालसाए वाहे गुरु जी दी फतह' से गुरुद्वारा गूंज उठा। वहां मौजूद हर किसी ने हुंकार भरी - हममें से कोई अपने पुरखों का धर्म नहीं छोड़ेगा।

एक इंतजार...
50-60 लोगों ने गुरुद्वारे में घुसने की कोशिश की। देखते ही देखते ही सिर धड़ से अलग हो गया। गुरुद्वारे में मौजूद लोगों को कोई नुकसान नहीं हुआ था। महिलाएं और बच्चे भी अंदर हॉल में सुरक्षित थे। यह सब देखकर मजहबी भीड़ गुरुद्वारे से थोड़ा पीछे हट गई। करीब 30 मिनट तक गुरुद्वारे से 50 मीटर दूर खड़े होकर मजहबी नारे लगाते रहे।

ऐसा लगा रहा था मानो उन्हें किसी चीज का इंतजार है। जिसका इंतजार था, हजारों का हुजूम आ गया था। गुरुद्वारे के अंदर मुश्किल से 400 हिंदू-सिख। उनमें 50-60 युवा। बाकी बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे।

एक उन्माद...
अंतिम लड़ाई का क्षण आ चुका था। भीड़ ने एक सिख- महिला को आगे खींचा। वह नग्न व अचेत अवस्था में थी। भीड़ में शामिल कुछ लोग उसे नोंच रहे थे। अचानक किसी ने उसका वक्ष तलवार से काट डाला और उसे गुरुद्वारे के भीतर फेंक दिया।

एक सवाल...
गुरुद्वारे में मौजूद गुजरांवाला के हिंदू-सिखों ने इससे पहले इस तरह की बर्बरता के बारे में कभी सुना नहीं था। पहली बार आंखों से देखा। अब हर कोई अपनी स्त्री के बारे में यह सोचकर बैचेन व भय व्याप्त हो गया। यदि उनकी मौत के बात उनकी स्त्री इनके हाथ लग गईं, तो उसका क्या होगा? अब उन्हें केवल मौत ही सहज लग रही थी। उसके अलावा सब कुछ भयावह।

एक कत्लेआम...
भीड़ ने दरवाजे पर चढ़ाई की। कत्लेआम मच गया। हिंदू-सिख बांकुरों की तरह लड़े, पर गिनती के लोग, हजारों के हुजूम के सामने कितनी देर टिकते...

एक मुक्ति...
लाजो - तुस्सी काटो बापूजी, मैं मुसलमानी नहीं बनूंगी। लाला बलवंत रोने लगे। आवाज नहीं निकल पा रही थी। लाजो ने फिर कहा - जल्दी करिए बापूजी। लाला बलवंत फूट-फूटकर रोने लगे। भला कोई बाप अपने ही हाथों अपनी बेटियों की हत्या कैसे करे?

लाजो - यदि आपने नहीं मारा तो वे मेरे वक्ष... बात पूरी होने से पहले ही लाला जी ने लाजो का सिर धड़ से अलग कर दिया। अब राजो की बारी थी। फिर भागो... पारो... गायो... इशो... और आखिरकार उर्मी। लाला जी हर बेटी का माथा चमूते गए और सिर धड़ से अलग करते गए। सबको एक-एक कर मुक्ति दे दी।

लेकिन उस मजहबी भीड़ से मृत महिलाओं का शरीर भी सुरक्षित नहीं था। नरपिशाचों के हाथ बेटियों का शरीर न छू ले, यह सोच सबके शव को लाला जी ने गुरुद्वारे के कुएं में डाल दिया।

एक आदेश...
लाला बलवंत ने प्रभावती से कहा - गुरुद्वारे के पिछले दरवाजे पर तांगा खड़ा है, तुम बलदेव के साथ निकलो। कुछ लोग तुम्हें सुरक्षित स्टेशन तक लेकर जाएंगे। वहां से एक जत्था भारत जाएगा। तुम दोनों निकलो।

प्रभावती - मैं आपके बिना कहीं नहीं जाऊंगी।
लाला जी - तुम्हें अपने पेट में पल रहे बच्चे के लिए जिंदा रहना होगा। तुम जाओ, मैं पीछे से आता हूं। लाला जी ने प्रभावती का माथा चूमा। बलदेव को गले लगाया और कहा जल्दी करो। तांगा प्रभावती और बलदेव को लेकर स्टेशन की तरफ चल दिया।

एक पिता...
फिर लाला जी ने खुद को चाकुओं से गोदा। उसी कुएं में छलांग लगा दी, जिसमें सात बेटियों को काट कर डाला था। आखिर दो बच्चों के पास उनकी मां थी। सात बच्चों के पास उनके पिता का होना तो बनता था।

लाला जी के बेटे बलदेव का पोता है, जिसने भारत के विभाजन में अपने परिवार के 28 सदस्य खोए थे। लाला जी, उनके भाई-बहन और उनके परिवार के कई लोगों की हत्या कर दी गई थी।

लाला जी की पत्नी, बेटे बलदेव और अजन्मे संतान के साथ जान बचाकर भारत आने में कामयाब रही थीं। वे पंजाब के अमृतसर में रहते हैं।

हाल ही में मुझे किसी ने यह लिंक, इस आग्रह के साथ प्रेषित किया, ताकि इसका हिंदी में अनुवाद कर भारत के 130 करोड़ हिंदुओं-सिखों-बौद्धों-जैनों-पारसियों-यहूदियों को बंटवारे की वस्तुस्थिति से अवगत कराऊं।

एक पेंटिंग...
पाकिस्तान में सन् 1947 में हिंदू-सिखों का कत्लेआम हुआ। स्त्रियों के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। उन्हें नग्न कर घुमाया गया। उनके वक्ष काट डाले गए। कइयों ने कुएं में कूद जान दे दी। उसी भयावहता को बयां करते हुए के.सी. आर्यन ने एक पेंटिंग बनाई थी।

अनुरोध...
ऐसी स्थिति भविष्य में भारत में पुनः पैदा न हो। इसलिए हिन्दुओं के मतांतरित भारतीय मुसलमानों को चाहिए वे अरबी संस्कृति/विभाजनकारी पहनावा, मदरसों व तब्लीगी जमातों का परित्याग कर अपने पूर्वजों की भारतीय संस्कृति को अपनावें।

हिंदू पूर्वजों के मतान्तरित भारतीय मुसलमानों को गैर-मुस्लिमों के प्रति ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, कपट, लड़ाई-झगड़ा, लूटमार, हत्या, बलात्कार व जिहाद संबंधित मध्ययुगीन आयतों को नकारने की जरूरत है, ताकि विभिन्न भाषा व धर्म के लोग भ्रातृभाव से मिल-जुल कर राष्ट्र की सर्वांगीण उन्नति करें। क्योंकि राष्ट्र, भाषा और धर्म से बड़ा है।

भारत के मजहब आधारित बँटवारे से नव-निर्मित इस्लामिक राज्य पाकिस्तान में विभाजन विभीषिकाओं की भयावहता को बयां करती एक पेंटिंग।

#विभाजनविभीषिकास्मृतिदिवस
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#विभाजनविभीषिकास्मृतिदिवस14अगस्त
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15/08/2026

जयनगर में विभिन्न संस्थान अपने यहाँ यह बैनर क्यों लगाने लगे हैं कि सोशल मीडिया संचालक वीडियो बनाकर पैसा न माँगे? क्या जयनगर में कुकुरमुत्ता की तरह सोशल मीडिया वाले हो गए हैं जो परिचय पत्रकार के रूप में देते हैं?

तस्वीर पर गौर कीजिए और बताइए कि इसमें विशेष क्या है? क्या ऐसा है जो नहीं होना चाहिए?तस्वीर मधुबनी जिला प्रशासन द्वारा "ऑ...
15/08/2026

तस्वीर पर गौर कीजिए और बताइए कि इसमें विशेष क्या है? क्या ऐसा है जो नहीं होना चाहिए?

तस्वीर मधुबनी जिला प्रशासन द्वारा "ऑफिसर फॉर ए डे" कार्यक्रम के अन्तर्गत शैडो ऑफिसर के रूप में जिले के वरीय पदाधिकारियों के साथ कार्य के तौर-तरीकों को समझने को लेकर चलाए गए अभियान से है जहाँ जिले के एक अधिकारी के साथ शैडो ऑफिसर के रूप में चयनित छात्रा साथ में दिख रही है।

जहाँ एक ओर जिले के अन्य पदाधिकारी शैडो ऑफिसर के रूप में चयनित छात्र-छात्राओं के लिए उचित मान-सम्मान, कुर्सी इत्यादि की व्यवस्था किये हुए हैं और अपने जिस तरह के सुसज्जित कुर्सी को धारण करके कार्यालय चलाते हैं, वैसी ही कुर्सी शैडो ऑफिसर को उपलब्ध कराए हैं, वहीं इस तस्वीर में दिखाई दे रहे अधिकारी स्वयं शानदार कुर्सी पर बैठे हुए हैं जो तौलिया से ढका हुआ है वहीं शैडो ऑफिसर के रूप में चयनित छात्रा को एक छोटी सी बिना तौलिया से ढके कुर्सी पर बिठाए हुए हैं। क्या इस तस्वीर से इस अधिकारी के व्यवहार का नकारात्मक संदेश समाज में नहीं जायेगा और शैडो ऑफिसर के रूप में चयनित इस छात्रा को भी ऐसा एहसास नहीं होगा कि अन्य शैडो ऑफिसर्स को जो मान-मर्यादा, प्रोटोकॉल मिला, वैसा प्रोटोकॉल इसे नहीं मिला?

तस्वीर में जो और जैसा दिख रहा है वैसा ही आम जनमानस के मन-मस्तिष्क में परिवर्तित होगा, वैसे इस मामले में आपका क्या विचार है?

मिथिलांचल का महा लंगर 13वा  जय भोले लंगर सेवा समिति जयनगर। लंगर शुरू हो चुका है। सभी कांवरिया बंधु का स्वागत है।
15/08/2026

मिथिलांचल का महा लंगर 13वा जय भोले लंगर सेवा समिति जयनगर। लंगर शुरू हो चुका है। सभी कांवरिया बंधु का स्वागत है।

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