04/04/2026
हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जीवन का यह वाकया उनके धैर्य, दया और बेहतरीन अख़लाक़ (चरित्र) का एक महान उदाहरण है।
मक्का में एक बूढ़ी औरत रहती थी, जो हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से बहुत नफरत करती थी। वह रोज़ाना उस रास्ते पर कांटे और कूड़ा बिछा देती थी जहाँ से आप (सल्ल.) नमाज़ पढ़ने या किसी काम से गुज़रा करते थे।
एआप (सल्ल.) हर रोज़ उन कांटों को चुपचाप हटा देते और बिना उस औरत को कुछ कहे या बद्दुआ दिए अपने रास्ते चले जाते। यह सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा।
एक दिन जब आप (सल्ल.) उस रास्ते से गुज़रे, तो देखा कि वहाँ कोई कांटे नहीं थे। रास्ता बिल्कुल साफ़ था। आपको आश्चर्य हुआ और आप सोच में पड़ गए कि आज उस औरत ने कांटे क्यों नहीं डाले।
जब आपने पता लगाया, तो मालूम हुआ कि वह बूढ़ी औरत बहुत बीमार है और बिस्तर से उठने की हालत में नहीं है।
यह सुनते ही आप (सल्ल.) उसके घर पहुँचे। आपने न केवल उसकी सेहत का हाल पूछा, बल्कि उसके घर की सफ़ाई की और उसकी सेवा की। आपने उसकी बीमारी में उसकी हर संभव मदद की।
वह औरत आप (सल्ल.) के इस ऊँचे चरित्र और दयालुता को देखकर दंग रह गई। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ कि वह जिस इंसान को तकलीफ पहुँचाती थी, वही उसकी मुसीबत में सबसे पहले काम आया।
उसने अपनी नफरत छोड़ दी और आपके नेक बर्ताव से मुतासिर होकर इस्लाम कुबूल कर लिया।