18/09/2026
गोरखपुर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, भारत सरकार, उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लखनऊ तथा राहत आयुक्त कार्यालय, उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर शुक्रवार को जिले की सभी तहसीलों में भूकंप, औद्योगिक (रासायनिक) आपदा एवं अग्निशमन से संबंधित व्यापक मॉकड्रिल कार्यक्रम आयोजित किया गया। अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) एवं प्रभारी अधिकारी आपदा के नेतृत्व में सुबह 10 बजे शुरू हुए इस मॉकड्रिल में विभिन्न आपदाओं की काल्पनिक परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।
मॉकड्रिल के दौरान काल्पनिक रूप से यह मानते हुए अभ्यास कराया गया कि जनपद में भूकंप के तेज झटके महसूस हुए हैं और इसके चलते विभिन्न स्थानों पर भवन क्षतिग्रस्त होने, आग लगने, गैस रिसाव तथा अस्पताल एवं सार्वजनिक संस्थानों में आपात स्थिति उत्पन्न हो गई है। उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने से लेकर प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और अस्पताल पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया।
अपर जिलाधिकारी (वि/रा) एवं प्रभारी अधिकारी आपदा को राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम के तहत इंसिडेंट कमांडर की भूमिका दी गई थी। उन्होंने सभी तहसीलों के उप जिलाधिकारियों और तहसीलदारों को संबंधित घटनाओं के अनुसार तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़ी आपदा की स्थिति में त्वरित निर्णय, संसाधनों का सही इस्तेमाल और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसी उद्देश्य से मॉकड्रिल के माध्यम से विभिन्न विभागों की तैयारियों को परखा गया।
भूकंप जैसी आपदा के दौरान अक्सर संचार नेटवर्क प्रभावित होने की संभावना रहती है। इसे ध्यान में रखते हुए मॉकड्रिल के दौरान जिले की सभी तहसीलों को वायरलेस नेटवर्क से जोड़ा गया। इसके माध्यम से आपदा की स्थिति में संचार व्यवस्था बनाए रखने और तहसील स्तर से जिला स्तर तक सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान सुनिश्चित करने का अभ्यास किया गया।
सदर तहसील के पॉम पैराडाइज में भूकंप और अग्निकांड की संयुक्त काल्पनिक घटना का मॉकड्रिल हुआ। भूकंप के कारण क्षतिग्रस्त भवन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग के 32 मीटर हाइड्रोलिक प्लेटफार्म वाहन का इस्तेमाल कर रेस्क्यू ऑपरेशन का प्रदर्शन किया गया। शॉर्ट सर्किट से लगी आग की स्थिति में विद्युत आपूर्ति बाधित करने और इसके बाद आग पर नियंत्रण पाने की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई। एनडीआरएफ टीम ने दीवार काटकर भवन के अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की विधि बताई। तीसरी और चौथी मंजिल पर फंसे लोगों को रस्सी रेस्क्यू के माध्यम से सुरक्षित नीचे लाने का भी प्रदर्शन किया गया।
मॉकड्रिल में चिकित्सा विभाग ने फील्ड हॉस्पिटल स्थापित किया। यहां काल्पनिक रूप से घायल लोगों को प्राथमिक उपचार दिया गया और गंभीर घायलों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल रेफर करने की प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया। नागरिक सुरक्षा, एनसीसी और आपदा मित्रों ने भी प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।
चौरीचौरा रेलवे स्टेशन पर अग्निकांड की काल्पनिक स्थिति में रेलवे प्रशासन और तहसील प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य करने का अभ्यास कराया गया। इसमें दोनों विभागों के बीच समन्वय, सूचना के आदान-प्रदान और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया।
सहजनवां तहसील के औद्योगिक क्षेत्र स्थित आईओसीएल एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में गैस रिसाव की काल्पनिक घटना पर मॉकड्रिल हुआ। इसमें रासायनिक रिसाव की स्थिति में लोकल क्राइसिस ग्रुप द्वारा आपसी समन्वय स्थापित कर रिसाव को रोकने और प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक सुरक्षा कार्रवाई करने का सजीव प्रदर्शन किया गया।
कैंपियरगंज तहसील के एमवी इंटर कॉलेज में एसडीआरएफ टीम ने विद्यार्थियों को विद्यालय सुरक्षा के संबंध में प्रशिक्षण दिया। विभिन्न आपदाओं के दौरान बच्चों को स्वयं को सुरक्षित रखने, सुरक्षित स्थान पर पहुंचने और आपात स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद मूक अभ्यास कराया गया।
बांसगांव तहसील के कौड़ीराम स्थित आरपीएम अकैडमी में भी विद्यार्थियों को विद्यालय सुरक्षा के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों को बताया गया कि आपदा के समय सुरक्षित बाहर निकलने के लिए विद्यालय स्तर पर पहले से योजना तैयार करना क्यों जरूरी है। खजनी तहसील के उनवल नगर पंचायत क्षेत्र स्थित गीता देवी महिला महाविद्यालय में अग्निकांड सुरक्षा पर मूक अभ्यास हुआ। महिलाओं को एलपीजी गैस रिसाव और आग लगने की स्थिति में स्वयं की सुरक्षा के उपायों का हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण दिया गया।
गोला तहसील के बड़हलगंज स्थित दुर्गावती देवी हॉस्पिटल में अग्निकांड की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। यहां मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने और आग पर नियंत्रण पाने की प्रक्रिया का मूक अभ्यास कराया गया। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर आपदा के समय मरीजों की सुरक्षित निकासी और विभागीय समन्वय की प्रक्रिया को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया।
मॉकड्रिल कार्यक्रम के दौरान एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा गोरखा रेजीमेंट गोरखपुर के प्रतिनिधियों ने ऑब्जर्वर की भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न स्थलों पर किए गए अभ्यास का अवलोकन किया और व्यवस्थाओं से संबंधित अपने सुझाव शासन को भेजे।
आपदा विशेषज्ञ गौतम गुप्ता ने बताया कि इस प्रकार के मॉकड्रिल का उद्देश्य केवल राहत एवं बचाव का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि वास्तविक आपदा के समय विभागों, प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना है। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में पहले से तय भूमिका, जिम्मेदारी, संचार व्यवस्था और संसाधनों की उपलब्धता राहत एवं बचाव कार्य को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मॉकड्रिल के माध्यम से जिले में भूकंप, अग्निकांड और औद्योगिक रासायनिक आपदा जैसी विभिन्न परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों का अभ्यास किया गया। अधिकारियों और बचाव दलों ने मौके पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए लोगों को सुरक्षित निकालने, प्राथमिक उपचार देने और आवश्यकतानुसार अस्पताल पहुंचाने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए प्रशासनिक एवं आपातकालीन तंत्र को तैयार रखना और विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय को मजबूत करना रहा।