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02/09/2026
🚨 बारां में चुनावी घमासान: इस बार वोट पार्टी को या विकास को?बारां नगर पालिका चुनाव में मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं...
02/09/2026

🚨 बारां में चुनावी घमासान: इस बार वोट पार्टी को या विकास को?
बारां नगर पालिका चुनाव में मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों का नहीं, बल्कि राजनीतिक सोच के बदलाव का भी बनता दिखाई दे रहा है। कमल राठौर को लेकर स्थानीय राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। समर्थकों का दावा है कि उनके पीछे एक बड़ा जनसमर्थन और कई प्रभावशाली चेहरे खड़े हैं।
कमल राठौर को अकेला समझने की भूल न करें!
चर्चाओं में पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा, नरेश मीणा और राकेश औदिच्य का नाम भी समर्थन के संदर्भ में सामने आ रहा है।
🔥 असली सवाल अब यह है—
अगर वर्षों से कांग्रेस और भाजपा ही विकल्प रही हैं, तो क्या इस बार बारां की जनता तीसरे विकल्प पर विचार करेगी?
जनता का सवाल सीधा है—
सड़कें, विकास, रोजगार और मूलभूत सुविधाएं अगर आज भी सवाल हैं, तो केवल पार्टी के नाम पर वोट क्यों?
राजनीतिक समर्थकों की ओर से कंवरलाल मीणा और नरेश मीणा के संघर्ष को भी इस बहस से जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि राजनीति में समझौते से ज्यादा महत्वपूर्ण स्वाभिमान और जनता के मुद्दे हैं।
⚡ सबसे बड़ा सवाल:
क्या बारां की जनता इस बार कांग्रेस–भाजपा की पारंपरिक राजनीति से बाहर निकलकर विकास के नाम पर वोट करेगी?
और अगर जनता ने तीसरा विकल्प चुना तो संदेश सिर्फ बारां नहीं, बल्कि अटरू, छबड़ा, छीपाबड़ोद और अंता तक जाएगा।
“वोट किसी पार्टी की जागीर नहीं—जनता का अधिकार है।
इस बार फैसला चेहरे पर नहीं, काम और विकास पर हो!”
एक्सपोज न्यूज़ इंडिया | सवाल जनता से, जवाब भी जनता से।
🔥 वायरल HASHTAGS
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01/09/2026

राजस्थान पुलिस की बड़ी पहल: सितंबर 2026 को "साइबर सुरक्षित राजस्थान" जन-जागरूकता माह के रूप में मनाने का निर्णय
​° डीजीपी के निर्देशानुसार महीने भर चलेगा राज्यव्यापी विशेष अभियान; ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों से बचाव का मिलेगा संदेश
° राज्य स्तर पर एसपी-1 (R4C) और जिला स्तर पर एडिशनल एसपी बनाए गए नोडल अधिकारी

जयपुर, 1 सितंबर। राजस्थान पुलिस द्वारा सितंबर माह को ‘साइबर सुरक्षित राजस्थान’ जन-जागरूकता माह के रूप में मनाया जाएगा। महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार पूरे प्रदेश में चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य आमजन को साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करना, सुरक्षा उपायों का व्यापक प्रचार-प्रसार करना तथा ऑनलाइन ठगी एवं धोखाधड़ी से सुरक्षित रहने के लिए सचेत करना है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री विजय कुमार सिंह के अनुसार अभियान के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर पुलिस अधीक्षक-1 (R4C) को राज्य नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं प्रत्येक जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को जिला नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनर्स पर विशेष ध्यान

अभियान के तहत पुलिस थानों के साइबर अपराध से जुड़े अधिकारी पेंशन विभाग के समन्वय से पेंशनर्स एवं वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’, निवेश के नाम पर होने वाली ठगी तथा अन्य साइबर अपराधों से बचाव के बारे में जागरूक करेंगे।

स्कूल-कॉलेजों में होंगे जागरूकता कार्यक्रम

जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षा अधिकारियों के समन्वय से स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यान, कार्यशालाएं, प्रश्नोत्तरी, सेमिनार एवं विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। छात्र-छात्राओं द्वारा एक दिवसीय मानव श्रृंखला बनाकर साइबर सुरक्षा का संदेश भी दिया जाएगा।

बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ नाटक

प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन तथा धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर नुक्कड़ नाटक, पोस्टर, ऑडियो-वीडियो संदेश और साइबर जागरूकता स्टॉल के माध्यम से आमजन को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी जाएगी।

युवाओं और खेल गतिविधियों को भी जोड़ा जाएगा

अभियान में साइबर स्वयंसेवकों, एनएसएस एवं एनसीसी कैडेट्स को भी जोड़ा जाएगा। आरएसी इकाइयों और जिला खेल अधिकारियों के समन्वय से साइबर जागरूकता के लिए दौड़ एवं साइकिल रैली जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

गांव-गांव पहुंचेगा साइबर सुरक्षा का संदेश

राज्य पुलिस अभियान को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए जिला मुख्य डाकपाल एवं पंचायती राज विभाग के समन्वय से ग्राम पंचायत स्तर तक साइबर जागरूकता गतिविधियां आयोजित करेगी।

सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार

अभियान के दौरान स्थानीय सोशल मीडिया प्रभावशाली👰 व्यक्तियों, खेल एवं2026 सिनेमा जगत की हस्तियों के माध्यम से वीडियो अपील जारी करवाई जाएंगी। इसके अलावा स्थानीय एफएम, टेलीविजन चैनल, सिनेमा हॉल, निजी केबल टीवी तथा बाजारों में लगे डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से हिंदी एवं क्षेत्रीय भाषाओं में साइबर सुरक्षा संबंधी संदेश प्रसारित किए जाएंगे।

31/08/2026

🔥 अटरू में भाजपा नेता मुकेश मिश्रा पर हमला… टिकट कटने का मामला या कहानी कुछ और?

अटरू में भाजपा नेता मुकेश मिश्रा पर हुए हमले को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोगों की ओर से इसे टिकट कटने की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या मामला वाकई इतना ही सीधा है?

राजनीति में आरोप लगना आसान है, लेकिन सच क्या है, इसकी तह तक पहुंचना जरूरी है।

आखिर हमले के पीछे वास्तविक वजह क्या थी?
क्या टिकट को लेकर कोई राजनीतिक विवाद था या फिर कहानी के पीछे कोई दूसरा कारण छिपा है?

कड़वा सच क्या है—यह जांच के बाद ही सामने आएगा।
लेकिन सवाल यह जरूर है कि क्या अटरू की राजनीति में पर्दे के पीछे चल रहा खेल अब बेनकाब होगा?

जनता इंतजार कर रही है…
सच्चाई कब सामने आएगी?

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चर्चा का विषय क्यों बना दिया गया पवन दिलावर के नामांकन का प्रकरण? सेटिंग से राजनीतिक षड्यंत्र से पवन दिलावर के मतदाता आव...
28/08/2026

चर्चा का विषय क्यों बना दिया गया पवन दिलावर के नामांकन का प्रकरण?

सेटिंग से राजनीतिक षड्यंत्र से पवन दिलावर के मतदाता आवेदन को खारिज करने की राजनीति मगर अभी अपील बाकी है स्थाई रूप से हर कोई जानता है की दिलावर परिवार अटरू का रहने वाला है तो फिर पवन का स्थाई निवास क्या अटरू नहीं है नौकरी करने के लिए कोई बाहर रहने जा सकता है इसका मतलब यह नहीं कि वह इस गांव का स्थाई निवासी नहीं है

पिता इस क्षेत्र से चुनाव जीते थे विधायक का और मंत्री भी इसी क्षेत्र से रहे तब पवन छोटा था जनता ने जो कर्ज दिलावर परिवार पर दिया उसे चुकाना चाहता है पवन और कस्बे को विकासशील बनाना चाहता है पवन तो फिर वह गलत कहा

अटरू में पवन दिलावर के मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के आवेदन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, अटरू एसडीएम ने जांच कमेटी गठित कर निवास संबंधी दावे की जांच करवाई और उसके बाद आवेदन निरस्त किया। �

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि पवन दिलावर का स्थायी और पारिवारिक संबंध अटरू से रहा है, तो क्या इस पूरे प्रकरण को केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने के आवेदन तक सीमित रखकर देखा जाना चाहिए या इसके पीछे के वास्तविक तथ्यों को भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए?
अटरू किसी के लिए नया स्थान नहीं है। पवन दिलावर का अटरू से संबंध किसी से छिपा हुआ नहीं है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह पूरी पारदर्शिता के साथ बताए कि निर्णय किस नियम, किस दस्तावेज और किन तथ्यों के आधार पर लिया गया।
वहीं, पवन दिलावर ने मीडिया में यह भी कहा है कि उन्होंने चुनाव लड़ने के उद्देश्य से आवेदन नहीं किया था और अब वह नाम नहीं जुड़वाना चाहते। �
एक्सपोज न्यूज़ इण्डिया...

जनता का सवाल
क्या अटरू में किसी व्यक्ति के वर्षों पुराने पारिवारिक एवं सामाजिक संबंधों को सिर्फ वर्तमान मतदाता सूची के पते के आधार पर परिभाषित किया जा सकता है?
प्रशासन का निर्णय नियमों के अनुसार होना चाहिए, लेकिन नियमों के साथ न्याय और तथ्यों की पूरी तस्वीर सामने आना भी उतना ही जरूरी है।
अटरू की जनता अब जानना चाहती है—
पवन दिलावर के नामांकन/मतदाता आवेदन के प्रकरण को इतना बड़ा राजनीतिक मुद्दा आखिर क्यों बना दिया गया?
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28/08/2026

शासन-सत्ता का सुख या अटरू का विकास? दिलावर और मेघवाल परिवार की दावेदारियों से बढ़ी सियासी सरगर्मी
करोड़ों की कमाई के लिए हर कोई सभापति बनने की तैयारी में? क्या अटरू की जनता समझ पाएगी असली मुद्दा, या आज भी ग्रामीण और पिछड़ेपन की तस्वीर रहेगी कायम?
एक्सपोज न्यूज़ इंडिया | अटरू
अटरू नगर पालिका के गठन के बाद पहली बार होने जा रहे नगर पालिका चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अध्यक्ष पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा और कांग्रेस में टिकट को लेकर दावेदारियां बढ़ गई हैं। प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों से जुड़े नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का बाजार गर्म है।
लेकिन इन दावेदारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल अटरू की जनता के सामने खड़ा है—क्या नगर पालिका की सत्ता विकास के लिए होगी या सत्ता और शासन का सुख कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहेगा?
सत्ता किसके विकास के लिए?
अटरू की राजनीति में परिवारों और बड़े राजनीतिक नामों की दावेदारी चर्चा का विषय जरूर है, लेकिन आम जनता के सामने सवाल इससे कहीं बड़ा है। वर्षों से विकास की उम्मीद लगाए बैठे अटरू के लोगों को क्या वास्तव में बेहतर सड़कें, नालियां, स्वच्छता, पेयजल, रोशनी, रोजगार के अवसर और व्यवस्थित शहर मिलेगा?
शासन और सत्ता का सुख अगर केवल खुद के विकास तक सीमित रह जाए तो जनता के विकास की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
अटरू की वास्तविक जरूरत ऐसे नेतृत्व की है जो आम आदमी की समस्याओं को समझे और नगर के विकास को प्राथमिकता दे।
करोड़ों की कमाई की चर्चा, लेकिन विकास का हिसाब कौन देगा?
सभापति की कुर्सी को लेकर दावेदारियां सामने आने के साथ स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं। सवाल यह है कि क्या सभापति पद सेवा और विकास का माध्यम बनेगा या राजनीतिक प्रभाव और आर्थिक लाभ का जरिया?
यदि नगर पालिका में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का बजट आता है, तो जनता को यह भी जानने का अधिकार है कि उन पैसों से अटरू में क्या बदलेगा और विकास कार्यों में पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी।
भाजपा-कांग्रेस से बड़ा मुद्दा—अटरू का विकास
अटरू में चुनावी मुकाबला चाहे भाजपा और कांग्रेस के बीच हो, लेकिन जनता के सामने मूल मुद्दा पार्टी से ज्यादा प्रत्याशी और उसके काम की क्षमता का होना चाहिए—यह चर्चा स्थानीय स्तर पर जोर पकड़ रही है।
क्या प्रत्याशी अटरू की समस्याओं को समझता है?
क्या वह जनता के बीच उपलब्ध रहेगा?
क्या वह नगर पालिका के बजट और विकास कार्यों में पारदर्शिता की बात करेगा?
क्या वह अटरू को ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्र की छवि से बाहर निकालने की ठोस योजना रखता है?
जनता के सामने सबसे बड़ा सवाल
अटरू पहली बार नगर पालिका चुनाव के जरिए अपनी शहरी सरकार चुनने जा रहा है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं कि भाजपा का टिकट किसे मिलेगा या कांग्रेस किसे मैदान में उतारेगी।
सवाल यह भी है—
क्या अटरू की जनता को विकास चाहिए या सिर्फ राजनीतिक परिवारों की दावेदारी?
क्या अटरू बदलना चाहता है या वही पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी?
क्या सभापति की कुर्सी सत्ता का सुख बनेगी या आम जनता की सेवा का माध्यम?
आने वाले चुनाव में इन सवालों के जवाब जनता के फैसले से सामने आएंगे।
एक्सपोज न्यूज़ इंडिया की खास टिप्पणी
अटरू को अब सिर्फ नया नगर पालिका बोर्ड नहीं, बल्कि नई विकास सोच की जरूरत है। चुनाव में चेहरा, उसकी छवि, काम करने की क्षमता और अटरू के विकास का विजन ही असली कसौटी बनेगा—यह फैसला आखिरकार जनता को करना है।
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🚨 बारां में खाद्य विभाग का बड़ा एक्शन! 🚨त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर सख्तीबारां में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई...
27/08/2026

🚨 बारां में खाद्य विभाग का बड़ा एक्शन! 🚨

त्योहारी सीजन से पहले मिलावटखोरों पर सख्ती

बारां में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई की दुकानों पर कार्रवाई करते हुए 6 खाद्य नमूने संग्रहित किए। कार्रवाई के दौरान करीब 40 किलो मिठाई एवं अन्य खाद्य सामग्री नष्ट करवाई गई।

कार्रवाई में लड्डू, इमरती, मिल्क केक सहित हरी-लाल चटनी जैसी सामग्री शामिल रही। खाद्य विभाग की टीम ने दुकानों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और स्वच्छता व्यवस्था का निरीक्षण किया।

📍 स्थान: बारां, राजस्थान
📅 26 अगस्त 2026

मिलावटखोरों पर कार्रवाई जारी रहेगी—जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं।

📰 बारां एक्सपोज न्यूज़ इंडिया
शुद्ध भोजन • सुरक्षित जीवन

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🔥 एक्सपोज न्यूज़ इंडिया की बड़ी खबर 🔥बारां में निकाय चुनाव को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं के मन की बात! राजस्थान मीडिया एसोस...
20/08/2026

🔥 एक्सपोज न्यूज़ इंडिया की बड़ी खबर 🔥

बारां में निकाय चुनाव को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं के मन की बात!

राजस्थान मीडिया एसोसिएशन अध्यक्ष ने राष्ट्रीय नेतृत्व को शिकायत भेजी बारां भाजपा को अगर भाजपा बनाना है गुट बाजी ब दूर करनी है तो आनंद गर्ग को बारां भाजपा से दूर रखें निकाय चुनाव में केंद्र नेतृत्व ने राज्य नेतृत्व को आदेशित किया हमें गुटबाजी नहीं चाहिए आनंद गर्ग को कोटा भेजो प्रभारी बनाकर इससे जिला अध्यक्ष खुद निर्णय कर सके कौन है प्रभावशाली उम्मीदवार और उसे ही टिकट दिया जाए

भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज है कि आनंद जी गर्ग को बारां से दूर रखकर कोटा नगर निगम चुनाव की जिम्मेदारी दी गई है। बताया जा रहा है कि राज्य भाजपा नेतृत्व ने आनंद गर्ग को कोटा नगर निगम चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी दी, जिसे राज्य नेतृत्व ने स्वीकार करते हुए उन्हें कोटा का प्रभारी नियुक्त किया।

अब नजरें बारां भाजपा जिला नेतृत्व के फैसले पर हैं। संगठन के सामने चुनौती है कि निकाय चुनाव में कार्यकर्ताओं की राय, संगठन की एकजुटता और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ऐसे निर्णय लिए जाएं, जिससे अधिक से अधिक भाजपा प्रत्याशी जीत दर्ज कर सकें और गुटबाजी पर लगाम लग सके।

कार्यकर्ता मजबूत होंगे तो संगठन मजबूत होगा—और संगठन मजबूत होगा तो जीत का रास्ता आसान होगा।

💐🙏 आनंद गर्ग जी को कोटा नगर निगम चुनाव प्रभारी बनाए जाने पर शुभकामनाएं।

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20/08/2026

बारां प्रमोद जेन भाया की टीम आई मीडिया के सामने सफाई देने

अब तक विकास नहीं कराया मगर अब जरूर करेंगे

बारां की सियासत पर बड़ा सवाल—जनता कब तक चुप रहेगी? लो देख लो🫵 मर्द ने सच लिख दिया 80% राजनेता पत्रकार अधिकारी गुलाम है इ...
20/08/2026

बारां की सियासत पर बड़ा सवाल—जनता कब तक चुप रहेगी?

लो देख लो🫵 मर्द ने सच लिख दिया 80% राजनेता पत्रकार अधिकारी गुलाम है इस जिले में नेताओं के हत्याओं का गढ़ बन चुका है विकास के नाम पर लूट हो रही है और रात में शराब खनक रही है रात रंगीन हो रही है और जनता बेवकूफ बना रही है कांग्रेस और बीजेपी को छोड़ो क्योंकि यहां भाजपा का विधायक जेल जाता है वह भी भाजपा शासन में और कांग्रेस के नेताओं की हत्या होती है कांग्रेस के शासन में और दोनों ही सूरत में यह पूरा कांड करने वाले खुद की पार्टी के नेता होते हैं बोर्ड भाजपा का और जिताया जाता है कांग्रेस के नेता को क्या अब भी जनता बेवकूफ बनती रहेगी जब दिल्ली में बदलाव हो सकता है जब दिल्ली में जंतर मंतर पर तीन दिन की बनी पार्टी भारत में कोहराम मचा सकती है तो क्या इस जिले के समझदार व्यक्ति जिले की दोनों राजनीतिक पार्टियों को छोड़कर निर्दलीयों को निर्विरोध नहीं जीता सकते बदलाव तो करना होगा तब जाकर घमंड टूटेगा इन दोनों राजनीतिक पार्टियों के जिले के मुखियाओं वरना दिन में जनता के सामने लड़ेंगे और रात को साथ बैठकर खाना खाएंगे और जनता को बोलेंगे यह तो बेवकूफ है एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा हम दोनों मिलकर जितना बेवकूफ बना सकते हैं बना लेंगे आने वाली पीढ़ी को कुछ तो दे जाओ प्रबुद्ध जन

बारां में विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और जनहित के मुद्दों को लेकर जनता के बीच लगातार सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा की स्थानीय राजनीति पर उठ रही आपसी मिलीभगत, भ्रष्टाचार और अपराध से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही जरूरी है—आखिर जनता को विकास चाहिए या सिर्फ चुनावी राजनीति?

पत्रकारिता की स्वतंत्रता, आम आदमी की सुरक्षा और जिले के भविष्य पर सवाल उठाना किसी एक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि जनता के अधिकार और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।

आने वाले निकाय चुनाव में मुद्दों पर मतदान करें, उम्मीदवार की ईमानदारी और काम का रिकॉर्ड देखें और अपने लोकतांत्रिक अधिकार का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करें।

EXPOZ न्यूज़ इंडिया — सच की आवाज़।

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