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माउंट एवरेस्ट पर हुई कई घटनाएँ सचमुच दिल दहला देने वाली हैं। यहाँ 10 प्रसिद्ध और वास्तविक घटनाएँ हैं:1. 1996 की सबसे बड़...
16/07/2026

माउंट एवरेस्ट पर हुई कई घटनाएँ सचमुच दिल दहला देने वाली हैं। यहाँ 10 प्रसिद्ध और वास्तविक घटनाएँ हैं:

1. 1996 की सबसे बड़ी त्रासदी

10–11 मई 1996 को अचानक आए भीषण बर्फ़ीले तूफ़ान में 8 पर्वतारोहियों की एक ही दिन में मौत हो गई। इस घटना पर Into Thin Air नामक प्रसिद्ध पुस्तक भी लिखी गई।

2. 2015 का भूकंप और हिमस्खलन

25 अप्रैल 2015 को नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप से एवरेस्ट बेस कैंप पर विशाल हिमस्खलन आया, जिसमें 22 लोगों की जान चली गई। यह बेस कैंप के इतिहास की सबसे घातक दुर्घटनाओं में से एक थी।

3. 2014 का खुम्बू आइसफॉल हादसा

18 अप्रैल 2014 को खुम्बू आइसफॉल में बर्फ़ का एक बड़ा हिस्सा टूटकर गिरा, जिससे 16 नेपाली शेरपा मारे गए। इसके बाद उस वर्ष अधिकांश अभियान रद्द कर दिए गए।

4. "डेथ ज़ोन" का खतरा

8,000 मीटर से ऊपर का क्षेत्र "डेथ ज़ोन" कहलाता है। यहाँ ऑक्सीजन इतनी कम होती है कि शरीर धीरे-धीरे काम करना बंद करने लगता है। कई पर्वतारोहियों की मौत यहीं हुई है।

5. शरीर का जम जाना

अत्यधिक ठंड के कारण कई लोगों के शव दशकों तक बर्फ़ में सुरक्षित रहते हैं। उन्हें नीचे लाना अक्सर इतना कठिन और जोखिम भरा होता है कि कई शव वहीं रह जाते हैं।

6. शिखर के रास्ते में लंबी कतारें

लोकप्रिय मौसम की खिड़की (summit window) के दौरान शिखर के रास्ते में कभी-कभी लंबी लाइन लग जाती है। इतनी ऊँचाई पर लंबे समय तक इंतज़ार करना बेहद खतरनाक हो सकता है।

7. अचानक बदलता मौसम

कुछ ही मिनटों में तेज़ हवाएँ, बर्फ़बारी और शून्य दृश्यता (whiteout) जैसी स्थिति बन सकती है, जिससे रास्ता पहचानना मुश्किल हो जाता है।

8. ऊँचाई का दिमाग़ पर असर

ऑक्सीजन की कमी से कुछ पर्वतारोहियों को भ्रम (hallucinations) या निर्णय लेने में कठिनाई हो सकती है। यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

9. खुम्बू आइसफॉल

यह एवरेस्ट के सबसे खतरनाक हिस्सों में से एक है। यहाँ विशाल बर्फ़ के टॉवर (seracs) और गहरी दरारें (crevasses) बिना चेतावनी के बदल सकती हैं।

10. सुरक्षित लौटना सबसे कठिन

आँकड़ों और पर्वतारोहियों के अनुभव बताते हैं कि कई दुर्घटनाएँ शिखर से वापस उतरते समय होती हैं, क्योंकि तब तक शरीर बहुत थक चुका होता है और ऑक्सीजन भी कम बचती है।

एक महत्वपूर्ण बात

एवरेस्ट बेहद खतरनाक है, लेकिन हर वर्ष सैकड़ों प्रशिक्षित पर्वतारोही उचित तैयारी, अनुभवी गाइड, सही मौसम और सुरक्षा नियमों का पालन करके सफलतापूर्वक शिखर तक पहुँचते हैं और सुरक्षित लौट भी आते हैं।

माउंट एवरेस्ट से जुड़े 10 ऐसे रोचक रहस्य और कम-ज्ञात तथ्य:1. एवरेस्ट पर कई शव आज भी मौजूद हैंअत्यधिक ठंड के कारण कई पर्व...
15/07/2026

माउंट एवरेस्ट से जुड़े 10 ऐसे रोचक रहस्य और कम-ज्ञात तथ्य:

1. एवरेस्ट पर कई शव आज भी मौजूद हैं

अत्यधिक ठंड के कारण कई पर्वतारोहियों के शव वर्षों तक सुरक्षित रहते हैं। उन्हें नीचे लाना बहुत कठिन और जोखिम भरा होता है।

2. "ग्रीन बूट्स" नाम का एक प्रसिद्ध शव

कई वर्षों तक एक पर्वतारोही का शव, जिसे उसके हरे जूतों की वजह से "ग्रीन बूट्स" कहा जाता था, रास्ता पहचानने का एक जाना-पहचाना संकेत बन गया था।

3. चोटी पर ऑक्सीजन समुद्र तल की तुलना में लगभग एक-तिहाई होती है

इसी कारण साँस लेना बहुत कठिन हो जाता है और अधिकांश लोग अतिरिक्त ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं।

4. जेट स्ट्रीम का असर

एवरेस्ट की चोटी के ऊपर कभी-कभी जेट स्ट्रीम गुजरती है, जिससे हवा की रफ्तार 250 किमी/घंटा से भी अधिक हो सकती है।

5. "समिट विंडो" बहुत छोटी होती है

पूरे साल में केवल कुछ दिनों के लिए मौसम इतना शांत होता है कि सुरक्षित रूप से शिखर तक पहुँचने की कोशिश की जा सके।

6. 🦠 ऊँचाई पर भी जीवन मिलता है

वैज्ञानिकों को एवरेस्ट की ऊँचाइयों पर कुछ सूक्ष्मजीव (माइक्रोऑर्गेनिज़्म) मिले हैं, जो बेहद कठोर परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं।

7. कभी एवरेस्ट पर कचरे की बड़ी समस्या थी

पुराने अभियानों से ऑक्सीजन सिलेंडर, टेंट और अन्य सामान जमा हो गया था। अब सफाई अभियान चलाए जाते हैं और पर्वतारोहियों के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं।

8. एवरेस्ट की चोटी पर समुद्री जीवों के जीवाश्म मिले हैं

लाखों वर्ष पहले यह क्षेत्र समुद्र की तलहटी का हिस्सा था। टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से यह पर्वत बन गया।

9. सूर्योदय का दृश्य अद्भुत होता है

एवरेस्ट की चोटी से सूर्योदय के समय पृथ्वी की वक्रता (Curvature) का एहसास कुछ परिस्थितियों में बहुत स्पष्ट दिखाई दे सकता है।

10. शिखर तक पहुँचना ही सफलता नहीं है

अनुभवी पर्वतारोही कहते हैं, "Summit is optional, return is mandatory." यानी असली सफलता सुरक्षित वापस लौटना है, क्योंकि अधिकांश दुर्घटनाएँ उतरते समय होती हैं।

रोचक तथ्य: माउंट एवरेस्ट की चोटी पर लगभग समुद्र तल के वायुदाब का केवल एक-तिहाई दबाव होता है, इसलिए वहाँ बिना तैयारी के कुछ ही मिनटों में शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है।

15/07/2026

एक रिपोर्ट के अनुसार
केरल में डॉक्टर की सैलरी 20 हजार रुपए है
और इतनी ही सैलरी सफाई कर्मी की भी है

कारण यह बताया गया है कि केरल में हर साल 7000 डॉक्टर बन रहे हैं और ये जरूरत से बहुत ज्यादा हैं।

कल तक हम सिर्फ बातें करते थे कि ऐसे हालात पैदा होने वाले हैं लेकिन वास्तव में ऐसे हालात पैदा हो चुके हैं। हमारे राजस्थान का हर जिला डॉक्टर पैदा कर रहा है। रोज नए-नए मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। जितने हमारे यहांडॉक्टर बन रहे हैं उससे ज्यादा डॉक्टर विदेश से बनकर आ रहे हैं।

यकीन मानिए कि आने वाले समय में जो हालात बीएड किए हुए युवाओं की है, वही हालत एमबीबीएस किए हुए युवाओं की भी होने वाली है।

ब्याह के लिए लड़की तक नहीं मिलेगी।

15/07/2026

क्या लगता है।
ईरान अमेरिका युद्ध का।
आख़िर कब ख़त्म होगा ये

💔 बेटा लंदन में, बेटी बाली में… और पिता का शव कई दिनों बाद सोफ़े पर मिला…यह सिर्फ़ एक ख़बर नहीं, बल्कि उस समाज का आईना ह...
14/07/2026

💔 बेटा लंदन में, बेटी बाली में… और पिता का शव कई दिनों बाद सोफ़े पर मिला…

यह सिर्फ़ एक ख़बर नहीं, बल्कि उस समाज का आईना है जहाँ सफलता की दौड़ में रिश्ते पीछे छूटते जा रहे हैं।

एक पिता अपनी पूरी जवानी इस उम्मीद में खपा देता है कि उसके बच्चे उससे बेहतर ज़िंदगी जिएँ।
वह अपनी इच्छाएँ मार देता है, अपनी खुशियाँ बेच देता है, रातों की नींद और दिन का सुकून कुर्बान कर देता है…
ताकि उसके बच्चों की हर ख़्वाहिश पूरी हो सके।

बच्चे बड़े होते हैं…
कामयाब भी हो जाते हैं…
कोई विदेश में बस जाता है, कोई अपने सपनों की दुनिया में खो जाता है।

लेकिन फिर एक दिन…
वही पिता, जिसने सबको जीना सिखाया,
खुद तन्हाई में दम तोड़ देता है।

सबसे बड़ा दुख मौत नहीं होता…
सबसे बड़ा दुख होता है ज़िंदा रहते हुए अपनों की यादों से भी दूर हो जाना।

याद रखिए—
माँ-बाप को महंगे तोहफ़ों की नहीं, आपके समय की ज़रूरत होती है।
हर रोज़ नहीं तो हफ़्ते में एक बार ही सही, उनसे बात कीजिए।
क्योंकि जिस दिन फ़ोन करने का मन होगा, हो सकता है उस दिन फ़ोन उठाने वाला कोई न हो।

कामयाबी का क्या फ़ायदा, अगर उसे देखने वाली माँ की आँखें और पिता का इंतज़ार ही अधूरा रह जाए?

🙏 माता-पिता की सेवा कीजिए, उन्हें समय दीजिए। यही दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है।

14/07/2026

सुकून तो सिर्फ जन्नत में मिलेगा। ज़िन्दगी में सिर्फ़ और सिर्फ़ जद्दोजहद है।

14/07/2026

क्या लगता है। ईरान ने 3 जहाजों पर हमला करके गलती कर दी।
जहाँ वो पहले विजेता दिख रहा था।
आपकी राय?

ट्रंप की स्ट्रेटजी है "प्रेसर एंड डील"। वो किसी डिप्लोमेट, राष्ट्रपति या राष्ट्रध्यक्ष की तरह देशों के रिश्ते नहीं संभाल...
09/07/2026

ट्रंप की स्ट्रेटजी है "प्रेसर एंड डील"। वो किसी डिप्लोमेट, राष्ट्रपति या राष्ट्रध्यक्ष की तरह देशों के रिश्ते नहीं संभालता। वो एक विशुद्ध क्रोनी कैपिटल्स की तरह डील करता है। चीन के विश्व प्रसिद्ध रणनीतिकार Sun Tzu की प्रसिद्ध किताब "The Art Of War" में डिसेप्शन के बारे में एक चैप्टर है जिससे बिजनेस निगोशिएशन में एक स्ट्रेटजी बनी है कि "नेवर लेट देम गैस योर नेक्स्ट मूव".. मतलब सामने वाले को कभी पता न चलने दो कि तुम एक्स्टली क्या करने वाले हो..

और इस स्ट्रेटजी के लिए आपको हमेशा अन्प्रीडिक्टेबल रहना होता है। अगर आप ट्रंप के बिहेवियर को ऑब्जर्व करें तो पाएंगे कि एक दिन बंदा आपकी तारीफ करता है, अगले दिन आप को बेइज्जत करेगा, अगले दिन कहेगा कि आपके देश की हालत खराब है फिर अगले दिन आपसे बिजनेस डील करने लगेगा।

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को खुद मिनरल डील करने के लिए व्हाइट हाउस बुलाया। फिर मीडिया के सामने बैठ के उसे लताड़ा , उस पर दबाव बनाने लगा। बोला कि बिना हमारी मदद के तुम रूस के सामने एक हफ्ते भी नहीं टिकोगे। उसके सूट पर कमेंट किया।

ट्रंप जानता है कि, महीनों भर दोनों देशों के ऑफिशल्स ने काम करके जिस डील का मसौदा तैयार किया है वो बकैती से कैंसिल तो नहीं होगी। और जब जेलेंस्की दबाव में आ गया तो उससे डील कर ली। जो अमेरिका के फायदे की थी।

ऐसे ही ईरान के स्ट्रेट ऑफ हरमूज में अमेरिकी ब्लॉकेड के दौरान चीन ने अपनी नेवी भेज दी थी। अब चीन की नेवी के पास सुपर सोनिक मिसाइल हैं तो अमेरिका ने अपने नेवी शिप्स पर "पैट्रियट डिफेंस सिस्टम" लगा दिया। जो सिर्फ जमीन कर लगता था। चीन के खिलाफ बयान बाजी हुई। सब को लगा कि अमेरिका और चीन के बीच टेंशन बढ़ रही है। फिर अचानक ट्रंप, चीन चला गया। और कहा कि अमेरिका और चीन बड़े ट्रेड पार्टनर हैं और हमेशा साथ रहेंगे।

भारत पाकिस्तान के युद्ध के दौरान हमारी खूब बेइज्जती की, खुद वार रुकवाने का क्रेडिट लिया। फिर टैरिफ लगाया। भारतीय नागरिकों को हथकड़ी लगा के भारत भेजा, दुनियां में बेइज्जती की। मोदी जी भी चीन- रूस चले गए । तो उल्टे सीधे बयान देने लगा। फिर अचानक एक दिन मोदी जी की तारीफ की और ट्रेड डील कर ली। इस डील में भारत का टैरिफ भी पहले से ज्यादा हो गया आए अमेरिका से 5 साल में 500 बिलियन का माल खरीदने की भी शर्त मनवा ली।

ट्रंप ऐसे ही प्रेशर बना के डील करता है। खूब उल्टा सीधा बयान देता है। किसी भी देश के अध्यक्ष ने कभी उसके बयानों का खंडन तक नहीं किया। कोई भी देश युद्ध नहीं चाहता तो मुंहजोरी भी नहीं करता। और वो खुद को विनर घोषित कर लेता है।

सिवाय ईरान के..

ईरान के साथ जब युद्ध चल रहा था तो ट्रंप रोज बयान देता था और ईरान के ऑफिशियल लोग उसका खंडन करते, मजाक उड़ाते थे। बल्कि उसकी खूब बेइज्जती करते थे। स्पीकर, प्रवक्ता से लेके दूसरे देशों में बैठे राजदूत उसके हर बयान पर जवाब देते थे। हरमूज खोलने के लिए एक राजदूत ने लिखा कि "चाबी खो गई है".. एक कह रहा गा "गमले के नीचे रखी है".. 😆

वो रोज कहता था कि हमने ईरान को डेसीमेट कर दिया अगले दिन ईरान के लोग मिसाइल्स की वीडियो डाल के उसको प्रोवोक करते थे। उसने कहा ईरान डील करना चाहता है ईरान ने कहा अमेरिका मरा जा रहा डील के लिए।

डील भी हुई तो ईरान वही सब करेगा जो पहले सब करता था। उल्टा 60 दिन हरमूज पे टोल वसूलेगा और अपना तेल विश्व बाजार में बेचने के सेंक्शन हटेंगे सो अलग।

अमेरिका ने कहा था कि हमने ईरान की पूरी लीडरशिप मार दी है। इजराइल ने ईरान की रॉयल गार्ड के बहुत सारे अफसर मृत घोषित कर दिए थे।

ईरान ने इतने में अयातुल्लाह खामनेई का फ्यूनरल किया और पूरी दुनियां ने देखा कि लीडरशिप तो अभी भी है। बल्कि जो जनरल अमेरिका और इजरायल कई बार मृत घोषित कर चुका था वो भी उसमें दिखे। इससे और ज्यादा किरकिरी हुई। #कालचक्र

ईरान किसी भी तरह से दबाव और डील वाली स्ट्रेटजी नहीं चलने दे रहा है। अब अमेरिका के पास बस एक ही रास्ता है कि वो ईरान। में सारे युद्ध नियम तोड़ के सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर बर्बाद करे। सिविलियन को मारे। और ईरान को मजबूर कर दे।

लेकिन समस्या ये है कि ईरान भी आधा मिडिल ईस्ट स्वाहा कर देगा। और इसका सबसे बड़ा फायदा चीन को होगा। यूरोप भी कंगाल हो जायेगा और वर्ल्ड इकोनॉमी डूब जाएगी सो अलग।

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साल 1978 में एक फिल्म आई थी "मुक़द्दर का सिकंदर"...जिसमें...-अमजद ख़ान रेखा को चाहता है।-रेखा अमिताभ को चाहती है। -अमिता...
12/03/2026

साल 1978 में एक फिल्म आई थी "मुक़द्दर का सिकंदर"...जिसमें...

-अमजद ख़ान रेखा को चाहता है।
-रेखा अमिताभ को चाहती है।
-अमिताभ राखी को चाहता है।
-राखी विनोद खन्ना से प्यार करती है।

लेकिन दुश्मनी अमिताभ बच्चन और अमजद ख़ान के बीच है।

अब आते हैं पश्चिमी एशिया पर.... यहां-

-भारत इज़राइल के साथ है
-इज़रायल अमेरिका के साथ
-अमेरिका पाकिस्तान के साथ
-पाकिस्तान ईरान के साथ है।

लेकिन दुश्मनी भारत और पाकिस्तान के बीच है।

इस पहेली को एक ही आदमी सुलझा सकता है। जिसका नाम है कादर ख़ान। लेकिन वह 2018 में मर चुका है।

तो चुप चाप जंग देखो
🤣🤣🤣

23/02/2026

कोन कोन ऐसे करता है 🤣🤣

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