STARBoy Tarun

STARBoy Tarun Independent researcher to counter Disinformation

14/06/2026

सेकुलरिज्म का धोखा

पिछले 75 सालों से इस देश को “सेकुलरिज्म” के नाम पर व्यवस्थित तरीके से बेवकूफ बनाया गया है।
सेकुलरिज्म की शुरुआत 16वीं-17वीं सदी के यूरोप में हुई थी। उस समय कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट के बीच भयंकर लड़ाई चल रही थी। दोनों एक-दूसरे को सताते थे। इसलिए तय किया गया कि राज्य किसी एक धर्म का पक्ष नहीं लेगा। राज्य तटस्थ रहेगा और धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताएगा नहीं। यानी सेकुलरिज्म का मूल मकसद था, बहुसंख्यक धर्म को नुकसान पहुँचाए बिना अल्पसंख्यकों की रक्षा करना।
लेकिन भारत में राज्य ने इसी सेकुलरिज्म को हथियार बनाकर अपने ही हिंदू धर्म, संस्कृति और सभ्यता को नष्ट करने की कोशिश की।

19वीं सदी में जॉर्ज जैकब होलिओक नाम के व्यक्ति ने सेकुलरिज्म की दूसरी परिभाषा दी। उस समय यूरोप में रूढ़िवादी ईसाई धर्म बहुत मजबूत था और विज्ञान-विरोधी सोच फैली हुई थी। इसलिए सेकुलरिज्म का मतलब था, तर्क और बुद्धि को बढ़ावा देना।
हम भारतीयों ने बिना सोचे-समझे इस पश्चिमी विचार को अपना लिया, जबकि हमारी अपनी सभ्यता और धर्म पहले से ही तर्क, विज्ञान और जिज्ञासा पर आधारित थे।

वास्तव में नेहरू जी ने सेकुलरिज्म के नाम पर शरिया को बढ़ावा दिया।
असली सेकुलरिज्म तो यह होना चाहिए कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए और साथ ही अल्पसंख्यकों के अधिकारों व सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए जाएं, जिन्हें सही से लागू भी किया जाए।
क्या भारत में एक भी बुद्धिमान व्यक्ति ऐसा नहीं है जो इस साफ बात को समझ सके?

कम से कम हम इस पर एक ईमानदार राष्ट्रीय बहस तो शुरू करें।

बात तो सही है 😂
10/06/2026

बात तो सही है 😂

आप लोगों ने कांग्रेसीयो और कांग्रेस के फेंके टुकड़ों पर पलने वाले पत्रकार दलालों को अक्सर यह कहते देखा होगा कि आईआईटी तो...
10/06/2026

आप लोगों ने कांग्रेसीयो और कांग्रेस के फेंके टुकड़ों पर पलने वाले पत्रकार दलालों को अक्सर यह कहते देखा होगा कि आईआईटी तो हमारे नेहरू ने बनवाया

अब आप भारत में बने आईआईटी की असली सच्चाई जानिए

आजादी के बाद कांग्रेस ने बड़ी धूर्तता भारत में आईआईटी का सपना साकार करने वाले डॉक्टर एन एम सिरकार का नाम पूरी तरह से गायब कर दिया

डॉ एन एम सिरकार वायसराय की एग्ज़ीक्युटिव काउंसिल में सदस्य (एजुकेशन) थे

ब्रिटिश सरकार इस बात से परेशान थी कि ब्रिटिश साम्राज्य बहुत तेजी से बढ़ता जा रहा था उस अनुपात में उन्हें अच्छे इंजीनियर नहीं मिल पा रहे तब डॉ एन एम सिरकार ने भारत में कई शहरों में आईआईटी बनाने का एक पूरा खाका वायसराय और ब्रिटिश गवर्नमेंट के सामने पेश किया और यह रिपोर्ट 300 पन्नों में थी जिस में विस्तार से बताया गया था कि ये विश्व स्तरीय इंजरिंग कॉलेज कैसे होंगे इन का क्या रोल होगा और इसमें पढ़कर निकले इंजीनियर किस तरह ब्रिटेन के तमाम उपनिवेश देशों में जाकर सेवा करेंगे सर्विस देंगे

एनएम सिरकार का सपना साकार हो पाता तभी कुछ ही महीनों बाद ब्रिटेन में सरकार बदल गई और लेबर पार्टी के क्लिमेंट एटली प्रधानमंत्री बने उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में यह वादा किया था कि यदि ब्रिटेन में लेबर पार्टी सत्ता में आएगी तब वह उपनिवेशवाद को खत्म करेंगे

उसके बाद आईआईटी बनाने का सपना अधूरा रह गया

आजादी के बाद जब डॉक्टर एन एम सिरकार ने नेहरू के सामने आईआईटी का प्रस्ताव पेश किया तब नेहरू ने यह कहकर खारिज कर दिया कि हमारे पास इतना पैसा नहीं है मैं सिर्फ जमीन की व्यवस्था करा सकता हूं बाकी आपको करना होगा

उसके बाद डॉक्टर एन एम सिरकार अपने सपने को लेकर ब्रिटेन जर्मनी सोवियत संघ और अमेरिका जैसे देशों के पास गए

फिर सोवियत संघ ने मदद किया और सोवियत संघ की मदद से भारत का पहला आईआईटी 1950 में खड़कपुर में बना

फिर डॉक्टर एन एम सिरकार शांत नहीं हुए उनका सपना था कि आईआईटी भारत के तमाम शहरों में होनी चाहिए उसके बाद आईआईटी बॉम्बे यूनेस्को की मदद से बना, आईआईटी कानपुर पश्चिम जर्मनी के मदद से बना उस वक्त जर्मनी दो हिस्से में बटा हुआ था पूर्वी जर्मनी और पश्चिमी जर्मनी

और आईआईटी दिल्ली अमेरिका की मदद से बना

इन सभी आईआईटी बनाने में नेहरू का कोई विरोध रोल नहीं था आप गूगल करके देखिए यह सारा सपना डॉक्टर एनएम सिरकार ने देखा था और इस सपने को डॉक्टर एनएम सिरकार ने साकार कर के दिखाया

मगर अफसोस कांग्रेसी इतिहासकारों ने आईआईटी का सपना देखने वाले असली योद्धा का नाम मिटा कर नेहरू का नाम आगे कर दिया।

अब यह तस्वीर देखकर भी मुझे आपको बताना पड़ेगा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों खारिज हुआ ?यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे.....
09/06/2026

अब यह तस्वीर देखकर भी मुझे आपको बताना पड़ेगा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों खारिज हुआ ?

यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे...

दरअसल यूपीए सरकार के समय राहुल गांधी के एक मप्र दौरे में मीनाक्षी नटराजन जो उस समय यूथ कांग्रेस में सक्रिय थी ने राहुल का ध्यान खींचा और मीनाक्षी मप्र कांग्रेस में राहुल की विश्वसनीय नेता बन गई...

वर्तमान में मप्र कांग्रेस में वर्चस्व की लड़ाई जम कर है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष एक तरफ तो नाथ साहब और दिग्गी दूसरी तरफ...

नाथ साहब और दिग्गी दोनों राज्य सभा जाना चाहते थे पर दिल्ली से वीटो हुआ और मीनाक्षी का नाम फाइनल हो गया..

सब फार्म इत्यादि अच्छे से भरा गया, सब कुछ स्मूथली चल रहा था, फॉर्म जमा हो गया फिर " किसी " का संदेश कैलाश विजयवर्गीय जी के पास पहुंचा कि मीनाक्षी पर एक अपराधिक मामला तेलंगाना में पुराना चला आ रहा है उसका नंबर इत्यादि भी मिल गया

बस कैलाश जी और राकेश सिंह जी ने आपत्ति दर्ज कर दी...मीनाक्षी को आज मंगलवार संध्या तक का समय दिया गया स्पष्टीकरण हेतु पर समय सीमा तक कोई उचित कारण तेलंगाना के मामले को अंकित नहीं करने पर नहीं पहुंची प्रेसिडिंग ऑफिसर के पास और मीनाक्षी का नामांकन फार्म रद्द कर दिया गया...
इति राज्यसभा चुनाव की कांग्रेस कथा...
सूत्रों के अनुसार
😁

06/06/2026

दिल्ली मै कॉकरोच प्रोटेस्ट

प्रोटेस्टर: हमें आजादी चाहिए

जर्नलिस्ट: वो तो ठीक है पर आप साड़ी पहन के क्यों आए हो
🤣🤣🤣

दो हफ्तों में तीन विश्व नेता भारत आए- साइप्रस, म्यांमार और वेनेजुएला।कोई इत्तेफाक नहीं।साइप्रस के राष्ट्रपति EU काउंसिल ...
05/06/2026

दो हफ्तों में तीन विश्व नेता भारत आए- साइप्रस, म्यांमार और वेनेजुएला।
कोई इत्तेफाक नहीं।

साइप्रस के राष्ट्रपति EU काउंसिल के चेयरमैन के रूप में आए। भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को जमीन पर उतारने, डिफेंस MoU करने और IMEC कॉरिडोर में सपोर्ट लेने के लिए ये विजिट बेहद अहम थी। यूरोप तक ट्रेड का नया रास्ता खुल रहा है।

म्यांमार के जंटा चीफ मिन ऑन्ग ह्लाइंग को भारत ने सबसे पहले होस्ट किया। 1600 किलोमीटर की छिद्रित सीमा, ड्रग्स-हथियारों की तस्करी और चीन के बढ़ते कब्जे को देखते हुए बॉर्डर सिक्योरिटी और दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ) का समझौता किया गया। चीन के एकाधिकार को चुनौती देने वाला कदम।

वेनेजुएला से तेल की बड़ी डील। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के बाद भारत अब वेनेजुएला का दूसरा सबसे बड़ा क्रूड ऑयल खरीदार बन चुका है। एनर्जी सिक्योरिटी के लिए ये इमरजेंसी लाइफलाइन है।

नतीजा? ट्रेड सिक्योरिटी, बॉर्डर सिक्योरिटी और एनर्जी सिक्योरिटी, तीनों मोर्चों पर एक साथ मजबूती।

ये है असली स्टेटक्राफ्ट, संकटों को रणनीतिक फायदे में बदलने की कला।

Cockroach Janta Party के spoksperson सौरव दास को 2024 में पुलित्जर सेंटर से ग्रांट मिला।पुलित्जर सेंटर वाशिंगटन की NGO ह...
05/06/2026

Cockroach Janta Party के spoksperson सौरव दास को 2024 में पुलित्जर सेंटर से ग्रांट मिला।

पुलित्जर सेंटर वाशिंगटन की NGO है जो वैश्विक पत्रकारों को फंड करती है। इसके मुख्य डोनर्स: नॉर्वे (NORAD) और जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन।

यह CJP के पीछे CIA-सोरोस का फ्रंट संगठन है।

CBSE OSM विवाद: अच्छे इरादे, खराब अमल की मिसालसीबीएसई ने छात्रों की सुविधा के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की थी, ऑन-स्क्रीन ...
03/06/2026

CBSE OSM विवाद: अच्छे इरादे, खराब अमल की मिसाल

सीबीएसई ने छात्रों की सुविधा के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की थी, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) यानी डिजिटल मूल्यांकन। उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके कंप्यूटर पर चेक करने की यह व्यवस्था अच्छी सोच वाली थी। लेकिन मई 2026 में जब इसे लागू किया गया, तो कई गंभीर समस्याएं सामने आईं। यह विवाद हर मंत्रालय के लिए सबक है अच्छे इरादे भी खराब क्रियान्वयन से उल्टा असर कर सकते हैं।
पुरानी व्यवस्था की समस्या
पहले सीबीएसई हर साल लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह हाथ से करता था। इसमें कई दिक्कतें थीं:

देश भर में इतनी सारी पुस्तिकाएं भेजना और वापस लाना बहुत बड़ी लॉजिस्टिक समस्या थी।
परीक्षक सही अंक देते थे, लेकिन जोड़ने में गलती हो जाती थी।
री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन करने पर प्रक्रिया धीमी, कागजी और अपारदर्शी होती थी।

इन समस्याओं को हल करने के लिए CBSE ने डिजिटल मूल्यांकन की ओर कदम बढ़ाया।

OSM प्रणाली क्या है?
OSM में उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन किया जाता है, डिजिटल इमेज बनाई जाती है और परीक्षक कंप्यूटर पर चेक करते हैं। अंक अपने आप जुड़ जाते हैं। इससे लॉजिस्टिक की परेशानी खत्म होती है और जोड़ने की गलतियां नहीं होतीं।
CBSE ने 2014-15 में इसका पायलट प्रोजेक्ट किया था, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर होने से इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। 2026 में बेहतर इंटरनेट और क्लाउड सुविधाओं के साथ इसे पूरे देश में लागू करने का फैसला लिया गया। मकसद सही था, छात्रों की जिंदगी आसान बनाना।

मई 2026 में क्या हुआ?
री-इवैल्यूएशन के लिए स्कैन कॉपी मांगने पर छात्रों को बड़ा झटका लगा। कई स्कैन कॉपी में उनके लिखे जवाब नहीं थे। कुछ पेज गायब थे, कुछ दूसरे छात्रों के जवाब दिख रहे थे।
यह बात सोशल मीडिया पर तेजी से फैली। जिन छात्रों का कॉलेज एडमिशन इन्हीं अंकों पर निर्भर था, उनके लिए यह भविष्य का संकट बन गया।
इसके अलावा पोर्टल पर तकनीकी समस्याएं आईं, लॉगिन नहीं हो रहा था, सर्वर डाउन हो रहा था, पेमेंट फेल हो रहा था। स्कैन धुंधली या कटी हुई थीं। एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ने OSM से जुड़े पोर्टल में कमजोरी बताई (हालांकि CBSE ने इसे टेस्ट एनवायरनमेंट बताया)।

असली समस्या कहां थी?
अगस्त 2025 में CBSE ने इस काम के लिए टेंडर जारी किए। पहले दो टेंडर में कोई कंपनी क्वालिफाई नहीं कर पाई। तीसरे टेंडर में शर्तें आसान कर दी गईं:

स्कैन रेजोल्यूशन 300 DPI से घटाकर 200 DPI कर दिया गया।
रोबोटिक स्कैनिंग को अनिवार्य नहीं किया गया।

ठेका सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी Coempt Edu Teck (पहले Globarena Technologies) को मिला, हैदराबाद की यह कंपनी लगभग 24.75 रुपये प्रति उत्तर पुस्तिका पर बोली लगाई। TCS ने 65 रुपये बोली लगाई थी। सरकारी नियम के अनुसार सबसे कम बोली वाले को ठेका देना अनिवार्य है।
CBSE की दो बड़ी गलतियां

वेंडर की क्षमता नहीं चेक की गई, CBSE ने यह नहीं देखा कि यह कंपनी 99 लाख उत्तर पुस्तिकाओं जैसे विशाल काम को संभाल पाएगी या नहीं। आलोचक बताते हैं कि Globarena को 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परीक्षा विवाद में जांच का सामना करना पड़ा था।L1 बोली प्रणाली की यह सबसे बड़ी कमजोरी है सरकार को सबसे सस्ती बोली वाले को काम देना पड़ता है, भले ही शक हो कि वह काम नहीं कर पाएगा।
एक साथ पूरे देश में लागू कर दिया, इतना बड़ा बदलाव बिना पायलट प्रोजेक्ट के सीधे पूरे देश में कर दिया गया। बेहतर होता अगर पहले दिल्ली जैसे एक जोन में पायलट किया जाता, सफल होने पर धीरे-धीरे बाकी जगहों पर लागू किया जाता।

मुख्य सबक
डिजिटल मूल्यांकन का विचार गलत नहीं था। यह आगे की सोच वाला कदम था। लेकिन जब लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर हो, तो सिर्फ अच्छा विचार काफी नहीं। जरूरत है कड़ी टेस्टिंग, पारदर्शी प्रक्रिया, मजबूत तैयारी और छात्रों का भरोसा जीतने की।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की जरूरत नहीं लगती, क्योंकि उनके इरादे गलत नहीं थे।
अब क्या किया जाए?

निर्दोष छात्रों से माफी मांगें।
री-इवैल्यूएशन की प्रक्रिया जल्द से जल्द पूरी करें।
सुनिश्चित करें कि सरकार की इस गलती से किसी छात्र को यूनिवर्सिटी एडमिशन में कोई समस्या न हो।
इस घटना से सीख लेकर भविष्य में ऐसी गलतियां न दोहराएं।

01/06/2026

खौफनाक!

गुजरात के कच्छ जिले के रायधन्नपर में 100-150 मुस्लिम पुरुषों की एक भीड़ ने आधी रात को गांव पर हमला बोल दिया। उन्होंने पूरे गांव की बिजली काट दी और गांववालों पर क्रूर हमला कर दिया। लोग दहशत में भाग निकले। कई लोग घायल हो गए।
यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा वाला संवेदनशील इलाका है। कई आरोपी पहले गौ-हत्या के मामलों में शामिल रह चुके हैं।
अभी तक 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनके वाहन और हथियार भी जब्त कर लिए गए हैं।

विश्व हिंदू परिषद ने आने वाले दिनों में आक्रामक कार्रवाई की चेतावनी दी है और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

31/05/2026

होली.. पर "तरुण" और ईंद पर "सूर्या" एक भी त्यौहार या एक भी दिन ऐसा नहीं होता
जब ये किसी हिंदू को सिर्फ़ इसलिए ना मार देते हो कि वो हिंदू है

खैर..उस के क़त्ल पे मैं भी चुप था मेरा नम्बर अब आया
मेरे क़त्ल पे आप भी चुप है अगला नम्बर आपका है!!

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