17/05/2026
दो मेढकों की कहानी: जीत की सोच (The Power of Positive Thinking)
एक बार की बात है, मेंढकों का एक दल जंगल से गुजर रहा था। अचानक, उनमें से दो मेढक गलती से एक गहरे और सूखे गड्ढे में गिर गए।
गड्ढा बहुत गहरा था। गड्ढे के बाहर खड़े बाकी सभी मेंढक चिल्लाने लगे, "तुम दोनों इस गड्ढे से बाहर कभी नहीं निकल सकते! यह गड्ढा बहुत गहरा है। तुम लोगों की हार निश्चित है!"
उन दोनों मेढकों ने ऊपर वालों की बात अनसुनी कर दी और गड्ढे से बाहर छलांग लगाने की कोशिश करने लगे। लेकिन वे हर बार गिर जाते। बाहर खड़े मेंढक लगातार चिल्ला रहे थे, "तुम लोग बेकार में कोशिश कर रहे हो! बस हार मान लो और बैठ जाओ।"
आखिरकार, उन दोनों मेंढकों में से एक मेढक ने दूसरों की बात मान ली। उसने कोशिश करना छोड़ दिया और निराश होकर बैठ गया। कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।
लेकिन, दूसरे मेंढक ने प्रयास करना नहीं छोड़ा। वह बार-बार गिरता, चोट खाता, लेकिन फिर उठता और पूरी ताकत से छलांग लगाता। बाकी मेंढक अब भी कह रहे थे कि वह पागल हो गया है और उसे अपनी जान की परवाह नहीं करनी चाहिए। लेकिन उस मेढक ने किसी की नहीं सुनी। उसने एक आखिरी छलांग लगाई और वह सीधा गड्ढे के बाहर आ गया!
कहानी की सीख:
बाहर खड़े मेंढकों की नकारात्मक बातें सुनकर पहला मेंढक हार गया। लेकिन, दूसरे मेढक ने 'जीत की सोच' को अपनाया। उसे लगा कि उसके दोस्त उसे बाहर आने के लिए प्रोत्साहित (Encourage) कर रहे हैं। इस सकारात्मक सोच ने उसे वह ऊर्जा दी, जिससे वह असंभव को संभव कर सका।
आपकी सोच ही आपकी दुनिया बनाती है। यदि आप मान लेते हैं, तो हार है; और यदि आप ठान लेते हैं, तो जीत निश्चित है।