25/12/2025
जयपुर के शास्त्री नगर में अवैध संबंध और पैसों के विवाद से शुरू हुई यह कहानी हत्या, लाश को ठिकाने लगाने और पुलिस की तेज़ पड़ताल तक पहुँचती है।
“राजधानी जयपुर का एक इलाका शास्त्री नगर, 24 दिसंबर की सुबह यहां मिलने वाला एक कट्टा, पूरे शहर को दहला देने वाला था। एक मकान के पोर्च में रखा बड़ा प्लास्टिक का कट्टा, मकान मालकिन और पड़ोसी घबराए हुए, पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल ।लाश बरामद और जांच शुरूपुलिस टीम, एफएसएल और डॉग स्क्वॉयड के साथ मौके पर पहुंचती है; कट्टे को खोलते ही अंदर मध्यम आयु की महिला की लाश दिखाई जाती है, चेहरे पर नाखूनों के गहरे निशान, सिर पर चोट के निशान I
“कौन थी यह महिला? किसने इसे यहां फेंका? और क्यों?”
पोस्टमार्टम में डॉक्टर सिर पर चोट और अधिक खून बहने को मौत का कारण बताते हैं I
जानकारी के अनुसार मृतक महिला जो शास्त्री नगर में अकेली रहती है और पति से अलग रहती है; उसका पड़ोसी जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू, जो लाइट की दुकान पर काम करता है और अक्सर उसी पुराने घर में रात गुजारता है।“पड़ोसी के रूप में शुरू हुई पहचान धीरे-धीरे नज़दीकियों में बदली और फिर अवैध संबंधों तक जा पहुँची।” दोनों को गुपचुप मिलते, हंसते-बतियाते, पैसों का लेन-देन करते है।
हत्या वाली रात21 दिसंबर की रात जितेंद्र फोन पर महिला को बुलाता है, वह देर शाम उसके घर पहुंचती है; फिर दोनों के बीच शारीरिक संबंध का बनते हैं।आधी रात के बाद माहौल बदलता है; महिला पैसों की मांग करती है, पुराने उधार और मकान की डील का जिक्र करती है, आरोप लगाती है कि जितेंद्र उसे धोखा दे रहा है; झगड़ा तेज़ होता है, चीखें, धक्का-मुक्की में जितेंद्र गुस्से में उसे ज़ोर से धक्का देता है, महिला का सिर दीवार से टकराता है, वह गिर जाती है, फर्श पर खून बहने लगता है; जितेंद्र के डर और घबराहट में हालत खराब हो जाती है I अब “रात के सन्नाटे में जितेंद्र के सामने दो रास्ते थे – पुलिस के पास जाना या अपने गुनाह को छुपाना… उसने दूसरा रास्ता चुना।” जितेंद्र को पूरी रात शव के पास बैठे जाता है।अगले दिन वह बाजार जाकर रस्सी और बड़ा प्लास्टिक का कट्टा खरीदता है, घर लौटकर फर्श से खून साफ करता है, महिला का बैग और कुछ सामान घर से दूर फेंक आता है।दूसरी रात करीब 3:50 बजे गली में सन्नाटा, जितेंद्र महिला का शव प्लास्टिक के दो–तीन कट्टों में भरकर घसीटते हुए लगभग 100 फीट दूर एक घर के खुली गेट वाले पोर्च तक ले जाता है; सीसीटीवी फुटेज में भी आ जाता है।पुलिस की साइंटिफिक जांचअगले दिन सुबह मकान मालकिन से कट्टा खुलवाती है, लाश दिखते ही चीख निकलती है; तुरंत शास्त्री नगर थाना पुलिस को सूचना जाती है।डॉग स्क्वॉयड कट्टे की स्मेल लेकर सीधा जितेंद्र के घर तक पहुंचता है; पुलिस जब अंदर जाती है, तो जितेंद्र के चेहरे पर नाखूनों के निशान और घर में बचे खून के धब्बे दिखते हैं।दूसरी टीम आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगालती है, जिसमें एक युवक रात को कट्टा घसीटते हुए दिखता है; फुटेज रोककर ज़ूम करने पर चेहरा साफ नज़र आता है – वही जितेंद्र।शुरुआती पूछताछ में वह झूठ बोलता है, लेकिन जैसे ही पुलिस सीसीटीवी और डॉग स्क्वॉयड की रिपोर्ट सामने रखती है, उसका चेहरा उतर जाता है I जितेंद्र टूट कर कबूल करता है कि महिला के साथ उसके अवैध संबंध थे, उस रात पैसों के विवाद में धक्का लगने से महिला की मौत हो गई, और पकड़े जाने के डर से उसने शव को बोरी में भरकर पड़ोसी के घर फेंक दिया।।“एक अवैध रिश्ता, कुछ रुपयों का लालच और ग़ुस्से का एक पल… नतीजा – एक मासूम ज़िंदगी खत्म, एक घर उजड़ गया और एक आदमी उम्र भर के लिए सलाखों के पीछे। रिश्ते चाहे जैसे भी हों, जब उनमें विश्वास की जगह हिंसा ले लेती है, तो कहानी का अंत अक्सर मौत पर ही होता है।”