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15/05/2026

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बिजोलिया किसान आंदोलन भारत के इतिहास में सबसे लंबा चलने वाला, अहिंसक और संगठित किसान आंदोलन था। यह वर्तमान राजस्थान के भ...
13/05/2026

बिजोलिया किसान आंदोलन भारत के इतिहास में सबसे लंबा चलने वाला, अहिंसक और संगठित किसान आंदोलन था। यह वर्तमान राजस्थान के भीलवाड़ा जिले (पूर्व में मेवाड़ रियासत) में हुआ था।
यहाँ इस आंदोलन की प्रमुख जानकारी दी गई है:
प्रमुख बिंदु -
समय सीमा:- 1897 से 1941 (कुल 44 वर्ष)।
स्थान: - बिजोलिया (मेवड़ रियासत), राजस्थान।
प्रकृति:- पूर्णतः अहिंसक और स्वतः स्फूर्त।
मुख्य कारण:- किसानों पर अत्यधिक कर (84 प्रकार के लाग-बाग), बेगार प्रथा और शोषण।
आंदोलन के तीन चरण :
यह आंदोलन मुख्य रूप से तीन चरणों में चला:
1. प्रथम चरण (1897 - 1915)
नेतृत्व: साधु सीताराम दास, नानाजी पटेल और ठाकरी पटेल।
घटना:1897 में गिरधारीपुरा गाँव में एक मृत्यु भोज के दौरान किसानों ने राव कृष्ण सिंह के अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाने का निर्णय लिया।
विवाद: 1903 में राव कृष्ण सिंह ने "'चँवरी कर "(बेटी की शादी पर 5 रुपये कर) लगा दिया। बाद में 1906 में पृथ्वी सिंह ने "तलवार बंधाई" (उत्तराधिकार कर) लागू किया, जिससे असंतोष और बढ़ गया।
2. द्वितीय चरण (1916 - 1922)
नेतृत्व:विजय सिंह पथिक (भूप सिंह)। यह आंदोलन का सबसे प्रभावशाली समय था।
संगठन:पथिक जी ने 'ऊपरमाल पंच बोर्ड' की स्थापना की।
प्रसार: माणिक्य लाल वर्मा और गणेश शंकर विद्यार्थी (प्रताप समाचार पत्र के माध्यम से) ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
परिणाम: 1922 में ए.जी.जी. हॉलैंड के प्रयासों से किसानों और ठिकाने के बीच समझौता हुआ और कई कर माफ कर दिए गए।
3. तृतीय चरण (1923 - 1941)
नेतृत्व: जमनालाल बजाज, हरिभाऊ उपाध्याय और माणिक्य लाल वर्मा।
अंत:लंबे संघर्ष के बाद 1941 में मेवाड़ के दीवान टी. राघवाचार्य और राजस्व मंत्री डॉ. मोहन सिंह मेहता के प्रयासों से किसानों की माँगें मान ली गईं और उनकी जमीनें वापस कर दी गईं।
आंदोलन की विशेषताएँ -
अहिंसा:44 वर्षों तक चलने के बावजूद इस आंदोलन में कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुई।
जागृति:इस आंदोलन ने राजस्थान में राजनीतिक चेतना पैदा की।
महिला भागीदारी: अंजना देवी चौधरी और नारायणी देवी वर्मा जैसी महिलाओं ने भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाई।
पंच बोर्ड किसानों ने अपनी समानांतर सरकार (पंचायत) चलाकर एकता का परिचय दिया।
**निष्कर्ष**
बिजोलिया किसान आंदोलन ने न केवल मेवाड़ बल्कि पूरे देश के किसानों को प्रेरित किया। विजय सिंह पथिक को इसी आंदोलन के कारण **'भारत में किसान आंदोलन का जनक'** कहा जाता है।

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