16/06/2026
बहू भाग 2
सीमा सिमरन को एक टक देखे जा रही थी तो सिमरन ने पूछा एसे क्या देख रहे हो आप मुझे ,,,,, तो सीमा सिमरन को शीशे के सामने कर ते हुये ,,,,,,, मै जे देख रही हूं के कोई इतना सुन्दर भी हो सकता है ।जैसे भगवान ने फुरसत से बनाया हो ।सिमरन का रंग जेसे दूध मे हलका सिन्दूर मिला दिया हो ,हिरनी के जैसी आँखे,छोटी सी नाक ,अपर लिप के लेफ्ट साइड छोटा सा तिल जो सिमरन की खूबसूरती को नज़र लगने से बचाता ।सीमा आपको पता है इस चेहरे को ही इतने बड़े घर का रिश्ता आया था।
आपको पता हे सीमा मुझे पड़ने का जुनून था जिस के चलते माँ ने मुझे शहर पड़ने भेज दिया ।वहा रह कर मेरे ख्याल भी बदले ऐसा नही था के मे रूढ़ीवादी खयालो वाली हूं माँ ने हमेशा सही का साथ देना सिखाया है ।वहां जाकर नये दोस्त बने ओर दोस्तो मे लड़के भी शामिल थे।मेरी शादी मे मेने मेरे दोस्तो को बुलाया था ।शादी वाली रात सब लोग बहुत खुश थे तभी मेरा दोस्त आया ओर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाहर ले आया जहा सब वर माला की रस्म के लिये खड़े थे बस जही गलती थी मेरे दोस्त की के उसने मेरा हाथ पकड़ा था जिसे बारात मे आये सब ने देखा ओर राज ने भी देखा ।सिमरन बोलते हुये चुप कर गई फिर सीमा को देख कर राज जिस से मेरी शादी होने वाली थी।राज ने मेरे दोस्त को बहुत मारा मै बहुत बोली उसे छोड़ने को पर राज ने मेरी एक भी नही सुनी।वो तब तक उसे मारता रहा जब तक मेरा दोस्त बेहोश ना हुया।सारे गाँव वाले सारे बाराती जे तमाशा देखते रहे कोई भी सामने नही आया। मुझे तो बस जे समझ नही आया के इतना पड़ा लिखा लड़का ओर इतनी छोटी सोच मेने जे सब नही सोचा था तो मेने शादी से मना कर दिया ओर माँ ने भी जही कहा।राज को जे बात गवारा नही थी के कोई लड़की ने उसे ना कही है वो गुस्से मे मेरे साथ बदसलूकी करने पर उतर आया इस बार भी सब देखते रहे कोई कुछ नही बोला में खुद को बचाने के लिये कमरे मे चली गई पर कमरा बंद नही कर पाई ओर राज ने मुझे धका दे दिया ,,,,अगर समर जी सही समय पर नही आते मै भी शायद किसी नदी नाले में पडी होती। आपके पता हे सीमा दुलहन बनी लड़की के साथ जब जे सब होता है तो गलती भी उस की ही होती है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुया सारी गलती मेरी ही थी। जे सब मेरी माँ नही सुन पा रही थी ओर उन की हालत खराब हो गई। तभी माँ (उषा देवी )ने सब के मुंह पर ताला लगाते हुये बोला ,,,,, उनका बेटा मुझ से शादी करे गा । अब आप ही बताउं सीमा जब मे ओर समर जी अजनबी है तो कैसे,,,, बस भाभी अब कुछ नही राज को तो आप जानती थी ना तब भी उस ने आपके साथ गलत किया ना सीमा सिमरन को समझाते हुये बोली । एक बात जरूर कहूँगी मेरे समर भाई दिल के बुरे नही है बस गुस्से मे ज्यादा रहते । सिमरन हस कर मुझे पता है ।
भाभी अब मे चलती हूं सिमरन कुछ नही कह पाई । वो सीमा को ही देख रही थी ।सीमा के जाने के बाद सिमरन बालकनी मे आ गई ओर तारों को देखने लगी । ओर वही पड़े काउच पर बैठ गई। कब उसे नींद आई पता ही ना लगा ।
समर रूम मे आकर बैड पर लेट गया ओर वो भी सो गया ।सुबह चार बजे सिमरन की आख खुली ठंड की वजह से तो वो उठ कर रूम मे आती है जहा समर बेड पर सो रहा था ।सिमरन समर को एक नजर देखती है फिर उसे कंबल उड़ा देती है ।तभी सिमरन को बचे के रोने की आवाज सुनाई देती है ।सिमरन धीरे से रूम से बाहर आती है ।ओर उस आवाज़ के पीछे चली जाती है । जे आवाज सोहेल के रूम से आ रही थी सिमरन दरवाजे पर खड़ी हो कर देख रही थी के तभी सोहेल की नजर सिमरन पर जाती है तो वो सिमरन को अंदर आने कहता है । सिमरन अंदर आकर परी को देखती है तो सोहेल सिमरन से तुम मेरा एक काम करो गी ,,,,, जी भाई आप जो कहो गे वही करुँ गी ,,,,, सिमरन बोली । ठीक है तुम परी को संभलो मे दूद ले आता हू ,,,,सोहेल बोला ।तो में ले आती हू सिमरन बोली ।नही तुम नही जा सकती ,,,,,, सिमरन सोहेल को देखने लग जाती है ,,,,,, अभी तुम्हारी पहली रसोई नही हुई है ,,,,, इस लिये बोला ,,,,,सोहेल सिमरन के सिर पर हाथ रखते हुये बोला ।सिमरन भी हा मे सिर हिला देती है ओर परी को गोद में ले लेती है । सोहेल दूद ले आता है पर परी पहले ही सो गई तो सिमरन सोहेल को सोने का बोल कर बाहर होल मे परी को लेकर आ गई ।सोहेल ने सिमरन को मना किया पर सिमरन नही मानी तो सोहेल सोने चला गया ।
सुबह के छे बजे उषा देवी बाहर होल मे आई तो सिमरन को देख कर उस तरफ चल दी पर जब उषा देवी ने सिमरन की गोद मे परी को देखा तो उन के चहरे पर बड़ी सी समाइल आ गई। उषा जी सिमरन का सिर सहलाती है जिस से सिमरन उठ जाती है ।उषा जी सिमरन को वही बैठे रहने का बोलती है ।उषा जी सिमरन के पास बैठ कर आप जहा क्या कर रही है ।सिमरन ,,,,,वो माँ मे रूम मे ही थी पर परी के रोने की आवाज सुन कर ही नीचे आई । कोई बात नही पर अब आप जाकर फ्रैश हो जाये तब तक सब उठ जाये गे ,,, उषा जी बोली ।ठीक है माँ बोल कर सिमरन परी को उषा जी को देती है ओर रूम की तरफ चल देती है पर वो जाना ही नही चाह रही थी कयुक इतने घंटों मे ना तो समर ने ही सिमरन से बात की ना ही सिमरन ने समर से ।बस जे सब सोचते हुये सिमरन रूम मे पहुँचती है तो समर को सोया हुया पाकर वो जल्दी से कपड़े लेकर बाथरूम मे चली जाती है ।थोड़ी देर बाद बाहर आती है तो समर सोया था तो सिमरन जल्दी से तैयार हो कर नीचे आ जाती है । माँ मे अब रसोई मे जा सकती हू सिमरन उषा जी से बोली ।हा जा सकती हो सब कुछ बन चुका है तुम्हें बस हलवा ही बनाना है सीमा मदद कर देगी ,,,उषा जी बोली । सिमरन ने हा मे गरदन हिला दी ।तभी सोहेल हँसते हुये वैसे सिमरन खाना बनाना आता है तुम्हें,,,,, बोला ।सिमरन भी हस दी ।
सब लोग खाना खा रहे थे तभी समर भी तैयार हो कर नीचे आता है ओर सब को गुड़ मॉर्निंग विश करता है ।पर एक बार भी सिमरन की तरफ नही देखता।
सोहेल समर से आज कही जा रहे हो क्या,,,,सोहेल समर के हाथ मे एक सूटकेस देख कर बोलता है ,,,,, हा भाई वो कलाइट से मीटिंग है वही जा रहा हूँ कोन सा कलाइट है,,,,,भाई वो मुबाई वाला ।इसका मतलब तुम दो दिन के लिये जा रहे हो ।हा भाई पहले उस की साइट देखनी है उसी के हिसाब से ही तो डिजाइन बनाउ गा ।तो ठीक है सिमरन को भी साथ ले जाउँ,,,,, उषा देवी बोली ।समर ओर सिमरन दोनो के ही हाथ रुक गये थे खाना खाते हुये ।
समर ,,,,,,, माँ आपके कहने पर मेने शादी कर ली है अब इस के आगे कोई उम्मीद मत रखिये गा ।
समर ,,उषा देवी गुस्से मे बोली ।बाकी भी हैरान थै । सिमरन भी भरी हुई आंखो से देख रही थी पर समर ने बीना सिमरन को देखे ही बोला ,,,,,,,,, मुझ से अब कोई उम्मीद मत रखना ।पत्नी है वो तुम्हारी,,,,, उषा देवी बोली । आप सब जानती है माँ तो अब इस बात पर बहस नही चाहता । समर उठ कर ओर हा मेने मीता(काम वाली)को बोल दिया है तो तुम आपना सामान दूसरे रूम मे रखवा लेना ,,,,,,बोल कर समर बिना किसी की सुने ही चला जाता है ।उषा देवी भी उठ कर अपने रूम मे चली गई,,,,,, वहा अपने पति की तस्वीर के सामने खड़ी थी ,,,,,, तभी सोहेल आकर उषा देवी के कंधे पर हाथ रखता है। उषा देवी बीना सोहेल को देखे,,,,,, मेने बहुत बड़ी गलती करदी ।नही माँ आपने गलत होने से रोका है ,,,,सोहेल उषा देवी के सामने आते हुये बोला। तो फिर समर कयु नही समझ रहा ।माँ समय दे आप सब ठीक होगा उषा देवी आपने आंसू साफ करते हुये ठीक है सोहेल अब मे कुछ नही बोलू गी ,,,तु सही कह रहा है समय ही सब ठीक करे गा ।
माँ बाहर मेहमान आये है ,,,सिमरन दरवाजे पर आकर बोली ।सोहेल और उषा देवी सिमरन के साथ बाहर आ गये ।हर्ष की मम्मी आई थी ।तो सब बैठ कर बातें करने लगे ।
ऐसे ही दस दिन बीत गये थे दो दिन का बोल कर समर आया ही नही ।अब परी हर वक्त सिमरन के साथ ही रहने लगी ।इन दस दिनों मे सोहेल के विहार मे बदलाव आया जहा वो चुप चुप रहता था वही सिमरन से बातें करने लगा और घर में सब के साथ मिल कर बैठने लगा । हर समय सिमरन परी के पीछे पीछे भागती रहती ।रात को परी सिमरन के साथ ही सोती। समर सब से बात करता सब की ख़ैरियत भी पूछता पर सिमरन के बारे मे ना तो कभी बात करी ना ही सुनी।
रोज की तरह ही उस दिन सोहेल ऑफिस गया था ,सीमा कालज और उषा देवी अपनी नन्द के जहा गई थी उस की बेटी की शादी है कुछ दिनो मे बस उस की ही तैयारी चल रही थी ।।घर पर सिमरन ओर परी ही थी ।सिमरन परी को खिलाने के लिये पीछे पीछे भाग रही थी । के अचानक ही परी गिर गई ,,,,, गिरने से रोने लगी तभी समर वहा पहुंचा ओर परी को उठा कर उसे चुप कराने लगा सिमरन वहा आकर परी को देखने लगी पर समर ने सिमरन को दूर रहने का इशारा कर दिया ,,,,,,,,, समर मीता को आवाज़ देता है ओर मीता को परी देते हुये उसे बाहर लेजाने को बोलता है । मीता के जाते ही सिमरन भी जाने को हुई तो समर सिमरन को रोक कर एक बात याद रखना जब में घर पर रहूँ तो मेरे सामने आने की कोशिश मत करना ।सिमरन हां मे सिर हिला देती है ,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,
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