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20/06/2026

#कोचिंग

20/06/2026

20/06/2026

Love story                    बड़ी बेसब्री के साथ सुबह सुबह बस का इंतेजार कर रहा था अखिल कालेज का पहला दिन था । इंतेजार ख़...
20/06/2026

Love story
बड़ी बेसब्री के साथ सुबह सुबह बस का इंतेजार कर रहा था अखिल कालेज का पहला दिन था । इंतेजार ख़त्म हुआ पिले कलर की बस दूर से दिखाई दे रही रही । सोचा के बस सीधे आके मेरे पास रुकेगी , पर ये क्या बस रो यूकी ही नहीं । दौड़ते हुए रोकने की कोशिश की बस जा चुकी थी । एक बाइक वाले से लिफ्ट ली और आगे जा कर बस को पकड़ली । अन्दर घुसते ही ड्राइवर पर चिल्लाता हुआ पीछे जा कर बैठ गया। गुस्सा तो था पर खुशी भी थी की चलो कैसे भी बस तो पकडली । रास्तो पर यहाँ वहाँ घूमती हुयी आखिर बस पहुँच गयी कॉलेज। बस से उतर के पूछते पूछते पहुँच गया क्लासरूम तक ।अन्दर जाकर खिड़की वाली सीट पकड़ के बेठ गया ,वहां से आने जाने वाले नए नए चेहरे जो दिखाई दे रहे थे । तभी अचानक नजर ऐसे चहरे पर पढ़ी जो दिखने में साधारण सा था पर अट्ट्रक्टिवे था। थोड़ी ही देर में वो चेहरा पास आते आते मेरी पास वाली क्लास में मुड़ गया ।में अपने काम में लग गया । मेरा ध्यान बार बार खिड़की की और जा रहा था उस क्लास से निकलने वाली हर एक लड़की में मै उसे तलाश कर रहा था। समय हो चूका था इंटर में सभी अपनी अपनी क्लास से बाहर आ रहे थे मै अभी भी खिड़की के पास बैठा उसके बाहर आने का इंतजार कर रहा था। शायद वो पहले ही जा चुकी थी । में आपनि क्लास से निकल कर कैंटीन की और चल पडा। इसी बीच मेने एक दोस्त भी बना लिया था जो मेरे साथ ही मेरी बैंच पर बैठा था विवेक नाम था उसका । कैंटीन में जाकर देखा तो अकेली बैठी हुई कुछ खा रही थी। पहले सोचा के जाकर उसके पास बैठ जाऊ और इंट्रो करलू। फिर ख्याल आया कही मना कर गयी तो इज्जत के कचरे हो जायेंगे ।
दो तीन दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा फिर एक दिन हिम्मत जुटा कर उसके पास जाकर धीमी सी आवाज में कहा के" क्या में यहाँ बैठ सकता हु? उसने मुझे अजनबी आँखों दे देखते हुए कहा ठीक है बैठ जाओ में कोन होती हु मना करने वाली । उस वक्त पता चला के मासूम सा दिखने वाला चाहरा इतना भी मासूम नहीं था जितना में सोच रहा था। फिर मेने एक सवाल और किया "यही रहती हो या कही बाहर से आयी हो पढ़ाई के लिए । उसने मुझे देखा और वापस अपनी नजरे नीचे झुकाली मेने फिर वही सवाल दोहराया उसने नकली मुस्कान के साथ जवाब दिया बाहर से आयी हु ,और कुछ पूछना हे या हो गया और वहां से उठ कर चली गयी। में मन ही मन सोच रहा था के कितना घमण्ड हे इसे सही से बात भी नहीं की ।यही सिलसिला कई दिनों तक चलता रहा फिर करीब 4 महीने बाद हम दोनों में थोड़ी सी दोस्ती हो पाई ,मेने तो पहले ही सोच लिया था के हो न हो यही लड़की अपने लिए सही है । धीरे धीरे नंबर एक्सचेंज हुए बाते होने लगी कभी मैसेज में कभी कभी किसी काम के बहाने कालिंग पे। अब धीरे धीरे ये रूटीन में आ गया था कुछ भी हो मैसेज तो एक दूसरे को करना ही था वो भी रोज । महीनो यही सिलसिला चलता रहा । कहानी में प्यार वाला मोड़ कालेज में होने वाले एनुअल फंक्शन से आया ।दोनों ने डांस में पार्टिसिपेट किया था और प्रैक्टिस भी साथ ही होती थी ज्यादातर टाइम साथ बीतने लगा दोनों को एक दूसरे की आदत सी हो चली थी । कालेज ख़त्म कर के जब घर लौटते तब भी मैसेज का सिलसिला चलता रहता । अभी तक हमारी बाते सिर्फ और सिर्फ एक अच्छे दोस्त की तरह चला रही थी । थोडी हिम्मत जुटा के एक दिन मैसेज में अपने दिल की बात कह दी । जैसे ही उसने वो बाते पढ़ी तुरंत उधर से कॉल आ गया । पहले तो रिसिव ही नहीं किया फिर सोचा के क्या पता उधर से जवाब हां में मिले ,जो होगा देखा जायेगा फोन उठाते ही " तुम समझते क्या हो अपने आप को तुमने सोच भी कैसे लिया के में तुमसे प्यार करुँगी। मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी"और इतना कह कर फोन कट गया।
अगली सुबह जब में कालेज पंहुचा तो देखा की वो पहले ही अपनी क्लास में आ चुकी है इस बार मेरा वेट नहीं किया गेट पर जैसा रोज किया करती थी । में समझ गया कि मैने आज एक बहोत अच्छा दोस्त खो दिया अपनि एक नासमझी की वजह से ।

इंटर में उसके पास जा कर पूछना चाहा तो उसने मुह सड़ाते हुए कोई जवाब नहीं दिया।
में उदास हो गया मेरा दिल बैठा जा रहा था कुछ देर बाद अचानक मोबाइल पर मैसेज की घंटी बजी जल्दी से मोबाइल बहार निकलते हुए मैसेज ओपन किया । "मुझे तुमसे कुछ बात करना है क्या तुम मुझसे लाइब्रेरी में मिल सकते हो " मैसेज पढ़ने के बाद गाला सूखने लगा था माथे पर पसीना और दिल में एक अजीब तरह की घबराहट। हिम्मत कर के लाइब्रेरी पंहुचा तो कार्नर में रखी टेबल जिससे बाहर का नजारा साफ साफ दिखाई देता था वहां बैठी थी वह। में चेहरे पर झूटी सी मुस्कान लेकर उसके पास जाकर बैठ गया। मेरे बैठते ही वह फिर से शुरू हो गयी तुम समझते क्या हो अपने आप को में उन लड़कियों की तरह नहीं हूं । मैसेज में आय लव यू लिख देने से प्यार का इजहार करने से में तुम्हे हां कह दूंगी अगर सच में प्यार करते हो तो मेरे सामने मुझे प्रपोज़ करो । यूह डरपोक की तरह मैसेज में लिखने से काम नहीं चलेगा जनाब और हां अगर प्रपोज़ कर ही रहे हो तो एक बात का ध्यान रखना गलती से भी छोड़ने की कोशिश मत करना वार्ना जान लेलूंगी तुम्हारी।

उस दिन से आज तक मेरे साथ हे मेरा वो पहला प्यार ।

छोटी बहू पार्ट 3शाम के समये उषा, सोहेल ओर समर बाहर लान मे बैठ कर चाये पी रहे थे ।पर सिमरन ओर सीमा बाहर नही थे। सिमरन ने ...
17/06/2026

छोटी बहू पार्ट 3
शाम के समये उषा, सोहेल ओर समर बाहर लान मे बैठ कर चाये पी रहे थे ।पर सिमरन ओर सीमा बाहर नही थे। सिमरन
ने सीमा से बोला भी के वो बाहर चली जाये पर सीमा नही गई ।सिमरन के आने के बाद सीमा को ऐसी दोस्त मिल गई जिस के साथ वो आपने दिल की सारी बातें करती थी ओर सिमरन भी सब बातें बताती। सीमा,,,,,,, भाभी भाई ने कहा ओर आप मान गई कब तक ऐसे चले गा कभी ना कभी एक दूसरे के सामने तो आना ही पड़ेगा ।आप ना सच मे भोली हो जो जैसा कहता है वैसा ही कर लेते हो।

सिमरन हस कर इसे भोलापन नही कहते ऐसा करने से तो घर मे सुख शांति बनीं रहती है ओर मे नही चाहती के मेरे वजह से इस घर की सुख शांति ख़राब हो ।सीमा ,,,,,, भाभी आप सब के बारे में सोचती हो पर खुद के बारे मे नही ,,,,, आप हो ना मेरे बारे मे सोचने के लिये सिमरन बोली। दोनो बैठे बातें कर रही थी ।मीता आते हुये ,,,,,,, भाभी आप को बाहर बुला रहे है । सिमरन ठीक है ।मीता चली गई। अब मेने क्या किया जो बाहर बुलाया जा रहा है सिमरन सीमा को देखते हुये बोली ।सीमा,,,,,,, चलो भाभी देखते है ओर परी को उठा कर बाहर आ गई। बाहर सोहेल ओर उषा देवी ही बैठे थे ।समर नही था वहा । सोहेल परी को लेकर ,,,,,, घुमने चला गया ।सिमरन सीमा वही उषा देवी के पास बैठ गई। उषा देवी सिमरन को एक बोक्स देती है। सिमरन ये क्या है माँ ।उषा जी ,,, देखो खोल कर। सिमरन खोल कर देखती है और हैरानी से माँ जे क्यो। उषा जी ,,,,,,, तुम्हारी मम्मी से बात हुई थी उनहों ने ही बताया के तुम काम करती हो ओर वो भी घर से । हा माँ करती थी पर तब की बात अलग थी ।और अब ,,,,,,,,,,,,,,, अब क्या हे और तब क्या था बताउं उषा जी बोली तो सिमरन चुप कर गई। उषा जी सिमरन के सिर पर हाथ फेरते हुए ,,,,,,,,,,, मेने कभी भी तुम मे ओर सीमा मे फर्क नही करा ।तुम दोनो ही मेरी बेटी हो ।तो तुम्हारी खुशी का भी ख्याल मुझे ही रखना है ।तुमे तो आपना काम सब से ज्यादा प्यारा है फिर छोड़ दिया ,,,,,,,,, कयु ?

सीमा जो इतनी देर से बातें सुन रही थी जिज्ञासा बस पूछ बैठी कोन सा काम करते हो आप भाभी ओर जे भी पता चल गया के आप ओनलाईन करती हो ,,,सीमा लैपटॉप की तरफ इशारा करते हुए बोली।

सिमरन,,,,,,,वो मेने आर्किटेक्चर का कोर्स किया है । तो वही काम करती हु पर घर से ही ।घर से मतलब सीमा बोली । सिमरन सीमा को देख कर ,,,,,, मेने अपनी एक साईट बना रखी है ।जिन लोगों को अपना काम आराम से करवाना होता जा मेरे आईडिया को अपनाना होता है वही मुझे कॉनटेकट करते है ।

वाह भाभी काम भी अपनी शर्तों पर करती हो आप ।सिमरन हस कर ,,,,,,, मे जही काम अपनी मर्जी से करती हूँ। अछा भाभी जे बताउं के आप अपने क्लाइंट से मिलने भी जाती हो ,,, सीमा ने फिर से सवाल पूछा। हा जाती हू,,,, जिनके सपने की नींव रखने का काम मे करती हू उनका सपना क्या है जेभी मुझे जाना होता है बाकी उनके सपने को में अपने तरीके से ढाल ती हूँ,,,सिमरन के चेहरे पर आज एक अलग ही खुशी थी जिसे उषा देवी ने देख लिया था । बस कर सीमा ओर क्या क्या पुछोगी ,,,,, सीमा ने फिर से सवाल करने के लिये मुंह खोला पर उषा देवी के कहने के साथ ही चुप कर गई। उषा देवी अब इसे ओन भी कर लो के बाहर से ही देखना है इसे। तो सीमा सिमरन से ,,,, ,हा भाभी माँ सही कह रही है ।सिमरन ,,,,,,, सीमा को लैपटॉप देते हुये लो फिर आप ही करो बोली ।सीमा भी लैपटाप को पकड़ कर ओन करने लगी तभी वहा समर आ कर बैठ गया ।जिसे देखने से ही सिमरन उठ कर जाने लगी ,,पर उषा जी के कहने पर वही बैठ गई। समर सीमा से,,,,,,,,,क्या बात है सीमा आज किसी को लैपटॉप चलाना सिखा रही हो क्या,,,,,,,सीमा के हाथो की हरकत एकदम रुक गई वही उषा जी भी समर के ऐसे सवाल से उसे देखने लगी ।ऐसे क्या देख रहे हो आप दोनो कुछ गलत नही पुछा मेने वही पूछा जो सच है । हा भाई आप सही कह रहे हो। सीमा बोली ,,,उषा जी को देख कर माँ मे अंदर जाउँ भाभी के साथ। उषा देवी हा मे सिर हिला देती है । सिमरन सीमा के जाने के बाद उषा देवी समर से ,,,,,जे क्या तरीका है आपनी पत्नी से बात करने का ,,,,,समर,, प्लीज माँ आप अब शुरू मत हो जाना मे नही मानता उसे अपनी पत्नी। उषा देवी,,,,, ठीक है आज के बाद मे तुम्हे कभी भी सिमरन के बारे मे नही बोलूं गी ।ओर तु भी मेरी बहु को कुछ नही बोले गा ।क्या मा आप पर कोई जादू कर दिया है क्या उस लडकी ने जो आप अपने बेटे को बोल रही हो ,,,समर हँसते हुये बोला ।

उषा देवी,,,,,, तु जानता भी है उसे जो ऐसी बातें कर रहा है तु आज दस दिन बाद आया है पर एक बार भी उस के बारे नही पुछा अरे देखा तुने तो देखा भी नही है सिमरन को ।माँ मेने आप को उस दिन ही बोल दिया था,,,,,आपको आपकी बहू मिल गई है । पर मुझे से ओर कुछ उम्मीद मत रखना ।पर समर,,,,,,,बस माँ इसी वजह से मे घर नही आना चाहता था पर आप सब की खातिर आगया ।उषा देवी कुछ बोलने को हुई तो समर उन्हे रोकते हुये बोला। ठीक है समर आज के बाद मे जा इस घर मे कोई भी तेरे ओर सिमरन के बीच मे नही आये गा ,,,उषा देवी बोली ।जही सही रहे गा माँ समर बोलते हुये आपने रूम मे चला गया । उषा देवी वही बेठी सोच मे डुब गई

क्या भाभी आप ने मुझे बोलने से रोक कयु दिया सीमा अंदर आकर बेड पर बैठ कर बोली ।बस ऐसे ही सिमरन सीमा से बोली।फिर भी भाभी भाई गलत है तो बताना तो फर्ज बना है ।,,,,,,,,,,next part

बहू भाग 2सीमा सिमरन को एक टक देखे जा रही थी  तो सिमरन ने पूछा एसे क्या देख रहे हो आप मुझे  ,,,,,   तो सीमा सिमरन को शीश...
16/06/2026

बहू भाग 2

सीमा सिमरन को एक टक देखे जा रही थी तो सिमरन ने पूछा एसे क्या देख रहे हो आप मुझे ,,,,, तो सीमा सिमरन को शीशे के सामने कर ते हुये ,,,,,,, मै जे देख रही हूं के कोई इतना सुन्दर भी हो सकता है ।जैसे भगवान ने फुरसत से बनाया हो ।सिमरन का रंग जेसे दूध मे हलका सिन्दूर मिला दिया हो ,हिरनी के जैसी आँखे,छोटी सी नाक ,अपर लिप के लेफ्ट साइड छोटा सा तिल जो सिमरन की खूबसूरती को नज़र लगने से बचाता ।सीमा आपको पता है इस चेहरे को ही इतने बड़े घर का रिश्ता आया था।

आपको पता हे सीमा मुझे पड़ने का जुनून था जिस के चलते माँ ने मुझे शहर पड़ने भेज दिया ।वहा रह कर मेरे ख्याल भी बदले ऐसा नही था के मे रूढ़ीवादी खयालो वाली हूं माँ ने हमेशा सही का साथ देना सिखाया है ।वहां जाकर नये दोस्त बने ओर दोस्तो मे लड़के भी शामिल थे।मेरी शादी मे मेने मेरे दोस्तो को बुलाया था ।शादी वाली रात सब लोग बहुत खुश थे तभी मेरा दोस्त आया ओर मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बाहर ले आया जहा सब वर माला की रस्म के लिये खड़े थे बस जही गलती थी मेरे दोस्त की के उसने मेरा हाथ पकड़ा था जिसे बारात मे आये सब ने देखा ओर राज ने भी देखा ।सिमरन बोलते हुये चुप कर गई फिर सीमा को देख कर राज जिस से मेरी शादी होने वाली थी।राज ने मेरे दोस्त को बहुत मारा मै बहुत बोली उसे छोड़ने को पर राज ने मेरी एक भी नही सुनी।वो तब तक उसे मारता रहा जब तक मेरा दोस्त बेहोश ना हुया।सारे गाँव वाले सारे बाराती जे तमाशा देखते रहे कोई भी सामने नही आया। मुझे तो बस जे समझ नही आया के इतना पड़ा लिखा लड़का ओर इतनी छोटी सोच मेने जे सब नही सोचा था तो मेने शादी से मना कर दिया ओर माँ ने भी जही कहा।राज को जे बात गवारा नही थी के कोई लड़की ने उसे ना कही है वो गुस्से मे मेरे साथ बदसलूकी करने पर उतर आया इस बार भी सब देखते रहे कोई कुछ नही बोला में खुद को बचाने के लिये कमरे मे चली गई पर कमरा बंद नही कर पाई ओर राज ने मुझे धका दे दिया ,,,,अगर समर जी सही समय पर नही आते मै भी शायद किसी नदी नाले में पडी होती। आपके पता हे सीमा दुलहन बनी लड़की के साथ जब जे सब होता है तो गलती भी उस की ही होती है मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुया सारी गलती मेरी ही थी। जे सब मेरी माँ नही सुन पा रही थी ओर उन की हालत खराब हो गई। तभी माँ (उषा देवी )ने सब के मुंह पर ताला लगाते हुये बोला ,,,,, उनका बेटा मुझ से शादी करे गा । अब आप ही बताउं सीमा जब मे ओर समर जी अजनबी है तो कैसे,,,, बस भाभी अब कुछ नही राज को तो आप जानती थी ना तब भी उस ने आपके साथ गलत किया ना सीमा सिमरन को समझाते हुये बोली । एक बात जरूर कहूँगी मेरे समर भाई दिल के बुरे नही है बस गुस्से मे ज्यादा रहते । सिमरन हस कर मुझे पता है ।

भाभी अब मे चलती हूं सिमरन कुछ नही कह पाई । वो सीमा को ही देख रही थी ।सीमा के जाने के बाद सिमरन बालकनी मे आ गई ओर तारों को देखने लगी । ओर वही पड़े काउच पर बैठ गई। कब उसे नींद आई पता ही ना लगा ।

समर रूम मे आकर बैड पर लेट गया ओर वो भी सो गया ।सुबह चार बजे सिमरन की आख खुली ठंड की वजह से तो वो उठ कर रूम मे आती है जहा समर बेड पर सो रहा था ।सिमरन समर को एक नजर देखती है फिर उसे कंबल उड़ा देती है ।तभी सिमरन को बचे के रोने की आवाज सुनाई देती है ।सिमरन धीरे से रूम से बाहर आती है ।ओर उस आवाज़ के पीछे चली जाती है । जे आवाज सोहेल के रूम से आ रही थी सिमरन दरवाजे पर खड़ी हो कर देख रही थी के तभी सोहेल की नजर सिमरन पर जाती है तो वो सिमरन को अंदर आने कहता है । सिमरन अंदर आकर परी को देखती है तो सोहेल सिमरन से तुम मेरा एक काम करो गी ,,,,, जी भाई आप जो कहो गे वही करुँ गी ,,,,, सिमरन बोली । ठीक है तुम परी को संभलो मे दूद ले आता हू ,,,,सोहेल बोला ।तो में ले आती हू सिमरन बोली ।नही तुम नही जा सकती ,,,,,, सिमरन सोहेल को देखने लग जाती है ,,,,,, अभी तुम्हारी पहली रसोई नही हुई है ,,,,, इस लिये बोला ,,,,,सोहेल सिमरन के सिर पर हाथ रखते हुये बोला ।सिमरन भी हा मे सिर हिला देती है ओर परी को गोद में ले लेती है । सोहेल दूद ले आता है पर परी पहले ही सो गई तो सिमरन सोहेल को सोने का बोल कर बाहर होल मे परी को लेकर आ गई ।सोहेल ने सिमरन को मना किया पर सिमरन नही मानी तो सोहेल सोने चला गया ।

सुबह के छे बजे उषा देवी बाहर होल मे आई तो सिमरन को देख कर उस तरफ चल दी पर जब उषा देवी ने सिमरन की गोद मे परी को देखा तो उन के चहरे पर बड़ी सी समाइल आ गई। उषा जी सिमरन का सिर सहलाती है जिस से सिमरन उठ जाती है ।उषा जी सिमरन को वही बैठे रहने का बोलती है ।उषा जी सिमरन के पास बैठ कर आप जहा क्या कर रही है ।सिमरन ,,,,,वो माँ मे रूम मे ही थी पर परी के रोने की आवाज सुन कर ही नीचे आई । कोई बात नही पर अब आप जाकर फ्रैश हो जाये तब तक सब उठ जाये गे ,,, उषा जी बोली ।ठीक है माँ बोल कर सिमरन परी को उषा जी को देती है ओर रूम की तरफ चल देती है पर वो जाना ही नही चाह रही थी कयुक इतने घंटों मे ना तो समर ने ही सिमरन से बात की ना ही सिमरन ने समर से ।बस जे सब सोचते हुये सिमरन रूम मे पहुँचती है तो समर को सोया हुया पाकर वो जल्दी से कपड़े लेकर बाथरूम मे चली जाती है ।थोड़ी देर बाद बाहर आती है तो समर सोया था तो सिमरन जल्दी से तैयार हो कर नीचे आ जाती है । माँ मे अब रसोई मे जा सकती हू सिमरन उषा जी से बोली ।हा जा सकती हो सब कुछ बन चुका है तुम्हें बस हलवा ही बनाना है सीमा मदद कर देगी ,,,उषा जी बोली । सिमरन ने हा मे गरदन हिला दी ।तभी सोहेल हँसते हुये वैसे सिमरन खाना बनाना आता है तुम्हें,,,,, बोला ।सिमरन भी हस दी ।

सब लोग खाना खा रहे थे तभी समर भी तैयार हो कर नीचे आता है ओर सब को गुड़ मॉर्निंग विश करता है ।पर एक बार भी सिमरन की तरफ नही देखता।
सोहेल समर से आज कही जा रहे हो क्या,,,,सोहेल समर के हाथ मे एक सूटकेस देख कर बोलता है ,,,,, हा भाई वो कलाइट से मीटिंग है वही जा रहा हूँ कोन सा कलाइट है,,,,,भाई वो मुबाई वाला ।इसका मतलब तुम दो दिन के लिये जा रहे हो ।हा भाई पहले उस की साइट देखनी है उसी के हिसाब से ही तो डिजाइन बनाउ गा ।तो ठीक है सिमरन को भी साथ ले जाउँ,,,,, उषा देवी बोली ।समर ओर सिमरन दोनो के ही हाथ रुक गये थे खाना खाते हुये ।
समर ,,,,,,, माँ आपके कहने पर मेने शादी कर ली है अब इस के आगे कोई उम्मीद मत रखिये गा ।
समर ,,उषा देवी गुस्से मे बोली ।बाकी भी हैरान थै । सिमरन भी भरी हुई आंखो से देख रही थी पर समर ने बीना सिमरन को देखे ही बोला ,,,,,,,,, मुझ से अब कोई उम्मीद मत रखना ।पत्नी है वो तुम्हारी,,,,, उषा देवी बोली । आप सब जानती है माँ तो अब इस बात पर बहस नही चाहता । समर उठ कर ओर हा मेने मीता(काम वाली)को बोल दिया है तो तुम आपना सामान दूसरे रूम मे रखवा लेना ,,,,,,बोल कर समर बिना किसी की सुने ही चला जाता है ।उषा देवी भी उठ कर अपने रूम मे चली गई,,,,,, वहा अपने पति की तस्वीर के सामने खड़ी थी ,,,,,, तभी सोहेल आकर उषा देवी के कंधे पर हाथ रखता है। उषा देवी बीना सोहेल को देखे,,,,,, मेने बहुत बड़ी गलती करदी ।नही माँ आपने गलत होने से रोका है ,,,,सोहेल उषा देवी के सामने आते हुये बोला। तो फिर समर कयु नही समझ रहा ।माँ समय दे आप सब ठीक होगा उषा देवी आपने आंसू साफ करते हुये ठीक है सोहेल अब मे कुछ नही बोलू गी ,,,तु सही कह रहा है समय ही सब ठीक करे गा ।

माँ बाहर मेहमान आये है ,,,सिमरन दरवाजे पर आकर बोली ।सोहेल और उषा देवी सिमरन के साथ बाहर आ गये ।हर्ष की मम्मी आई थी ।तो सब बैठ कर बातें करने लगे ।

ऐसे ही दस दिन बीत गये थे दो दिन का बोल कर समर आया ही नही ।अब परी हर वक्त सिमरन के साथ ही रहने लगी ।इन दस दिनों मे सोहेल के विहार मे बदलाव आया जहा वो चुप चुप रहता था वही सिमरन से बातें करने लगा और घर में सब के साथ मिल कर बैठने लगा । हर समय सिमरन परी के पीछे पीछे भागती रहती ।रात को परी सिमरन के साथ ही सोती। समर सब से बात करता सब की ख़ैरियत भी पूछता पर सिमरन के बारे मे ना तो कभी बात करी ना ही सुनी।

रोज की तरह ही उस दिन सोहेल ऑफिस गया था ,सीमा कालज और उषा देवी अपनी नन्द के जहा गई थी उस की बेटी की शादी है कुछ दिनो मे बस उस की ही तैयारी चल रही थी ।।घर पर सिमरन ओर परी ही थी ।सिमरन परी को खिलाने के लिये पीछे पीछे भाग रही थी । के अचानक ही परी गिर गई ,,,,, गिरने से रोने लगी तभी समर वहा पहुंचा ओर परी को उठा कर उसे चुप कराने लगा सिमरन वहा आकर परी को देखने लगी पर समर ने सिमरन को दूर रहने का इशारा कर दिया ,,,,,,,,, समर मीता को आवाज़ देता है ओर मीता को परी देते हुये उसे बाहर लेजाने को बोलता है । मीता के जाते ही सिमरन भी जाने को हुई तो समर सिमरन को रोक कर एक बात याद रखना जब में घर पर रहूँ तो मेरे सामने आने की कोशिश मत करना ।सिमरन हां मे सिर हिला देती है ,,,,,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,, ,,,,,,,,,,,,,,,,
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