30/10/2025
चौथ का बरवाड़ा में मदन दिलावर का सफाई सिस्टम फेल! लाखों के बजट के बावजूद गंदगी के ढेर – जिम्मेदार कौन?
मुख्य रिपोर्ट :
राजस्थान सरकार द्वारा पंचायतों में सफाई सुधार के लिए शुरू की गई ठेका प्रथा व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है।
सवाई माधोपुर जिले की चौथ का बरवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र की ग्राम पंचायत चौथ का बरवाड़ा इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है।
सूत्रों के अनुसार, यहां सफाई के नाम पर लाखों रुपये का बजट जारी किया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर नालियां जाम, गलियों में गंदगी के ढेर, और घर-घर से कचरा संग्रहण ठप है।
ग्रामवासियों का आरोप है कि सफाई के नाम पर जो राशि पंचायत में आ रही है, वह न तो गांव की सफाई पर खर्च हो रही है और न ही सफाईकर्मी तक पहुंच रही है।
बल्कि, यह राशि ठेकेदारों और पंचायत स्तरीय अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से बंदरबांट कर दी जा रही है।
ग्रामीणों के तीखे सवाल :
> “जब हर महीने लाखों रुपए सफाई के लिए आते हैं, तो फिर गांव की गलियां क्यों बजबजा रही हैं?”
“क्या सफाई का ठेका विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का नया ज़रिया बन गया है?”
जनता और पत्रकारिता के सवाल :
1. सफाई व्यवस्था में आने वाले लाखों रुपये का ऑडिट कौन करेगा?
2. पंचायत में सफाईकर्मियों को पूरा वेतन क्यों नहीं मिल रहा?
3. नालियों की सफाई, कचरा उठान और कूड़ा निस्तारण पर किसने किया निरीक्षण?
4. क्या स्थानीय प्रशासन और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी पैसा हजम हो रहा है?
5. क्या मदन दिलावर का ‘ठेका मॉडल’ ग्राम स्तर पर पूरी तरह फेल हो चुका है?
6. चौथ का बरवाड़ा जैसे मामलों में जवाबदेही तय करने का काम कौन करेगा?
जनता की आवाज़ :
“सफाई के नाम पर सिर्फ कागज़ों में काम दिखाया जा रहा है। गांव में आएं तो चारों ओर कचरे और बदबू का आलम है। यह सिस्टम फेल हो चुका है,” — स्थानीय नागरिकों का आरोप।
राज्य सरकार का उद्देश्य गांवों में स्वच्छता और पारदर्शिता लाना था, लेकिन चौथ का बरवाड़ा में यह ठेका प्रणाली भ्रष्टाचार का नया अध्याय बनती जा रही है।
अब सवाल यह है —
जब सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं, तो गंदगी कौन फैला रहा है और सफाई का पैसा कौन डकार रहा है?
क्या मंत्री मदन दिलावर इस फेल सिस्टम की जिम्मेदारी लेंगे या फिर जनता यूं ही बदबू झेलती रहेगी?
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