19/09/2026
IIT Bombay Student Su***de: एक परीक्षा, ChatGPT और फिर मौत—क्या उस बातचीत के बाद किसी ने सोचा कि छात्र के मन में क्या चल रहा होगा?
क्या सिर्फ यह कहना काफी था कि “तुम्हारे करियर पर असर नहीं पड़ेगा”?
कल्पना कीजिए उस छात्र की स्थिति की।
एक ऐसा युवा, जिसने IIT तक पहुंचने के लिए वर्षों मेहनत की होगी। लाखों विद्यार्थियों के बीच से प्रतिस्पर्धा करके IIT में प्रवेश हासिल करना किसी भी छात्र के लिए सिर्फ एक परीक्षा पास करना नहीं होता। इसके पीछे परिवार की उम्मीदें, बच्चे की अपनी महत्वाकांक्षाएं, वर्षों की पढ़ाई और भविष्य के सपने जुड़े होते हैं।
फिर एक दिन परीक्षा के दौरान उससे गलती होती है।
मोबाइल फोन उसके पास मिलता है।
उसे पता चलता है कि उसने परीक्षा के दौरान ChatGPT का इस्तेमाल किया है।
इसके बाद उसे परीक्षा कक्ष से बाहर किया जाता है और संस्थान के अधिकारियों से बातचीत होती है।
संस्थान कहता है कि उसे समझाया गया।
लेकिन सवाल यह है—
उसे क्या-क्या कहा गया?
उस बातचीत का स्वर कैसा था?
क्या उससे पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया?
क्या उससे पूछा गया कि वह किसी दबाव में था?
क्या उससे पूछा गया कि क्या वह डर रहा है?
क्या उससे यह पूछा गया कि घर पर इस घटना को लेकर उसे किस प्रतिक्रिया का डर है?
क्या उससे यह पूछा गया कि क्या उसे लग रहा है कि उसने अपने माता-पिता, शिक्षकों या खुद को निराश कर दिया है?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या किसी ने यह समझने की कोशिश की कि उस समय वह मानसिक रूप से किस स्थिति में था?
इन सवालों के जवाब अभी सार्वजनिक नहीं हैं।
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IIT की सीट सिर्फ एक सीट नहीं होती
भारत में IIT में प्रवेश पाने की दौड़ कितनी कठिन है, यह किसी से छिपा नहीं है।
कई बच्चे स्कूल के वर्षों से इसके लिए तैयारी करते हैं। परिवार अपनी आर्थिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के बावजूद बच्चों को कोचिंग दिलाते हैं। बच्चा अपनी किशोरावस्था का बड़ा हिस्सा किताबों, टेस्ट और प्रतियोगिता के बीच बिताता है।
जब उसे IIT मिलती है तो परिवार के लिए वह गर्व का क्षण होता है।
लेकिन इसी वजह से IIT में पढ़ने वाले विद्यार्थी के लिए किसी परीक्षा में गलती का भावनात्मक प्रभाव सामान्य कॉलेज के विद्यार्थी से अलग हो सकता है।
यह कहना सही नहीं होगा कि हर IIT छात्र ऐसी स्थिति में आत्महत्या के बारे में सोचेगा।
लेकिन यह भी मान लेना उचित नहीं होगा कि एक छात्र को केवल यह कह देना कि “तुम्हारे करियर पर असर नहीं पड़ेगा” उसके डर को पूरी तरह खत्म कर देता है।
किसी छात्र को यह डर हो सकता है कि उसके माता-पिता को क्या पता चलेगा।
उसे यह लग सकता है कि उसने अपने परिवार का विश्वास तोड़ दिया।
उसे शर्मिंदगी महसूस हो सकती है।
उसे लग सकता है कि उसके दोस्तों को क्या लगेगा।
उसे अपने भविष्य को लेकर घबराहट हो सकती है।
और कभी-कभी व्यक्ति के मन में पैदा होने वाला संकट बाहर से दिखाई नहीं देता।
यही वजह है कि इस मामले में यह जानना बेहद महत्वपूर्ण है कि छात्र के साथ हुई बातचीत में सिर्फ अनुशासनात्मक पहलू देखा गया था या उसकी भावनात्मक स्थिति को भी समझने की कोशिश की गई थी।
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“कोई कार्रवाई नहीं हुई” — फिर भी छात्र इतना डर गया?
IIT बॉम्बे ने स्पष्ट किया है कि छात्र के खिलाफ कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी और उसे यह आश्वासन दिया गया था कि घटना उसके अकादमिक करियर को प्रभावित नहीं करेगी। (Moneycontrol)
अगर यह आधिकारिक विवरण पूरा और सही है, तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए कि इसके बावजूद छात्र के मन में क्या चल रहा था।
क्योंकि प्रशासन की ओर से कार्रवाई न होना और छात्र का मानसिक # # रूप से सुरक्षित महसूस करना—दो अलग बातें हैं।