26/09/2026
जयपुर की लक्ष्मण डूंगरी की पहाड़ियों में 300 साल पहले बाबा निर्मल दास जी महाराज ने एक चट्टान पर संजीवनी पर्वत हाथ में लिए हनुमान जी की आकृति बनवाकर पूजा अर्चना की। बाबा जी की मृत्यु के बाद ये जगह गुमनाम सी हो गई। साल 1961 में पंडित राधेलाल चौबे यहाँ आए और उन्होंने इस जगह को खोले के हनुमान जी मंदिर के रूप में विकसित करवाया। बरसात के दिनों में पहाड़ियों की खोह से पानी बहता था इस वजह से मंदिर का नाम खोले के हनुमान जी पड़ा। क्या आपने इस मंदिर को कभी देखा है?