01/10/2017
गोरखपुर. आस्था के रंग तो आपने कई देखे होंगे, लेकिन गोरखपुर के बासगांव के मंदिर में मासूमों, नौजवानों और बूढ़ों के माथे से रिसती खून को देख आप दंग रह जाएंगे. इनकी पलकों, आंखों, माथे और हाथों से बहती रक्तधार आपके रोंगटे खड़े कर देगी. इस मंदिर में बंद हुई पशु बलि के बाद मां के आशीर्वाद के लिए लोग अपना खून बहा रहे हैं.
जी हां, हम बात कर रहे हैं गोरखपुर के बासगांव के दुर्गा मंदिर की. परंपरा के तहत इस मंदिर में बलि दी जाती रही है. लेकिन, कुछ सालों पहले इलाके के लोगों ने पशु बलि पर ऐतराज किया और इंसानों का खून बहाने का रिवाज शुरू हो गया है. आस्था का ऐसा चलन, जो एकबारगी रोंगटे खड़े कर देता है, दिल दहल जाता है. मासूमों और बुजुर्गों के अंगों से रिसते खून को देखकर आपका दिल भले ही दहलता हो, मगर यहां जुटने वाले लोग देवी मां को अपना खून बगैर घबराए अर्पित करते हैं.
बासगांव के इस दुर्गा मंदिर में नवमी के दिन देवी मां का अभिषेक अपने खून से किया जाता है. चाहे वह बच्चा हो, बड़ा हो या फिर कोई बुजुर्ग सभी के अंगों से खून माता को चढ़ाया जाता है. यहां तक इस मंदिर में महज 12 दिन के बच्चे का भी खून चढ़ाने के लिए उसे इस दर्दनाक आस्था से गुजारने में लोग जरा भी नहीं हिचकते. मासूम के नाम पर बस एक मुरव्वत बरती जाती है कि उसके एक अंग से खून मां को अर्पित किया जाता है तो बड़ों को नौ अंगों से रक्त देने की इस तकलीफदेह परंपरा का दर्द बर्दाश्त करना पड़ता है.
चारों ओर मासूमों की चीखें सुनाई देती हैं तो खून से तरबतर लोगों की दिल दहला देने वाला नजारा दिखाई देता है. गोरखपुर के बांसगांव में इस प्राचीन दुर्गा मंदिर में नवरात्रि की नवमी के दिन हजारों लोगों के खून की बलि दी जाती है. हर साल इस दिन यहां लोगों का हुजूम उमड़ता है, इस गांव के हर एक श्रीनेत परिवार के सदस्य के अपने अंगों से खून की बलि मां दुर्गा को अर्पित करने की परंपरा है.
आस्था की इस परंपरा को लेकर लोगों की धारणा है कि इससे मां दुर्गा उनके परिवार पर अपना आशीर्वाद बनाए रखती हैं. अंगों से बह रहे खून को निकालने के बाद ये इसे पीपल के पत्ते से पोंछकर उस पर हवन की भभूत लगाते हैं. उनकी मान्यता है कि इससे कितना ही गहरे से गहरा घाव हो दो दिन में ही सही हो जाता है.
कुछ लोगों के तो शरीर से इतना खून निकलता है कि उनका पूरा शरीर खून से लथपथ नजर हो जाता है. लोगो