14/11/2025
भ्र्ष्टाचार जीत गया!
ईमानदारी ने बेईमानी से लड़ने की हिम्मत तो दिखाई,
परन्तु भूखे पेट कृशकाय ईमानदारी,
रिश्वत के सप्लीमेंट लेकर पहलवान बनी बेईमानी से नहीं जीत पाई!
नंगे पांव चलने वाली ईमानदारी
जूतों में कीले लगाकर गरीब असहाय लोगों को कुचलने वाली बेईमानी से
एक बार फिर हार गई!
रक्तदान से सम्मानित होने वाले,
रक्तचूसने वालों से हार गए।
यह सदियों से होता आया है।
फिर दोहरा दिया गया।
सत्य हकीकत में कड़वा होता ही है।
कड़वाहट को कौन चुनेगा ?
मीठा बनना होगा।
मीठी छुरी भी चलेगी।
यह धर्मराज की सभा नहीं है।
चुनाव है!
यहाँ साम दाम दंड भेद जायज है!
ईमानदारी की कोशिश नाजायज है!
यही प्रमाणित हुआ है!
सादर।
🙏🏻🙏🏻