13/02/2026
“ ाओ” पदयात्रा के दौरान #शिव_विधायक_रविन्द्र_सिंह भाटी का धरनास्थल पर रात्रि विश्राम एक ऐसी रात थी, जो इतिहास में दर्ज भले न हो, लेकिन चेतना में हमेशा ज़िंदा रहेगी। थके हुए कदम, धूल से सने कपड़े और आँखों में जलते संकल्प के साथ पदयात्री जब धरनास्थल पर रुके, तब उनके बीच एक जनप्रतिनिधि का ज़मीन पर बैठ जाना इस संघर्ष को और गहरा अर्थ दे गया। वह रात सिर्फ विश्राम की नहीं थी, वह रात ओरण के पक्ष में लिया गया मौन संकल्प थी। ओरण जो केवल जंगल नहीं, बल्कि लोक आस्था, पशु-पक्षियों का आश्रय और मरुस्थल में जीवन की आख़िरी हरियाली है आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। उस धरती पर लेटे लोग यह साफ़ कह रहे थे कि विकास की कीमत अगर प्रकृति का विनाश है, तो ऐसा विकास स्वीकार नहीं। यह रात्रि विश्राम सत्ता और संघर्ष के बीच खिंची लकीर को मिटाने का प्रयास था, जहाँ #आवाज़_उठी_ओरण_बचेगा, तभी आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित साँस ले सकेंगी।
Hanuman Beniwal Ravindra Singh Bhati