16/05/2026
नई दिल्ली: अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के धर्म संकाय के सहायक प्रोफेसर डॉ. रेहान अख्तर को शनिवार को दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित जामिया इस्लामिया इशाअतुल इस्लाम, कलां मस्जिद में आयोजित कार्यक्रम में ‘युवा विद्वान सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया। ‘विकसित भारत में मदरसों का योगदान’ विषय पर आयोजित छात्र संवाद एवं स्वागत समारोह के दौरान उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य मुनव्वरी बेगम मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहीं।
सम्मान ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में डॉ. रेहान अख्तर ने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और तकनीकी प्रगति से पूरा नहीं होगा, बल्कि इसके लिए नैतिकता, चरित्र, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों से सशक्त समाज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मदरसे केवल धार्मिक शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, सामाजिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण संस्थान हैं।
डॉ. अख्तर ने कहा कि मदरसों ने भारत की शैक्षिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में मदरसों और उनके विद्वानों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थानों ने राष्ट्रीय एकता, भाईचारे और देशप्रेम को मजबूत किया। उनके मुताबिक, मदरसों की भूमिका केवल परंपरागत धार्मिक शिक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने भाषा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि आज कई मदरसे समय की जरूरतों के अनुसार आधुनिक शिक्षा, कंप्यूटर प्रशिक्षण, अंग्रेजी, प्रबंधन और तकनीकी विषयों को अपने पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे हैं। यह बदलाव दर्शाता है कि मदरसे आधुनिक भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए तैयार हैं। डॉ. अख्तर ने कहा कि मदरसा पृष्ठभूमि से आने वाले अनेक छात्रों ने सिविल सेवा, शिक्षा, न्यायपालिका, पत्रकारिता और शोध जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
कार्यक्रम में मदरसों की बदलती भूमिका और विकसित भारत के निर्माण में उनकी संभावित भागीदारी पर विस्तार से चर्चा हुई।