08/09/2026
जम्मू-कश्मीर पंजाबी भाषा अधिकार सभा ने कैबिनेट मंत्री सतीश शर्मा को सौंपा व्यापक ज्ञापन
जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषाएं अधिनियम, 2020 में संशोधन कर पंजाबी को आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग
जम्मू/श्रीनगर, 8 सितंबर 2026:
जम्मू-कश्मीर पंजाबी भाषा अधिकार सभा के बैनर तले सामुदायिक नेताओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज सिविल सचिवालय में माननीय कैबिनेट मंत्री श्री सतीश शर्मा जी से मुलाकात की और उन्हें एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से जम्मू-कश्मीर सरकार से पंजाबी भाषा को आधिकारिक प्रशासनिक भाषा का दर्जा देने की मांग की गई।
जेएंडके पंजाबी भाषा अधिकार सभा के संयोजक संदीप सिंह रिसम के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए जम्मू-कश्मीर के साथ पंजाबी भाषा के ऐतिहासिक संबंध और इसके महत्व को रेखांकित किया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जम्मू और कश्मीर घाटी में बड़ी संख्या में पंजाबी भाषी नागरिक हैं, जिनमें पंजाबी भाषा को लेकर गहरी सांस्कृतिक और प्रशासनिक उपेक्षा की भावना पैदा हुई है।
सभा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषाएं अधिनियम, 2020 में पंजाबी भाषा को शामिल नहीं किया गया, जबकि पूर्व जम्मू-कश्मीर संविधान के तहत पंजाबी को लगभग छह दशकों तक संवैधानिक मान्यता प्राप्त रही थी।
संदीप सिंह रिसम ने क्षेत्र के व्यापक राजनीतिक विमर्श से समानता जोड़ते हुए कहा कि जिस प्रकार जम्मू-कश्मीर का ऐतिहासिक राज्य का दर्जा समाप्त होने से लोगों में गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई, उसी प्रकार पंजाबी की संवैधानिक पहचान और मान्यता को अचानक समाप्त किए जाने से भी स्थानीय पंजाबी भाषी समुदाय को सांस्कृतिक पीड़ा पहुंची है।
सभा ने कहा कि निर्वाचित सरकार के पास इस पीड़ा को दूर करने का एक ऐतिहासिक अवसर है। इसके लिए आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र में ‘जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषाएं (संशोधन) विधेयक’ पेश कर पंजाबी को आधिकारिक प्रशासनिक भाषाओं की सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
माननीय कैबिनेट मंत्री श्री सतीश शर्मा जी ने प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनकी मांगों एवं समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। मंत्री ने प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया कि निर्वाचित सरकार जम्मू-कश्मीर के हर क्षेत्र की समृद्ध भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रतिनिधिमंडल में मनमीत सिंह, गुरदेव सिंह, करण सिंह, परविंदर सिंह, नवजीत सिंह सहित अन्य प्रतिनिधि शामिल रहे।
सभा के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे जम्मू-कश्मीर के सभी जिलों में लोकतांत्रिक तरीके से जनसंपर्क अभियान जारी रखेंगे, विभिन्न राजनीतिक दलों और प्रमुख हितधारकों से मुलाकात करेंगे तथा जम्मू-कश्मीर की विरासत भाषाओं के भाषाई अधिकारों की बहाली के लिए जनसमर्थन जुटाएंगे।