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बेहतर शिक्षक और शिक्षण व्यवस्था राष्ट्रनिर्माण में आवश्यक: डॉ. अंजिला गुप्ता जमशेदपुर, 18 अक्टूबर: जमशेदपुर महिला विश्वव...
18/10/2024

बेहतर शिक्षक और शिक्षण व्यवस्था राष्ट्रनिर्माण में आवश्यक: डॉ. अंजिला गुप्ता

जमशेदपुर, 18 अक्टूबर: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की इग्नू बी.एड प्रोग्राम की कार्यशाला-2 के ग्यारहवें दिन इग्नू की समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा ने प्रार्थना सभा के साथ प्रथम सत्र में चारों सत्र का विषय प्रवेश कराते हुए ' शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में दृश्य कला के स्वरूप' और ' वृत्तिक दक्षता में वृद्धि हेतु पाठ्यक्रम' विषयों पर संक्षेप में प्रकाश डाला।

प्रथम और द्वितीय सत्र के संसाधन व रहे कोल्हन विश्वविद्यालय, चाईबासा के सहायक प्राध्यापक श्री धनंजय कुमार ने ' शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में दृश्य कला के स्वरूप' विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कक्षा कक्ष शिक्षण में दृश्य कला के कई स्वरूपों पर चर्चा की। चित्रकला,रेखाचित्र,मूर्तिकला,मुद्रण,कंप्यूटर ग्राफिक की शिक्षण अधिगम में उपयोगिता और आवश्यकता पर जोर दिया।
कक्षा कक्ष क्रियाकलाप के अंतर्गत शिक्षार्थियों ने कई प्रकार की दृश्य कला स्वरूपों के उपयोग द्वारा सार्थक चित्रण किया।

प्रथम सत्र में जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के रजिस्टर डॉ. राजेंद्र जायसवाल भी कार्यशाला में उपस्थित रहे। डॉ. जायसवाल ने शिक्षार्थियों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए बेहतर शिक्षक बनने हेतु प्रेरित किया।

जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की कुलपति महोदया डॉ. अंजिला गुप्ता ने शिक्षार्थियों से कार्यशाला की संक्षिप्त जानकारी ली और समाज के उद्धार में शिक्षक वर्ग के महत्व को इंगित किया। कुलपति महोदया ने शिक्षार्थियों का मार्गदर्शन करते हुए राष्ट्रनिर्माण में शिक्षकों की भूमिका और महत्व का उल्लेख किया। कुलपति महोदया ने शिक्षार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए शुभकामनाएं और आशीष दिया।

तृतीय और चतुर्थ सत्र की संसाधन सेवी रही करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर के शिक्षा विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. सुचेता भुईयां ने शिक्षार्थियों द्वारा विद्यालय प्रशिक्षण के दौरान निर्मित 'शिक्षा में अभिनय एवं कला में उनके उपयोग' विषय के कार्यों की जांच की और सभी शिक्षार्थियों ने विद्यालयी प्रशिक्षण के अपने-अपने अनुभवों को कार्यशाला में साझा किया।

कार्यशाला को सफल बनाने में नेहा सुरुचि मिंज और उपेंद्र शर्मा समेत सभी संसाधन सेवियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
*राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का सत्रावसान हुआ। कार्यशाला में शिक्षक, छात्राएं, छात्र, संसाधन सेवी उपस्थित रहे।*

अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल कोच हसन इमाम मलिक ने रतन टाटा से मुलाकात का एक किस्सा साझा किया।रतन टाटा ने खिलाडियों को दिलवाया थ...
18/10/2024

अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल कोच हसन इमाम मलिक ने रतन टाटा से मुलाकात का एक किस्सा साझा किया।
रतन टाटा ने खिलाडियों को दिलवाया था सम्मान।

जमशेदपुर: टाटा स्टील खेल विभाग के सहायक मैनेजर व अंतरराष्ट्रीय हैंडबॉल कोच हसन इमाम मलिक ने रतन टाटा से जुड़ी एक दिलचस्प किस्सा साझा किया. उनके बारे उन्होंने कहा कि वह हर कर्मचारी की बात को सुनते थे. उन्होंने बताया कि टाटा स्टील में कई राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों की नियुक्ति खलासी या मजदूर कोटे में होती थी.

1997 तक इन राष्ट्रीय खिलाड़ियों को को खलासी या मजदूर के टैग के साथ रहना पड़ता है. लेकिन 1997 में जब जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में नये कांफ्रेंस हॉल का उद्घाटन हुआ. उस उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि रतन टाटा थे. उन्होंने उद्घाटन से पूर्व शीर्ष अधिकारियों को कहा कि वह टाटा स्टील में कार्यरत राष्ट्रीय खिलाड़ियों से मुलाकात करना चाहते हैं. उन्होंने गर्मजोशी के साथ सभी राष्ट्रीय खिलाड़ियों से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने मेरे कोर्ट में ओलिंपिक से संबंधित एक बैज को देखकर काफी प्रभावित हुए. इसके बाद जेआरडी स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में सभी नेशनल खिलाड़ियों को उनसे रू-ब-रू होने का मौका मिला. जब मेरी बारी आयी तो, मैंने उनसे कहा कि टाटा स्टील राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को हर सुविधा देती है. लेकिन खिलाड़ियों के साथ खलासी या मजदूर का टैग अच्छा नहीं लगता. इस बात को सुनकर तुरंत उन्होंने तत्कालीन एमडी जेजे इरानी से कान में कुछ कहा. उसके एक महीने के बाद एक विभागीय सर्कुलर जारी हुआ. जिसमें यह उल्लेख था कि कोई भी खिलाड़ी केवल स्पोर्ट्स पर्सन रहेगा. वह खलासी या मजदूर नहीं रहेगा. यह खबर टिस्को समाचार में भी प्रकाशित हुआ था. उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा उस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने खेल में भारत के भविष्य को उज्ज्वल बताया था।

शिक्षा में कला के समावेश से शिक्षा पद्धति का बेहतर विकास संभव: श्री धनंजय कुमारजमशेदपुर, 17 अक्टूबर: जमशेदपुर महिला विश्...
17/10/2024

शिक्षा में कला के समावेश से शिक्षा पद्धति का बेहतर विकास संभव: श्री धनंजय कुमार

जमशेदपुर, 17 अक्टूबर: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की इग्नू बी.एड प्रोग्राम की कार्यशाला-2 के दसवें दिन इग्नू की समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा ने प्रार्थना सभा के साथ प्रथम सत्र में चारों सत्र का विषय प्रवेश कराते हुए 'स्व की समझ' और 'अभिनय द्वारा पर्यावरणीय मुद्दों की समझ' जैसे विषयों पर संक्षेप में प्रकाश डाला।

प्रथम और द्वितीय सत्र की संसाधन सेवी रहीं जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. अरुणिमा कुमारी ने शिक्षार्थियों से पी.पी.टी के माध्यम से स्व की समझ विषय पर शिक्षार्थियों संग चर्चा की। डॉ. अरुणिमा ने वास्तविक जीवन के उदाहरणों द्वारा स्व की समझ विकसित करने पर जोर दिया। स्वयं को समझाना और व्यक्तित्व के विकास पर सामाजिक प्रभावों के बारे में द्विमुखी संवाद किया।
कक्षा कक्ष क्रियाकलाप के अंतर्गत शिक्षार्थियों ने अपने जीवन में पढ़ने वाले सकारात्मक प्रभाव के स्त्रोत पर प्रतिवेदन बनाए और प्रस्तुतियां दी।

दैनिक भास्कर के संपादक श्री कुमार भवानंद जी के विशेष आमंत्रण पर समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा के नेतृत्व में 12 शिक्षार्थियों के एक समूह ने दैनिक भास्कर समाचार पत्र के कार्यालय का शैक्षिक दौरा किया। जहां शिक्षार्थियों ने श्री भवानंद जी से शिष्टाचार भेंट की और टॉक शो में शिक्षा, राजनीति, स्वास्थ्य और कई सामाजिक मुद्दों पर गहन चर्चा की। उन्होंने समाचार प्रिंटिंग की पूर्ण प्रक्रिया से शिक्षार्थियों को अवगत भी कराया। आगामी विधानसभा चुनावों पर शिक्षार्थियों ने अपने विचार भी संपादक संग साझा किए।

तृतीय और चतुर्थ सत्र के संसाधन व रहे कोल्हन विश्वविद्यालय, चाईबासा के सहायक प्राध्यापक श्री धनंजय कुमार ने 'अभिनय द्वारा पर्यावरणीय मुद्दों की समझ' विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने दृश्य कला और प्रदर्शन कला द्वारा पर्यावरणीय मुद्दों को सरलता से समझाने की आवश्यकता को ज़रूरी बताया। पर्यावरणीय मुद्दों के विषय में चेतना निर्माण हेतु अभिनय विधि की प्रासंगिकता पर बल दिया। कहानी विधि, चित्रकला, अभिनय कला पर भी शिक्षार्थियों को लाभान्वित किया।

कार्यशाला को सफल बनाने में श्रीमती नेहा सुरुचि मिंज और श्री उपेंद्र शर्मा समेत सभी संसाधन सेवियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
*राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का सत्रावसान हुआ। कार्यशाला में शिक्षक, छात्राएं, छात्र, संसाधन सेवी उपस्थित रहे।*

वर्तमान में तनावमुक्त शिक्षण पद्धति का महत्व व आवश्यकता अधिक: डॉ. त्रिपुरा झाजमशेदपुर, 16 अक्टूबर: जमशेदपुर महिला विश्वव...
16/10/2024

वर्तमान में तनावमुक्त शिक्षण पद्धति का महत्व व आवश्यकता अधिक: डॉ. त्रिपुरा झा

जमशेदपुर, 16 अक्टूबर: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की इग्नू बी.एड प्रोग्राम की कार्यशाला-2 के नवें दिन इग्नू की समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा ने प्रार्थना सभा के साथ प्रथम सत्र में चारों सत्र का विषय प्रवेश कराते हुए 'सहयोगपूर्ण शिक्षण' और 'तनावमुक्त शिक्षण' जैसे विषयों पर संक्षेप में प्रकाश डाला।

प्रथम और द्वितीय सत्र की संसाधनसेवी रहीं कोल्हान विश्वविद्यालय की एम.एड की विभागाध्यक्ष डॉ. सुचित्रा बेहरा ने 'तनाव मुक्ति की तकनीकियां सीखना' विषय पर गंभीर चर्चा करते हुए शिक्षा से तनाव को अलग करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने अधिगम में तनाव के कारणों पर चर्चा करते हुए विद्यार्थियों को तनाव के समय सही मार्गदर्शन देने पर चर्चा की और तनाव मुक्ति की तकनीकें भी सिखाई। तनाव से निपटने के लिए योग, संगीत, कला को कारगर बताया।
सामूहिक क्रियाकलाप के अंतर्गत मिश्रित विषय के शिक्षार्थियों ने तनाव मुक्ति की तकनीक पर प्रतिवेदन का निर्माण किया और प्रस्तुति दी।

*द्वितीय सत्र में जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की समन्वयक डॉ. कामिनी भी कार्यशाला भी उपस्थित रही। डॉ. कामिनी ने समाज और राष्ट्र में शिक्षकों के सहयोग पर अपने विचार रहे और सभी शिक्षार्थियों को राष्ट्र निर्माण में सहयोग करने हेतु शुभकामनाएं दी।*

तृतीय और चतुर्थ सत्र के संसाधन सेवी रहे जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजय भुइयां ने 'सहयोगपूर्ण अधिगम विधियां' विषय पर शिक्षार्थियों संग चर्चा करते हुए कक्षाकक्ष अभ्यास में सहयोगपूर्ण अधिगम विधियों का उपयोग करने पर ज़ोर दिया। डॉ. भुईयां से बताया कि सहयोगपूर्ण विधि द्वारा अधिगम को सरल व सुचारू बनाया जा सकता है। उन्होंने सहयोगपूर्ण अधिगम विधियों के प्रकारों और कक्षा शिक्षण में इसके महत्व पर भी शिक्षार्थियों संग चर्चा की।
चतुर्थ सत्र की समाप्ति से पूर्व शिक्षार्थियों ने सामूहिक क्रियाकलाप के अंतर्गत कक्षा कक्ष शिक्षण में सहयोगपूर्ण विधि के उपयोग पर प्रतिवेदन बनाएं। सभी प्रतिवेदनों पर संसाधन सेवी ने मार्गदर्शन किया और सकारात्मक सुझाव दिए।

कार्यशाला को सफल बनाने में नेहा सुरुचि मिंज और उपेंद्र शर्मा समेत सभी संसाधन सेवियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
*राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का सत्रावसान हुआ। कार्यशाला में शिक्षक, छात्राएं, छात्र, संसाधन सेवी उपस्थित रहे।*

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