Know About Indian History

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 .15                #प्राचीन_इतिहासइसमें वैदिक काल से लेकर राजपूत काल तक का अध्ययन किया जाता है। #वैदिक_काल(1500BC - 600...
07/01/2023

.15

#प्राचीन_इतिहास
इसमें वैदिक काल से लेकर राजपूत काल तक का अध्ययन किया जाता है।
#वैदिक_काल(1500BC - 600BC)
•ऋग्वैदिक काल (1500BC - 1000BC)
•उत्तर वैदिक काल (1000BC - 600BC)
#वैदिक_समाज_के_निर्माता_आर्य_थे।
आर्य मध्य एशिया से आए थे। आर्यों की भाषा संस्कृत थी जो देवताओं की भाषा थी, जिस कारण आर्य स्वयं को श्रेष्ठ कहते थे। जिन्हे संस्कृत नहीं आती थी, उन्हे निम्न कहा जाता था।
#दक्षिण_भारत_का_आर्यीकरण_अगस्त_ऋषि_ने_किया।
#उत्तर_भारत_का_आर्यीकरण_राजा_विदेह_के_पुरोहित_गौतम_राहुगढ़_ने_किया।
इस समय सबसे प्रिय पशु गाय थी। जो समृद्धि का संकेत थी। गाय की हत्या करने पर मृत्युदंड दिया जाता था।
्थव्यवस्था_का_मुख्य_आधार_कृषि_था। #वैदिक_समाज_ग्रामीण_सभ्यता_थी।
#उत्तर_वैदिक_काल_में_ही_लोहे_की_खोज_हुई_थी।

 .14   #उपनिषद:- इसका अर्थ होता है, गुरू के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना।उपनिषद् 108 हैं, किंतु 13 उपनिषद् को ही मान्यत...
04/01/2023

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#उपनिषद:- इसका अर्थ होता है, गुरू के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना।
उपनिषद् 108 हैं, किंतु 13 उपनिषद् को ही मान्यता प्राप्त है।
#वृहद_नारायण_उपनिषद्:- यह सबसे बड़ा तथा प्राचीन उपनिषद् है।
#कठोपनिषद:- इसमें यम तथा नचिकेता की चर्चा है। इसमें "ऊं" शब्द के महत्व को दर्शाया गया है।
#मुण्डकोपनिषद:- इसमें #सत्यमेव_जयते की चर्चा है।
#अलोपनिषद:- यह सबसे बाद का उपनिषद् है। इसकी रचना अकबर के समय में हुई थी।
#स्मृति_साहित्य:- इसमें प्राचीन राजवंशों की जानकारी मिलती है। स्मृति साहित्य की संख्या 36 है।
#मनु_स्मृति तथा #यागवल्य_स्मृति से मौर्य काल की जानकारी मिलती है।
#याज्ञवल्य_स्मृति में जुआ खेलने को सही बताया गया है।
#मनु_स्मृति को धर्म शास्त्र कहते हैं। इसमें ऊंची जाति को वरीयता दी गई है। दलित तथा महिला को नीच दिखाया गया है।
#इसमें_8_प्रकार_के_विवाह_की_चर्चा_है।
#संस्कार_की_संख्या_16_होती_है।
ीन_प्रकार_के_होते_हैं___
(i) #देवऋण
(ii) #ऋषिऋण
(iii) #पितृऋण
#आश्रम_की_संख्या_4_है___
जन्म से 5 वर्ष की अवस्था को #बाल्यावस्था या #शिशुवस्था कहते हैं।
(i) #ब्रह्मचर्य- 5y -25y (गुरुकुल में शिक्षा)
(ii) #गृहस्थ_जीवन- 25y-50y (परिवार के साथ)
(iii) #वानप्रस्थ- 50y-75y (सामाजिक तथा धार्मिक जीवन)
(iv) #सन्यासी_जीवन- 75y (वन में तपस्या )

 .-13  अब हम जानते हैं..उपनिषद, पुराण, इत्यादि के बारे में। #आरण्यक :- वैसी पुस्तक जिसको रचना जंगल में की गई है।  #अथर्व...
27/12/2022

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अब हम जानते हैं..उपनिषद, पुराण, इत्यादि के बारे में।
#आरण्यक :- वैसी पुस्तक जिसको रचना जंगल में की गई है। #अथर्ववेद को छोड़कर सभी पुस्तक आरण्यक हैं।
#वेदांग:- वेदों को भली-भांति समझने के लिए वेदंग की रचना की गई।
#वेदांग_की_संख्या_6_है--
(1) #व्याकरण= अष्टाध्यायी (पाणिनी)
(2) #ज्योतिष= वृहत संहिता (वाराहमिहीर)
(3) #निरूक्त= निरूक्त शास्त्र
(4) #शिक्षा= शिक्षा शास्त्र
(5) #कल्प= कल्प शास्त्र (गौतम ऋषि)
(6) #छंद= छंद शास्त्र
#पुराण:- इसकी रचना #लौमहर्ष_ऋषि तथा #उग्रश्रवा ने किया है। इसकी संख्या 18 है।
#इसे_पांचवा_वेद_या_वेदों_का_वेद_कहते_हैं। इससे प्राचीन राजवंशों की जानकारी मिलती है।
#विष्णु_पुराण:- इससे मौर्य वंश की जानकारी मिलती है।
#मत्स्य_पुराण:- इससे सातवाहन वंश की जानकारी मिलती है। इसमें विष्णु भगवान के 10 अवतारों की चर्चा मिलती है।
#वायु_पुराण:- इसमें गुप्त वंश की जानकारी मिलती है।इसमें लिखा है की समुद्रगुप्त का घोड़ा तीन समुद्र का पानी पीता था।
आगे उपनिषद् के बारे में जानेंगे।!!

 .-12  अब बाकी के दो वेदों के बारे में जानते हैं...(3) #सामवेद:-इसमें 1875 मंत्र हैं, किंतु वास्तव में 99 मंत्र ही सामवे...
25/12/2022

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अब बाकी के दो वेदों के बारे में जानते हैं...
(3) #सामवेद:-
इसमें 1875 मंत्र हैं, किंतु वास्तव में 99 मंत्र ही सामवेद के हैं। बाकी मंत्रो को ऋग्वेद से ग्रहण कर लिया है।
सामवेद में भारतीय संगीत के सात स्वर सा, रे, ग, म, प, ध, नी, की चर्चा है। ये संगीत यज्ञ के समय गए जाते हैं।
#सामवेद_के_ज्ञानी_को_उदगाथा_कहते_हैं। #सामवेद_का_उपवेद_गंधर्ववेद_है तथा #इसके_ज्ञानी_को_नारद_कहते_हैं।
(4) #अथर्ववेद:-
इसकी रचना सबसे बाद में उत्तर वैदिक काल में हुई है, इसमें 6000 मंत्र हैं।
इसमें जादू-टोना, वसीकरण, इत्यादि की चर्चा है।
#अथर्ववेद_के_ज्ञानी_को_ब्रह्मा_कहते_हैं।
#अथर्ववेद_का_उपवेद_शिल्पवेद_है तथा #इसके_ज्ञानी_को_विश्वकर्मा_कहते_हैं।
वेदों के नामों को याद रखने से ज्यादा जरूरी इनके कर्म को याद रखना जरूरी है।
(1) #ऋग्वेद
(2) #यजुर्वेद
(3) #सामवेद
(4) #अथर्ववेद
आगे की जानकारी में।

 .11  अब हम जानते हैं वेदों के बारे में...वेदों को रचना ईश्वर ने की है। अतः वेद को अपौरूषेय कहा जाता है।गुप्त काल में  #...
24/12/2022

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अब हम जानते हैं वेदों के बारे में...
वेदों को रचना ईश्वर ने की है। अतः वेद को अपौरूषेय कहा जाता है।गुप्त काल में #कृष्ण_द्वैपायन_वेदव्यास ने वेदों को संकलन किए थे।
प्रारंभ में वेदों को संख्या3 थी, अथर्ववेद को बाद में शामिल किया गया है।
सबसे पहले जानते हैं #ऋग्वेद के बारे में...
(1) #ऋग्वेद-
यह सबसे #प्राचीन तथा सबसे #बड़ा वेद है। इसमें 10 मंडल, 1028 सूक्त, तथा 10580 ऋचाएं हैं। #तीसरे_मंडल में #गायत्री_मंत्र का उल्लेख है।
#9वें मंडल में #सोम_देवता की चर्चा है। इसमें #सबसे_बाद_का_मंडल #10वां_मंडल हैं।
#ऋग्वेद_के_ज्ञानी_को_होतृ_कहते_हैं। #इसका_उपवेद_आयुर्वेद_है, तथा #इसके_ज्ञानी_को_प्रजापति_कहते_हैं।
(2) #यजुर्वेद-
#इसके_ज्ञानी_को_अधर्व्य_कहते_हैं।
इसमें #युद्ध तथा #यज्ञों_के_नियमों का चर्चा है। #यजुर्वेद_गद्य_तथा_पद्य_वाला_वेद_है
इसका #उपवेद_धनुर्वेद है, तथा इसके #ज्ञानी_को_विश्वामित्र कहते हैं।
आगे के 2 वेदों के बारे में में जानते हैं।

 .-10  अब हम जानते है साहित्यिक स्रोत के बारे में..... #लिखित_स्रोत_को_ही_साहित्यिक_स्रोत_कहते_हैं।प्राचीन इतिहास की जान...
22/12/2022

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अब हम जानते है साहित्यिक स्रोत के बारे में.....
#लिखित_स्रोत_को_ही_साहित्यिक_स्रोत_कहते_हैं।प्राचीन इतिहास की जानकारी का यह सबसे बड़ा स्रोत है।
#इसे भी #दो भागों में बांटा गया है---
(1) गैर धार्मिक स्रोत और (2) धार्मिक स्रोत
#गैर_धार्मिक_स्रोत ;-
इसका संबंध किसी भी धर्म से नहीं रहता है। उदाहरण ;- अर्थशास्त्र
#धार्मिक_स्रोत ;-
इसका संबंध किसी-न-किसी धर्म से रहता है। इसको भी दो भागों में बांटा गया है (1) गैर ब्राह्मण और (2) ब्राह्मण
#गैर_ब्राह्मण ;- वैसा स्रोत जिसका संबंध हिंदु धर्म से न हो। जैसे:-
#जैन_साहित्य -- यह प्राकृत भाषा में मिले हैं, इन्हे आगम कहते हैं।
उदाहरण:- 12अंग, 12 उपांग, भगवती सूत्र, मूल सूत्र, आदि।
#बौद्ध_साहित्य -- बौद्ध साहित्य पाली भाषा में मिले हैं।
#जातक_ग्रंथ में महात्मा बुद्ध के पूर्व जन्म की 200 कहानियां हैं।
#ललित_विस्तार में महात्मा बुद्ध की पूरी जीवनी है।
#अंगुत्तर_निकाय में 16 महाजनद की चर्चा है। बौद्ध धर्म की सबसे पवित्र पुस्तक #त्रिपिटक है, जो 3 पुस्तकों का समूह है।
(1) #सूत_पिटक:- यह सबसे बड़ा पिटक है। इसे बौद्ध धर्म का एंसाइक्लोपिडया कहते हैं।
(2) #विनय_पिट:- यह सबसे छोटा पिटक है। इसमें बौद्ध धर्म के प्रवेश की चर्चा है।
(3) #अधिम्म_पिटक :- इसमें महात्मा बुद्ध के दार्शनिक विचारों की चर्चा है।
आगे की जानकारी में।

 .-9  आज हम जानेंगे  #अभिलेख और  #विदेशी_यात्री के बारे में.. #अभिलेख (Edict)अभिलेखों का अध्ययन  #एपिग्राफी कहलाता है। #...
19/12/2022

.-9

आज हम जानेंगे #अभिलेख और #विदेशी_यात्री के बारे में..
#अभिलेख (Edict)
अभिलेखों का अध्ययन #एपिग्राफी कहलाता है।
#पत्थरों को खोद कर लिखना #अभिलेख कहलाता है।
#छोटे_पत्थरों पर लिखना #शिलालेख कहलाता है।
#स्तंभ के समान #ऊंचे_पत्थरों पर लिखना #स्तंभ_लेख कहलाता है।
आज हम कई चीजों के बारे में अगर जान रहे हैं तो इसका एक कारण अभिलेख भी है। ऐसे कई अभिलेख लिखे गए है जिन्हे पढ़ कर इतिहास के बारे में बहुत कुछ पता चला है।
अब विदेशी यात्री के बारे में जानते हैं की भारत में कौन-कौन से विदेशी यात्री आए थे।
#विदेशी_यात्री_द्वारा_भारत_का_वर्णन....
#फाहियान (399 ई.) :::
इसके पुस्तक का नाम "फौ-कूओ-थी"। यह चंद्रगुप्त-II (विक्रमादित्य) के दरबार में आया था। यह उस समय के भवन तथा कौड़ी की चर्चा की है।
#शुंग_चुन (512 ई.):
यह चीन से आया था, यह भारत से ही किताबें लेकर गया था।
#ह्वेंसांग (629ई.)
इसके किताब का नाम "सी-यू-की" था। यह #हर्षवर्धन के दरबार में आया था।
#इत्सिंग(673 ई.) :
यह चीनी यात्री था। यह त्रिपिटक की 400 प्रतियां (Photocopy) अपने साथ लेकर गया था।
#इब्नबतूता - इसकी पुस्तक #रेहला थी। यह मोरक्को का रहने वाला था। यह 7000 Km. की यात्रा करके मुहम्मद-बिन-तुगलक के दरबार में आया था।
#अब्दुल_रज्जाक - इसकी पुस्तक "मतला-ए-साहेन" है। यह विजयनगर के #कृष्णदेव_राय के दरबार में आया था।
आगे की जानकारी Next Post में।

 .-8  अब हम जानते हैं पुरातात्विक स्रोत के सिक्कों के बारे में। #सिक्का (Coins) #सिक्के_का_अध्ययन_न्यूमेसमेटिक्स_कहलाता_...
18/12/2022

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अब हम जानते हैं पुरातात्विक स्रोत के सिक्कों के बारे में।
#सिक्का (Coins)
#सिक्के_का_अध्ययन_न्यूमेसमेटिक्स_कहलाता_है।
(1) #टेराकोटा का सिक्का मिट्टी का बना था। यह #सिंधु_सभ्यता में बना था।
(2) #मौर्य_काल में #आहत या #पंचमार्क सिक्के का प्रयोग हुआ था।
(3) #पर्ण_चांदी के सिक्के थे, जो #मौर्य_काल में प्रचलित थे।
(4) #सीसा का सिक्का #सातवाहन काल में प्रचलित थे।
(5) पहली बार #सोने का सिक्का #यूनानी शासकों द्वारा प्रचलित किया गया।
(6) #सर्वाधिक_मात्रा में तथा #सबसे_अधिक #अशुद्ध_सोने का सिक्का #गुप्त_काल में प्रयोग हुआ।
(7) #कौड़ी का प्रयोग #गुप्त_काल में ही हुआ था और #मयूर_शैली का सिक्का भी गुप्त काल में #समुद्र_गुप्त के समय में लाया गया था।
(8) #रूपये का प्रयोग #शेरशाह_शूरी ने किया।
(9) #दाम का प्रारंभ #शेरशाह_शूरी ने ही किया था।
(10) #सोने_की_अशर्फी का प्रारंभ भी #शेरशाह_शूरी ने ही किया।
(11) #शुद्ध_सोने का सिक्का #कुषाण शासकों के काल में।
(12) #चमड़े का सिक्का #हुमायूं के शासन काल में #सियाबुद्दीन ने चलाया था।
आगे जानेंगे #अभिलेख के बारे में।

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