24/03/2026
"सोने की चिड़िया" में सोना ही आम आदमी की पहुँच से बाहर? शीर्षक: "सोने की चिड़िया" में सोना ही आम आदमी की पहुँच से बाहर?
"आजाद भारत के इतिहास में आज हम सबसे बदतर आर्थिक दौर देख रहे हैं। जिस देश को कभी 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था, आज वहां सोना और चांदी आम जनता के लिए सिर्फ एक सपना बन कर रह गए हैं।
मेरे सीधे सवाल:
1. रुपया बनाम डॉलर: जब $1 = ₹93 हो चुका है, तो क्या सरकार के पास इस गिरती साख को बचाने का कोई 'रोडमैप' है या सिर्फ चुप्पी?
2. महंगाई की मार: सोना-चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री जी को देश की इस स्थिति का आभास भी है?
3. अर्थव्यवस्था का हाल: दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर सिर्फ जनता की जेब काटी जा रही है।
इतिहास में आज के दौर को आर्थिक विफलता के रूप में याद किया जाएगा। बिना किसी विजन और ठोस नीति के देश को इस मोड़ पर खड़ा कर देना नेतृत्व की सबसे बड़ी नाकामी है। जनता अब जवाब चाहती है, खोखले वादे नहीं!
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"आजाद भारत के इतिहास में आज हम सबसे बदतर आर्थिक दौर देख रहे हैं। जिस देश को कभी 'सोने की चिड़िया' कहा जाता था, आज वहां सोना और चांदी आम जनता के लिए सिर्फ एक सपना बन कर रह गए हैं।
मेरे सीधे सवाल:
1. रुपया बनाम डॉलर: जब $1 = ₹93 हो चुका है, तो क्या सरकार के पास इस गिरती साख को बचाने का कोई 'रोडमैप' है या सिर्फ चुप्पी?
2. महंगाई की मार: सोना-चांदी के दाम आसमान छू रहे हैं। क्या प्रधानमंत्री जी को देश की इस स्थिति का आभास भी है?
3. अर्थव्यवस्था का हाल: दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। अर्थव्यवस्था सुधारने के नाम पर सिर्फ जनता की जेब काटी जा रही है।
इतिहास में आज के दौर को आर्थिक विफलता के रूप में याद किया जाएगा। बिना किसी विजन और ठोस नीति के देश को इस मोड़ पर खड़ा कर देना नेतृत्व की सबसे बड़ी नाकामी है। जनता अब जवाब चाहती है, खोखले वादे नहीं!
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