31/10/2025
मायावती बोलीं- नसीमुद्दीन बनना चाहते थे शमशुद्दीन, क्षत्रपों को दी नसीहत
बसपा मुखिया ने पार्टी से बाहर करने के बाद शमशुद्दीन पर किया सार्वजनिक हमला
झाँसी : दलित, मुस्लिम और ओबीसी को
जोड़कर नई सोशल एंजिनियरिंग कर रही बहुजन समाज पार्टी ने पार्टी के उन क्षत्रपों को भी नसीहत दी है, जिन्होंने बसपा के नाम पर अपना सियासी प्रभाव बना लिया। हाल ही में मुस्लिम भाईचारा कमिटि की बैठक में मायावती ने एक साथ कई निशाने साधे।
उन्होंने मुस्लिम समाज को जोडने का मन्त्र दिया तो झाँसी के कद्दावर नेता शमशुद्दीन का नाम लेकर क्षत्रपों पर तीखा प्रहार किया।
मायावती ने कहा कि शमशुद्दीन विरोधी पार्टियों के घिनौने हथकण्डों में फँसकर नसीमुद्दीन की राह पर चल पड़े थे।
बसपा में क्षत्रपों का हर कार्यकाल में प्रभाव रहा है। हालाँकि बसपा मुखिया ने अपने कैडर को साथ रखने के लिए पार्टी व सरकार में बनने वाले क्षत्रपों को बाहर का रास्ता दिखाने में देरी नहीं की। ताजा मामला शमशुद्दीन राइन का है। चर्चा है कि उन्होंने अपने काम की दम पर पश्चिम उत्तर प्रदेश में संगठन को अपनी जेब में रख लिया था। काफी शिकायतें हुई, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। झाँसी के शमशुद्दीन राइन अब बाँदा के नसीमुद्दीन सिद्दीकी की तरह बसपा से बाहर कर दिए गए हैं। बसपा मुखिया के निर्देश पर बसपा संगठन में पश्चिम उत्तर प्रदेश में खासी पकड़ रखने वाले प्रभारी शमशुद्दीन राईन की संगठन में पुरानी फाइल खोली जा रही हैं। अभी तक आयर्थी शिकायतों को अब सार्वजनिक किया जा रहा है। इसकी शुरूआत स्वयं बसपा मुखिया व पूर्व मुख्यमन्त्री मायावती ने बीते दिनों हुई मुस्लिम भाइचारा की प्रदेश स्तरीय बैठक में
की है। दरअसल, झाँसी से मुस्लिम भाइचारा के जिला समन्वयक के तौर पर कार्य करने वाले शमशुद्दीन राइन ने मुस्लिम समाज को ही अपना आधार बना लिया। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा को पश्चिम नतीजा, शमशुद्दीन राइन का प्रभाव लगातार बढ़ता गया। पश्चिम उत्तर प्रदेश के साथ चुनाव के समय शमशुद्दीन राइन को बुन्देलखण्ड व कानपुर क्षेत्र में भी लाया गया। बसपा ने मुस्लिम समाज को जोड़ने के लिए उनके प्रभाव का
शमसुद्दीन राहन उत्तर प्रदेश में काफी सफलता मिली।
पश्चिम उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज मॅबनाया था खासा प्रभाव, बसपा में बन गए थे बड़े सिपहसालार
उपयोग किया। जानकार बताते हैं कि धीरे-धीरे शमशुद्दीन राइन ने बसपा के अन्दर अपना गुट बनाना शुरू कर दिया और कौग्रेस व सपा की तरह वह क्षत्रप बनकर उभरने लगे। उनके खिलाफ रुपए देकर टिकट बॉटने का आरोप लगा और स्टिंग ऑपरेशन भी हुआ, लेकिन वह नेतृत्व के विश्वासपात्र बने रहे। प्रभाव बढ़ने के बाद वह संगठन के लिए संग्रह राशि में भी गड़बड़ी करने लगे। इसकी शिकायते हुईं, लेकिन सुनी नहीं गयी। पिछले दिनों कुछ शिकायतों के साथ साक्ष्य भी बसपा मुखिया को उपलब्ध कराए गए और इसके बाद उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। बसपा मुखिया ने प्रदेश से सभी मण्डलो की भाईचारा कमिटि की बैठक में कहा कि पार्टी में सपा-काँग्रेस जैसी विरोधी पार्टियों के घिनौने हथकण्डों के साथ पार्टी में कुछ स्वार्थी व अवसरवादी लोगों की चुनौती का सामना करना पड़ता है और उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही भी करनी पड़ती है। शमशुद्दीन राईन पार्टी को नुकसान पहुँचाते हुए दूसरे नसीमुद्दीन सिद्दीकी बनना चाह रहे थे।
मुस्लिम समाज को बताया जाएगा बसपा सरकार में उनका रुतबा, अफसरों की बनाई सूची
आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बसपा अपनी ताकत बढ़ाने को मुस्लिमों के बीच पकड़ बनाने की कोशिश तेज कर दी है। समाज में यह सन्देश दिया जाएगा कि भाजपा को केवल बसपा ही हरा सकती है। बसपा मुखिया ने साफ कर दिया है कि बीते विधानसभा चुनाव में मुस्लिम समाज ने सपा व काँग्रेस का समर्थन किया था, लेकिन भाजपा सरकार को नहीं रोका जा सका। यदि मुस्लिम समाज सीधे बसपा को समर्थन करे, तो फिर भाजपा सरकार को चुनाव में हराया जा सकता है। अब यह सन्देश शहर-शहर व गाँव-गाँव पहुँचाया जाएगा। इसके लिए अब हर विधानसभा क्षेत्र में दो संयोजक, जिसमे एक मुस्लिम व एक दलित वर्ग से बनाया जाएगा। साथ ही प्रत्येक क्षेत्र में 100-100 मुस्लिम समाज से सदस्य बनाए जाएंगे, जिन्हें पार्टी की सदस्यता दिलायी जाएगी।