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भाइयों और बहनों, मौसम विभाग की भविष्यवाणी गलत हो सकती है, लेकिन चुनावी मौसम में नेताओं के 'रंग' बदलने की भविष्यवाणी कभी ...
10/05/2026

भाइयों और बहनों, मौसम विभाग की भविष्यवाणी गलत हो सकती है, लेकिन चुनावी मौसम में नेताओं के 'रंग' बदलने की भविष्यवाणी कभी फेल नहीं होती!
आजकल की राजनीति देखकर ऐसा लगता है जैसे कोई जादुई खेल चल रहा हो:
वॉशिंग मशीन राजनीति: कल तक जिस पर 'स्कैम' (Scam) का ठप्पा था, आज वो 'नेता वॉशिंग सेंटर' से धुलकर एकदम 'क्लीन' (Clean) होकर बाहर निकल रहा है।
विकाश कहाँ है?: पोस्टर पर तो 'विकास' चमक रहा है, लेकिन गलियों में आज भी जनता हाथ में बोर्ड लिए पूछ रही है— "विकास कहाँ है? जल्दी बताओ!"
मेरी वोट, उनकी कुर्सी: हम धूप में लाइन में लगकर अपनी उंगली पर स्याही लगवाते हैं ताकि उन्हें 'पावर' (Power) वाली कुर्सी मिल सके।
राजनीति का नया मायाजाल:
पार्टी चाहे कोई भी हो, झंडे चाहे किसी भी रंग के हों, बस कुर्सी का मोह नहीं छूटना चाहिए। सुबह जो विपक्ष में था, शाम होते-होते सत्ता की वॉशिंग मशीन में 'भ्रष्टाचार मुक्ति यंत्र' के जरिए शुद्ध हो जाता है।
जनता सिर्फ टैक्स भरती रह जाती है और नेता जी कुर्सी का आनंद लेते हैं।
आपका क्या कहना है? क्या आपने भी 'विकास' को कहीं देखा है या वो भी किसी वॉशिंग मशीन में धुल गया? 😂👇

इनका सबसे पहला और पसंदीदा सवाल होता है— "बेटा, आजकल क्या कर रहे हो?" भाई साहब, अगर मैं बता भी दूँ कि मैं 'सॉफ्टवेयर इंजी...
08/05/2026

इनका सबसे पहला और पसंदीदा सवाल होता है— "बेटा, आजकल क्या कर रहे हो?" भाई साहब, अगर मैं बता भी दूँ कि मैं 'सॉफ्टवेयर इंजीनियर' हूँ, तो इनका अगला रिएक्शन ऐसा होगा जैसे मैंने बोला हो कि मैं मंगल ग्रह पर समोसे बेचता हूँ।
​"अच्छा... कंप्यूटर चलाते हो? वो तो पड़ोस का चिंटू भी चलाता है दिन भर गेम खेलता है।"
​जी नहीं आंटी, चिंटू गेम खेलता है और मैं पूरी कंपनी का सर्वर संभालता हूँ। दोनों में उतना ही फर्क है जितना 'पुदीने की चटनी' और 'हरा पेंट' में होता है!

01/05/2026

*दोपहर शाम की देश राज्यों से बड़ी खबरें*

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*1* कमर्शियल LPG सिलिंडर के साथ 5 किलो वाला 'छोटू' भी हुआ महंगा, 261 रुपये बढ़ी कीमत

*2* सिलिंडर के दाम बढ़ने पर कांग्रेस आक्रामक: PM मोदी का नाम लेकर कहा- फिर चला महंगाई का चाबुक; आंकड़े भी साझा किए

*3* होटल-रेस्तरां में खाना हुआ महंगा, सब्सिडी वाली रसोई गैस की कालाबाजारी रोकने के लिए केंद्र सख्त; राज्यों को दिए निर्देश

*4* वैश्विक बाजार में कीमतें बढ़ने, घरेलू स्तर पर रुपए की कमजोरी और इंपोर्ट की लागत बढ़ने की वजह से खाने का तेल महंगा होने की आशंका जताई जा रही है. पश्चिम एशिया संकट की वजह से खाद्य तेल कंपनियों के लिए इंपोर्ट महंगा हो गया है, ऊपर से कमजोर रुपए ने उनके मार्जिन घटा दिए हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में उनकी तरफ से दाम में बढ़ोतरी हो सकती हैं.

*5* सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को अग्रिम जमानत, असम CM की पत्नी पर लगाए आरोपों का मामला

*6* अटारी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी का समय बदला, अब शाम 6 से 6:30 बजे तक होगी, आज से नई टाइमिंग लागू; हजारों लोग पहुंचते हैं

*7* एम्स जोधपुर की बड़ी कामयाबी: बिना ओपन सर्जरी के हटाया गया 10×10 सेमी का ट्यूमर, ESD तकनीक से हुआ चमत्कार

*8* 'लद्दाख बौद्ध संस्कृति और करुणा की जीवित प्रयोगशाला...', लेह में बुद्ध पूर्णिमा पर बोले अमित शाह

*9* राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, इंडियन स्टेट वाले बयान के लिए FIR की मांग वाली याचिका खारिज

*10* MP के जबलपुर में क्रूज डूबा, 9 शव मिले, लाइफ जैकेट में 4 साल के बेटे को छाती से चिपकाए मिली मां; पीएम ने दुख जताया

*11* पंजाब विधानसभा में हंगामा: सीएम पर शराब पीकर सदन में आने का आरोप, कांग्रेस विधायकों ने किया वाॅकआउट

*12* लखनऊ में रियल एस्टेट कारोबारी 11वीं मंजिल से कूदे, IPL सट्टे में लाखों हारे; मरने से पहले पत्नी से कॉल पर रोए

*13* जल संकट गहराया : देश के आधे से ज्यादा जलाशयों में पानी 40% से नीचे, बंगाल में हालात बेहद गंभीर

*14* भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 मार्च से 29 अप्रैल के बीच देश के एक-तिहाई से अधिक हिस्सों में सामान्य से कम या बिल्कुल बारिश नहीं हुई है। हालांकि दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में प्री-मानसून बारिश शुरू हो चुकी है। गर्मी अपने चरम पर है और कई राज्यों में लू की स्थिति बनी हुई है, ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में जलाशयों का जलस्तर और गिर सकता है।

*15* देश का GST कलेक्शन रिकॉर्ड ₹2.42 लाख करोड़ पहुंचा, अप्रैल में बीते साल के मुकाबले 8.7% की ग्रोथ; इम्पोर्ट से होने वाली कमाई में 25.8% बढ़ी

*16* कमर्शियल वाहनों की मांग में उछाल: अप्रैल में बिक्री 6.9% बढ़ी, घरेलू बाजार में ट्रकों और बसों का भी दबदबा

*17* ईरान पर हाइपरसोनिक मिसाइलों से हमला कर सकता है अमेरिका, बचे हुए ईरानी नेता टारगेट पर, सेना ने ट्रम्प को प्लान बताया

*18* यूपी-बिहार-कर्नाटक में 2 दिन में आंधी-बारिश से 32 मौतें, हिमाचल में ग्लेशियर टूटकर सड़क पर गिरा; राजस्थान-महाराष्ट्र में पारा 44°C पार

*19* सूर्यवंशी टी-20 में सबसे तेज 100-सिक्स लगाने की दहलीज पर, IPL में आज राजस्थान Vs दिल्ली; सीजन में पहली बार भिड़ंत
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01/05/2026

सरकारी तेल कंपनियों ने आज से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बड़ी बढ़ोतरी कर दी है।

दिल्ली में अब 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर की नई कीमत 3071.50 रुपये हो गई है। इससे पहले यह सिलेंडर लगभग 2078.50 रुपये में उपलब्ध था।

हालांकि, घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आम उपभोक्ताओं को इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

Haryana Update BJP Haryana

30/04/2026

हरियाणा का शेर: राव तुला राम और 1857 की क्रांति 🚩
दोस्तों, जब आज़ादी की पहली लड़ाई (1857) का ज़िक्र आता है, तो हरियाणा के रेवाड़ी के उस वीर का नाम गर्व से लिया जाता है जिसने "लड़ते-लड़ते मरना मंज़ूर किया, पर झुकना नहीं।"
कौन थे राव तुला राम?
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में राव तुला राम ने रेवाड़ी से मोर्चा संभाला था। उन्होंने न केवल अपने इलाके को अंग्रेजों से मुक्त कराया, बल्कि अपनी कूटनीति और बहादुरी से ब्रिटिश हुकूमत की जड़ें हिला दीं।
नसीबपुर (नारनौल) का वो ऐतिहासिक युद्ध ⚔️
नारनौल के नसीबपुर का मैदान आज भी उनकी बहादुरी का गवाह है। अंग्रेजों के पास आधुनिक हथियार थे, लेकिन राव साहब के पास अदम्य साहस और जज़्बा! उन्होंने अंग्रेजों को ऐसी टक्कर दी कि दुश्मन सेना के कई बड़े अफसर वहीं ढेर हो गए।
आज़ादी के लिए सात समंदर पार 🌍
जब देश के भीतर परिस्थितियाँ कठिन हुईं, तो वे रुके नहीं। वे अफगानिस्तान और रूस तक गए ताकि विदेशी मदद जुटाकर फिर से अंग्रेजों पर हमला कर सकें। दुर्भाग्यवश, 23 सितंबर 1863 को काबुल में बीमारी की वजह से वे शहीद हो गए। उनकी इसी शहादत को याद करते हुए हरियाणा में 'हरियाणा वीर एवं शहीद दिवस' मनाया जाता है।
"हरियाणा की माटी का हर कण उनकी वीरता की कहानी सुनाता है।"
आज हम नमन करते हैं राव तुला राम जी को और हरियाणा के उन तमाम अनगिनत वीरों को, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। 🫡
📌 क्या आप अपने क्षेत्र के किसी और वीर सेनानी के बारे में जानते हैं? कमेंट में ज़रूर बताएं!
#हरियाणा #रावतुलाराम #1857कीक्रांति #वीरअहीरवाल #रेवाड़ी #देशभक्ति #भारतीयइतिहास

28/04/2026

अगर आप किसी कंपनी में काम करते हैं, तो आपकी सैलरी बढ़ने के लिए साल भर की मेहनत, 'Appraisal' और बॉस की जी-हुज़ूरी लगती है। लेकिन राजनीति एक ऐसा 'स्टार्टअप' है जहाँ:
खुद ही एम्प्लॉई हैं, खुद ही बॉस!
अपनी सैलरी बढ़ाने के लिए किसी मीटिंग की ज़रूरत नहीं, बस मेज़ थपथपाई और बिल पास।
क्वालिफिकेशन: शून्य (हो तो बोनस, न हो तो कोई बात नहीं)।
परफॉरमेंस: देश चाहे गड्ढे में जाए, इनकी सुख-सुविधाएं ऊपर ही जाएंगी।
हैरानी की बात है कि जिस देश में करोड़ों लोग ₹500 की दिहाड़ी के लिए तरस रहे हैं, वहां 'जनसेवकों' के भत्ते लाखों में हैं। क्या यह लोकतंत्र का अपमान नहीं है?
सहमत हैं तो शेयर करें! 📢

27/04/2026

आज जब हम अपने देश के लोकतंत्र और इतिहास पर नजर डालते हैं, तो एक बड़ा सवाल मन में आता है—अंग्रेजी शासन (British Raj) और आजादी के बाद के शासन में हमें कितनी समानताएं देखने को मिलती हैं?
​1. नौकरशाही का ढांचा (Bureaucracy):
हकीकत तो यह है कि आज भी हमारा प्रशासनिक ढांचा काफी हद तक वही है जो अंग्रेजों ने बनाया था। वही 'कलेक्टर' का पद, वही लालफीताशाही (Red Tapism) और वही फाइल सिस्टम। प्रशासन आज भी जनता की सेवा से ज्यादा 'नियमों' पर टिका नजर आता है।
​2. कानून और धाराएं:
भारतीय दंड संहिता (IPC) और पुलिस एक्ट जैसे कई कानून आज भी ब्रिटिश काल की याद दिलाते हैं। हाल के बदलावों से पहले तक, वही धाराएं हम पर लागू थीं जो कभी आंदोलनकारियों को रोकने के लिए बनाई गई थीं।
​3. सत्ता का स्वभाव:
भले ही आज हम अपनी सरकार खुद चुनते हैं, लेकिन सत्ता का 'दबदबा' अक्सर वैसा ही महसूस होता है। वीआईपी कल्चर, भारी सुरक्षा घेरा और आम जनता से दूरी—ये चीजें कभी-कभी औपनिवेशिक दौर (Colonial era) की याद दिला देती हैं।
​निष्कर्ष:
आजादी ने हमें 'अधिकार' दिए, 'वोट' दिया और 'पहचान' दी, जो अंग्रेजों के समय नामुमकिन था। लेकिन व्यवस्था की कमियां आज भी वही हैं। असली आजादी तब होगी जब व्यवस्था केवल शासक के लिए नहीं, बल्कि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए काम करेगी।
​आपकी क्या राय है? क्या आपको भी लगता है कि आज के सिस्टम में अंग्रेजियत अभी भी बाकी है?

बहुत दुख होता है यह देखकर कि आज हरियाणा के घर-घर में नशा पहुँच गया है। माँ-बाप की उम्मीदें दम तोड़ रही हैं और हंसते-खेलत...
27/04/2026

बहुत दुख होता है यह देखकर कि आज हरियाणा के घर-घर में नशा पहुँच गया है। माँ-बाप की उम्मीदें दम तोड़ रही हैं और हंसते-खेलते परिवार उजड़ रहे हैं। क्या सरकार ने इस बढ़ती महामारी से आँखें मूँद रखी हैं?
सिर्फ कागजों पर 'नशा मुक्ति' के विज्ञापन देने से कुछ नहीं होगा, नशे की सप्लाई लाइन को काटना होगा। अगर आज हम नहीं बोले, तो कल बहुत देर हो जाएगी।
सरकार से सीधा सवाल: आखिर कब रुकेगा मौत का यह कारोबार?

📉 शिक्षा या व्यापार? (Private School Monopoly)आजकल प्राइवेट स्कूलों की हालत देखकर समझ नहीं आता कि हम बच्चों को 'स्कूल' भ...
27/04/2026

📉 शिक्षा या व्यापार? (Private School Monopoly)
आजकल प्राइवेट स्कूलों की हालत देखकर समझ नहीं आता कि हम बच्चों को 'स्कूल' भेज रहे हैं या किसी 'कॉर्पोरेट ऑफिस' में। शिक्षा जो कभी संस्कार और ज्ञान का माध्यम थी, अब एक महंगा बिजनेस बन चुकी है। 💸📚
क्या आप भी इन समस्याओं का सामना कर रहे हैं?
फीस की भारी लूट: हर साल बिना किसी ठोस कारण के 10-20% फीस बढ़ा देना।
फिक्स्ड वेंडर्स की मनमानी: किताबें, ड्रेस और जूते भी स्कूल द्वारा तय की गई दुकानों से ही लेने का दबाव।
हिडन चार्जेस: डेवलपमेंट फीस, एक्टिविटी फीस और न जाने कौन-कौन से नाम पर जेब खाली करना।
अहंकार: अगर पेरेंट्स सवाल पूछें, तो सीधे शब्दों में कह दिया जाता है— "पसंद नहीं तो टीसी (TC) ले जाइये।"
क्या शिक्षा पर केवल अमीरों का हक है? मध्यम वर्ग के माता-पिता की मेहनत की कमाई बस इन स्कूलों की बिल्डिंग्स चमकाने में जा रही है। 🏫🚫
सरकार और प्रशासन को इस 'एजुकेशन माफिया' और 'मोनोपॉली' पर सख्त लगाम लगानी चाहिए। शिक्षा को व्यापार बनने से रोकना अब बहुत ज़रूरी है।
प्राइवेट स्कूलों की 'खास दुकान' वाली सेटिंग कब खत्म होगी? 🚫📚
हरियाणा में स्कूलों की मनमानी चरम पर है। किताबों से लेकर मोजों तक पर स्कूल अपना कमीशन सेट कर रहे हैं। शिक्षा विभाग को इन पर सख्त एक्शन लेना चाहिए।
अगर आपका स्कूल भी आपको किसी खास दुकान पर भेज रहा है, तो डरें नहीं, आवाज़ उठाएं! 📢

कहाँ से लाओगे सुकून की छाँव, जब सारे पेड़ ही काट दोगे? 🏗️🪓याद रखिए, जब आखिरी पेड़ कटेगा और आखिरी नदी सूखेगी, तब हमें एहस...
26/04/2026

कहाँ से लाओगे सुकून की छाँव, जब सारे पेड़ ही काट दोगे? 🏗️🪓
याद रखिए, जब आखिरी पेड़ कटेगा और आखिरी नदी सूखेगी, तब हमें एहसास होगा कि हम "पैसों" को खा नहीं सकते और न ही उन्हें सांस के रूप में ले सकते हैं। कंक्रीट के जंगल हमें फल और ऑक्सीजन नहीं देंगे।
जागिए! इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।
#पर्यावरण

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