TEJ RATHORE

TEJ RATHORE SHORT-FILMS MUSIC-VIDEO
DIRECTOR/PRODUCER
MUSIC COMPOSER
SCREENWRITER
YOUTUBER
BLOGGER

27/05/2025

ऑपरेशन सिंदूर: क्या खोया क्या पाया

किसी बीमारी का उपचार या इलाज अधूरा छोड़ देते है तो वो जब वापस उभरती है तो पहले दी गई दवाओ के असर से इम्यून होकर पहले से कहीं ज़्यादा घातक सिद्ध होती है क्योंकि ख़त्म होने से पूर्व उपचार रोक देने पर वो बीमारी उन दवाओं या उपचार के असर को कमजोर करने या उनके प्रति प्रतिरोधक क्षमता को विकसित कर चुकी होती हैं क्योंकि आंशिक ख़ात्मे पर जीवनदान पर उसके वायरस पूर्व में हुए उपचार के हमले का तोड़ निकालने की दौड़ में भी लग जाते है। यही हुआ इस बार के ऑपरेशन में। आंशिक कार्यवाही से हो सकता है दुश्मन पहले से ज़्यादा सशक्त हो जाए क्योंकि जो विफल होता है वो अगली बार सफलता के ज़्यादा प्रयास में लगता है जबकि जो सफलता के भ्रम में आश्वस्त जीने लगता है उसके विकास प्रयासों में विराम लग जाता है।

सबक के तौर पर पाक शायद अब अमेरिका से भी हथियार लेगा और भारत अमेरिका पर पाक को हथियार न बेचने हेतु दबाव बनानें की हेसियत में है नहीं तो रोक पाएंगे नहीं। वो अब इस युद्ध में रही उनकी कमियों पर हर हाल में कुछ न कुछ कार्य करेंगे क्योकीं उनके तो सर्वाइवल का आधार ही नफ़रत और हिंसा है तो वो इस दिशा में तो कुछ खुरापाती ज़रूर करेंगे। साथ ही जब उनके सारे मुख्य आतंकी ज़िंदा है वो अब शायद हमास हुती हिजबुल्ला जैसी ट्रेनिंग और हथियार लेने लगे जोकि भारत के लिए और बड़ा ख़तरा है।

तीसरा वहां इमरान ख़ान पर हुए जुर्मों के कारण उनकी आम जनता में ही सेना विरोधी माहौल खड़ा हो रखा था वो इस युद्ध के करण सेना के प्रति आम जन की सहानुभूति, सहयोग और वाह वाही में परिवर्तित हो गया। वहाँ का युवा और किशोर वर्ग जो सोशल मीडिया के ज़रिए वास्तिविक चित्र देखते हुए भारत के आंतरिक माहौल और विकास से प्रभावित होकर भारत को एक आदर्श मानते हुए ख़ुद के देश में भ्रष्टाचार एवं आतंकवाद विरोधी विचार बुन रहा था साथ ही भविष्य में भारत के साथ सारे मतभेद भुला कर सहयोग की तरफ़ बढ़ने की तरफ़ आकर्षित हो रहा था जोकि दोनों देशों में नफ़रत की राजनीती की दुकान चलाने वाले तमाम लोगों के लिए एक ख़तरा साबित होने वाला था इसलिए कुछ लोग वहां कुछ यहाँ लगातार इन प्रयासो में लगे हुए थे की कैसे भी करके ये नफ़रत ज़िंदा रहनी चाहिए ताकि राजनीति चल सके और अब ये घटना होने के करण आने वाले समय में जहाँ नई पीढ़ी नई दिशा लेना चाहती थी वो अब फिर भारत के विरुद्ध आक्रोश और नफ़रत से भर चुकी है जोकि आतंकवाद में भी कूद सकती है क्योंकि आंशिक आक्रोश और नफ़रत को इंतक़ाम की भावना में तब्दील करना अब उनकी ख़ुफ़िया एजेंसियों और आतंकियों के लिए आसान काम हो गया।

चौथी बात जो भारत के हमले के करण उनके वहाँ परमाणु रिसाव की अफ़वाहों को मीडिया और एक वर्ग ने तूल दिया जो तार्किक रूप से देखा जाए तो 1988 में परमाणु युद्ध की संभवना को रोकने हेतु दोनों देशों के बीच सभी परमाणु स्रोतों के स्थल की जानकारियाँ साझा रखने हेतु की गई संधि की अव्हेलना मानी जाएगी और इस दुष्प्रचार को पाक अगर वैश्विक स्तर पर एक तर्क के तौर पर भारत का ग़ैर ज़िम्मेदाराना आचरण सिद्ध करने हेतु हथियार के रूप में उपयोग में लेकर पेश करने लगा तो इन झूठे दावों के करण भारत की छवि को ज़रूर नुक़शान पहुचेगा। हो सकता है कुछ देश भारत पाक दोनों पर परमाणु हथियार निरस्त्रीकरण का दबाव बनाने जोकि चीन के परमाणु संपन्न रहते भारत के लिए घातक सिद्ध होगा।

आतंकवाद ख़त्म हुआ कि नहीं ये हम तब तक तो नहीं ही कह सकते जब पहलगाम की नृशंश घटना को अंजाम देते हुए निर्दोष निहत्थे लोगों की अकारण जान लेने वाले सभी आतंकी बिना सजा मिले ग़ायब हो गए हो और अक्सर भारत में आतंकी घटनाओं के अंजाम देने वाले अग्रणी आका मसूद अज़हर व हाफिज सईद आज भी ज़िंदा हो।

विवेकशील व्यक्ति इसके नफे नुक़शान का सही निष्कर्ष समझ सकता है पर राजनीति और अंधभक्ति से प्रभावित लोगों को शायद ही ये आभास हो।

14/05/2025

Justice is undelivered yet-

भारत पाक या भारत चीन के बीच दशकों से चल रहे विवाद के मूल में क्या है? मूल में कश्मीर है और आज़ादी के बाद पूरे कश्मीर का निर्वविवाद रूप से हमारे पास होना ख़ुद साबित करता है कि पूरा कश्मीर निर्विवाद रूप से भारत का अभिन्न हिस्सा है लेकिन पाक चीन ने कुछ हिस्सा छीना यानी उनका था नहीं बल्कि अवैध लिया फिर और ज़्यादा हथियाने की क़वायद में आये दिन नये नये हथकंडे अपनाए जाते रहे चाहे सीमापार आतंकवाद हो या अंदरूनी अस्थिरता पैदा करने की कोशिश तो ये परेशानियाँ मिटेगी कैसे? मिटेगी केवल और केवल कश्मीर की भूमि के विवाद को हल करके उसके अलावा चाहे सदियाँ बीत जाये पाक चीन किसी न किसी तरह दिक़्क़त देते रहेंगे।

ऐसे में क्या भारत का लक्ष्य केवल आतंकियों को मारने भर का ही हो सकता है? विवाद का विषय ज़िंदा है तो आज मारोगे कल नये पैदा होंगे तो मूल विषय पर विधान करो, जड़ में जाओ और उस पर कुछ कार्यवाही करो क्योंकि हमारा अंतिम लक्ष्य पूर्ण कश्मीर की घर वापसी है तो हम उसी पर क्यों नहीं लगते, हम केवल उपरा ऊपरी पट्टी करके क्यों बैठ जाते है जब बीमारी की जड़ का इलाज नहीं किया तो। कितना ही कहें हम हर युद्ध में कश्मीर का निवारण करने में विफल रहे है चाहे सरकार किसी की रही हो तो ये माँ लो कि हमने अपना अल्टीमेट ऑब्जेक्टिव अचीव नहीं कर पाये कभी।

अब देश की जनता भी सरकार से बात करे तो सिर्फ़ पाक अधिकृत एवं चीन अधिकृत कश्मीर की करे क्योंकि हमारी सरकार ने इस ओर कोई कार्यवाही नहीं की। सरकार पूर्ण रूप से इस पर योजना नहीं बना पाई थी जोकि सरकार की कमी रही। मरना मारना मुद्दा था ही नहीं, किसके ज़्यादा नुक़्शान हुआ किसके कम हुआ ये कोई मायने नहीं रखता जब न्याय नुक़्शान की कसौटी से होना ही नहीं हो तो।

भारत पाक या भारत चीन के बीच असली न्याय केवल सम्पूर कश्मीर की घर वापसी से ही पूर्ण होगा क्योंकि वो भी हर चोट कश्मीर के कारण पहुँचाते है और हम बस चोट के बदले चोट पहुँचा कर बैठ जाते है असल मायने में हमने चोट के बदले पाक अधिकृत कश्मीर को कभी लक्ष्य में लिया ही नहीं, बस हर बार वही हमारी बेवक़ूफ़ी रही।

11/05/2025

भाजपा आईटी सैल के सैनिक सीजफायर की वकालत करने कूद पड़े है जैसे उनको कल ही पता चला हो कि पाकिस्तान परमाणु संपन्न देश है उनको चीन का साथ मिला हुआ है हमारे देश में नये उद्योग आने वाले है ब्लाब्ला। ये सब बात तो पूरी दुनियाँ के बच्चे बच्चे को 6 मई को भी पता थी, अगर सीजफायर का यही कारण था तो युद्ध होता ही नहीं। फिर आख़िर क्या कारण हुआ कि बात ऐसे बदल गई?

ट्रम्प मोदी जी के मित्र है कुर्सी खींचे थे बैठने के लिए फिर भी चलते युद्ध में IMF ने पाक को सौ अरब का पैकेज दे दिया और अमेरिका ने उनको युद्ध से भी उबार दिया, हालाँकि पाक ने तो अमेरिका से निवेदन किया था बचाओ तो उनके हित के फ़ैसले में मोदी जी फिर कैसे एक ही कॉल पर मान गये???

कारण गहरा है बस हिंट की बात इतनी है कि अभी हमने भी भविष्य के लिए बहुत कुछ सबक़ लिया है और कई सुधारों की घोर ज़रूरत है वरना आगे बहुत कुछ बदलने वाला है। लड़ाई से सबक़ लेते हुए पाक हथियारों में बहुत कुछ बदलाव करेगा अमेरिकी बाज़ार का ग्राहक बनेगा पाक के आतंकी संगठन ईरान समर्थक आतंकी संगठनों से प्रशिक्षण लेंगे और फिर वापस उतरेंगे क्योकि अब उनका ये 55 साल का भ्रम टूट चुका है कि कभी आरपार होगा ही नहीं। अब वो आरपार की बड़ी तैयारी करेंगे क्योंकि उनका तो मूल ही हिंसा है तो उनसे शांति की उम्मीद तो वैसे भी असंभव है।

हमास हिज़बुल्ला हुतियों की तर्ज़ पर अगर उनके आतंकी संगठन सक्रिय हुए तो फिर आने वाले दिनों में समस्या गहरी ही होगी। आज वो एक राइफल से हमला या छुटपुट धमाका करने से से ज़्यादा कुछ नहीं कर पाते लेकिन हमास हिज़बुल्ला हुतियों की भाँति शायद वो अब मिसाइल और रॉकेट से हमले करने का प्रशिक्षण लेने लगेंगे और शायद कुछ वर्ष बाद वैसे हमले भी करने लग जाये क्योंकि उनके मूल में हिंसा है। इज़राइल की भाँति भी उनको ख़त्म कर दोगे तो भी एक पीढ़ी मारोगे अगली पीढ़ी फिर उसी उसूल पर खड़ी होगी क्योकि ज़मीन का झगड़ा सदियों तक और पीढ़ियों तक चलता है।

अब कैसे भी करके बस कश्मीर के मुद्दे को चाहे बातचीत या कूटनीति से या समझौते से नफ़े नुक़सान की लेन देन करके ख़त्म करने और दोनों देशों के आपसी रिश्ते सुधारने पर एक क्रांतिकारी प्रयास भी आज़माना ज़रूरी है। वहाँ की जनता का एक बहुत बड़ा वर्ग बहुमत का वर्ग भारत से अच्छे रिश्ते और व्यापाफ़िक संबंध चाहता है इसलिए कूटनीति की मेज़ पर अब सरकारों को आना चाहिए।

उनके मूल को समझते हुए पाक से समझौते के लिए भारत अमेरिका सहित कई अरब देशों को बीच में गवाह रख कर कुछ बड़ा निर्णय ले सकता है जहां अगर भविष्य में पाक वापस कोई गड़बड़ी करे तो वो सारे देश प्रतिबंध और दबाव डाल सके।

आज अमेरिका रुस आपस में एक होने की बात करने लगे है तो दो पड़ोसी क्यों नहीं कर सकते? असहमतियाँ तो देश के अंदर भी बहुत है फिर भी सब कुछ ठीक ठाक शांति से चल रहा है ना तो लंबे प्रयासों से दो देशों में भी चल सकता है। भारत उनको आंतरिक समस्याओं से निपटने में सहयोग करे वो भारत के साथ सहयोग करे ये संभव हो जाये तो बहुत ही क्रांतिकारी होगा क्योंकि इसके अलावा कोई रास्ता है नहीं। हिंसा से अब हल संभव नहीं है सिर्फ़ ज़िंदगियाँ उझड़ेगी कई वर्षों की कमाई एक झटके में लुटेगी और अच्छा ख़ासा बजट कश्मीर की सुरक्षा में जाता रहेगा जब तक पूर्ण शांति नहीं होती।

राजनैतिक परिस्थितियाँ कुछ ऐसी बन गई है कि ये बात वर्तमान परिदृश्य में असंभव लगती है क्योंकि दुनियाँ में पूर्ण समाधान, पूर्ण शांति, पूर्ण समृद्धि और पूर्ण कुशलता की स्तिथि में राजनीति कभी ज़िंदा नहीं रह सकती इसलिए राजनेता हमेशा कुछ मुद्दे अनसुलझे रखते है ताकि जनता को उनकी गरज बनी रहे लेकिन कुछ तो करना चाहिए।

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19/05/2024

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RAPKID ARFAT DAR BADAR SONGDirector/Producer/Story/Screenplay: TEJ RATHORE Singer/Lyrics/Composer: RAPKID ARFATMusic/Mix Master: AATIF GULZARFlute: FLUTEPREE...

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