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ज्योतिष दशाएं और शिव - ज्योंतिष में समस्त ग्रह शिव रूप में समाए है। नेत्र सूर्य, अमृत रूपी गंगा इनके मस्तक पर चन्द्र रूप...
10/03/2021

ज्योतिष दशाएं और शिव - ज्योंतिष में समस्त ग्रह शिव रूप में समाए है। नेत्र सूर्य, अमृत रूपी गंगा इनके मस्तक पर चन्द्र रूप में विराजमान हैं, भुजाए मंगल का प्रतीक है, ज्ञान और मुख साक्षात् बृहस्पति, अर्धनारीश्वर तथा नटराज रूप शुक्र है। बुद्धि और चातुर्य रूप में बुध विराजमान है। ‘वृहत पाराशर होराशास्त्र’ के अनुसार जब जब भी व्यक्ति पर मारक दशा से अनिष्ट दशा हो, तो उसे शिवोपासना करनी चाहिए।
प्रत्येक ग्रह की दशा, अंतर्दशा तथा दशाएं - सूर्य - महादशा में सूर्य, शनि या केतु की अनिष्ट दशा हो तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
चंद्र - गुरू अनिष्टकारी या बालरिष्ठ हो तो शिव सहस्त्रनाम का जाप करें। चन्द्र-शुक्र, सूर्य तथा दशा- अंतर्दशा के नाथ का जाप करें। शिव पूजन करें।
मंगल - मंगल अंतर्दशा में वृषभ दान और रूद्र का जाप करंे। मंगल -राहू में नाग का मृत्युंजय का जाप करें। मंगल गुरू में शिव सहस्त्रनाम करें। मंगल-शनि में मृत्युंजय जाप करें।
राहु - गुरू-स्वर्ण प्रतिमा दान और शिव पूजन करंे।
गुरू - गुरू दशान्तरदशा में शिव जप, रूद्र जप और गोदान करें। गुरू-शनि में मृत्युंजय जाप करें। शुक्र, केतु, राहु मे शिव सहस्त्रनाम तथा मृत्युंजय जाप करें।
कालसर्प दोष निवारणः - चांदी के नाग -नागिन का विसर्जन और शिव पूजा करें।
शीघ्र विवाहः - पार्वती पूजन करें तथा शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
मारक दशाः - मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
बीमारीः - रक्तचाप, पागलपन, हदय की बीमारियों में रूद्राक्ष धारण करें और शिव पुजा करें।
नटराजः - शिव ने चारों वेंदो में से एक-एक तत्व का संग्रह करके ’नाट्य वेद’ का निर्माण किया जिसमें ऋग्वेद से पाठ्य, सामवेद - गीत, यजुर्वेद-अभिनय, अथर्ववेद से रसों का संग्रह किया। शिव डमरू से जो ध्वनियां निकली, उसी से व्याकरण शास्त्र के 14 सूत्र निकलें, तभी इनका नाम नटराज रखा गया।
शिव पूजा - रात्रि के चार प्रहर में प्रथम प्रहर में दुग्ध/जल धारा, द्वितीय प्रहर में दही/खीर, तृतीय प्रहर में घी अनार का अध्र्य या नैवेद्य चतुर्थ प्रहर में मधु/फलों का रस, प्रत्येक प्रहर में विसर्जन और माला दुगनी करें। प्रभात में विसर्जन उपरान्त व्रत कथा सुनकर अमावस्या को प्रार्थना करें।
राशि का आधार और रूद्राक्ष धारण - मेष राशि - 5,14 माुखी रूद्राक्ष धारण, 3 मुखी त्याज्य, वृषभ 4,6,13 मुखी रूद्राक्ष , मिथुन - 8 मुखी धारण , 5 मुखी त्याज्य , कर्कः 1,2,14 मुखी सिंहः - 10,12 मुखी धारण ,3 मुखी त्याज्य , कन्याः - 1,8,13 मुखी , तुलाः- 1,9,10,13 मुखी धारण , वृश्चिकः - 1,2,14 मुखी धारण, 3 मुखी, धनुः - 10, 12 मुखी, मकरः - 1,6,9,14 मुखी धारण, 5 मुखी त्याज्य, कंुभः - 7,14, मुखी धारण, मीनः 1,12,13 मुखी धारण।

गरूड़ पुराण के अनुसार पूजा अर्चना के लिए विविध पदार्थों से करीब 40 प्रकार के शिवलिंग बनाएं जाते हैं।

किससे निर्मित किसलिए
जौ, गेंहु और चावल के आटे से पुत्र लाभ और श्री पुष्टि के लिए।
हरताल, त्रिकुट से वशीकरण।
स्वच्छ कपिल वर्ण के गोबर से निर्मित ऐश्वर्य।
पारद से धन, ज्ञान, सिद्धि तथा ऐश्वर्य।
पीतल और कांसा निर्मित मुक्तिप्रद।
सीसा निर्मित शत्रुनाशक।
अष्टधातु से सर्वसिद्धिप्रद।
अष्ट लौहजात से कुष्ठनाशक।
स्फटिक से सर्व कार्य।
स्वर्ण निर्मित माहमुक्तिप्रद।
मौक्तिक सौभाग्यकर।
गुडोत्य प्रीति बढ़ाने।
शर्करामय सुखप्रद।
तिल पिष्टोत्थ लिंग अभिलाषा सिद्धि।
धान्यज धान्यप्रद।
फलोत्य फलप्रद।
भस्मय सर्वफल।
केशास्थि सर्व शत्रुनाशक।
दधिदु़ग्धो कीर्ति, लक्ष्मी तथा सुख।
सीताखण्डमय आरोग्य लाभ।

चीन में फैलता कोरोना का कहर चीन में कोरोनावायरस का जहर फैलता जा रहा है चीन से शुरू हुई यह महामारी विकराल रूप लेती नजर आ ...
28/02/2020

चीन में फैलता कोरोना का कहर
चीन में कोरोनावायरस का जहर फैलता जा रहा है चीन से शुरू हुई यह महामारी विकराल रूप लेती नजर आ रही हैं। यह बीमारी तेजी से अन्य देशों में फैलती जा रही है इस बीमारी से मरने वालों की संख्या हजारों से बाहर चली गई हैं सूत्रों के हवाले से यह भी माना जा रहा है कि वस्तुतः यह एक रासायनिक जैविक हथियार या जिसका परीक्षण किया गया जिससे कई लोगो यह संक्रमण फैल गया और इसका असर जापान, थाईलैंड, यू.एस. में भी इस गंभीर और घातक बीमारी का असर फैल गया। कोरोनावायरस के बारे में यह कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस को खुद चीन द्वारा बनाया गया है दरअसल चीन कनाडा के सहयोग से एक बायोलाजिकल हथियार बना रहा था । चीन यह हथियार अपने च्4 लैब में बना रहा था जो कि चीन के अंदर वुहान शहर में है।
चीन के ये वैज्ञानिक काफी लंबे समय से काम कर रहे थे चीनी सरकार एक बड़ी साजिश करके कनाडा से एक खास तरह का तत्व तत्व (पार्टिकल) लेकर आई जिस पर काफी समय से काम चल रहा था चीन का उद्देश्य बायोलाजिकल हथियार बनाना था जिससे युद्ध के समय दूसरे देश पर छोड़ा जा सके और वहां की हवा में वायरस ही वायरस फैल जाए और बड़े पैमाने पर लोगों को संक्रमण से क्षति हो बहरहाल चीन के वैज्ञानिक थोड़ा सा चूक गए और वुुहान शहर की लैब में यह वायरस तीव्रता से फैल गया ।
शहर दर शहर देश दर देश इस वायरस संक्रमण से प्रभावित हो रहे है।

ं इलाज

केरोनो वायरस जो चीन के संाईंसदानों की उपज है। वैज्ञानिकों ने शोध से जो इलाज निकाले वे भारतीय संस्कृति सनातन संस्कृति की मान्यता है। चीन ने घोषणा की है कि अगर शवों को जमीन में गाड़ देंगे तो उनके शरीर में क्रोना वायरस या अन्य जो भी बैक्टीरिया होते हैं वे जमीन मंे मिल जाएंगे तथा यह वायरस या बैक्टीरिया कभी नष्ट नहीं होंगे , जल- वायु को प्रदूषित करेंगे इसलिए चीन ने घोषणा कि है की जो लोग भी कोई वायरस से संक्रमित हो जाते हैं उनके शव को जलाकर ही अंतिम संस्कार किया जाए । शव को दाह करना- भारतीय सनातन व वैदिक परंपरा के अनुरूप हैं तथा शवदाह (जलाने) के संस्कार को सबसे उत्तम शवक्रिया मानी जाती हैं।
साथ ही चीन ने घोषणा की है कि मांसाहार से भी यह वायरस तेजी से तथा तीव्रता से फैलता है जिन प्राणियों को मांसाहार से खाया जा रहा हैं वे कई संक्रमण बीमारी से ग्रसित हो जाते हैं शाकाहार से संक्रमण होने के चांस कम रहते हैं जो वायरस बैक्टीरिया वायुमंडल में फैल गए हैं उनके लिए गोबर का ऊपले पर घी डालकर वायुमंडल में बैक्टीरिया को समाप्त किया जा सकता है इसलिए ही भारतीय ऋषियों ने यज्ञ में श्रेष्ठ कर्म बताया। हाथ मिलाने से, गले मिलने से एक दूसरे को छूने से भी संक्रमण फैलता है अतः इन चीजों से परहेज करना चाहिए इसलिए भारतीय ऋषि हाथ जोड़कर अभिवादन भी करने की परंपरा है आज चीन शवदाह अग्नि संस्कार यज्ञ संस्कृति जैसी भारतीय संस्कृति की परंपराओं को अपना रहा है वह दिन दूर नहीं जब संपूर्ण विश्व में भारतीय वैदिक संस्कृति का लोहा मानेगा ज्योतिषीय कारणों पर विचार करें तो शनि का राशि में मकर राशि में प्रवेश संपूर्ण विश्व में लगभग ढाई वर्ष तक ऐसी स्थिति रहेगी है महामारी भूकंप सुनामी धार्मिक उन्माद तथा युद्ध जैसी स्थिति हो से काफी नुकसान व जनहानि होने की संभावनाएंे व संकेत मिल रहे हैं । शनि 11 मई 2020 को शनि मकर राशि में वक्री होंगे 29 सितंबर शनि वक्री स्थिति में चलायमान रहेंगे यह समय भी विश्व समुदाय के लिए चिंतास्पद स्थितियों से परिपूर्ण रहेगा । 29 सितंबर से शनि वापस मार्गी हो जाएंगे शनि का यह परिभ्रमण चर राशि में तथा पश्चात् कुंभ राशि (स्थिर) राशि में देश और दुनिया के लिए हर मायने से चित्र विचित्र रहेगा। इस सन्दर्भ व्यक्तिगत कुण्ड़लीयो पर तथा व्यक्तिगत ग्रह गोचर पर विचार करना समीचीन न होगा, क्योंकि यह माहमारी हैं, सामुहिक अनिष्ट है, अतः इस सन्दर्भ में समग्र रूप से चिन्तन आवश्यक है।

क्रोना वायरस से रहे सावधान चीन की यात्रा से बचे।
चीन में फैले कोरोना वायरस (जिसे वुहान वायरस भी कहा जा रहा है) को लेकर अब भारत में भी सतर्कता बरती जाने लगी है।
देश की राजधानी दिल्ली समेत मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरू, हैदराबाद, कोच्चि और कोलकाता हवाईअड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई है। चीन और हांगकांग से लौटे यात्रियों की थर्मल जांच की जाएगी। यात्रियों को विमान में चढ़ने से पहले सेल्फ रिपोर्टिंग फार्म भरना होगा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस संदर्भ में आपात बैठक बुलाई है. इस बैठक में डब्ल्यूएचओ यह तय करेगा कि कोरोना वायरस से फैल रही बीमारी को क्या अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य आपात काल घोषित करने की जरूरत है या नहीं।
अमरीका में भी वायरस के संक्रमण का एक मामला सामने आया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह शख्स चीन के वुहान से अमरीका आया है।
यह नया कोरोना वायरस दिसंबर महीने में सबसे पहले पकड़ में आया था. लेकिन अब यह चीन की सीमा को पार करके दूसरे देशों में भी पहुंच चुका है।
ताजा मामलों की बात करें तो अमरीका के एक मामले से पहले थाईलैंड में दो और जापान में भी एक मामला सामने आ चुका है। सऊदी के एक अस्पताल में काम करने वाली केरल की नर्स इस जानलेवा वायरस से संक्रमित मिली हैं।
कोरोना वायरस के लक्षण
सिरदर्द,नाक बहना,खांसी, गले में ख़राश, बुखार,अस्वस्थता का अहसास होना, छींक आना, अस्थमा का बिगड़ना,थकान महसूस करना, निमोनिया, फेफड़ों में सूजन
कोरोना वायरस के कारण अमूमन संक्रमित लोगों में सर्दी-जुकाम के लक्षण नजर आते हैं लेकिन असर गंभीर हो तो मौत भी हो सकती है।



साभार अज्ञातदर्शन ज्योतिष पत्रिका

28/02/2020

चीन में फैलता कोरोना का कहर चीन में कोरोनावायरस का जहर फैलता जा रहा है चीन से शुरू हुई यह महामारी विकराल रूप लेती नज...

मनुष्य जैसा भाग्य लेकर आता है, उसकी बुद्धि भी उसी समान बन जाती है। कार्य-व्यापार में उसी अनुरूप मिलता है। उसके सहयोगी, स...
21/05/2019

मनुष्य जैसा भाग्य लेकर आता है, उसकी बुद्धि भी उसी समान बन जाती है। कार्य-व्यापार में उसी अनुरूप मिलता है। उसके सहयोगी, संगी-साथी भी उसके भाग्य के अनुरूप ही होते है। सारा क्रियाकलाप भाग्यनुसार ही संचालित होता है।

सत्ता के खेल में उलझे संतबाबागिरी से नेतागिरी तकधर्म की नौका पर सवार राजनीतिधर्म उपदेश, संसार को सद्मार्ग बताने वाले संत...
27/04/2019

सत्ता के खेल में उलझे संत
बाबागिरी से नेतागिरी तक
धर्म की नौका पर सवार राजनीति

धर्म उपदेश, संसार को सद्मार्ग बताने वाले संत इन दिनों राजनीति में काफी सक्रिय है, क्यों सन्यासी धर्मच्युत हो रहे है। बात धर्म की राजनीति की हो, या राजनीति के धर्म की। धर्माचार्यो ने सदैव समाज का मार्गदर्शन राजनीति से अलग- विलग रहकर किया हैं, लेकिन कालान्तर में परिस्थितियां बदली, धर्माचार्यो व धर्म में विसंगतियां आ गई, धर्माचार्य सत्ता लोलूप बन स्वयं राजनीति में कूद गए, उन्हे लगा कि वे राजनीति में आकर समाज में एक क्रंातिकारी बदलाव ले आयेगें, लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा धर्माचार्य राजनेताओं के हाथों की कठपूतलियां बनकर रह गए। इन चुनावों में कई कथित धर्माचार्य, संत चुनाव मैदान में हैं, तो कई साधुवेश धारी चुनाव प्रचार की कमान संभाले हैं । बाबा रामदेव, योगी आदित्यनाथ, साक्षी महाराज, प्रज्ञा ठाकुर, सुमेधानंद, बाबा बालकनाथ,प्रमोद कृष्णन्,कम्प्यूटर बाबा, आचार्य चक्रपाणि, यहां तक कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती भी राजनीतिक पार्टीयों का प्रचार करते नजर आते है और विभिन्न पार्टीयों ने कई धर्माचार्याे को अपना स्टार प्रचारक तक बना रखा है, वे चुनाव प्रचार की कमान भी संभालें हुए हैं, तो कुछ संत जो प्रत्यक्ष राजनीति में नही है, अपनी कथाओं के माध्यम से पार्टी व दलों का प्रचार करते नजर आते है। क्यों धर्माचार्य धर्मच्युत हो गए हैं, क्यों उन्हे अपने धर्म पर भरोसा नहीं रहा क्यों वे राजनेताओं व राजनीतिक दलों की चमचागिरी चाटुकारिता करते नजर आतें हैं, प्रश्न बड़ा ही महत्वपूर्ण है? उत्तर भविष्य में निहित हैं अब देखना यह है कि ये धर्म की चादर ओढें़ यह संत रूपी राजीनीतिज्ञ केवल आत्मचिंतन के आगे भी कुछ कर पाते है या नहीं क्योंकि अभी तक ये कथित संत अपना राजनीतिक कैरियर सेटल करने में ही लगे हुए है। आईये जानते है कुछ ऐसे ही धर्म की चादर ओढे़ राजनीतिक संतो के बारे में .......

‘‘ भाजपा को पूर्ण बहुमत नही ! एनडीए से मोदी होगे प्रधानमंत्री ‘‘                  डाॅ. पं. सीताराम त्रिपाठी षास्त्री 201...
27/04/2019

‘‘ भाजपा को पूर्ण बहुमत नही !
एनडीए से मोदी होगे प्रधानमंत्री ‘‘
डाॅ. पं. सीताराम त्रिपाठी षास्त्री

2019 लोकसभा चुनाव में कौन होगा अगला प्रधानमंत्री ? क्या मोदी दौबारा प्रधानमंत्री बनेगे ? अन्तर्राश्ट्रीय भविश्वक्ता डाॅ.पं.सीताराम त्रिपाठी राश्ट्रीय अध्यक्ष अन्तर्राश्ट्रीय ज्योतिश विज्ञान षौध संस्थान द्वारा ज्योतिशीय योग सूत्र व सिद्धान्तों के आधार पर जोरदार षब्दों में भविश्यवाणी का दावा किया !

1-माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्म तारीख 17 सितम्बर 1950 को 12ः09 बजे बड़नगर मेहसाना गुजरात में अनुराधा नक्षत्र के दूसरे चरण वृष्चिक राषि व वृष्चिक लग्न में हुआ है। मोदी की जन्मकुण्डली में चन्द्रमा-मंगल लग्न में विराजमान होकर नीचभंग राजयोग व महालक्ष्मी योग बना रहै है।
2-मोदी जी की जन्मकुण्डली में लग्न में मंगल वृष्चिक राषि में बैठकर रूचक नामक पंचमहापुरूश राजयोग का निर्माण कर रहा है। जो पंचमहापुरूशों में एक उच्च अग्नि कारक राजयोग है। परासर ने इसे पारिजात राजयोग की संज्ञा दी है। षास्त्रों में इसे इच्छापूर्ति राजयोग कहा गया है। मोदी को इस राजयोग ने बलवान षरीर, षौर्य,साहस, आत्मविष्वास, निर्णयषक्ति,पराक्रमी, सशक्त षब्दकोश, वाकचातुरता, वाक्षक्ति न्यायप्रिय व राजनितिक कूटनीतिज्ञ स्वंय अर्जित प्रसिद्धि, विजय विदेष यात्रा, कुषल राजनेता के साथ प्रधानमंत्री बनाया है।
3-मोदी की कुण्डली में लग्न में चन्द्रमां से चैथे भाव में बृहस्पति बैठने से गजकेसरी योग निर्माण हो रहा है। ज्योतिश सूत्रांे मंे कुण्डली के किसी भी भाव में बैठे चन्द्रमा से 1,4,7,10 स्थान पर गुरू के बैठने से गजकेसरी योग निर्मित होता है।
4-मोदी के कुण्डली में पंचम भाव का स्वामी गुरू व शश्ठम भाव का स्वामी मंगल दोनों केन्द्र में है तथा लग्नेष मंगल बलवान होकर स्वराषि का लग्न में विराजमान होने से षंखयोग का निर्माण हो रहा है। मोदी की आवाज षेर की दहाड़ षंखनाद की तरह बुलन्द होगी यह स्वर्ग में इन्द्रदेव के पास अश्टसिद्धि नवनिधियों व समुद्र मंथन से प्राप्त 14 रत्न सिद्धियों मे एक योग माना गया है। हनुमान जी के पास भी अश्टसिद्धि नवनिधियों में एक षंखनिधि योग है। ज्योतिश षास्त्रों में षंखऋशि ने षंखनिधि योग कहा है। भगवान श्रीराम कुबेर व इन्द्र की जन्मकुण्डलीयों में भी षंखयोग है। षंखयोग एंव रूचक पंचमहापुरूश राजयोग ने मोदी को मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बनाया है। यह रजोगुण व तमोगुण युक्त माना गया है। इस योग में जन्मे जातक अपने पराक्रम से उपार्जित उच्चपद सुख-सम्पदा यष-कीर्ति भवन धन वाहन आदि का उपयोग स्वंय एक पीढ़ी तक ही करता है। कुटुम्बीजन पुत्र व भार्या को नहीं लिखा होता है। इस योग के कारण ही मोदी को भार्या व पुत्र सुख नही लिखा है।
5-प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्मकुण्डली में रूचक नामक पंचमहापुरूष, राजयोग, लक्ष्मी योग, नीचभंग राजयोग, गजकेसरी योग, केदार योग, पारिजात योग,षंखनिधि आदि योगों के कारण मोदी का विजय रथ 2019 मे कोई नही रोक सकता है। लोकसभा चुनाव मे कांग्रेस-भाजपा रोमांचक कंाटे की टक्कर में भाजपा अकेले अपने बल पर 543 में से 272 बहुमत का जादुई आंकड़ा पार नही कर पायेगी। 2014 से सीटे कम मिलेगी एनडीए घटक दल जीत कर बीजेडी व टीआरएस सहयोग से सरकार बनायेगी और नरेन्द्र मोदी फिर से दौबारा प्रधानमंत्री बनेंगे।
6-नोटबन्दी, जीएसटी, मंहगाई, भश्टाचार, उपचुनावों में भाजपा की करारी हार, विपक्ष महागठबंधन का प्रहार ,राजस्थान, मध्यप्रदेष, छतीसगढ़ में कड़े मुकाबले के बीच भाजपा हार, मोदी की निर्णय-नितियों की आलोचना व विरोध के बाद भी ग्रहांे के राजयोग से मोदी को प्रधानमंत्री बनने से कोई ताकत नही रोक सकती है। पुलवामा सबसे बड़े आतंकवादी हमले के बदले मे की गई एयर स्ट्राइक से मोदी के पक्ष मे प्रखर राट्रवाद भावना की लहर आगई है। 2014 मोदी लहर से अलग होगी। Pandit Sitarama Tripathi, Dinash Tripathi Pawan Tripathi

अज्ञातदर्शन के संरक्षक लाल बाबाजी की भविष्यवाणीराजा सूर्य, मंत्री शनि-क्या गुल खिलायेंगेौरव सिद्ध राष्ट्रीय संत श्री लाल...
27/04/2019

अज्ञातदर्शन के संरक्षक लाल बाबाजी की भविष्यवाणी
राजा सूर्य, मंत्री शनि-क्या गुल खिलायेंगे
ौरव सिद्ध राष्ट्रीय संत श्री लाल बाबाजी वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव की भविष्यवाणी की है। उन्होंने कहा है कि लोकसभा के चुनाव के मद्देनजर सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाला एन डी ए गठबंधन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में मिशन 351 की प्राप्ति के लिए युद्ध स्तर पर तैयारी, अभियान में जुटेगा तो विपक्ष भी सक्रिय होकर मोर्चा बनायेगा। धर्म-कर्म और पुरूषार्थ से भाजपा स्थितियां अपने अनुमूल बनाने में तत्पर होगी। वर्ष 2021 तक की आधारभूमि इसी वर्ष तैयार होगी। राजस्थान में भी राजनीति कई रंग दिखायेगी। भाजपा खो रहा जनाधार मजबूत करने का प्रयास करेगी तो भाजपा-कांग्रेस में अन्तर्कलह भी उभरेगा। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी विपक्षी दलों को एकजुट करने का प्रयास करेगी, राहुल गांधी की भी जनता में स्वीकार्यता बढ़ेगी। कहीं सत्ता परिवर्तन तो कहीं आरक्षण विरोधी आंधी चलेगी। दिल्ली प्रदेश की सत्ता हिलती नजर आयेगी। कई नए गठबंधन बनेंगे, कुछ टूटेंगे। राजतंत्र के कर्ता सूर्य के साथ शुक्र है अर्थात् सरकार में मलेच्छावृत्ति वालों का बोलबाला रहेगा। आरक्षण के नाम पर पद की योग्यता नहीं रखने वालों को उच्च पदों पर आसीन किया जायेगा। राज्यों में चैंकाने वाले परिणाम व राजनीति सामने आयेगी। ग्रहों की चाल राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से उथल-पुथल के संकेत दे रही है। भारत की कुण्डली में चंद्र गुरू का अंतर चल रहा है जो अक्टूबर तक रहेगा। गुरू अष्टम और एकादश का स्वामी होकर तृतीय भाव का उपस्वामी है। जिससे केन्द्र व राज्य सरकारों की स्थिति कमजोर होगी। शीर्ष विवादों में घिरेंगे, जन विरोधी फैसलों का जनमानस पर विपरीत असर दिखेगा। भाजपा क्षीण बहुमत पाकर सत्ता में लौट सकती है। लेकिन एक खास काल खण्ड में चुनाव होने पर एन डी ए का वर्चस्व बढ़ेगा। भाजपा को पूर्वी तथा उत्तर पूर्वी राज्यों में सफलता मिलेगी पर उत्तर व पश्चिम भारत में पिछला प्रदर्शन नहीं दोहरा पाएगी। बिहार में जबर्दस्त सत्ता संघर्ष देखने में आयेगा। प्रधानमंत्री काशी के साथ एक अन्य संसदीय क्षेत्र में चुनाव लड़ेंगे। यूपीए गठबंधन के एक महत्वपूर्ण घटक के रूख का 2019 के आम चुनाव नतीजों पर असर रहेगा। भाजपा के भीतर भी विग्रह का संकेत दिखेगा। कांग्रेस युवा अध्यक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में अच्छा प्रदर्शन करेगी। महागठबंधन और तीसरा मोर्चा एकजुट होकर भी अलग-अलग रहेगा। ग्रह गोचर के संकेत है कि पूरे विश्व में अनेक देशों में छत्र भंग व सत्ता परिवर्तन होगा। संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और गिरेगी। निर्वाचन आयोग, रिजर्व बैंक आॅफ इंडिया, सीबीआई के अलावा उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा पर आंच आयेगी। चुनाव आयोग के एक पक्षीय निर्णयों से आक्रोश बढ़ेगा। देश की कुण्डली में शनि नवम, दशम का स्वामी होगर तीसरे भाव में आसीन है। जिससे धार्मिक मुद्दों पर खींचतान होगी, उपद्रव होंगे जनता परेशान होगी। शनि का अष्टम में आना संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को विवादित करेगा। जनता को बरगलाया जायेगा, संसद में अशोभनीय आचरण और एक-दूसरे पर दोषारोपण वातावरण विषाक्त बनायेगा। Lal Baba g

वर्श 2019 में होने वाले इन आम चुनावों को अगर हम ज्योतिशी दृश्टिकोण से देखे तो यह चुनाव भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय ...
27/04/2019

वर्श 2019 में होने वाले इन आम चुनावों को अगर हम ज्योतिशी दृश्टिकोण से देखे तो यह चुनाव भारतीय राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ने वाले होंगे। इन आम चुनावों को लेकर भाजपा में भारी उत्साह है, कांग्रेस पार्टी भी एक बार पूरे जोश व उत्साह में दिखाई दे रही हैं,कांग्रेस के अवसरवादी लोग पार्टी छोड़कर भाजपा में षामिल हो रहे है। कहावत भी प्रसिद्ध है कि जब जहाज डूबने लगता है, तो सबसे पहले चूहे उसे छोड़कर भागते है। कांग्रेस भी कुछ इसी तरह से डूबता जहाज है। बहरहाल, ज्योतिशी भी अधिकांषतः इस डावाडोल राजनीतिक परिस्थिति को देखकर खामोष है, तो कुछ लोग हवा के रूख को देखकर भविश्यवाणी कर रहे है। लेकिन इतने पर भी यह जानना जरूरी है कि इस बार सत्ता का ऊंट किस करवट बैठ रहा है? क्या वास्तव में नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनने जा रहे है? यदि कोई और तो कौन? किसकी लाॅटरी लगेगी? यह तो समय ही बताएगा। बहरहाल, हम ज्योतिशीय दृश्टिकोण व सितारों की गणना से इसका अनुमान लगाने की कोषिष करते है।
स्वतंत्र भारत की कुण्डली में वर्तमान में चन्द्रमां की महादषा में गुरू का अंतर चल रहा है। स्वतंत्र भारत की कुण्डली में चन्द्रमां पराक्रमेश होकर पराक्रम भाव में स्वगृही है। तथा बृहस्पति लाभेश और अष्टमेश होकर छठे भाव में स्थित हैं, स्वतंत्र भारत की कुण्डली वृषभ लग्न की है, जहां बृहस्पति नैसर्गिक रूप से पापी होता है। अतः किसी एक दल की सरकार की गठन की संभावना थोड़ी कमजोर हैं, एनडीए की सरकार बन सकती हैं, इस बार 2019 में गठबन्धन की सरकार के योग अधिक प्रबलता से दिखलाई पड़ रहे है।
वर्श 2076(विक्रम संवत्) की सरकार बन चुकी है। यह वर्ष प्रमादी नामक सम्वत्सर है। इस वर्श के अधिपति (राजा) शुक्र हैं, तथा उपेश शनि है। प्रधानमंत्री सूर्य है। धनाध्यक्ष (वित्तमंत्री) मंगल है। षनि महाराज इस वर्श धनु राशि में चलायमान है तथा 30 अप्रैल 2019 से वक्र स्थिति में चलायमान रहेगें। देवगुरू बृहस्पति भी इस वर्ष वृश्चिक राशि में गतिशील रहेगें, तथा वक्र स्थिति में चलायमान हैं। दो-दो मंदगामी ग्रहो के कारण श्री नरेन्द मोदी एक बार पुनः प्रधानमंत्री बनेगें।

धर्मस्य हि जायो भुयादधर्मस्य पराजयः !!         धर्म की सदा विजय हो । धर्म के बारे में विद्वानों ने अलग-अलग तर्कों से धर्...
27/04/2019

धर्मस्य हि जायो भुयादधर्मस्य पराजयः !!
धर्म की सदा विजय हो । धर्म के बारे में विद्वानों ने अलग-अलग तर्कों से धर्म परिभाषित किया है । धारयते इति धर्मः। जो धारण किया जाए वह धर्म है ।
इसका मतलब यह नहीं कि धर्म अपनी पहचान तिलक, छापे, टोपी, या दाढ़ी में रखता है। अगर आप निष्काम, निर्लेप भाव से कर्म करते हैं वह भी धर्म का स्वरूप बनकर धारण हो जाता है ।
देश में चुनाव है और धर्म अधर्म की बातें जोरो पर है। देश के सामने दो ही विकल्प है। सही विकल्प का चुनाव कर, भारत इस समय सक्रांति काल मे हैं।
ज्योतिष शास्त्र अनुसार जब कोई ग्रह संक्रांति परिवर्तन करता है तो क्षीण माना गया है। यद्यपि अज्ञातदर्शन का चुनाव विशेषांक आपके हाथ में है, जिसमें ग्रहों के परिवर्तन के आधार पर कुछ भविष्यवाणियां प्रस्तुत की गई है।
देश में आम चुनाव 2019 का आगाज हो चुका है एनडीए और यूपीए दोनों ही अपने-अपने पूरे जोश में हैं एनडीए की तरफ से फिलहाल श्री नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद के दावेदार हैं वहीं यूपीए की तरफ से राहुल गांधी ने अपनी विरासत संभाल रखी है.. राजनीति में नए युग का सूत्रपात हो चुका है, अज्ञातदर्शन ने निर्लेप भाव से ज्योतिषीय विश्लेषण प्रस्तुत किया है, लेकिन ज्योतिषी भी अपने आस-पास हो रही घटनाओं, स्थितियों व वातावरण से खुद को अलग नहीं कर पाता है, ज्योतिषीय विश्लेषण गलत होने के पीछे मेरा यह मानना है कि यह कारण हैं, कि जब ज्योतिषी किसी रंग का चश्मा लगा देता हैं, तो उसे सब उसी प्रकार का दिखने लग जाता है। वैसे हमने प्रयास किया हैं, कि ऐसे किसी रंग का चश्मा नहीं लगा कर स्पष्ट रूप से फल कथन किया जाए।
यह चुनाव किसी युद्ध से कम नहीं है। वैसे भी किसी ने क्या खूब कहा है की जंग और प्रेम में सब जायज है अगर जंग और प्रेम में सब जायज है तो फिर इस दुनिया में गलत कुछ नहीं है और यह चुनाव किसी जंग ( युद्ध ) से कम नहीं है। सत्ता की महारानी किसका वरण करती है वरमाला किसके गले में डालती है यह देखने की बात है लेकिन इतना तय है कि राजनीति में नवीन युग का सूत्रपात हो चुका है श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश प्रगति की और अग्रसर है चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीख घोषित कर दी है जहां देश में कुल 7 चरणों में लोकसभा चुनाव प्रस्तावित है। 23 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने हैं ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखें तो श्री नरेंद्र मोदी जी को 23 तारीख को तीसरा चंद्रमा रहेगा। चंद्रमा$गुरु की युति उनकी राशि में गजकेसरी योग को निर्मित करेगी, तथा नीच के चंद्रमा की महादशा इनके लिए नीच भंग राजयोग कारक भी है इस समय शनि भी देवगुरु बृहस्पति की राशि में स्थित रहेंगे, जो उनके जन्म लग्न से दूसरे भाव में स्थित होगा वहां से देवीय कृपा, गुरू कृपा के आशीर्वाद के फल स्वरुप सत्ता प्राप्ति का योग बन रहा है चंद्रमा की महादशा में शुक्र का अंतर निश्चित रूप से विरोधाभासी परिस्थितियों के मध्य इन्हें सत्ता की कुर्सी पर काबिज करेगा षडयंत्र और विरोध की राजनीति के बीच एक बार पुनः भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।
वैसे कभी कभार अंदर का शायर भी जाग ही जाता है। चुनाव मौके पर दो पंक्ति यां आपकी सेवा में नजर है।
हुकुमत पे ईल्जाम लाखों है मगर
महफुजियत भी हुकुमत के साये में ही है।
बहरहाल, सीधें ज्योतिषीय विश्लेषण पर आते है, नहीं तो विषयान्तर हो जायेगा। चुनाव के इस कालखण्ड में श्री नरेन्द्र मोदी के जी के लग्नेश मंगल, राहु के प्रभाव में रहेगें, इस दौरान सत्ता की कुर्सी तो इन्हे मिल जायेगी, परंतु संभव है कि सीटें जरूर कुछ कम आ पाए। 23 मई को मंगल आद्र्रा नक्षत्र के अन्तर्गत रहेगें। राहु के नक्षत्र में होने के कारण भ्रम व भय उत्पन्न करेगें, परंतु इसमें कोई दो राय नहीं वे सत्ता को प्राप्त करेगें, नरेन्द्र मोदी एक बार पुनः देश के प्रधानमंत्री बनेगें वहीं राहुल गांधी की कुण्डली में भाग्येश शनि नीच राशिस्थ हैं, अतः प्रधानमंत्री बनने का योग नही हैं । इस समय इनको मंगल की महादशा में गुरू का अंतर चलेगा। गुरू शत्रु राशि में इनके राजयोग का मार्ग तो प्रशस्त नहीं करेगा, फिर भी इनका जनाधार जरूर बढ़ सकता हैं, इनके नेतृत्व में कांग्रेस पाटी व यूपीए को पहले से अधिक सीटें प्राप्त होगी।

चुनाव नतीजों की भविष्यवाणी पर निर्वाचन आयोग ने लगाई रोकनिर्वाचन आयोग ने मीडिया संस्थानों को सख़्त निर्देश दिए हैं कि वो ...
12/04/2019

चुनाव नतीजों की भविष्यवाणी पर निर्वाचन आयोग ने लगाई रोक
निर्वाचन आयोग ने मीडिया संस्थानों को सख़्त निर्देश दिए हैं कि वो किसी भी चुनाव के नतीजों से जुड़ी ज्योतिषियों, टैरो कार्ड रीडर और पंडितों की भविष्यवाणी को प्रसारित न करें.
आयोग ने कहा है कि ऐसा करना चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना जाएगा. इससे पहले आयोग चुनाव प्रक्रिया के दौरान एग्ज़िट पोल पर भी पाबंदी लगा चुका है.

गुरुवार को आयोग ने सभी प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों को सख़्त निर्देश दिए कि वो चुनाव नतीजों का किसी भी तरीके से अनुमान नहीं लगाएंगे और न ही राजनीतिक पंडितों और टैरो कार्ड रीडर्स के भविष्यवाणी को किसी भी माध्यम से प्रसारित करेंगे.

निर्वाचन आयोग ने मीडिया संस्थानों को सख़्त निर्देश दिए हैं कि वो किसी भी चुनाव के नतीजों से जुड़ी ज्योतिषियों, टैर...

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15/03/2019

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15/03/2019

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