10/03/2021
ज्योतिष दशाएं और शिव - ज्योंतिष में समस्त ग्रह शिव रूप में समाए है। नेत्र सूर्य, अमृत रूपी गंगा इनके मस्तक पर चन्द्र रूप में विराजमान हैं, भुजाए मंगल का प्रतीक है, ज्ञान और मुख साक्षात् बृहस्पति, अर्धनारीश्वर तथा नटराज रूप शुक्र है। बुद्धि और चातुर्य रूप में बुध विराजमान है। ‘वृहत पाराशर होराशास्त्र’ के अनुसार जब जब भी व्यक्ति पर मारक दशा से अनिष्ट दशा हो, तो उसे शिवोपासना करनी चाहिए।
प्रत्येक ग्रह की दशा, अंतर्दशा तथा दशाएं - सूर्य - महादशा में सूर्य, शनि या केतु की अनिष्ट दशा हो तो महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
चंद्र - गुरू अनिष्टकारी या बालरिष्ठ हो तो शिव सहस्त्रनाम का जाप करें। चन्द्र-शुक्र, सूर्य तथा दशा- अंतर्दशा के नाथ का जाप करें। शिव पूजन करें।
मंगल - मंगल अंतर्दशा में वृषभ दान और रूद्र का जाप करंे। मंगल -राहू में नाग का मृत्युंजय का जाप करें। मंगल गुरू में शिव सहस्त्रनाम करें। मंगल-शनि में मृत्युंजय जाप करें।
राहु - गुरू-स्वर्ण प्रतिमा दान और शिव पूजन करंे।
गुरू - गुरू दशान्तरदशा में शिव जप, रूद्र जप और गोदान करें। गुरू-शनि में मृत्युंजय जाप करें। शुक्र, केतु, राहु मे शिव सहस्त्रनाम तथा मृत्युंजय जाप करें।
कालसर्प दोष निवारणः - चांदी के नाग -नागिन का विसर्जन और शिव पूजा करें।
शीघ्र विवाहः - पार्वती पूजन करें तथा शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
मारक दशाः - मृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
बीमारीः - रक्तचाप, पागलपन, हदय की बीमारियों में रूद्राक्ष धारण करें और शिव पुजा करें।
नटराजः - शिव ने चारों वेंदो में से एक-एक तत्व का संग्रह करके ’नाट्य वेद’ का निर्माण किया जिसमें ऋग्वेद से पाठ्य, सामवेद - गीत, यजुर्वेद-अभिनय, अथर्ववेद से रसों का संग्रह किया। शिव डमरू से जो ध्वनियां निकली, उसी से व्याकरण शास्त्र के 14 सूत्र निकलें, तभी इनका नाम नटराज रखा गया।
शिव पूजा - रात्रि के चार प्रहर में प्रथम प्रहर में दुग्ध/जल धारा, द्वितीय प्रहर में दही/खीर, तृतीय प्रहर में घी अनार का अध्र्य या नैवेद्य चतुर्थ प्रहर में मधु/फलों का रस, प्रत्येक प्रहर में विसर्जन और माला दुगनी करें। प्रभात में विसर्जन उपरान्त व्रत कथा सुनकर अमावस्या को प्रार्थना करें।
राशि का आधार और रूद्राक्ष धारण - मेष राशि - 5,14 माुखी रूद्राक्ष धारण, 3 मुखी त्याज्य, वृषभ 4,6,13 मुखी रूद्राक्ष , मिथुन - 8 मुखी धारण , 5 मुखी त्याज्य , कर्कः 1,2,14 मुखी सिंहः - 10,12 मुखी धारण ,3 मुखी त्याज्य , कन्याः - 1,8,13 मुखी , तुलाः- 1,9,10,13 मुखी धारण , वृश्चिकः - 1,2,14 मुखी धारण, 3 मुखी, धनुः - 10, 12 मुखी, मकरः - 1,6,9,14 मुखी धारण, 5 मुखी त्याज्य, कंुभः - 7,14, मुखी धारण, मीनः 1,12,13 मुखी धारण।
गरूड़ पुराण के अनुसार पूजा अर्चना के लिए विविध पदार्थों से करीब 40 प्रकार के शिवलिंग बनाएं जाते हैं।
किससे निर्मित किसलिए
जौ, गेंहु और चावल के आटे से पुत्र लाभ और श्री पुष्टि के लिए।
हरताल, त्रिकुट से वशीकरण।
स्वच्छ कपिल वर्ण के गोबर से निर्मित ऐश्वर्य।
पारद से धन, ज्ञान, सिद्धि तथा ऐश्वर्य।
पीतल और कांसा निर्मित मुक्तिप्रद।
सीसा निर्मित शत्रुनाशक।
अष्टधातु से सर्वसिद्धिप्रद।
अष्ट लौहजात से कुष्ठनाशक।
स्फटिक से सर्व कार्य।
स्वर्ण निर्मित माहमुक्तिप्रद।
मौक्तिक सौभाग्यकर।
गुडोत्य प्रीति बढ़ाने।
शर्करामय सुखप्रद।
तिल पिष्टोत्थ लिंग अभिलाषा सिद्धि।
धान्यज धान्यप्रद।
फलोत्य फलप्रद।
भस्मय सर्वफल।
केशास्थि सर्व शत्रुनाशक।
दधिदु़ग्धो कीर्ति, लक्ष्मी तथा सुख।
सीताखण्डमय आरोग्य लाभ।