JRK Entertainment

JRK Entertainment Entertainment

24/10/2025

जब दूसरा विश्वयुद्ध समाप्त हुआ तो अमेरिका के पास 22000 टन सोना जमा हो चुका था। स्वाभाविक था कि यूरोपीय देशो ने सोना बेचकर उससे हथियार खरीदे थे।

युद्ध के बाद वाशिंगटन मे सभी देशो की मीटिंग हुई और यही समस्या रखी गयी कि किस मुद्रा मे व्यापार करें...?

क्योंकि ब्रिटिश पाउंड की स्थिति खराब थी।
तब अमेरिका ने कहा कि डॉलर मे लेन देन करो।

भारत चीन को डॉलर देगा, चीन चाहे तो इस डॉलर को आगे प्रयोग करें या फिर अमेरिका को देकर सोना ले जाए क्योंकि अमेरिका के पास सोने की कमी नहीं थी।

28 ग्राम सोने के बदले 35 डॉलर का मूल्य तय हुआ।

इस तरह सभी देश खुश हो गए और डॉलर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा बन गया। अमेरिका पर भी दबाव था कि ज्यादा डॉलर ना छापे अन्यथा उतना गोल्ड कहाँ से लाएगा?

1960 मे सोने के भाव मे बढ़ोत्तरी हुई,
28 ग्राम सोना 40 डॉलर तक पहुँच गया।

ऐसे मे लोग 35 डॉलर मे अमेरिका से गोल्ड खरीदते फिर 40 डॉलर मे लंदन के गोल्ड एक्सचेंज पर बेच देते।

उस समय ब्रिटेन को लोन चाहिए था इसलिए अमेरिका ने ब्रिटेन के मुँह मे पैसे भरकर यह मार्केट ही बंद करवा दिया।

यही कारण है कि आज भी दोनों के रिश्ते अटूट है क्योंकि मज़बूरी के साथी है।

15 अगस्त 1971 को अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन घोषणा कर देते है कि अब से डॉलर के बदले गोल्ड वाली स्कीम ही बंद।

ये विश्व को धोखा था....
मगर निक्सन को इसकी परवाह नहीं थी।

दुनिया का हर देश डॉलर लिये बैठा था
वो इसे फाड़ भी नहीं सकता था,

उस समय डॉलर को बचाना अमेरिका से ज्यादा दुनिया का सिरदर्द बन गया क्योंकि यदि डॉलर खत्म हो गया तो आपके पास तो विदेशी मुद्रा भंडार ही नहीं बचा।

उसी बीच अरब देशो मे तेल निकला,
इन अरब देशो मे राजपरिवार का शासन था जिन्हे हमेशा क्रांति होने का डर था। अमेरिका ने इन्हे सुरक्षा दी और सुनिश्चित किया कि ये डॉलर मे ही तेल बेचे।

जाहिर है ज़ब तेल डॉलर मे मिलेगा तो अन्य देशो के लिये डॉलर का रिजर्व रखना मज़बूरी होंगी।

ज़ब बैंकिंग सिस्टम उन्नत होने लगा तो अमेरिका ने स्विफ्ट सिस्टम मे खुद को आगे किया।

ये ऐसा होता है कि मानो आपको SBI से न्यूजीलैंड की किसी बैंक मे पैसे भेजना है तो जरूरी नहीं कि दोनों बैंक एक दूसरे को जानते हो। ऐसे मे पहले पैसा अमेरिकन बैंक जाएगा और वहाँ से न्यूजीलैंड।

जाहिर है डॉलर का रोल यहाँ भी आएगा।

हालांकि इसी स्विफ्ट को चुनौती देने भारत का UPI आया है, अब आप समझ गए होंगे कि राहुल गाँधी और पी चिदंबरम इसके विरोध मे क्यों थे?

वे बेवकूफ नहीं है....
बस अमेरिकी डॉलर का नमक अदा कर रहे है।

बेवकूफ तो हम है जिन्हे उनकी आवाज मे लोकतंत्र दिख रहा है। खैर डॉलर के डोमिनेशन की कहानी यही है,

अमेरिका अरबो डॉलर खर्च करता है,
ताकि अन्य देशो मे राजनीतिक हस्तक्षेप कर सके।

अमेरिका के लिये बेहद जरूरी है कि किसी भी देश की सरकार डॉलर का विरोध ना करें।

UPI आ गया तो स्विफ्ट को खा जाएगा इसलिए पहले NGO को फंडिंग होती है फिर राहुल गाँधी और चिदंबरम जैसे लोग UPI के खिलाफ बोलते है।

सद्दाम हुसैन करीब 25 वर्ष से तानाशाह था
लेकिन लोकतंत्र की आड़ मे उसे तब ही मारा गया ज़ब उसने डॉलर को चुनौती दी।

ये हस्तक्षेप करने के लिये अमेरिका को अरबो डॉलर खर्च करने पड़ते है एक इकोसिस्टम बनाना पड़ता है।

अब आपको अमेरिका की ये नीति चाहे जैसी भी लगी हो लेकिन उसके अर्थशास्त्रियों की प्रशंसा करनी होंगी। इसमें हमारे लिये भी कुछ सबक है।

आज ट्रम्प है, कल बाइडन थे, परसो ओबामा थे तो नरसो बुश थे। सभी ने अमेरिका के हित मे ही निर्णय लिये है ना कि भारत के हित मे, इसलिए हमें किसी का प्रशंसक होने की जरूरत नहीं है।

हमें सिर्फ अपना हित देखना है।

भारत सरकार ने अपने प्रयास तेज कर दिये है,
अरब देशो से संबंध सुधारकर UPI को वहाँ भी ले जा रहे है इसलिए नूपुर शर्मा जैसे केस मे थोड़ा झुकना पड़ता है।

यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के लिये हमें 1947 वाला विश्वसनीय अमेरिका बनना है इसलिए सीधे किसी भी देश पर मिलिट्री एक्शन लेकर युद्ध के हालात नहीं बना सकते।

हर चीज बोलने लिखने की नहीं होती,
नागरिको को अपने विवेक का भी प्रयोग करना होगा।

आपको समझना होगा कि भारत मोदी युग मे अचानक इतना कैसे बदलने लगा।

हो सकता है हम सुपर पॉवर ना बन सके
मगर प्रयास भी ना करें ये कैसे संभव है।

इन सबमे समय लगेगा तब तक राहुल गाँधी हजारों बार जाति परस्त और उद्योग विरोधी बातो मे उलझायेगा।

कई राज्यों को मणिपुर बनाने का प्रयास होगा, लेकिन आपको समझना होगा कि ये अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र है।

इस स्टेज पर आकर....
हम देश का सौदा नहीं कर सकते।

10/04/2025

आज एक दिलचस्प मैसेज मिला:

अंग्रेज़ी में बीमार को सिक कहते हैं

खुशवंत सिंह लिखते हैं

एक बार मैं मुंबई से सिंगापुर की यात्रा कर रहा था।

बगल की सीट पर बैठी एक महिला मुझे देखती रही.

मैं समझ गया कि इस औरत ने पहले कभी किसी सिख को नहीं देखा था।

उड़ान के बीच में जब चाय और नाश्ता परोसा गया, तो मैंने उस महिला से बातचीत की।

उसका नाम मार्गरीटा था और वह स्पेन की रहने वाली थी।

बातचीत के दौरान उसने पूछा, "आप क्या हैं?"

मैंने उत्तर दिया, "मैं सिख हूं।"

(वह समझी मैं सिक यानी बीमार हूँ )

“मुझे क्षमा करें,” युवती ने कहा, “आशा है कि तुम शीघ्र ही स्वस्थ हो जाओगे।”

इस पर मैंने कहा, "नहीं प्रिय, मैं शरीर से सिक नहीं हूं, मैं धर्म से सिख हूं।"

महिला बहुत प्रसन्न हुई और मुझसे हाथ मिलाते हुए बोली, "आपसे मिलकर अच्छा लगा; मैं भी धर्म को बीमारी मानती हूँ।"

- खुशवंत सिंह

08/04/2025

पत्नी किसी अन्य पुरूष से पुत्र प्राप्त कर ले, तो उस पर किसका अधिकार_.?*

*एक गाँव में एक गरीब आदमी रहता था। उसकी शादी हो गई।*
*कुछ दिनों बाद वह पत्नी से बोला - मैं बाहर व्यापार करने जा रहा हूँ, आज ही के दिन एक बरस बाद लौट आऊँगा!! ऐसा कह कर वह चला गया.!*

*पति वहाँ व्यापार में व्यस्त हो गया. पत्नी यहाँ अकेली थी, जो रोज सुबह नहा धोकर पैदल ही सब्जी खरीदने जाती थी.*

*उसी बाजार में एक धनवान पुरूष भी रोज कार से सब्जी खरीदने आता था, वह रोज इस महिला को आते हुए देखता था. एक दिन वह उस महिला से बोला - आओ मैं आपको घर तक छोड़ दूँगा.*

*नहीं! मै चली जाऊँगी.!*

*डरो मत !! मेरा घर भी अगली गली में है, मैं आपको सकुशल पहुँचा दूँगा.*

*वह स्त्री कार में बैठ गई. उस पुरूष ने शांति शालीनता के साथ उस स्त्री को उसके घर के सामने उतारा और चला गया.*

*अब यह रोज का क्रम बन गया.*

*एक दिन उस पुरूष ने उस स्त्री से स्नेह तथा आदर से कहा - आओ चाय पीकर चली जाना. स्त्री ने उसका आग्रह स्वीकार कर लिया तथा चाय पीकर चली गई. सिलसिला आगे बढ़ा भोजन भी होने लगा, उन दोनों के मध्य प्रेम उत्पन्न हो गया और परिणाम हुआ - एक सुन्दर पुत्र.*

*वह स्त्री अपने पुत्र को उस पुरूष के घर ही रखती व नित्य एक बार जाकर उसे लाड़ प्यार से दूध पिला कर लौट आती.*

*एक बरस पूरा हो गया. पति के लौट आने की तारीख़ आ गई.!! पति आ गया.!! पत्नी का ध्यान पुत्र में होने के कारण वह पति की बातों पर ध्यान न दे पा रही थी. उसे अशांत व खिन्न देखकर पति ने उससे पूछा - सच सच बताओ क्या हुआ.?*

*पत्नी ने सब बात कह दी और पुत्र की याद आना बताया!!*

*पति बोला - अपना पुत्र है! जा ले आ!!*

*पत्नी गई और जाकर उस पुरूष से बोली कि मेरे पति आ गये हैं और मैं अपना पुत्र लेने आई हूँ .!*

*वह पुरूष बोला - पुत्र नही दूँगा, वह मेरा है.*

*अब स्त्री और उसका पति दोनों पुत्र माँग रहे हैं तथा वह पुरूष पुत्र को अपने पास रखना चाहता है। मामला न्यायालय में गया। न्यायाधीश के समक्ष सबने अपने तर्क़ सुनाए।*

*(1) _पति ने कहा_ - जब मेरी शादी हुई तो मेरे पास जमीन थी। मैं व्यापार करने परदेश गया तथा यह कहकर गया कि जब बोवनी का समय आएगा तब आ जाऊँगा. परन्तु यदि किसी कारण न आ पाऊँ तो तू किसी से खेत बुआ लेना, बरसात शुरू हो गई और मै न आ पाया तो मेरी पत्नी ने मेरा खेत दूसरे से बुआ लिया, अब बोने वाला व्यक्ति कह रहा है कि फसल मेरी है!! तो फसल तो खेत मालिक की ही रहेगी!! बुआई करने वाला चाहे तो मजदूरी ले ले!! परन्तु फसल पर अधिकार तो खेत मालिक का ही रहेगा।।*

*(2) _उस पुरूष ने कहा_ - मैं एक रोज सैर करने गया, सड़क पर मुझे एक खाली डिब्बी पड़ी मिली, मैं ने इधर उधर देखा - मुझे कोई डिब्बी का मालिक दिखाई न दिया, डिब्बी सुन्दर थी!*

*मैंने डिब्बी उठा ली तथा अपने जेब से एक हीरा निकाल कर डिब्बी में रख दिया, दूसरे दिन मुझे एक आदमी मिला, वह कहने लगा यह डिब्बी तो मेरी है!! मैंने डिब्बी में से हीरा निकाल कर अपने पास रख लिया और डिब्बी उसके मालिक को लौटा दी. अब वह आदमी कहता है कि हीरा भी मुझे दो!! हीरा तो मैने रखा था तो हीरा तो मैं ही रखूँगा, उसकी डिब्बी मैं वापस देने को तैयार हूँ पर हीरे का मालिक तो मै ही हूँ!!*

*(3) _पत्नी ने कहा_ - जब मेरी शादी हुई तो मेरे पिता ने एक भैंस दी थी, भैंस दूध देती थी, एक दिन मेरे पास जामन नहीं था, मैंने एक पड़ौसी से माँगकर जामन ले लिया, दूध जमा लिया फिर उस दही को मथ कर घी निकाला! अब वह जामन देने वाला कह रहा है कि घी मेरा है !! घी तो उस का ही रहेगा जिसका दूध था!! जरा सा जामन दे देने से घी उसका कैसे हो सकता है? वह चाहे तो जामन के पैसे ले ले??*

*तीनों के अपने अपने किस्से व तर्क थे, तीनों की बात सुनकर न्यायाधीश महोदय ने सन्यास ले लिया।*

*अब पुत्र किसे मिलना चाहिये? है क्या जवाब किसी के पास.!*🤔🤔

विषय पर विचार करके लाइक कमेंट और शेयर करके पेज को फोलो भी करें ।

01/01/2025

सन् 2019 में लिखी गई कुछ लाईनो को दुबारा जोड़तोड करके .......
किसी शहर की मीणा कालोनी मे बैठी अठाली महिलाओं की मंडली के बातचीत शब्द मेने अपने अनुसार सिर्फ मनोरंजन के लिए लिखे है जो कि इस प्रकार है-
मेरा उदेश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाना नही है
टेसण मास्टर की लुगाई......
काई कुन करै बहणा , झंडी दिखावै रेलगाड़ी कू , आवै जब इस्या रहवै जाणै याकू हल मे जोड्यौ दिखै , और म्हारे समझ नही आवै जब इतेक काम रहवैः तो या फेसबुक किस्या चलावै म्आ । मे तो थक गी बहणा कहती कहती , कोई गेबी ये भायेलाना न को फोन आजाय तो इस्या बात करेगो जिस्या नयी लुगाई सू बात कर रियौ है और हम सोती टेम नेक आवाज कर देवा तो इस्या चिखाडेगो जिस्या याका कान मे सूतडी धर दी ।

ड्राइवर की लुगाई
कछु मत कह री बहणा ये रेलवे बाडा न की तो , म्हारा डोकरा ने न्यो कह दी चाय छौरी बिना नौकर के दे दू पिण डिलाईबर के नही दू,पिण म्हारो फूफो ले बैठ्यौ , कतई न्यौ कहवै सगाई तो न्या ही करेगा । बिस्या तो सब मौज है बहणा , पिसा भी खूब मिले , मोकू कछु चीज की कमी कोन , पिण कभी दो दिन मे तो कभी तीन दिन मे घर आवै , और कतई क्वार्टर मे इस्या पिड्यौ रहवै जाणै ट्रेन नही ऊँटगाडी चलार आयौ । गेबी छोरा छौरी न कू स्कूल सू लेर सब्जी तक को सब काम मे करू , बाकौ तो इतेक भी सायरो कुनी के महिना को सामान तो लुआ लावे।

टीचर की लुगाई
न्या ही पिड्यौ रहवै सारे दिन , जावै सुबह और 12 बिजा तो न्या दिखै छाती पे , हे बहणा थमारे सही है हाली सब दुनियाँ फ्रि रेलगाड़ी मे तो घूम लेवे , न्या तो मेने करौली का मदनमोहन की 17 बार कहदी पिण रसकै ही कुनी , म्हारी जीजी के लारै पेल की चौथ पे बरवाडा मे जा आई , नइ याकै भरोसे तो न्या भी कुन जाती । छौरा कू एक साईकिल दिला लायौ ,तीन दिन थूथरो सुजा लियो बहणा ,मेने कह बड दी के या छोरो पैदल स्कूल जावै।
सबडी दुनियाँ खाटू श्याम जा आई , पण या लोभी। सर्दी न छुट्टी में सारे दिन पालक पितकाली न में पाणी देतो रहवै ,पण घूमवे के नाम याको ।

#बैंक बाले की लुगाई
काई बताऊ रै जीजी , अब तो बैंक की नौकरी है ही खराब , पहले तो 9 बिजा जावेआ और 5 बिजा आ जावेआ । अब तो 8 बजे ही निकड लेवे ,जाणै इनकू ही लगाणो है म्हा झाडू , । एक दो और आवै आडी/टेडी जात की चिकली सी दो चार छोरी बैंक मे , सारे दिन करै उनसू पंचायत , मेरी सब्जी की तो कभी बडाई कुन करै , और वे दयारी न को आचार भी पनीर लगे।

#ग्रूप डी बालै की लुगाई
काई बताऊँ काकी , तनखा तो सबडी खाबा मे ही चली जाय , या तो हमारा पापा ने प्लांट दे दियो न्या , जेसू बणा लिया दो कमरा , गरीब आदमी है कर रिया हा टाईमपास , ये तो थमारे पास बैठ जामा , नही दो गार्डड्राईबर न की लुगाई है लोहडी , पीसा पीसा पीसा , मरी जा रही है कतई , भगवान जाणै कणा काई बतडावै माईलेज घंटा और किलोमीटर । पहले तो काकी थमाराशछौरी की ट्रेक पे ही , पण अब तो गेट पे लगा दी , बेस बैठ्या बैठलठ्या झंडी बतावै ।

#टेक्निशियन की लुगाई
हमारे तो दो घंटा जावै , फेर सारे दिन क्वार्टर पे ही रहवै , कछु काम कुनी , पैसा न को काई गेबी , आराम होणो चाहिए । मोकू तो लगे ही कुनी बे नौकरी भी करै के , । उनको तो दो जगह सू आशगियो ड्राइवर मे नंबर पर मेने कतई मना कर दी ।

#पुलिस बाले की लुगाई
जब सू लाईन मे ड्यूटी लगी है न तब सू तो कतई खेत जार कुन समाडे पप्पू की मम्मी , मे ही जाऊ सातदिन मे घर , गेबी निंदणी , कटाई , भराई, सबडो काम मे करू । आज आई बा मास्टर की लुगाई दुध लेवा , मेने कह दी बहणा तडके सू मित आज्यौ दुध लेवा मकान पे , पण बट्टौ मत लगाये म्हारा दुध के , की पाणी मिलावै । कतई भैंस ही सूख गी ,
#टिप्पर की लुगाई - का बेचे जे थम ...? नौकरी नौकरी नौकरी , ऐ बडौ री । ब्लेक स्कार्पियो बुक कराई है , या थार मे तो भरोटा लायेगे भरोटा ।
🙏💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

पूरी कहानी देशी शब्दो में......बताओ

Address

Jodhpur

Telephone

+919983311897

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when JRK Entertainment posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to JRK Entertainment:

Share