17/12/2025
Vasundhra Raje क्यों चुनौती बनी Modi-Shah के लिए?
राजस्थान में इन दिनों एक ही सवाल छाया हुआ है कि अब वसुंधरा राजे का क्या होगा? मोदी-शाह की जोड़ी ने भाजपा अध्यक्ष बनने के उनके सपने पर पानी फेर दिया बिहार से नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर। एक तरफ ये सवाल है और दूसरी तरफ जैसे उन पर कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा हो। न तो उन्होंने नबीन की नियुक्ति पर कोई राजनीतिक प्रतिक्रिया व्यक्त की और न ही उन्होंने इस नियुक्ति के बाद कोई राजनीतिक बयान ही दिया। वैसे वसुंधरा यह तो कह ही चुकी हैं कि पद तो किसी नेता का नहीं होता, वह तो जनता का होता है।
अंता उपचुनाव के बाद से वे भले ही किसी राजनीतिक कार्यक्रम में नहीं दिखी और न ही कोई राजनीतिक बयान दिया, लेकिन पिछले दो-तीन महीनों से राजस्थान में वसुंधरा की सक्रियता कम होने का नाम ही नहीं ले रही। वे राजस्थान के गांव-खेड़ों तक जा चुकी हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेती हैं तो उनका जलवा अलग ही दिखाई देता है। कुल मिलाकर उनका जनाधार है कि दो साल मुख्यमंत्री नहीं रहने के बाद भी कम नहीं हो रहा।
वैसे आजकर सोशल मीडिया का जमाना है और वे इस मामले में भी राजस्थान के अन्य नेताओं के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय हैं। फेसबुक पर तो उनके 9.5 मिलियन यानी करीब 95 लाख फॉलोवर हैं। इतने फोलोवर तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी नहीं है। उनके खाते में यह संख्या 4.1 मिलियन ही है। एक्स पर जरूर वे गहलोत के 5.1 मिलियन फॉलोवर्स के मुकाबले कुछ कम 4.1 मिलियन पर हैं। प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तो इस मामले में कहीं मुकाबले में ही नहीं दिखते। फेसबुक पर तो उनके 709 के फोलवर्स के मुकाबले उप मुख्यमंत्री के फॉलोवर्स की संख्या 7.31 मिलियन के साथ ज्यादा है।
सवाल उठता है कि न तो धरातल पर और न ही सोशल मीडिया पर वसुंधरा की लोकप्रियता कम हुई है, फिर उन्हें मोदी-शाह की जोड़ी किनारे करने पर क्यों लगी हुई है। दरअसल, मोदी-शाह युग में नई राजनीति का उदय हुआ है, जिसमें चुनाव जीतने के साथ साथ बिना जनाधार वाले नेताओं को प्राथमिकता मिल रही है। वसुंधरा इसमें फिट नहीं बैठती। उनकी तरह और राज्यों में भी स्थापित क्षत्रप किनारे किए जा रहे हैं। इधर, वसुंधरा का राजस्थान में एकछत्र नेतृत्व है। वे केंद्रीय नेतृत्व यानी मोदी-शाह के कई फैसलों से असहमत होती आई हैं। इससे उनका मोदी शाह की केंद्रीकृत राजनीतिक कमांड नीति से टकराव होता है। यही कारण हैं कि वे आज भी खासकर अमित शाह के लिए ऐसी चुनौती बनी हुई हैं, जिने न उगलते बनें और न ही निगलते।
इसका मतलब क्या हुआ? क्या वसुंधरा का राजनीतिक भविष्य खत्म होने वाला है? कई विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। वे कहते हैं कि वसुंधरा राजे का भविष्य खत्म तो नहीं हुआ, लेकिन यह अभी संक्रमणकाल में है। भले ही हाल ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पद उनके हाथ से निकल गया, लेकिन ये उनके सियासी जीवन का आखिरी अध्याय नहीं माना जा सकता।
इस विश्लेषण में जानिए-
-अब वसुंधरा राजे का क्या है राजनीतिक भविष्य
-वे क्यों चुनौती बनी हुई हैं मोदी-शाह के लिए
-क्या उनका ठोस जनाधार कर रहा है अमित शाह को सोचने के लिए मजबूर
-क्यों भजनलाल शर्मा और अन्य नेता नहीं कर पा रहे वसुंधरा का मुकाबला
पूरा विश्लेषण सुनिए मेरे यू ट्यूब चैनल चौथा पाया पर।