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Vasundhra Raje क्यों चुनौती बनी Modi-Shah के लिए?राजस्थान में इन दिनों एक ही सवाल छाया हुआ है कि अब वसुंधरा राजे का क्या...
17/12/2025

Vasundhra Raje क्यों चुनौती बनी Modi-Shah के लिए?

राजस्थान में इन दिनों एक ही सवाल छाया हुआ है कि अब वसुंधरा राजे का क्या होगा? मोदी-शाह की जोड़ी ने भाजपा अध्यक्ष बनने के उनके सपने पर पानी फेर दिया बिहार से नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर। एक तरफ ये सवाल है और दूसरी तरफ जैसे उन पर कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा हो। न तो उन्होंने नबीन की नियुक्ति पर कोई राजनीतिक प्रतिक्रिया व्यक्त की और न ही उन्होंने इस नियुक्ति के बाद कोई राजनीतिक बयान ही दिया। वैसे वसुंधरा यह तो कह ही चुकी हैं कि पद तो किसी नेता का नहीं होता, वह तो जनता का होता है।

अंता उपचुनाव के बाद से वे भले ही किसी राजनीतिक कार्यक्रम में नहीं दिखी और न ही कोई राजनीतिक बयान दिया, लेकिन पिछले दो-तीन महीनों से राजस्थान में वसुंधरा की सक्रियता कम होने का नाम ही नहीं ले रही। वे राजस्थान के गांव-खेड़ों तक जा चुकी हैं। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेती हैं तो उनका जलवा अलग ही दिखाई देता है। कुल मिलाकर उनका जनाधार है कि दो साल मुख्यमंत्री नहीं रहने के बाद भी कम नहीं हो रहा।

वैसे आजकर सोशल मीडिया का जमाना है और वे इस मामले में भी राजस्थान के अन्य नेताओं के मुकाबले ज्यादा लोकप्रिय हैं। फेसबुक पर तो उनके 9.5 मिलियन यानी करीब 95 लाख फॉलोवर हैं। इतने फोलोवर तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी नहीं है। उनके खाते में यह संख्या 4.1 मिलियन ही है। एक्स पर जरूर वे गहलोत के 5.1 मिलियन फॉलोवर्स के मुकाबले कुछ कम 4.1 मिलियन पर हैं। प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तो इस मामले में कहीं मुकाबले में ही नहीं दिखते। फेसबुक पर तो उनके 709 के फोलवर्स के मुकाबले उप मुख्यमंत्री के फॉलोवर्स की संख्या 7.31 मिलियन के साथ ज्यादा है।

सवाल उठता है कि न तो धरातल पर और न ही सोशल मीडिया पर वसुंधरा की लोकप्रियता कम हुई है, फिर उन्हें मोदी-शाह की जोड़ी किनारे करने पर क्यों लगी हुई है। दरअसल, मोदी-शाह युग में नई राजनीति का उदय हुआ है, जिसमें चुनाव जीतने के साथ साथ बिना जनाधार वाले नेताओं को प्राथमिकता मिल रही है। वसुंधरा इसमें फिट नहीं बैठती। उनकी तरह और राज्यों में भी स्थापित क्षत्रप किनारे किए जा रहे हैं। इधर, वसुंधरा का राजस्थान में एकछत्र नेतृत्व है। वे केंद्रीय नेतृत्व यानी मोदी-शाह के कई फैसलों से असहमत होती आई हैं। इससे उनका मोदी शाह की केंद्रीकृत राजनीतिक कमांड नीति से टकराव होता है। यही कारण हैं कि वे आज भी खासकर अमित शाह के लिए ऐसी चुनौती बनी हुई हैं, जिने न उगलते बनें और न ही निगलते।

इसका मतलब क्या हुआ? क्या वसुंधरा का राजनीतिक भविष्य खत्म होने वाला है? कई विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं। वे कहते हैं कि वसुंधरा राजे का भविष्य खत्म तो नहीं हुआ, लेकिन यह अभी संक्रमणकाल में है। भले ही हाल ही राष्ट्रीय अध्यक्ष पद उनके हाथ से निकल गया, लेकिन ये उनके सियासी जीवन का आखिरी अध्याय नहीं माना जा सकता।

इस विश्लेषण में जानिए-
-अब वसुंधरा राजे का क्या है राजनीतिक भविष्य
-वे क्यों चुनौती बनी हुई हैं मोदी-शाह के लिए
-क्या उनका ठोस जनाधार कर रहा है अमित शाह को सोचने के लिए मजबूर
-क्यों भजनलाल शर्मा और अन्य नेता नहीं कर पा रहे वसुंधरा का मुकाबला

पूरा विश्लेषण सुनिए मेरे यू ट्यूब चैनल चौथा पाया पर।

भजनलाल को क्यों सताई छवि की चिंता?राजस्थान में सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की...
09/12/2025

भजनलाल को क्यों सताई छवि की चिंता?

राजस्थान में सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सूबे से विदाई की अटकलों के बीच अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के माथे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने लगी हैं। उन्हें अपनी सरकार के दो साल पूरे होने से कुछ दिन पहले ही अपनी छवि की चिंता सताने लगी तो वे पिछले दो-तीन दिन से 'नायक' बनने की पुरजोर कोशिशें कर रहे हैं।

भाजपा के साधारण से कार्यकर्ता और राजस्थान भाजपा के प्रदेश कार्यालय में सादगी के साथ महामंत्री का काम करने वाले भजनलाल शर्मा को दो साल पहले मुख्यमंत्री बनाकर मोदी शाह ने सभी को चकित कर दिया था। अब उनकी सरकार के दो साल 15 दिसम्बर को पूरे होने वाले हैं। राज्य स्तरीय समारोह में इसका जश्न मनाया जाना है, लेकिन मुख्यमंत्री अब कहीं जाकर अपनी छवि की ओर ध्यान देने लगे हैं। हालांकि उनकी निष्ठा और ईमानदारी पर कोई संदेह नहीं कर सकता, लेकिन दो साल में वे अपने लिए एक सकारात्मक परसेप्शन नहीं बना पाए। कई बार उन्हें बदलने की चर्चाएं भी हुई, लेकिन जाहिर है कि जब कोई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कहने पर मुख्यमंत्री बना हो तो उसे हटा पाना आसान नहीं होता।

लेकिन हकीकत में भजनलाल की आम जनता में एक धाकड़ प्रशासक वाली छवि नहीं बन पाई। अब इसका अहसास शायद मुख्यमंत्री को हुआ है या फिर उन्हें दिल्ली प्रवास के दौरान इस दिशा में इशारा किया गया है और वे 'आम आदमी का मुख्यमंत्री' बनने की कोशिश पर निकल पड़े हैं। जिस तरह उन्होंने समस्या समाधान के लिए बने राजस्थान संपर्क पोर्टल के कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर एक ऑपरेटर के रूप में आम आदमी से बात की और कुछ ही घंटों में समाधान हो गया और जिस तरह उन्होंने भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टोलरेंस की नीति के अनुरूप जल जीवन मिशन में गड़बड़ी के लिए अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे बड़े अधिकारियों के खिलाफ भी जांच की अनुमति दे दी, उससे यह लगता है कि अब पेपर लीक पर पूरी तरह अंकुश जैसे बड़े काम का भी जनता के बीच संदेश नहीं पहुंच पाने से उन्होंने सबक लिया है और अब कभी कंट्रोल रूम तो कभी मॉर्निंग वॉक पर जयपुर के जवाहर सर्किल पर आम लोगों के बीच पहुंचने जैसे कदमों से वे नई छवि गढ़ने का प्रयास कर रहे हैं।

पूरा विश्लेषण सुनिए मेरे यू ट्यूब चैनल चौथा पाया पर। लिंक कमेंट बॉक्स में।

यहां भी है बदलाव की बयार!राजस्थान में जैसे बदलाव की बयार है। एक तरफ भाजपा में वसुंधरा राजे को लेकर हलचल मची है तो दूसरी ...
08/12/2025

यहां भी है बदलाव की बयार!

राजस्थान में जैसे बदलाव की बयार है। एक तरफ भाजपा में वसुंधरा राजे को लेकर हलचल मची है तो दूसरी तरफ कांग्रेस में तूफान से पहले की शांति है। कारण कि Congress भी बहुत जल्दी एक बड़ा बदलाव देखने वाली है राजस्थान में। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मौजूदा अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा का पांच साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। कार्यकाल वैसे तीन साल का होता है, लेकिन उदयपुर घोषणा के मुताबित दो साल कूलिंग पीरियड भी मान लें तो पांच साल पूरे हो चुके। इसके साथ ही नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की तैयारी शुरू हो चुकी है। कहा जा रहा है कि प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति व जातीय समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को एक बार फिर राजस्थान की कमान दी जा सकती है। वैसे भी जब पायलट को पिछले साल राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था तो उन्होंने कहा था कि उनकी आत्मा तो राजस्थान में बसती है। वैसे गहलोत भी कई बार कह चुके हैं कि उनकी इच्छा तो 100 साल तक राजस्थान की सेवा करने की है।

ऐसा में अभी से सवाल खड़े होने लगे हैं कि क्या पायलट का राजस्थान लौटने का सपना वाकई पूरा होने वाला है? यदि ऐसा हुआ तो दिग्गत नेता अशोक गहलोत का क्या होगा? क्या प्रदेश में एकबार फिर GehlotVsPilot होगा? या फिर गहलोत को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ लगाया जाएगा अहम भूमिका देकर?

कहते हैं ना कि राजनीति की रेखा कभी सीधी नहीं चलती। वह चलते चलते घूम जाती है। राजस्थान में भी ऐसा ही हो रहा है। चाहे भाजपा हो या फिर कांग्रेस, दोनों को ही सर्दी के मौसम में बदलाव की आग तपा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत दोनों की ही राजस्थान से विदाई हो जाती है तो ये करीब तीन दशक में पहली बार होगा कि राजस्थान में राजनीति की धुरी रहे दोनों दिग्गज कहीं और नजर आएंगे।

जानकार कहते हैं कि वसुंधरा के बारे में क्या फैसला होगा, यह तय नहीं है, लेकिन राजस्थान में नया कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष बनना तय है। पायलट के राजस्थान लौटने के चांस मौजूदा सियासी परिस्थितियां भी मजबूत करती हैं और अब गहलोत के साथ उनके सम्बन्ध इतने तनावपूर्ण नहीं हैं, लेकिन उनके लौटने के बाद अशोक गहलोत को तीन साल बाद फिर उन्हीं से चुनौती मिल सकती है तो जाहिर है कांग्रेस गहलोत और पायलट की सहमति से हो कोई फैसला करे। वैसे नए प्रदेशाध्यक्ष के लिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अभी कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव हरीश चौधरी के अलावा विधानसभाध्यक्ष रहे सी पी जोशी के नाम भी चर्चा में हैं, लेकिन आज के हालात पायलट की सम्भावना पर ज्यादा संकेत दे रहे हैं।

गहलोत को भी केंद्र की राजनीति में लाने की सम्भावना खरगे की बढ़ती उम्र और अस्वस्थता के कारण ज्यादा प्रबल होती हैं। उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसकी सम्भावना इसलिए भी बन रही है कि गहलोत कई दिनों से सोनिया गांधी और राहुल गांधी से सम्बन्ध सुधारने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।

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https://youtu.be/OPExrvzmPHo

AshokGehlot को नई भूमिका, SachinPilot लौट रहे राजस्थान! RajasthanPolitics में जैसे बदलाव की बयार है। एक तरफ BJP मे...

वसुंधरा राजे ने कर दिया बड़ा इशारा!RajasthanPolitics  में अभी एक ही नाम चर्चा में है। वह है पूर्व मुख्यमंत्री VasundhraR...
07/12/2025

वसुंधरा राजे ने कर दिया बड़ा इशारा!

RajasthanPolitics में अभी एक ही नाम चर्चा में है। वह है पूर्व मुख्यमंत्री VasundhraRaje और चारों ओर एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर वसुंधरा का होगा क्या या वे अब क्या करेंगी? क्या उन्हें वाकई राज्यपाल बनाकर राजस्थान की राजनीति से दूर किया जा रहा है या अब भी वे ModiShah की लाख कोशिशों के बावजूद RSS के बूते BJPNationalPresident की रेस में बनी हुई हैं?

जब से BJPPresidentElection की बात ने तेजी पकड़ी है, तभी से न सिर्फ नए नए नाम सामने आ रहे हैं, बल्कि मीडिया के एक वर्ग में यह बात भी तेजी से फैल रही है कि VasundhraRaje को इस पद पर आने से रोकने के लिए उन्हें Rajasthan से दूर रहने को कहा गया है। कहा गया है कि वे अपनी मर्जी बता दें कि किस राज्य का Governor उन्हें बनना है। हालांकि इस ऑफर की कहीं से न तो पुष्टि हो रही है और न ही खुद वसुंधरा राजे ने कुछ कहा है, लेकिन दो दिन पहले Ajmer प्रवास के दौरान उन्होंने एक स्थानीय न्यूज चैनल में बातचीत में इशारों इशारों में जो बातें कहीं, वे अपने आप में एक बड़ा संदेश दे गई।

RajasthanPolitics में खासकर भाजपा में कई लोग इन दिनों उनकी सक्रियता से हैरान हैं। वसुंधरा हर जिले में जा रही हैं। गांव-खेड़े में कार्यकर्ताओं से मिल रही हैं। धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में खुलकर शिरकत कर रही हैं, इसी से उनके विरोध सहमे हुए हैं। इधर, दिल्ली में उन्हें राजस्थान की राजनीति ही नहीं राज्यपाल बनाकर राजनीति से ही रुखसत करने की अटकलें चल रही हैं, लेकिन VasundhraRaje पर लगता है या तो इन बातों का कोई असर नहीं है या फिर वे एक MaturePolitician की तरह तेल देखों, तेल की धार देखों की तर्ज पर आगे बढ़ रही हैं। कुल मिलाकर वे किसी ट्रेप में फंस ही नहीं रही।

अजमेर में जब उनसे राजनीति से जुड़े सवाल किए गए तो उन्होंने भावुक होकर इशारों इशारों में ही जवाब दिए। मसलन उन्होंने यह कहकर बड़ा PoliticalMessage दे दिया कि 'मैंने कभी पद को अपना नहीं माना। यह मेरा नहीं है, यह जनता का है। जब तक लोग मुझे अपना परिवार मानते हैं, तब तक मैं उनके बीच रहूंगी।' उन्होंने कहा कि यह रिश्ता एक रात में नहीं बना, बल्कि 20 साल से ज्यादा समय में मजबूत हुआ है। लोग दूर-दूर से मिलने आते हैं, राम-राम करते हैं, गाल पर हाथ फेरते हैं। यह प्यार हर किसी को नहीं मिलता। यही मेरी पूंजी है और मैं कितनी भाग्यशाली हूं। (How Lucky I Am).

Vasundhra ने उन्हें लेकर की जा रही गुटबाजी पर भी संकेतों में ही बात की। उन्होंने कहा कि अगर कोई दो लोगों को लड़ाकर फायदा लेना चाहता है, तो वह फायदा कुछ समय का ही होता है। भगवान भी साथ नहीं देता। लंबे समय में प्यार ही रिश्ते को कायम रखता है। उन्होंने सब कुछ भगवान पर छोड़ दिया है और जनता का प्यार ही उनका कवच है। उनके इन शब्दों में भी कोई राज छिपा है कि राज्य को आगे बढ़ाने के लिए एकता और पारस्परिक सहयोग चाहिए। ये नहीं कि मैं आपको काटूं और आप सबको काटो। इस तरह से नहीं, साथ मिलकर काम करेंगे तो क्षेत्र और प्रदेश को आगे बढ़ना ही है।

वसुंधरा के ये इशारे भविष्य की राजनीति के लिए बड़ा इशारा हैं। जाहिर हैं वे कोई ऐसा कदम नहीं उठाएंगी कि अनुशासनहीनता माना जाए, लेकिन साथ ही उन्होंने अपनी ताकत का अहसास भी करवा दिया है।

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https://youtu.be/HWqD8e6zs5o

VasundhraRaje ने संकेतों में कह दी बड़ी बात! RajasthanPolitics में अभी एक ही नाम चर्चा में है। वह है ...

भाजपा में कुछ तो चल रहा है...!भाजपा में इन दिनों बड़ी हलचल है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तैयारी है। साथ ही आगे की रणनीति भ...
06/12/2025

भाजपा में कुछ तो चल रहा है...!

भाजपा में इन दिनों बड़ी हलचल है। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की तैयारी है। साथ ही आगे की रणनीति भी तेजी से घूम रही है। यहां तक की केंद्र के उत्तराधिकार की जंग भी शुरू हो चुकी है अंदर ही अंदर। इसके लिए कई नेताओं को ठिकाने लगाने की कोशिश चल रही है। कुछ का पत्ता अध्यक्ष चुनाव में काटने की तैयारी है तो कुछ के पर कतरने की कोशिशें।

यूपी में पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भाजपा के संगठन महामंत्री बी एल संतोष और संघ के सर कार्यवाह अरुण कुमार की बैठक के बाद यह हलचल ज्यादा ही नजर आ रही है। इधर राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सक्रियता पर केंद्र और खासकर गृह मंत्री अमित शाह की पैनी नजर है। उधर, दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके बयान बदले बदले से नजर आ रहे हैं। वे अब उन्होंने अपने भाषण में 2014 के नरेन्द्र मोदी की शैली अपना ली है।

एक तरफ अमित शाह की सक्रियता और भाजपा संगठन और राज्यों की सत्ता पर मजबूत होती उनकी पकड़ और चुनौती बन सकने वाले नेताओं से शह-मात का खेल, संकेत दे रहा है कि भाजपा में अंदरूनी घमासान काफी तेज होने वाला है। बताया जाता है यूपी में योगी, राजस्थान में राजे और दिल्ली में राजनाथ सिंह निशाने पर लिए जा रहे हैं।

वसुंधरा राजे को तो राज्यपाल बनाकर राजस्थान की राजनीति से दूर करने की कोशिशों की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से चल रही है, वहीं वसुंधरा के सतीष पूनिया और राजेंद्र राठौड़ जैसे विरोधियों को प्रमोट किया जा रहा है। राजे को सत्ता से पहले ही दूर किया जा चुका है राजनाथ के साथ भेजी गई पर्ची उनके हाथ से ही खुलवा कर भजन लाल शर्मा को सत्ता सौंपने के साथ।

उत्तर प्रदेश में योगी के लिए चुनौती बने केशव प्रसाद मौर्य को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। राजनाथ को भी संकेत कर दिया गया है कि अभी कोई सपना नहीं पालें। किसी ज्योतिषी सांसद मित्र की सलाह अभी काम नहीं आने वाली, यानी उन पर भी परोक्ष रूप से लगाम लगाने की तैयारी कर ली गई है। असली खेल तो भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद सामने आएगा, अभी तो इशारे मिल रहे हैं सिर्फ।

चूंकि केंद्र में भाजपा को 2024 के आम चुनाव में पूर्ण समर्थन नहीं मिला। मोदी सहयोगियों की मदद से सरकार चला रहे हैं। राजनीतिक परिस्थितयां बनती-बिगड़ती है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि मोदी का विकल्प बनने की तैयारी अभी से शुरू कर दी जाए। शाह ने ये कोशिशें काफी पहले ही शुरू कर दी थी राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में दूसरी पीढ़ी के नेताओं को पर्ची के माध्यम से आगे लाकर, लेकिन इसके पीछे उनकी यह रणनीति कई लोगों को अब समझ में आ रही है। यूपी व बिहार कब्जे में लेने के बाद महाराष्ट्र पर नजर है। इन तीनों राज्यों में 168 सीटें हैं लोकसभा की। यहां की सियासी हलचल भी कुछ संकेत तो दे ही रही है भविष्य की तैयारी के बारे में।

खैर राजनीति में जो होता है, दिखता नहीं और जो दिखता है, वह होता नहीं। संकेत पढ़ने के अपने अपने नजरिए हो सकते हैं। फिलहाल भाजपा की अंदरूनी राजनीति के इन संकेतों से बहुत कुछ सामने आने वाला है। संघ प्रमुख मोहन भागवत का इन संकेतों पर मौन भी काफी अहम है।

पूरा विश्लेषण सुनिए मेरे यू ट्यूब चैनल चौथा पाया पर लिंक को क्लिक करके।

https://youtu.be/ynhPW3wEu0g

Vasundhra की विदाई, Rajnath पर लगाम, भाजपा में घमासान? BJP में इन दिनों बड़ी हलचल है। BJPPresidentElection की तैयार...

वसुंधरा राजे को बड़ी चुनौती, अब करेगी क्या?भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पिछले एक सप्ताह से राजनीतिक सरगर्मिय...
05/12/2025

वसुंधरा राजे को बड़ी चुनौती, अब करेगी क्या?

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव को लेकर पिछले एक सप्ताह से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं, लेकिन अब मामला उत्तर प्रदेश की ओर से फंस रहा है। गृह मंत्री अमित शाह यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के धुर विरोधी केशव प्रसाद मौर्य को लगातार आगे कर रहे हैं और इसे समझते हुए खुद योगी भी हठ योग की मुद्रा में हैं। इस बात के संकेत भाजपा अध्यक्ष को लेकर पिछले बुधवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूपी से लौटे भाजपा के संगठन महामंत्री बी एल संतोष, अमित शाह और भाजपा के मौजूदा अध्यक्ष जे पी नड्डा की बैठक में मिले हैं। योगी न तो कुर्सी छोड़ने को तैयार हैं और न ही मौर्य को स्वीकार करने के लिए। इधर, यूपी के इस विवाद की आंच राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे तक पहुंचने की आशंका खड़ी हो गई है।

सियासी संकेत बहुत साफ हैं कि मोदी शाह राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन करने के मूड में कत्तई नहीं है। बल्कि देश की इस मजबूत राजनीतिक जोड़ी ने राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा राजे के विरोधियों को आगे करना तेज कर दिया है। हाल ही अमित शाह ने दो वसुंधरा विरोध नेताओं सतीष पूनिया और राजेंद्र राठौड़ को काफी अहमियत दी है। अंता उपचुनाव में हार का ठीकरा भी वसुंधरा के माथे पर फोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए मोदी शाह ने वसुंधरा के अशोक गहलोत जैसे कांग्रेस नेताओं से मधुर सम्बन्धों को आधार बना रखा है। कांग्रेस के नेता समय समय पर वसुंधरा का नाम लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते रहते हैं।

ऐसे हालातों में यह तो तय है कि मोदी शाह वसुंधरा राजे को राजस्थान की राजनीति से दूर करने का मन बना चुके हैं, लेकिन दिक्कत ये है कि वसुंधरा के मुकाबले का कोई नेता अभी यहां सामने हैं नहीं। इधर वसुंधरा लगातार सक्रिय हैं राजस्थान की राजनीति में। वे सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों के जरिए लगातार अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से मिल रही है। इसे देखते हुए खबर आ रही है कि वसुंधरा को अब राजस्थान की राजनीति से दूर करने के लिए उन्हें किसी राज्य का राज्यपाल बनाने पर विचार चल रहा है, जो आसानी से वसुंधरा राजे को मंजूर होगा नहीं।

कुल मिलाकर वसुंधरा के सामने चुनौती हैं कि क्या वे सिर्फ एक विधायक रहकर पूर्व मुख्यमंत्री के तमगे के साथ राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहना पसंद करेगी या विधायक दल और पार्टी में अपना व्यक्तिगत दबदबा साबित करते हुए कोई और कदम उठाएगी? वसुंधरा की फितरत से लगता नहीं है कि वे कोई पार्टी विरोधी कदम उठाएंगी, लेकिन यह देखना अहम हो गया है कि वसुंधरा को अगर भाजपा अध्यक्ष या राजस्थान की बागडोर नहीं सौंपकर दरकिनार किया जाता है तो क्या वे क्या करेंगी?

इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा में वही होगा, जो मोदी शाह ने तय कर लिया है। जाहिर है इन दोनों ने भाजपा अध्यक्ष का नाम भी तय कर ही रखा है, लेकिन अब इस पर सहमति बनाने की कोशिश सिरे नहीं चढ़ पा रही। मामला संघ तक जाएगा और उसकी राय अहम होगी, लेकिन सवाल फिर भी बना रहेगा कि वसुंधरा के सामने जो चुनौती है, वे उसमें क्या करेगी? क्या राजस्थान और भाजपा से उनकी राजनीति को पूरी तरह दरकिनार कर दिया जाएगा?

इस विश्लेषण में जानिए

-भाजपा की मौजूदा राजनीतिक गतिविधियों पर एक नजर
-क्या मोदी शाह ने तय कर लिया भाजपा अध्यक्ष का नाम
-यूपी के समीकरण क्यों उलझा रहे हैं फैसला
-क्या योगी आदित्यनाथ फेर रहे हैं शाह की कोशिशों पर पानी
-वसुंधरा राजे क्यों आ रही इस विवाद की चपेट में

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सलाह जो मोदी शाह को भी पसंद आई और टाल दिया ये फैसला!मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री ...
04/12/2025

सलाह जो मोदी शाह को भी पसंद आई और टाल दिया ये फैसला!

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान अचानक बुलाई गई राजस्थान कैबिनेट को लेकर मंत्रिमंडल फेरबदल की जो अटकलें लगाई गई थी, वो एक बार फिर निर्मूल साबित हुई। जानकारों के अनुसार माना जा रहा था कि मुख्यमंत्री को नए मंत्रियों व हटाए जाने वाले मंत्रियों की सूची पर हरी झंडी मिल जाएगी, लेकिन इन बैठकों के दौरान ही एक वरिष्ठ नेता का सुझाव मोदी शाह को पसंद आया और इसके साथ ही मंत्रिमंडल फेरबदल पर फिलहाल विराम लग गया।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 2 दिसम्बर को दिल्ली जाकर संसद भवन में मोदी शाह और इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा से मुलाकात की थी। इसी दौरान दिल्ली से ही मुख्यमंत्री ने अत्यावश्यक संदेश भेजकर 3 दिसम्बर को मंत्रिमंडल और मंत्री परिषद की बैठक बुलाने के निर्देश दे दिए। बैठक का नोटिस भी निकल गया। इसके बाद कई लोग यह मानने लगे कि इस बैठक में ही सभी मंत्रियों से इस्तीफे ले लिए जाएंगे और इसके साथ ही फेरबदल का रास्ता साफ हो जाएगा। सूत्रों का कहना है कि इसके बाद तस्वीर एकाएक बदली। दिल्ली में राजस्थान के एक वरिष्ठ नेता की अलग से हुई मोदी से मुलाकात हुई और इसने पूरा गणित बदल दिया। इस नेता की सलाह थी कि इस मामले में थोड़ा इंतजार और करना चाहिए। इसके पीछे हाल ही अंता उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद बने हालात भी एक कारण रहे। कहा गया कि अभी फेरबदल जैसा कदम उठाया गया तो बयानबाजी या आंतरिक गुटबाजी बढ़ सकती है। प्रदेश में पंचायत व निकाय चुनाव अप्रैल 2026 से पहले करवाए जाने हैं। इनमें परफोर्मेंस के आधार पर विधायकों को मौका देना ज्यादा बेहतर होगा। अगर अभी फेरबदल किया तो भजनलाल–वसुंधरा–संगठन समीकरण में टकराव सामने आ सकता है। किसी गुट को लगेगा कि उसे कमजोर किया जा रहा है।

कुल मिलाकर राजस्थान में फेरबदल टलने की वजह भजनलाल शर्मा के बाद मोदी शाह से एक अन्य नेता की मुलाकात है, जिसने सलाह दी थी कि अभी कदम उठाना जोखिम भरा होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि फेरबदल अब निकाय और पंचायत चुनावों के बाद ही होने की संभावना ज्यादा है।

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कुछ तो बड़ा होने वाला है भई...!मुख्यमंत्री BhajanLalSharma के अचानक दिल्ली दौरे और उनकी संसद के WinterSession के बीच PMM...
02/12/2025

कुछ तो बड़ा होने वाला है भई...!
मुख्यमंत्री BhajanLalSharma के अचानक दिल्ली दौरे और उनकी संसद के WinterSession के बीच PMModi से लगभग 25 मिनट की मुलाकात के बाद
RajasthanPolitics में बड़ी हलचल मची हुई है। इसी दौरान भजन सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय की ओर से 3 दिसम्बर को मंत्रिमंडल और इसके बाद मंत्री परिषद की बैठक बुला लिए जाने के बाद तो लगभग टल से गए CabinetReshuffle को लेकर भी कई मंत्रियों और विधायकों की धड़कनें बढ़ गई हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या Gujarat की तर्ज पर इसी बैठक में सभी मंत्रियों के इस्तीफे ले लिए जाएंगे?

दरअसल, पिछले कई दिनों से Rajasthan में अटकलें चल रही थी कि BJP4Rajasthan की नई कार्यकारिणी की घोषणा के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल जल्दी होने वाला है। कई लोगों ने तो मंत्रिमंडल फेरबदल या विस्तार 2 दिसम्बर को होने का अंदाज भी लगा लिया था, लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री BhajanLalSharma आज दिल्ली रवाना हुए तो ये सारी अटकलें धरी रह गई। फिर अंदाज ये लगाया गया कि मुख्यमंत्री PMModi को प्रवासी राजस्थान दिवस के 10 दिसम्बर को प्रस्तावित दौरे का निमंत्रण देने के लिए उनसे मुलाकात करेंगे।

PMModi से मुख्यमंत्री की मुलाकात हो गई। करीब पच्चीस मिनट चली। क्या बात हुई, यह तो सामने आने से रहा, लेकिन मान लिया गया कि अब CabinetReshuffle भजनलाल सरकार के दो वर्ष पूरे होने के मौके 11 से 15 दिसम्बर तक होने वाले कार्यक्रमों के बाद यानी जनवरी में ही होगा। इसी दौरान खबर आती है कि मुख्यमंत्री ने Cabinet की बैठक बुला ली है तो माहौल एकदम बदल गया। हो सकता है बैठक का CabinetReshuffle से कोई सम्बन्ध नहीं हो, लेकिन कई मंत्रियों व विधायकों में इससे ही खलबली मच गई और उनके दिलोदिमाग में पिछले दिनों जो Gujarat में हुआ उसका दृश्य कौंधने लग गया।

जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल का विस्तार या फेरबदल लगभग एक साल से टल ही रहा है। होगा जरूर, लेकिन कब होगा यह तय नहीं है। यह भी सम्भव है कि कुछ मंत्रियों को हटाने को लेकर दिक्कत आ रही होगी, कारण कि अब तो उन्हें संगठन में भेजे जाने के रास्ते भी लगभग बंद हो चुके हैं। अब भेजा जाता है तो मुश्किलें आएंगी ही। ऐसे में आज की मुलाकात सिर्फ आमंत्रण देने के लिए तो नहीं हो सकती, कारण कि PMModi के बाद मुख्यमंत्री ने AmitShah से भी मुलाकात की है और इससे पहले वे JPNadda से भी मिले हैं। इसलिए अचानक बुलाई गई कैबिनेट की बैठक को इससे जोड़कर देखा जा रहा है।

दूसरी तरफ देखें तो सरकार की दूसरी वर्षगांठ के कार्यक्रमों या पर्यटन व अन्य विभागों की कुछ नीतियों या सेवा शर्तों में बदलाव पर मुहर लगाने के लिए CabinetMeeting बुलाई गई हो। जो भी है, कल यानी 3 दिसम्बर को सामने आ जाएगा। फिलहाल, RajasthanPolitics में जोर की हलचल है। तय मानिए कि जो भी होगा बड़ा होगा। कब होगा, इंतजार करना पड़ेगा, कारण कि ModiShah की राजनीति को अच्छे अच्छे समझने में गलती कर देते हैं।

इस विश्लेषण में जानिए

-PMModi से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मुलाकात के क्या हैं मायने
-क्यों मची है RajasthanPolitics में हलचल
-क्या बड़ी होने वाला है BhajanLalSharma सरकार में
-मंत्रियों-विधायकों में क्यों मच गई CabinetMeeting की सूचना के बाद खलबली

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क्या अब योगी हैं निशाने पर?BJPInternalPolitics की यह बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार और संगठन की नब्ज टटोलने भाजपा के सं...
01/12/2025

क्या अब योगी हैं निशाने पर?

BJPInternalPolitics की यह बड़ी खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार और संगठन की नब्ज टटोलने भाजपा के संगठन महामंत्री BLSanthosh और RSS के बड़े नेता Arun आज यानी 1 दिसम्बर 2025 को लखनऊ पहुंचे हैं। इनकी मुख्यमंत्री YogiAdityNath के अलावा भाजपा और संघ के बड़े नेताओं और प्रचारकों के साथ बैठकें होंगी। इसकी रिपोर्ट PMModi और संघ प्रमुख MohanBhagwat तक पहुंचाने की बात की जा रही है।

इससे ही बड़ा सवाल उठने लगा है कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? यूपी में विधानसभा का चुनाव साल 2027 में होना है। वहां दो बार से योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं, लेकिन इन दिनों उनकी दोनों उप मुख्यमंत्रियों KeshavPrasadMourya और BrijeshPathak दोनों से ही नहीं बन रही। इधर, मौर्या केंद्रीय गृह मंत्री AmitShah के काफी नजदीक हैं। शाह उन्हें लगातार प्रमोट कर रहे हैं। हाल ही BiharElection2025 के दौरान उन्हें चुनाव सह प्रभारी और बाद में BJP की ओर से पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया। फिर पिछले दिनों भाजपा अध्यक्ष JPNadda के घर हुई भोज बैठक में AmitShah ने नड्डा को मौर्य का मुंह मीठा करवाने का भी इशारा किया। अब अचानक यूपी की नब्ज टटोलने के लिए बीएल संतोष व संघ प्रतिनिधि के दौर पर अरूणसिंह को लखनऊ भेजा गया है।

AmitShah के इस कदम से न सिर्फ संघ प्रमुख MohanBhagwat बल्कि खुद PMModi भी चकित हैं। आपको याद होगा कि बिहार के नतीजे आने के बाद से शाह संगठन के कामों में बहुत ज्यादा व्यस्त हैं। हाल ही रायपुर में ही डीजीपी कॉन्फ्रेंस के अलावा उनका कोई बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम भी सामने नहीं आया। उनकी भाजपा नेताओं के साथ बैठकों की जरूर खबरें सामने आई हैं। ये खबरें BJPNationalPresident के चुनाव से जोड़कर देखी जा रही है, लेकिन इसी दौरान यूपी में शाह का निशाना कुछ और ही कहानी कह रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी के विकल्प के रूप में शाह और योगी के नाम ही सामने आते हैं, लेकिन शाह की योगी के साथ कभी नहीं बनी। जिस तरह शाह ने राजस्थान में VasundhraRaje को किनारे किया है, अब सम्भवतः योगी को निशाने पर लिया जा रहा है। योगी के प्रखर हिन्दूवादी नेता होने के नाते उन्हें RSS का समर्थन मिलता रहा है, ऐसे में अब शाह ने ऐसा दांव खेला है कि खुद संघ प्रमुख भी अपने नेता की रिपोर्ट को खारिज करने की स्थिति में नहीं होंगे। वैसे भी Amit Shah राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से प्रभावी नेताओं को किनारे करने में कामयाब रहे हैं। उनकी कोशिश है कि कम मजबूत वाले नेताओं को आगे बढ़ाया जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें कोई कड़ी चुनौती नहीं मिले।

AmitShah की यूपी पर नजर भी कहीं ऐसा ही इशारा तो नहीं कर रही, इसे गहराई से देखने की जरूरत है।

क्या भाजपा 2027 विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में बड़ा राजनीतिक रीसेट करने जा रही है? क्या केशव प्रसाद मौर्य को संगठन में और मज़बूत भूमिका दी जा सकती है?
और सबसे बड़ा सवाल कि क्या YogiAdityaNath को हटाने की स्थिति नहीं बने तो केशव मौर्य को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की भी संभावना बन रही है, ताकि उन्हें योगी से ऊपर दिखाया जा सके?

इस PoliticalAnalysis में समझिए

-UttarPradesh में नेतृत्व परिवर्तन की सम्भावना
-योगी बनाम संगठन का नया समीकरण
-RSS और BJP नेताओं के संयुक्त दौरे के मायने
-KeshavPrasadMourya की राष्ट्रीय भूमिका की राजनीतिक संभावनाएं

पूरा विश्लेषण सुनिए मेरे यू ट्यूब चैनल चौथा पाया पर। लिंक कमेंट बॉक्स में।

BJPNationalPresident का चुनाव अब तो लगता है वाकई KBC (कौन बनेगा चीफ) गया है। केबीसी में एक करोड़ तक का सवाल होता है, लेक...
29/11/2025

BJPNationalPresident का चुनाव अब तो लगता है वाकई KBC (कौन बनेगा चीफ) गया है। केबीसी में एक करोड़ तक का सवाल होता है, लेकिन यहां यह एक बिलियन डॉलर का सवाल बन गया है कि कौन बनेगा BJP का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष। दिक्कत यह है कि उत्तर के जो विकल्प दिए गए हैं ABCD या E के रूप में, वे सभी सही साबित होते हैं, लेकिन वाकई सही जवाब क्या है ModiShah के अलावा कोई नहीं जानता। स्थिति यह हो गई कि जिस RSSVsBJP की बात की जा रही थी, वह भी हवा में ही झूलने लगी है।

वैसे तो BJPPresidentElection पिछले करीब एक साल से कई बार टले हैं, लेकिन इस बार लगा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का यह बयान कि BiharElection2025 के तुरंत बाद भाजपा को नया अध्यक्ष मिल जाएगा, सही साबित होने वाला है। इसे पिछले शनिवार से लगातार हो रही BJPLeaders की मीटिंगों से बल भी मिला। भाजपा संगठन चुनाव के प्रभारी K.Laxman का भाजपा मुख्यालय में कमरा नम्बर 8 भी लगातार खुलने लगा। वहां नेताओं कीआवाजाही दिखी, इससे भी जल्द चुनाव होने के संकेत मिले। और फिर जब लगातार Extension पर चल रहे मौजूदा अध्यक्ष JPNadda ने अपने घर AmitShah और BLSantosh जैसे बड़े नेताओं की मौजूदगी में प्रमुख नेताओं की भोज बैठक भी कर ली तो लगा कि अब तो एक दो दिन में फैसला हो ही जाएगा। फिर भी बात नहीं बनी। ModiShah दोनों ही रायपुर में चल रही DGPConfrence में 30 नवम्बर तक व्यस्त रहेंगे। इसके अगले दिन संसद का WinterSession शुरू हो जाएगा, जो 19 दिसम्बर तक चलेगा। इसी दौरान मळमास भी लग जाएगा, जिसमें कोई शुभ काम नहीं होता तो बात 16 जनवरी 2026 तक टल सकती है, लेकिन ModiShah ने हमेशा ही अपने फैसलों से चौंकाया ही है, तो इस बार भी चौंका दे तो अलग बात है। कई भाजपा नेता तो मान रहे हैं कि BJPPresidentElection अब WestBengalElection2026 के बाद ही होगा।

सवाल उठता है कि आखिर अब जब सब कुछ तय हो गया है तो बात बन क्यों नहीं पा रही। दरअसल, हाल ही PMModi की अयोध्या में संघ प्रमुख MohanBhagwat के साथ बंद कमरे में लम्बी मंत्रणा हुई है। इसमें कुछ तय हुआ होगा, लेकिन AmitShah को शायद संघ की ओर से सुझाए गए नाम अब भी पसंद नहीं आ रहे। वे संघ की बाकी शर्तें तो मानने के लिए राजी हैं, लेकिन चाहते हैं कि कोई उनकी पसंद का नेता ही BJPNationalPresident बनें। जो नाम ModiShah की तरफ से आ रहे हैं, उन्हें संघ एकदम स्वीकार नहीं कर रहा। ऐसे में अब उम्र का फंडा लाया गया है। यह कहते हुए कि अगले तीन सालों में कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव हैं। फिर लोकसभा के चुनाव भी 2029 में आ जाएंगे, ऐसे में NewBJPPresident पर सारा दारोमदार होगा। इसलिए ऐसा व्यक्ति हो जिसके लगातार दौरों में उम्र आड़े नहीं आए। इस वजह से ManoharLalKhattar के साथ SanjayJoshi और VasundhraRaje जैसे नाम वैसे ही साइड लाइन हो जाते हैं और फिर जिनकी सबसे ज्यादा चर्चा हो रही हैं, उनमें से DharmendraPradhan, BhupendraYadav या SunilBansal जैसे नेता को अध्यक्ष बनाया जा सकता है, जो ModiShah की इच्छा के अनुरूप काम करने से भी नहीं हिचकिचाएंगे। नाम तो वैसे ShivRajSinghChauhan का भी है, लेकिन वे किसी नेता की मनमाफिक काम करने के लिए शायद ही तैयार हों, इसलिए यह नाम भी हाशिए पर जा सकता है। कुल मिलाकर मामला RSS और AmitShah की पसंद के बीच फंसता दिख रहा है और इसके चलते चुनाव टलने की बात भी सही हो जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।

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इस टीम चयन को क्या कहिएगा...?RajasthanPolitics में जिस बदलाव की अटकलें लग रही थी, वह आखिर सामने आने लगी है। राजस्थान की ...
27/11/2025

इस टीम चयन को क्या कहिएगा...?

RajasthanPolitics में जिस बदलाव की अटकलें लग रही थी, वह आखिर सामने आने लगी है। राजस्थान की सत्ताधारी BJP की नई प्रदेश कार्यकारिणी की 27 नवम्बर को आखिर घोषणा हो गई। प्रदेशाध्यक्ष MadanRathore ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JPNadda की मंजूरी के बाद नए पदाधिकारियों की सूची जारी की। इसमें 9 उपाध्यक्ष, 4 महामंत्री और सात-सात मंत्री व प्रवक्ता तथा एक कोषाध्यक्ष व एक सह कोषाध्यक्ष के नाम शामिल हैं। गिनती के पुराने पदाधिकारियों को रिपीट किया गया है। कुल मिलाकर नई कार्यकारिणी में नए और युवा लोग हैं। GenerationChange की ओर बढ़ रही भाजपा का असर इस StateExecutive या RajasthanBJP की टीम पर भी नजर आ रहा है। यही कारण है कि 55 या 60 साल से ज्यादा उम्र के पदाधिकारी नहीं बनाए गए हैं।

नए पदाधिकारियों की खास बात यह है कि इसमें 34 नाम शामिल हैं। इनमें कोई विधायक या सांसद मूल पद पर नहीं है। मात्र दो विधायकों को प्रवक्ता बनाया गया है। यह भी शायद पहली बार हुआ है कि सात प्रवक्ताओं को भी प्रदेश कार्यकारिणी की सूची में समाहित किया गया है। हालांकि प्रदेशाध्यक्ष MadanRathore ने इस कार्यकारिणी को संतुलित और कारगर बताया है, लेकिन भाजपा के कई बड़े नेता भी इस सूची को देखकर चकित हैं। सबसे ज्यादा आश्चर्य तो इस बात को लेकर जताया जा रहा है कि इसमें क्षेत्रीय संतुलन नजर ही नहीं आता। जो 34 पदाधिकारी बनाए गए हैं इनमें 13 तो Jaipur शहर और देहात के ही हैं। इसके अलावा Bikaner से तीन और Hanumangarh व Ajmer से दो दो पदाधिकारी शामिल किए गए हैं। शेखावाटी के काफी लोग लिए गए हैं, लेकिन मारवाड़ के सबसे बड़े जिले Jodhpur से किसी भी नेता का नम्बर नहीं आया। मेवाड़ और हाड़ौती भी नहीं के बराबर है, जबकि ये इलाके BJP का गढ़ बनकर उभरे हैं।

अब सवाल उठ रहा है कि आखिरी इस सूची में जो पदाधिकारी सामने आए हैं, उनमें किस नेता की ज्यादा चली है और किस नेता की अनदेखी हुई है। सूची का पोस्टमार्टम करने वाले कहते हैं कि सूची पर RSS का प्रभाव ज्यादा नजर आ रहा है। अधिकांश पदाधिकारी या तो संघ से सीधे जुड़े हैं या फिर संघ के प्रभावी लोगों के नजदीकी माने जाते हैं। इसी तरह लोकसभा स्पीकर OmBirla और हरियाणा के प्रभारी SatishPunia भी कई समर्थकों को इस सूची में स्थान मिला है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री VasundhraRaje के समर्थक हाशिए पर डाल दिए गए हैं। खुद मुख्यमंत्री BhajanLalSharma के भी समर्थक या नजदीकी कम ही नजर आ रहे हैं नई कार्यकारिणी में।

पूरा विश्लेषण यू ट्यूब चैनल Paya पर देखें। लिंक कमेंट बॉक्स में।

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