10/12/2025
दरबार काल से आज तक जोधपुर में समाज की एक विशेष पहचान हैं..
लेखक भँवर मालवीय
श्रीदेववंशी मालवी लोहार समाज जोधपुर बन्दूक निर्माण व चांदी घड़ाई में महारत हासिल था
लोहे भामर देहि में, रग-रग कला समाई,
मालवी लोहार समाज की, गाथा अमिट सदाई।
माटी मालवा छोड़कर, पहुँचे मरु के धाम,
मेहनत, कौशल, कर्म से, पाए जग में नाम।
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लेखक - भँवर मालवीय@8114426467
श्रीदेववंशी मालवी लोहार समाज का इतिहास लगभग एक सहस्राब्दी पुराना माना जाता है। मध्य भारत के मालवा अंचल से यह समाज समय के साथ राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों और बस्तियों में फैलता गया। करीब दो सौ वर्ष पूर्व समाज के कुछ परिवार जोधपुर पहुँचे और अपनी पारंपरिक कला और कौशल के बल पर इस शहर में नई पहचान बनाने लगे। चाँदी घड़ाई, धातु-नक्काशी, अस्त्र-शस्त्र निर्माण और दरबार के लिए विशेष प्रकार की बंदूकें तैयार करने की कला ने समाज के कारीगरों को जोधपुर राजदरबार में विशेष सम्मान दिलाया। उनकी निष्ठा और कार्यकुशलता ने उन्हें रियासत के विश्वसनीय शिल्पकारों की श्रेणी में स्थापित किया।
समय बीतने के साथ समाज की जड़ें जोधपुर में गहराई से स्थापित होती गईं। राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए परिवारों ने मिलकर शहर में अपना बड़ा समुदाय बनाया और आज जोधपुर में समाज के एक हजार से अधिक परिवार स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं। पुराने समय में ‘लोहारों की पोल’ समाज का प्रमुख निवास क्षेत्र था, जो आज भी उनके ऐतिहासिक अस्तित्व का प्रमाण है। समाज ने संगठन की शक्ति को समझते हुए लगभग इक्यावन वर्ष पूर्व सिवांची गेट के पास अपना समाज भवन बनाया और रामेश्वर नगर में विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की स्थापना की, जिससे शिक्षा, संस्कार और सामाजिक गतिविधियों को नई दिशा मिली।
समाज ने परंपरागत धातुकला की विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिकता की ओर भी कदम बढ़ाया। समय के साथ समाज के लोग फेब्रिकेशन, आयरन–स्टील उद्योग, मशीनरी कार्य, मेडिकल और पैरा-मेडिकल, व्यापार, उद्योग, बिल्डिंग निर्माण और हैंडीक्राफ्ट जैसे कई क्षेत्रों में आगे बढ़े। इन क्षेत्रों में मिली सफलता ने समाज की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाया और नई पीढ़ी के लिए अवसरों का विस्तार किया।
समाज के श्रेष्ठ व्यक्तित्वों ने भी इसकी प्रतिष्ठा को ऊँचा किया है। ब्रिटिश काल में *रामदेव जी पंवार* विदेशों में कैमरा और इलेक्ट्रॉनिक मशीनों के विशेषज्ञ के रूप में विख्यात हुए। *जुगल किशोर परिहार* ने राजस्थानी साहित्य और पत्रकारिता में अपना अमूल्य योगदान दिया। वर्तमान में *बसंती पंवार* ने राजस्थानी भाषा की महिला साहित्यकारा के रूप में लोकसंस्कृति और संवेदनशील लेखन को नई पहचान दिलाई। दिव्यांग होते हुए भी जागरूकता और प्रेरणा का संदेश पूरे देश में फैलाने वाले *जगदीश मालवीय* ने अपने कार्यों से समाज को गौरवान्वित किया और राष्ट्रीय स्तर के कई सम्मान प्राप्त किए। चिकित्सा जगत में *डॉ. कमलेश मालवीय* ने पश्चिमी राजस्थान के प्रमुख हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में उत्कृष्ट सेवाएँ दे रहें हैं और अपने बॉन एंड जॉइंट अस्पताल के माध्यम से समाज व प्रदेश में नई पहचान स्थापित की। इनके अतिरिक्त भी अनेक समाजजन सरकारी, अर्ध-सरकारी और निजी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं और अपने कर्म से समाज का नाम रोशन कर रहे हैं।
जोधपुर महानगर में समाज आज खांडा फलचा, भीतरी शहर, चौखा, मंडोर, भगत की कोठी, कुड़ी भगतासनी, चांदपोल और अनेक क्षेत्रों में संगठित रूप से निवास कर रहा है। मेहनत, परंपरा, कला, शिक्षा और संगठन की शक्ति ने श्रीदेववंशी मालवी लोहार समाज को जोधपुर में एक सशक्त और सम्मानित समुदाय के रूप में स्थापित किया है।
कला, संस्कृति, कर्म के, दीपक सदा जलाय,
मालवी लोहार समाज ने, गौरव ध्वजा लहराय।
मालवा की माटी से, मरुधरा तक नाम,
मेहनत, योग्यता, एकता—समाज का सच्चा धाम।
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लेखक - भँवर मालवीय@8114426467