19/07/2026
ज़िम्मेदारी पर शायरी
ज़िम्मेदारियों का बोझ जब कंधों पर आ जाता है,
इंसान हँसते-हँसते भी बहुत कुछ छुपा जाता है।
जो निभाता है हर फ़र्ज़ बिना कोई शिकायत किए,
वही असली मायनों में ज़िंदगी जीना सिखा जाता है।