04/08/2026
कैथल नगर परिषद प्रॉपर्टी टैक्स घोटाला,चपरासी से लेकर डीसी तक सबकी जांच जरूरी
: लाखों का बकाया चंद रुपयों में गायब, पारदर्शी व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
कैथल 3 अगस्त 2026 अटल हिन्द न्यूज रिसोर्स
कैथल नगर परिषद में प्रॉपर्टी टैक्स रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर भारी-भरकम बकाए को नाममात्र दिखाकर एनडीसी (No Dues Certificate) जारी करने का बड़ा मामला सामने आया है।
प्रमुख मामले:
वृंदावन गार्डन (ढांड रोड): 2011-12 से 2017 तक का 17 लाख रुपये का बकाया, महज 1 लाख रुपये दिखाकर एनडीसी दे दी गई।
गोल्ड मैरी स्कूल: लगभग 4 से 4.5 लाख रुपये के टैक्स बकाए को भी हेरफेर कर कम दिखाया गया।
कार्रवाई: नगर परिषद द्वारा रिकॉर्ड दुरुस्त कर दोनों संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं और रिकवरी के लिए कोर्ट में केस दायर कर दिए गए हैं।
घोटाले की गहराई और अन्य मीडिया रिपोर्टों के खुलासे
यह मामला केवल दो संपत्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार कैथल नगर परिषद की कार्यप्रणाली और पुरानी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। अन्य मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय मुद्दों को जोड़ने पर कई महत्वपूर्ण और गंभीर पहलू सामने आते हैं:
1. कौन शामिल? (अकेला व्यक्ति या पूरा गैंग)
अंदरूनी सांठगांठ: चूंकि पोर्टल और रिकॉर्ड तक सीधी पहुंच केवल चुनिंदा कर्मचारियों और ऑपरेटरों की होती है, इसलिए यह किसी एक व्यक्ति का काम न होकर एक सुनियोजित गिरोह (गैंग) की ओर इशारा करता है, जिसमें बाहरी लोग (प्रॉपर्टी मालिक) और अंदरूनी कर्मचारी दोनों शामिल हो सकते हैं।
जांच का दायरा: जांच कमेटी के इंचार्ज और नगर परिषद सचिव मोहन लाल के अनुसार, टैक्स भरने वाले से लेकर विभाग के भीतर सांठगांठ करने वाले हर शख्स की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
2. कब से शुरू हुआ घोटाला और कितना बड़ा है नुकसान?
पुराना खेल: वृंदावन गार्डन का मामला साल 2011-12 से जुड़ा है, जिससे यह साफ होता है कि यह धांधली वर्षों से चल रही है।
करोड़ों का अंदेशा: यदि केवल दो मामलों में ही लाखों का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है, तो पिछले एक दशक के रिकॉर्ड की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होने पर यह घोटाला करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है।
3. ऑडिट व्यवस्था और निगरानी पर बड़े सवाल
ऑडिट रिपोर्ट कहां है? नगरपालिका के खातों और रिकॉर्ड का नियमित ऑडिट होना अनिवार्य है। यदि ऑडिट होता रहा है, तो ऑडिटर की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है कि उन्होंने इस हेरफेर को क्यों नजरअंदाज किया या मामला क्यों दबाया।
चपरासी से लेकर डीसी तक सबकी जांच: जनता मांग कर रही है कि फाइलों और कागजातों पर नजर रखने वाले हर स्तर के कर्मचारियों—चपरासी से लेकर संबंधित अधिकारियों, सचिव, ईओ और उच्च स्तर—की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
कैथल नगर परिषद की कार्यशैली और उपभोक्ता परेशानियां
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कैथल नगर परिषद में आम जनता का शोषण एक आम बात बन चुकी है:
फर्जी हस्ताक्षर और रसीदें: कई कर्मचारियों पर आरोप है कि वे उपभोक्ताओं के फर्जी हस्ताक्षर खुद ही कर लेते हैं और पावती या पत्र यह कहकर वापस ऑफिस में जमा करवा देते हैं कि "उपभोक्ता ने लेने से मना कर दिया।"
दस्तावेजों की लुकाछिपी: टैक्स पूरा भरने और नक्शा पास होने के बावजूद कई मामलों में उपभोक्ताओं को आज तक उनके मूल दस्तावेज या एनडीसी समय पर नहीं दिए गए हैं।
जनता की मांग: "जनता का पैसा जनता को वापस मिलना चाहिए।" यदि नगरपालिका भ्रष्टाचार रोकने में असमर्थ है, तो ऐसी व्यवस्था का क्या औचित्य जो नागरिकों को सुविधाएं देने के बजाय उन्हें दफ्तरों के चक्कर कटवाए।
राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद
विजिलेंस और अन्य मामले: कैथल जिले में पहले भी पूंडरी नगरपालिका में फर्जी एनडीसी, अवैध कॉलोनियों से सरकारी खजाने को 100 करोड़ से अधिक के नुकसान और प्रधानमंत्री आवास योजना में रिश्वतखोरी के मामले सामने आ चुके हैं।
चेयरपर्सन बनाम अधिकारी विवाद: इससे पहले भाजपा चेयरपर्सन सुरभि गर्ग द्वारा प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल और एडमिन आईडी के दुरुपयोग तथा डेवलपमेंट चार्ज कम दिखाए जाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, कार्यकारी अधिकारी (ईओ) संदीप सोलंकी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि टैक्स राशि मनमाने ढंग से कम-ज्यादा नहीं की जा सकती और विभागीय जांच जारी है।
कैथल नगर परिषद का यह घोटाला पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है। जब तक विजिलेंस या किसी स्वतंत्र एजेंसी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर चपरासी से लेकर बड़े अधिकारियों तक पर आपराधिक मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते, तब तक सिस्टम पर जनता का भरोसा बहाल होना मुश्किल है।