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अधिवक्ता से विवाद में दरोगा व सिपाही को हुई 10-10 साल की सजा व 50-50 हज़ार रुपये जुर्माना....अधिवक्ता व उनके साथियों के ...
14/04/2026

अधिवक्ता से विवाद में दरोगा व सिपाही को हुई 10-10 साल की सजा व 50-50 हज़ार रुपये जुर्माना....

अधिवक्ता व उनके साथियों के साथ मारपीट, चोटी काटने, नकदी व मोबाइल लूटने के आरोप में तीन वर्ष पूर्व दायर याचिका पर एंटी डकैती न्यायालय ने गंभीर रुख अपनाया है।

फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नेकपुर कलां निवासी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार शर्मा ने न्यायालय में दाखिल याचिका में बताया कि उनका एक व्यक्ति से विवाद चल रहा था। इसी सिलसिले में कर्नलगंज चौकी पर तैनात तत्कालीन चौकी इंचार्ज अनिल भदौरिया ने 10 जनवरी 2018 को उन्हें चौकी पर बुलाया। अधिवक्ता के अनुसार जब वह अपने दो साथियों के साथ चौकी पहुंचे, तो वहां मौजूद तत्कालीन एसएसआई दीपक कुमार, सिपाही सुरेंद्र सिंह एवं नवनीत यादव ने गाली-गलौज शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपितों ने उनके साथ मारपीट की और जबरन उनकी चोटी काट दी। इसके अलावा जेब में रखे दो हजार रुपये छीन लिए गए। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके मोबाइल फोन तोड़ दिए और सिम कार्ड भी गायब कर दिए।

मामले की सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) ने दारोगा अनिल भदौरिया व सिपाही सुरेंद्र सिंह को दोषी करार दिया। न्यायालय के आदेश पर दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। दोष सिद्ध दारोगा अनिल भदौरिया पुलिस लाइन जालौन व सिपाही सुरेन्द्र कुमार इटावा में तैनात हैं।

#फर्रुखाबाद

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10/04/2026

चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा है कि बिना किसी वैध आदेश के किसी वाहन को रोककर रखना पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए पीड़ित को चार सप्ताह के भीतर 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह फैसला जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने मोहाली निवासी विकास द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसकी कार को पुलिस ने अवैध रूप से थाने में खड़ा करवा दिया।

मामले के अनुसार, 12 जून 2025 को याचिकाकर्ता की कार एक सड़क दुर्घटना में शामिल हुई थी, जिसके बाद दोनों वाहनों को पुलिस स्टेशन लाया गया। जांच में यह पाया गया कि दुर्घटना में किसी भी पक्ष की गलती नहीं थी और न ही कोई व्यक्ति घायल हुआ था, साथ ही वाहनों को भी गंभीर नुकसान नहीं हुआ।

इसके बावजूद पुलिस ने वाहन को थाने के बाहर खड़ा रखा। राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि वाहन मालिक ने अपनी इच्छा से गाड़ी थाने के बाहर छोड़ी थी, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को असंगत और अविश्वसनीय बताते हुए खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि 12 जून से 28 जुलाई 2025 तक बिना वैध आदेश वाहन रोककर रखना पुलिस की गलती और शक्तियों का दुरुपयोग है।

अदालत के निर्देश के बाद 28 जुलाई 2025 को वाहन वापस किया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में मुआवजा देना न्यायहित में आवश्यक है, खासकर जब मामला सड़क दुर्घटना से जुड़ा हो और पुलिस की लापरवाही स्पष्ट हो।

“बिना वैध आदेश वाहन रोककर रखना पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग — कोर्ट ⚖️”





10/04/2026

तेलंगाना हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में कहा कि पुलिस अधिकारियों के पास इस आधार पर गाड़ी को रोकने या जब्त करने का कोई अधिकार नहीं है कि कार चलाने वाला व्यक्ति नशे की हालत में पाया गया था। कोर्ट के इस फैसले से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर नशे में धुत ड्राइवर के अलावा उसके साथ कोई और नहीं है, तो पुलिस को कार वापस लेने के लिए उसके सबसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त को जानकारी देनी होगी।

2021 के फैसले का दिया हवाला
जस्टिस ईवी वेणुगोपाल ने अपने आदेश में 2021 की एक याचिका में एक फैसले का जिक्र किया। इस याचिका में इस बारे में विस्तार से गाइडलाइंस दी गई थीं कि पुलिस को नशे में गाड़ी चलाने के मामलों में शामिल लोगों से कैसे निपटना चाहिए।

हाई कोर्ट ने कहा क्या है?
हाई कोर्ट ने कहा, 'पुलिस अधिकारियों के पास इस आधार पर गाड़ियों को सीज करने का अधिकार नहीं है कि गाड़ी चलाने वाला व्यक्ति नशे की हालत में पाया गया था। उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति अकेले गाड़ी चलाता है और पुलिस अधिकारी उसे नशे की हालत में पाता है और वह व्यक्ति गाड़ी चलाने में असमर्थ है, तो पुलिस के पास रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जब्त करने का अधिकार है। ऐसी स्थिति में पुलिस गाड़ी को सीज कर सकता और गाड़ी को सुरक्षित कस्टडी में लेकर सबसे पास के पुलिस स्टेशन या सही जगह पर रख सकता है।'

कोर्ट ने साथ ही कहा कि पुलिस की यह ड्यूटी है कि वह उक्त गाड़ी को या तो मालिक को या किसी ऐसे अधिकृत व्यक्ति को दे दे जो नशे की हालत में न हो और जो गाड़ी चलाने की स्थिति में हो। कोर्ट ने कहा कि गाड़ी उसे ही दी जाए, जिसके पास वैध लाइसेंस हो।

ड्राइवर शराब के नशे में पाया जाता है तो...
हाई कोर्ट ने कहा कि अगर गाड़ी का ड्राइवर शराब के नशे में पाया जाता है, तो उसे गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। मगर, इसमें कहा कि अगर पुलिस को ड्राइवर के साथ कोई दूसरा व्यक्ति मिलता है जो नशे में नहीं है और उसके पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस है, तो ऐसे व्यक्ति को गाड़ी को सीज किए बिना गाड़ी चलाने की इजाजत देना होगा।

जलने वाले जलते रहेंगे और एक दिन खुद ब खुद खत्म हो जायेंगे 🙏
22/03/2026

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Jai Mata Di🙏🙏🙏
22/03/2026

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Sweet Family 💃💃💃🕺🕺🕺
22/03/2026

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04/03/2026

मेरे व मेरे परिवार की तरफ से सभी देशवासियों को देसी होली- फाग की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏🙏
Be Aware Be Safe🙏
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11/02/2026

छोटे बिल्लू राम की तोतली शायरी 🥰🥰🥰
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