12/05/2026
कुछ दिनों बाद सब-कुछ सामान्य हो जाएगा। एक दो दिन चर्चा का विषय रहेगा, फिर धीरे-धीरे सब शांत हो जाएगा। जिनकी बिजली बंद है वो चालू हो जाएगी। जिनकी लाइनें टूटी हैं वे भी जुड़ जाएंगी। बस कमी उनको ही रहेगी जिन्होंने अपना परिजन खोया है।
चौबीस घंटे में हादसे की वजह ढूंढना भूंसे के ढेर में सूई ढूंढने के जैसा है। पालमपुर के बिंद्राबन क्षेत्र में बिजली लाइन को बहाल करते हुए जो हादसा हुआ है उसका संभावित कारण मानवीय भूल और सुरक्षा सावधानियों में कोताही ही नज़र आ रही है।
मेरा अपना अनुभव बताता है कि शत प्रतिशत बिजली दुर्घटनाओं में यही मुख्य कारण सामने आते हैं।
हादसे की संभावित वज़ह क्या हो सकती है?
आइए जानते हैं -
1. जिस 11 केवी लाइन की प्राकृतिक आपदा के कारण ब्रेकडाउन थी, उसके शट-डाउन का परमिट लिया गया था या नहीं?
2. कहीं ऐसा तो नहीं था कि शट-डाउन का परमिट नहीं लिया गया हो और लाइन का जी-ओ स्विच काट कर ही काम किया जा रहा था? यदि ऐसा था तो स्विच काट कर ताला लगाया था या नहीं?
3. क्या 11 केवी लाइन पर काम करते समय आवश्यक सुरक्षा सावधानियों को नजरंदाज किया गया?
4. क्या काम शुरू करने से पहले दोनों तरफ़ से लाइन को शार्ट करने के बाद अर्थ किया गया था या नहीं? यही एकमात्र चीज़ है जो बिजली वालों को किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाती है। और हम इसी चीज़ को अक्सर नजरंदाज कर देते हैं।
5. क्या सब-स्टेशन स्टाफ से चूक हो गई है? दुर्घटना के ज्यादातर केसों में यही मानवीय भूल सामने आती है।
6. कहीं ऐसा तो नहीं था कि किसी दूसरी लाइन का परमिट कैंसिल करते समय गलती से इस लाइन को चार्ज कर दिया गया, जिस पर कि अभी काम चल रहा था?
7. क्या लाइन में किसी उपभोक्ता के इन्वर्टर या जनरेटर का करंट आ गया? ऐसा भी हो सकता है कई बार ऐसा भी देखने में आता है।
8. क्या लाइन में किसी दूसरी लाइन का करंट प्रवाहित हो गया? ऐसा भी संभावित है क्योंकि कई जगह पर लाइनें एक-दूसरे को क्रास भी करती हैं।
सौ बात की एक बात है कि यदि सुरक्षा सावधानियों को नजरंदाज नहीं किया गया होता तो ये दुर्घटना नहीं होती। यदि काम शुरू करने से पहले दोनों तरफ़ से लाइन को शार्ट करने के बाद अर्थ कर दिया होता तो इस दुर्घटना को टाला जा सकता था।
अब जो होना था, सो हो चुका है। परिजनों के दुःखों को कुछ कम करना बिजली बोर्ड का दायित्व है। मेरा बिजली बोर्ड के अधिकारियों से विनम्र निवेदन है कि परिजनों को तुरन्त एक करोड़ का मुआवजा और सरकारी नौकरी मुहैया करवानी चाहिए।