14/03/2026
सन्तों ने बदलना है ये नक्शा कुल संसार का।
नफ़रत की गहरी खाई पर पुल है बनाना प्यार का।
पुल बन जाता है तो सारे सहज में आते जाते हैं।
मिट जाती हैं दूरियां सब आपस में मिल पाते हैं।
दिलों के अन्दर रहे न खाई ऐसा कर दिखलाना है।
आदमी को आदमी के संग मिलाते जाना है।
रंग वेश बोली और भाषा नस्लों की दीवार कहीं।
मज़हबो मिल्लत जाति पांति मुल्कों की दीवार कहीं।
दीवारों के रहते जग में हर सू हाहाकार है।
हो गये धरती के टुकड़े बिखर गया संसार है।
गुरू ज्ञान से वैर मिटेगा बरसेगा बस प्यार ही प्यार।
कहे ‘हरदेव’ दीवार रहित ये हो जायेगा कुल संसार।