Priya Shukla

Priya Shukla मेरी तो शान है हिन्दी मेरा अभिमान है हिन्दी
मैं हुँ हिन्द क़ी बेटी मेरा श्रृंगार है हिन्दी
#लेखिका This is my personal page and not for any business promotion.
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I am a writer and poet and i share my personal writing here.

05/06/2026
03/06/2026

मेरे पास हमेशा हर जगह एक ऐसी दोस्त होती है जो बेवजह मेरा हालचाल पूछती है, सच बताऊं बहुत अच्छा और बहुत स्पेशल फील होता है, भगवान की ब्लेसिंग वाली फील आती है।






Dosti,friendship,best friend, girls time, desi queen, attitude queen, real friends.

31/05/2026

Apne hisse Ka aasman tumhe khud banana hoga.....




10/05/2026
10/05/2026

Happy mother's day to all bhoi bhali pyari maa out here ❣️🎊
❤️

05/05/2026

रत्ना देवनाथ: एक पीड़ित माँ से 'बंगाल की आवाज' तक का सफर !

4 मई 2026 के चुनावी नतीजे केवल एक सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि एक माँ के आर्तनाद और उसके संघर्ष की परिणति भी हैं। पनिहटी से रत्ना देवनाथ की ऐतिहासिक जीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि बंगाल की जनता ने "ममता" (करुणा) के ऊपर "न्याय" को चुना है।

​​अगस्त 2024 में आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज की उस काली रात ने बंगाल की आत्मा को झकझोर दिया था। रत्ना देवनाथ ने अपनी बेटी खोई थी, लेकिन कल के नतीजों ने उन्हें पूरे बंगाल की हर 'बेटी' का रक्षक बना दिया है।

​1. पनिहटी: न्याय का नया केंद्र
​पनिहटी सीट, जो कभी टीएमसी का गढ़ हुआ करती थी, कल एक रणक्षेत्र बन गई। रत्ना देवनाथ की जीत ने साबित किया कि भावनाओं का ज्वार जब उठता है तो किसी के रोके नहीं रुकता।
​और फिर जनता ने चुनावी वादों और मुफ्त योजनाओं (जैसे लक्ष्मी भंडार) के मुकाबले एक माँ के आंसुओं और उसकी न्याय की मांग को प्राथमिकता दी।

​सत्ता की विफलता - रत्ना देवनाथ की उम्मीदवारी ने हर घर में यह संदेश दिया कि यदि एक डॉक्टर बेटी सुरक्षित नहीं है और सरकार अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रही है, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है।

​2. ममता बनर्जी की हार का मुख्य कारण- 'न्याय में विफलता'
​ममता बनर्जी की हार का सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि उनकी सरकार ने आर.जी. कर मामले को जिस तरह हैंडल किया, वह जनता की नजरों में "सबूतों को मिटाने" और "दोषियों को संरक्षण" देने जैसा था।

​महिला वोट बैंक का टूटना- ममता बनर्जी का सबसे मजबूत आधार 'महिलाएं' थीं। लेकिन जब रत्ना देवनाथ न्याय के लिए सड़कों पर उतरीं, तो बंगाल की महिलाओं ने उनमें खुद को देखा।

​संवेदनशीलता का अभाव- सरकार द्वारा आंदोलनकारी डॉक्टरों और पीड़ित परिवार के प्रति दिखाए गए कड़े रुख ने आग में घी का काम किया, जिसका नतीजा कल टीएमसी के सूपड़े साफ होने के रूप में सामने आया।

​3. बीजेपी की जीत और रत्ना का प्रतीकवाद-
​बीजेपी ने रत्ना देवनाथ को पनिहटी से चुनाव लड़ाकर इसे "धर्मयुद्ध" बना दिया था।

​नैतिक जीत- रत्ना देवनाथ की जीत केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक है। यह उस तंत्र की हार है जिसने न्याय की आवाज को दबाने की कोशिश की थी।

​ऐतिहासिक जनादेश- कल जब रत्ना देवनाथ ने जीत के बाद अपनी बेटी की तस्वीर पर माला चढ़ाई, तो वह दृश्य इस चुनाव का सबसे सशक्त संदेश था—कि सत्ता कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह एक माँ के संकल्प से बड़ी नहीं हो सकती।

को कुल मिलाकर कहा सकते हैं कि ​ममता बनर्जी की शर्मनाक हार के पीछे कोई आर्थिक या बाहरी कारण नहीं, बल्कि रत्ना देवनाथ के प्रति सरकार का अन्याय था। पनिहटी के मतदाताओं ने रत्ना को चुनकर यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल अब केवल "खेला होबे" (खेल होगा) नहीं चाहता, बल्कि अपनी बेटियों के लिए "न्याय" चाहता है।

​"रत्ना देवनाथ की जीत उस हर व्यक्ति की जीत है जो व्यवस्था की क्रूरता के खिलाफ खड़ा रहा।"
​कल की यह जीत बंगाल की राजनीति में एक अमिट अध्याय है, जहाँ एक साधारण परिवार की महिला ने अपने साहस से एक शक्तिशाली साम्राज्य की जड़ें हिला दीं। यह लोकतंत्र की वह ताकत है जहाँ अंततः 'सत्यमेव जयते' ही चरितार्थ होता है।

किसी ने सच ही कहा है कि किले बाहर से नहीं भीतर से ढहाए जाते हैं।
'बाहरीगोतो ' की रट बेकार गई।

स्त्रीrang - सुजाता चुलबुल

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