03/08/2026
त्याग और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे हमारे बाबा- पूज्य उड़ियाबाबा जी
त्याग और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे हमारे बाबा- पूज्य उड़ियाबाबा जी रामघाट में इमली के नीचे एक फूस की कुटी थी। उसमें सिरकी लगी थी। बाहर एक लँगोटी और भीतर जल भरा कमण्डलु । भगवती भागीरथी के तट पर उस महान् योगी की पर्ण-कुटी त्याग-वैराग्य की प्रतीक थी। प्रातःकाल आप किसी से मिलते नहीं थे। प्रायः पाँच-छः घण्टे निरन्तर एक आसन से बैठे ध्यान मग्न रहते थे। उस समय कोई उनके समीप जा नहीं सकता था । मध्याह्न में गांव में भिक्षा करने जाते और तीसरे पहर सत्संगियों की शङ्काओं का समाधान करते थे। यही उनकी चर्या थी ।...
त्याग और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे हमारे बाबा- पूज्य उड़ियाबाबा जी