25/05/2026
मैदान-ए-अरफ़ात (हज का सबसे अहम मुकाम)
मैदान-ए-अरफ़ात सऊदी अरब के शहर मक्का के पास स्थित एक बहुत ही मुबारक और अहम जगह है। हज का सबसे बड़ा रुक्न “वुकूफ़-ए-अरफ़ात” यहीं अदा किया जाता है। अगर कोई हाजी अरफ़ात में तय समय पर मौजूद न हो, तो उसका हज पूरा नहीं होता।
अरफ़ात की अहमियत
9 ज़िलहिज्जा को दुनिया भर से आए लाखों हाजी यहाँ जमा होते हैं।
ज़ोहर से लेकर मग़रिब तक दुआ, इस्तिग़फार और इबादत की जाती है।
इसी दिन अल्लाह तआला अपने बंदों पर खास रहमतें नाज़िल फरमाता है।
इसे “हज का दिन” भी कहा जाता है।
मैदान-ए-अरफ़ात की खास जगहें
1. जबल-ए-रहमत
यह अरफ़ात की मशहूर पहाड़ी है।
कहा जाता है कि यहाँ हज़रत आदम (अ.स.) और हज़रत हव्वा (अ.स.) की मुलाकात हुई थी।
हाजी यहाँ दुआ और इबादत करते हैं।
2. मस्जिद-ए-नमिरा
अरफ़ात की बड़ी और मशहूर मस्जिद।
यहाँ हज का ख़ुत्बा दिया जाता है।
ज़ोहर और असर की नमाज़ जमाअत से पढ़ी जाती है।
3. वुकूफ़-ए-अरफ़ात
हज का सबसे जरूरी अमल।
9 ज़िलहिज्जा को अरफ़ात में ठहरना फर्ज़ है।
इसी दौरान दुआएँ कबूल होने की बहुत फज़ीलत है।
4. दुआ और इस्तिग़फार
हाजी पूरे दिन अल्लाह से माफी मांगते हैं।
अपने गुनाहों से तौबा करते हैं।
दुनिया और आख़िरत की भलाई की दुआ करते हैं।
5. मेडिकल कैंप और सुविधाएँ
हाजियों के लिए मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं।
पानी, खाने और आराम की व्यवस्था की जाती है।
सफाई और सुरक्षा का खास इंतज़ाम होता है।
अरफ़ात में क्या करना चाहिए?
ज्यादा से ज्यादा दुआ करें।
तौबा और इस्तिग़फार पढ़ें।
तलबिया, तस्बीह और कुरआन की तिलावत करें।
सब्र और अमन बनाए रखें।
अरफ़ात के बाद
मग़रिब के बाद हाजी मुज़दलिफा की तरफ रवाना होते हैं, जहाँ रात गुजारते हैं और अगले दिन जमारात के लिए कंकड़ियाँ जमा करते हैं।