28/01/2020
,!!निर्भया के गुनहगार मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में लगाया गंभीर आरोप- तिहाड़ जेल में हुआ मेरा यौन शोषण
लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्ली!!,
निर्भया के गुनहगार मुकेश सिंह की वकील अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उनेक मुवक्किल का तिहाड़ जेल में यौन उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुकेश को इस मामले में दूसरे दोषी अक्षय के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। उच्चतम न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब बुधवार को आदेश सुनाया जाएगा। मुकेश ने शीर्ष अदालत से कहा, 'कोर्ट ने मुझे सिर्फ मौत की सजा सुनाई है। क्या मेरा रेप किए जाने की सजा सुनाई गई थी?' दोषी के वकील ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका का निबटारा करने में प्रक्रियागत खामियां रह गई हैं। मुकेश कुमार सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी।
मौत की सजा का सामना कर रहे दोषी मुकेश कुमार की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान उसकी वकील ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि घृणा अपराध से करें न कि अपराधी से। यह भी दावा किया गया कि दया याचिका पर विचार करते समय उसे एकांत में रखने सहित अन्य परिस्थितियों और प्रक्रियागत खामियों को नजरअंदाज किया गया। जस्टिस आर. भानुमति की अगुवाई में तीन न्यायधीशों की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। इस पर बेंच ने सवाल किया, 'आप कैसे कह सकते हैं कि ये तथ्य राष्ट्रपति महोदय के समक्ष नहीं रखे गए थे? आप यह कैसे कह सकते हैं कि राष्ट्रपति ने सही तरीके से विचार नहीं किया?'
दोषी के वकील ने जब यह कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारे तथ्य नहीं रखे गए थे तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारा रिकॉर्ड, साक्ष्य और फैसला पेश किया गया था। अंजना प्रकाश ने मौत की सजा के मामले में कई फैसलों और दया करने के राष्ट्रपति के अधिकार का हवाला दिया। उन्होने यह भी दलील दी कि राष्ट्रपति ने दुर्भावनापूर्ण, मनमाने और सामग्री के बगैर ही दया याचिका खारिज की। अंजना प्रकाश ने यह दावा भी किया कि 2012 के इस गैंगरेप केस में अन्य दोषी राम सिंह की जेल में हत्या कर दी गई थी लेकिन इसे आत्महत्या का मामला बताकर बंद कर दिया गया। गौरतलब है कि राम सिंह मार्च 2013 में जेल के भीतर फंदे पर लटका हुआ मिला था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुकेश सिंह के वकील की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि दोषी के साथ यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप दया का आधार नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि मृत्युदंड के लिए मुजरिम को जेल में कालकोठरी में नहीं रखा गया है जैसा आरोप लगाया है, साथ ही सजा घटाने का कोई आधार भी नहीं बताया गया है। तुषार मेहता ने आगे कहा कि यह दलील कि मुकेश के साथ जेल में बुरा बर्ताव किया गया, उस व्यक्ति के लिए दया का आधार नहीं हो सकती, जिसने जघन्य अपराध किया है।
इससे पहले कोर्ट ने चार में से एक दोषी पवन के पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें इकलौते गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने सभी दोषियों को एक फरवरी का डेथ वॉरंट जारी किया है। फांसी की सजा को टालने के लिए सभी आरोपी एक-एक कर कोर्ट में कोई न कोई याचिका दाखिल कर रहे हैं।
बेंच राष्ट्रपति द्वारा 17 जनवरी को मुकेश कुमार सिंह की दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। दया याचिका खारिज होने के बाद ही अदालत ने चारों मुजरिमों को एक फरवरी को मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने के लिए डेथ वॉरंट जारी किया था।
23 वर्षीय निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार के बाद उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया का बाद में 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया था।
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निर्भया के गुनहगार मुकेश ने सुप्रीम कोर्ट में लगाया गंभीर आरोप- तिहाड़ जेल में हुआ मेरा यौन शोषण
लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्ली
निर्भया के गुनहगार मुकेश सिंह की वकील अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उनेक मुवक्किल का तिहाड़ जेल में यौन उत्पीड़न हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुकेश को इस मामले में दूसरे दोषी अक्षय के साथ यौन संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया। उच्चतम न्यायालय ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। अब बुधवार को आदेश सुनाया जाएगा। मुकेश ने शीर्ष अदालत से कहा, 'कोर्ट ने मुझे सिर्फ मौत की सजा सुनाई है। क्या मेरा रेप किए जाने की सजा सुनाई गई थी?' दोषी के वकील ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका का निबटारा करने में प्रक्रियागत खामियां रह गई हैं। मुकेश कुमार सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति ने 17 जनवरी को खारिज कर दी थी।
मौत की सजा का सामना कर रहे दोषी मुकेश कुमार की दया याचिका राष्ट्रपति द्वारा खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान उसकी वकील ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि घृणा अपराध से करें न कि अपराधी से। यह भी दावा किया गया कि दया याचिका पर विचार करते समय उसे एकांत में रखने सहित अन्य परिस्थितियों और प्रक्रियागत खामियों को नजरअंदाज किया गया। जस्टिस आर. भानुमति की अगुवाई में तीन न्यायधीशों की बेंच इसकी सुनवाई कर रही है। इस पर बेंच ने सवाल किया, 'आप कैसे कह सकते हैं कि ये तथ्य राष्ट्रपति महोदय के समक्ष नहीं रखे गए थे? आप यह कैसे कह सकते हैं कि राष्ट्रपति ने सही तरीके से विचार नहीं किया?'
दोषी के वकील ने जब यह कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारे तथ्य नहीं रखे गए थे तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच से कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सारा रिकॉर्ड, साक्ष्य और फैसला पेश किया गया था। अंजना प्रकाश ने मौत की सजा के मामले में कई फैसलों और दया करने के राष्ट्रपति के अधिकार का हवाला दिया। उन्होने यह भी दलील दी कि राष्ट्रपति ने दुर्भावनापूर्ण, मनमाने और सामग्री के बगैर ही दया याचिका खारिज की। अंजना प्रकाश ने यह दावा भी किया कि 2012 के इस गैंगरेप केस में अन्य दोषी राम सिंह की जेल में हत्या कर दी गई थी लेकिन इसे आत्महत्या का मामला बताकर बंद कर दिया गया। गौरतलब है कि राम सिंह मार्च 2013 में जेल के भीतर फंदे पर लटका हुआ मिला था।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुकेश सिंह के वकील की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि दोषी के साथ यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप दया का आधार नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि मृत्युदंड के लिए मुजरिम को जेल में कालकोठरी में नहीं रखा गया है जैसा आरोप लगाया है, साथ ही सजा घटाने का कोई आधार भी नहीं बताया गया है। तुषार मेहता ने आगे कहा कि यह दलील कि मुकेश के साथ जेल में बुरा बर्ताव किया गया, उस व्यक्ति के लिए दया का आधार नहीं हो सकती, जिसने जघन्य अपराध किया है।
इससे पहले कोर्ट ने चार में से एक दोषी पवन के पिता की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें इकलौते गवाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया गया था। कोर्ट ने सभी दोषियों को एक फरवरी का डेथ वॉरंट जारी किया है। फांसी की सजा को टालने के लिए सभी आरोपी एक-एक कर कोर्ट में कोई न कोई याचिका दाखिल कर रहे हैं।
बेंच राष्ट्रपति द्वारा 17 जनवरी को मुकेश कुमार सिंह की दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। दया याचिका खारिज होने के बाद ही अदालत ने चारों मुजरिमों को एक फरवरी को मृत्यु होने तक फांसी पर लटकाने के लिए डेथ वॉरंट जारी किया था।
23 वर्षीय निर्भया से दक्षिण दिल्ली में चलती बस में 16-17 दिसंबर, 2012 की रात छह व्यक्तियों ने सामूहिक बलात्कार के बाद उसे बुरी तरह जख्मी हालत में सड़क पर फेंक दिया था। निर्भया का बाद में 29 दिसंबर को सिंगापुर के एक अस्पताल में निधन हो गया था।