19/04/2026
*भगवान परशुराम जी का जीवन परिचय*
*1. परिचय*
- *नाम*: परशुराम, अर्थ "परशु = फरसा" धारण करने वाले राम
- *अवतार*: भगवान विष्णु के छठे अवतार। इन्हें आवेशावतार और चिरंजीवी माना जाता है
- *कुल*: ब्राह्मण कुल, लेकिन क्षत्रिय गुणों से संपन्न
*2. जन्म*
- *पिता*: सप्तऋषि जमदग्नि
- *माता*: रेणुका
- *जन्म तिथि*: वैशाख शुक्ल तृतीया, जिसे अक्षय तृतीया भी कहते हैं
- *जन्म स्थान*: मान्यता अनुसार मध्य प्रदेश का जानापाव पहाड़ी
*3. प्रमुख घटनाएँ*
- *शिव से परशु प्राप्ति*: भगवान शिव की तपस्या कर दिव्य फरसा परशु और युद्ध-कला का वरदान मिला
- *सहस्त्रबाहु वध*: हैहय वंशी राजा कार्तवीर्य अर्जुन ने इनके पिता का वध कर दिया था। बदला लेने के लिए परशुराम जी ने उसे मारा
- *21 बार पृथ्वी निःक्षत्रिय करना*: अधर्मी, अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं का 21 बार संहार कर पृथ्वी को उनके भार से मुक्त किया
- *धरती दान*: विजय के बाद पूरी पृथ्वी ऋषि कश्यप को दान कर दी और स्वयं महेन्द्र पर्वत पर तप करने चले गए
- *शिष्य*: भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण को शस्त्र विद्या इन्होंने ही सिखाई
*4. विशेषताएँ*
- *शस्त्र और शास्त्र*: एकमात्र अवतार जो ब्राह्मण होकर महान योद्धा भी थे
- *चिरंजीवी*: मान्यता है कि वे आज भी महेन्द्रगिरि पर्वत पर तपस्या में लीन हैं
- *स्वभाव*: धर्म के प्रति अत्यंत कठोर, माता-पिता के आज्ञाकारी, अन्याय के विरुद्ध तुरंत क्रिया करने वाले
*5. महत्व*
परशुराम जी अन्याय के अंत और धर्म की स्थापना के प्रतीक हैं। इनका जीवन बताता है कि विद्या और शक्ति दोनों का संतुलन जरूरी है।
जय श्री परशुराम 🚩