01/05/2026
आज मैं यहाँ किसी व्यक्तिगत मुद्दे के लिए नहीं, बल्कि न्याय और अधिकार की उस आवाज़ को उठाने के लिए खड़ा हूँ, जो लंबे समय से दबाई जा रही है।
हम बात कर रहे हैं Pachna Bandh की—उस बांध की, जिसके निर्माण में हमारे बारे गाँव बैंसला और आसपास के 39 गाँवों ने अपनी जमीन, अपने खेत, अपनी आजीविका तक कुर्बान कर दी। जिन लोगों ने अपने घर-आँगन छोड़े, जिनकी पीढ़ियों की मेहनत उस पानी के नीचे चली गई—क्या आज उनका हक सबसे पहले नहीं बनता?
मैं आपसे पूछना चाहता हूँ—
क्या विकास का मतलब यह है कि जिनकी जमीन ली जाए, उन्हीं को पानी के लिए तरसाया जाए?
क्या न्याय का मतलब यह है कि बलिदान कोई दे और लाभ कोई और उठाए?
हमारा स्पष्ट और सीधा कहना है:
पचना बांध का पानी सबसे पहले **बारे गाँव बैंसला और आसपास के 39 गाँवों** को मिलना चाहिए। यह केवल मांग नहीं है—यह हमारा **अधिकार** है, हमारा **हक** है।
कमांड एरिया की अपनी जगह है, लेकिन उससे पहले उन लोगों का हक है जिन्होंने इस परियोजना के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया। अगर हमारी जमीन इस बांध में गई है, तो इस पानी पर पहला हक भी हमारा ही होना चाहिए।
हम किसी के खिलाफ नहीं हैं, हम केवल अपने हक के लिए खड़े हैं।
हम संघर्ष नहीं चाहते, लेकिन अन्याय भी स्वीकार नहीं करेंगे।
आज इस मंच से मैं प्रशासन और सरकार से यह मांग करता हूँ कि:
* पचना बांध के पानी में प्राथमिकता हमारे 39 गाँवों को दी जाए
* पीने के पानी और स्थानीय जरूरतों को सबसे ऊपर रखा जाए
* और हमारे अधिकारों को लिखित रूप में सुनिश्चित किया जाए
अगर हमारी बात नहीं सुनी गई, तो हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज़ और बुलंद करेंगे—क्योंकि यह लड़ाई किसी एक गाँव की नहीं, पूरे क्षेत्र के सम्मान और भविष्य की है।
आइए, हम सब मिलकर एकजुट हों और अपने अधिकार के लिए खड़े हों।
**“जिस जमीन ने पानी दिया, उस जमीन का हक सबसे पहले होना चाहिए।”**
धन्यवाद।