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बिस्तर पर औरत को मर्द की बायी और लेटना चाहिए,,हम सभी काम अपने दाएं हाथ से करते हैं,,, मर्द का दाहिना हाथ खुला रहना चाहिए...
21/07/2025

बिस्तर पर औरत को मर्द की बायी और लेटना चाहिए,,

हम सभी काम अपने दाएं हाथ से करते हैं,,, मर्द का दाहिना हाथ खुला रहना चाहिए,,,,,

सोते समय औरत की आदत होती है वह मर्द का कंधा बाजू या छाती पर सर रख कर सोती है। बाएं बाजू या कंधे पर और अपने सर रखा हो तो आदमी का दायां हाथ फ्री होता है

जिससे मर्द को औरत को सहलाने उसके बालों में उंगलियां चलाने मैं कोई मुश्किल नहीं आती है।

औरत भी यही चाहती है कि मर्द उसे सहलाए उसकी सारी थकान उतार दे,,

मर्द औरत की और बायी करवट लेता है।

तब मर्द की दाई नास ऊपर की तरफ होती है। इससे श्वास आने जाने में दाया स्वर चलता है इसे सूर्य स्वर कहते है। इससे शरीर में गर्मी बढ़ती है। जो मर्द के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।

औरत जैसे ही पति की तरफ मुख करती है।

उसका बाया स्वर चलता है। बाया स्वर चंद्र स्वर है।इससे औरत अंदर शीतलता बढ़ती है। जो औरत के स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है।

स्वस्थ जीवन ही जिंदगी का आधार है,,,

इसलिए औरत को मर्द की बायी और सोना चाहिए।🙏🙏💐💐🌈

सनातन धर्म में महिला को पुरुष की बाम अंगी बताया गया है। बाम अंगी होने का मतलब होता है कि महिला पुरुष की बाएं भाग का हिस्सा होती है।

और यही कारण है कि धार्मिक चित्रों में शिव के बाएं पार्वती खड़ी रहती हैं,राम के बाएं सीधा खड़ी रहती हैं, विष्णु के बाएं लक्ष्मी खड़ी रहती हैं।

आता है या पूर्व में ही निर्धारित है कि महिला को पुरुष के लेफ्ट में स्थापित होना चाहीये।

सोने के नियम के अनुसार भी हमारा जो बायां हिस्सा है शरीर का वह हमेशा नीचे होना चाहिए दाहिना हिस्सा शरीर का ऊपर की तरफ होना चाहिए यानी कि हमको बाएं करवट ले करके सोना चाहिए।

इसका वैज्ञानिक कारण भी है जो हृदय होता है वह हमारे बाएं भाग में स्थित होता है बाएं भाग में स्थित होने के कारण रक्त का संचरण जब हम बाएं हो करके सोते हैं तो पूरे शरीर में बराबर होता है।

इसी प्रकार जब हम बाएं करवट तो करके सोते हैं तो महिला को भी अपने साथ जब सुला है तो बाएं साइड में ही सुनाएं यह महिला पुरुष के लिए सबसे अच्छा पोजीशन है चाहे उनमें प्रेमालाप करने का हो चाहे साथ में सोने का ।

यह वैज्ञानिक रूप से भी अच्छा होगा और उनके आपसी रिश्ते को मजबूत करने के भी लिए भी अच्छा होगा आपस में प्रेम संबंध स्थापित करने में भी आसानी होगी।

पति को संभोग सुख दो तो वो तुम्हे दुनिया के सारे सुख देगा अपनी सहेलियों मां और चाची से ये बात हमेशा सुनती आरही थी लेकिन अ...
04/11/2024

पति को संभोग सुख दो तो वो तुम्हे दुनिया के सारे सुख देगा
अपनी सहेलियों मां और चाची से ये बात हमेशा सुनती आरही थी
लेकिन असल में कमी कुछ और थी

35 साल की उम्र में मेरा विवाह हुआ ये काफी लेट समय था और जिससे मेरी शादी हुई उसकी उम्र 37 साल थी

पहले लोग शादी जल्दी करने पर जोर देते थे, लेकिन आज लोग पहले करियर बनाने के पीछे भागते हैं

कम उम्र में हुई शादी आप को आपके पार्टनर और परिवार से घुलने मिलने में ज्यादा आसान होती है

लेकिन देर में हुई शादी में लोग इतने ज्यादा जटिल हो जातें हैं की वह अपने आप को नए माहौल में ढाल नही पाते

35 की उम्र में शादी होने से वैसे हो शरीर में कामवासना खत्म हो जाती है
रही सही कसर 37 साल के पुरुष के अंदर भी नही बचती

बचती है तो एक बात वो है साथ,

जब मेरी शादी हुई तो मुझे पता था जिस व्यक्ति से मेरी शादी हो रही है वो काफी कम कमाता है, पर 35 साल की उम्र होने पर मेरी मां को भी काफी चिंता होने लगे थी

क्यों की मेरे पापा की मृत्यु समय से पहले हो गई थी
मैने घर वालों से बात की तो लोगो ने बोला शादी करो नही उम्र निकल जाएगी

सहेलियों से बोला तो उन्होंने बोला रात को बिस्तर पर पति को खुश रखो वो खुद मेहनत कर के ज्यादा पैसे कमाएगा

सबकी बातों को ध्यान में रख कर मैने शादी कर ली,
लेकिन शादी के बाद पत्नी के साथ साथ एक पुरुष की जिंदगी में एक और चीज आती है जिसे हम जिम्मेदारी के नाम से जानते हैं

जिनसे मेरी शादी हुई थी वो इस बात को जानते थे की मैं शादी से खुश नहीं हूं क्यों की उनकी आय कम है

शादी के पहली रात उन्होंने मुझसे कहा, देखो मेरी आय कम है उम्र ज्यादा है इसका मतलब ये नही है की हम दोनों साथ में खुश नहीं रह सकते
मैं तुम्हे सभी संसाधन तो नही दे सकता लेकिन इतने जरूर दे सकता हूं की हमारी जिंदगी अच्छे से चले

और उस रात खाली यही बात हुई,
ऐसे ही करते करते 20 से 22 दिन बीत गए पर हम दोनो के बीच पति पत्नी वाला रिश्ता बना ही नही शायद उन्हें मन में मलाल था की वो कम कमाते हैं जिसकी वजह से मैने उन्हे मन से स्वीकार नहीं किया हैं

फिर सहेलियों से बात हुई सबने फिर वही बात कही, उन्हें रात में खुश करो और वो खुद तुम्हारी जरूरतें पूरी करेगा

महीने के अंत में उन्हें वेतन मिला 25000 रुपए, जिसमे से 5000 रुपए वो भविष्य केलिए रख कर 20000 मुझे दिया

और बोला मेरी जरूरतें काफी सीमित है, ये पैसे तुम रखो। अगर मुझे जरूर हुई तो तुमसे ले लूंगा
तुम अपने हिसाब से घर देख लो

पर जब मैंने हिसाब लगाना शुरू किया तो पैसे कम पड़े
जब मैने इनसे इस बारे में डिस्कस किया तो वो बोले थोड़ी दिक्कत हो सकती है लेकिन मैं दूसरी नौकरी के लिए ट्राय कर रहा हूं

ऐसे ही करते करते शादी को 6 महीने हो गए और हमारा झगड़ा हुआ, मैं बोलती और पैसे कमाओ वो बोलते जो हैं उसमे एडजेस्ट करने की कोशिश करो

बात इतनी बढ़ गई की मैं अपने मायके आ गईं और मन बना लिया की अब इसके साथ नही जाना

उन्हें ने कई बार मुझे बुलाया मेरे घर आए लेने
थक हार कर मैने भी बोल दिया जिस दिन आप अच्छा कमाने लगेंगे उस दिन आजाना लेने आप तो अभी पूरी तरह से मेरा खर्चा भी उठा नही पाते

ये बात उन्हें बहुत बुरी लगी, क्यों की गुस्से की वजह से मेरा बोलने का लहजा भी खराब था

लेकिन इस बार उस इंसान के गिरबान को चोट पहुंची थी , वो वापस तो गया लेकिन कभी लौट के नही आया

बल्कि उन्होंने अपने वेकील से फोन कर के बोला की अगर तुम मुझसे अलग होना चाहती हो तो हो सकती हो

जिसे जान कर मेरा गुस्सा और भड़क गया मुझे लगा को जो इंसान मेरा खर्चा नही उठा सकता वो मुझे छोड़ने की धमकी दे रहा है,

मैने भी बोल दिया नही रहना है,
हमारी हियरिंग हुई, जज ने पूछा, तो उन्होंने स्पष्ट बोला, sir मेरी तनख्वाह कम है, जिससे इन्हे आपत्ति है
और मैं इन्हे खुश नहीं रख पा रहा हूं, और ना ये मेरे साथ खुश हैं, किसी इंसान को जबरदस्ती खुश नहीं किया जा सकता है मेरे बस में इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकता
हर इंसान को अपनी खुशी चुनने की आजादी है

जजों ने मुझे समझाया की एक बार रिश्ता में खटास आजती है तो जिंदगी खराब हो जाती है तुम चाहो तो एक नई शुरुवात कर सकती हो, पैसे कम है लेकिन इतने भी नही की तुम्हारी बेसिक जरुरते पूरी ना हो सके

लेकिन इगो की वजह से किसी की नही सुनी

और कुछ समय बाद मेरा तलाक हो गया

तलाक के 6 महीने मैं घर पर थी लेकिन उसके बाद एक नौकरी की, अब मेरी उम्र 37 साल हो गई थी और मैने नौकरी करने का निश्चय किया
नौकरी पर आने पर पता चला की कितना मेहनत का काम है

और ये भी पता चला की डिवोर्क्सी लड़की के आगे पीछे सब घूमते हैं, मौके का तलाश करते हैं की कब मौका मिले और इसके साथ कुछ करने को मिले
काम अच्छा हो तो आप की कोई तारीफ नही करता
लेकिन अगर काम में कमी हो तो ऑफिस से लेके जूनियर तक पीछे पड़ जाते हैं

मेरी तनखवाह 15000 की है अब समझ में आने लगा था की नौकरी करना कितना कठिन है कुछ भी चाहो लेकिन हमारे हाथ में कुछ नही है

अब जिस 15000 के लिए मुझे 10 से 6 काम करना पड़ता था, लोगो की हरासमेंट का सामना करना पड़ता था

पहले उससे ज्यादा घर बैठे 20000 मिलता लेकिन अब काम करने के बाद 15000 मिल रहा है ऊपर से दिनभर की मेहनत

एक पुरुष अपने परिवार की कमी को पूरा करने के लिए दिन रात मेहनत करता है लेकिन हम औरतें सिर्फ ये सोचते हैं की कैसे हमारा काम पूरा हो

लेकिन आज उसी शक्श की नौकरी में तनखवा 86000 रुपए है

मैने ये गलती की रिश्ते को पैसे के पैरामीटर के पर तोलने लगी थी लेकिन है सही नही था
यदि प्यार से समझती तो हमारा जीवन भी आगे अच्छा चलता

आज के दौर में लड़किया किसी लड़के से शादी करने से पहले ये जानना चाहती हैं की लड़का कितना कमा रहा
लेकिन असल में किसी से शादी करने से पहले ये जानना जरूरी है की उसका चरित्र कैसा हैं

शादी जैसे बंधन को चलाने के लिए जरूरी है आपसी सहमति, समाजस्य और विश्वास लेकिन आज मेरी तरह सभी लड़कियां अपनी शादी में सबसे पहले ये देखती हैं की लड़का पैसा कितना कमा रहा है लड़किया तो लड़किया उनके मां बाप भी यही देखते हैं

एक अच्छा रिश्ता पैसे की दम पर नही चलता है।
मुझे ये बात तब समझ आए जब मैंने अपना रिश्ता खो दिया

किसी अमीर से 4 बात सुनने से बेहतर है की किसी कम आय वाले के साथ शादी कर के साथ खुश रहने में आनंद है

ये एक सत्य घटना है आप बताइए आप के हिसाब से रिश्ते चलाने के लिए पैसे कितने जरूरी हैं

कल मैंने 950 रु किलो की दर से देशी_घी लिया।पिताजी अचंभित हो कर बोले कि हमारे समय में तो इतने रुपए में 'ढ़ेर सारा' घी आ ज...
11/10/2023

कल मैंने 950 रु किलो की दर से देशी_घी लिया।

पिताजी अचंभित हो कर बोले कि हमारे समय में तो इतने रुपए में 'ढ़ेर सारा' घी आ जाता।

मैंने कहा, पिताजी ढ़ेर सारा यानी कितना 🤔 ?
उदाहरण देकर समझाइये।

मेरी बात सुन पिताजी शांत रह गए।

मैंने फिर पूछा, पिताजी ढ़ेर सारा मतलब कितना ?

पिताजी कुछ नहीं बोले, बस चुपचाप छत पर आ गए। ऊपर आकर वो शांति से बैठे, पानी पिया फिर बोले...

बेटा, 'ढ़ेर सारा' यानि बहुत ज्यादा...
उदाहरण देकर कहूँ तो हमारे समय में इतने रुपए में इतना घी आ जाता कि पूरा मोहल्ला एक एक कटोरी घी पी लेता ।

मैं बोला... पिताजी, ये उदाहरण तो आप नीचे भी दे सकते थे 🤔 ?

बेटा, नीचे बहुत भीड़ थी और "भीड़ को उदाहरण समझ नही आता हैं।"

मैं बोला, पिताजी में कुछ समझा नही...😯
'भीड़ को उदाहरण' समझ में नही आता है क्या ?

पिताजी बोले...
एक बार मोदी जी ने कहा था कि "विदेशों में हमारे देश का बहुत सारा काला धन जमा है।"

भीड़ ने कहा कि... कितना ?

तो मोदी जी ने उदाहरण देकर समझाया, "इतना कि पूरा पैसा अगर वापस आ जाए तो सभी के हिस्से में 15-15 लाख आ जाए।"

बस सुनने वालों की भीड़ तभी से "15 लाख" मांग रही है..,

और ये उदाहरण अगर मैं नीचे देता तो हो सकता है कि कल कई लोग अपनी-अपनी कटोरी लेकर घी मांगने आ जाते।🤗

्रीराम 🙏

मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं,तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर...
16/09/2023

मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं,
तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।

जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय
अरबपति रतनजी टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा:
"सर आपको क्या याद है कि आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली"?

रतनजी टाटा ने कहा:
"मैं जीवन में खुशी के चार चरणों से गुजरा हूं, और आखिरकार मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।"
पहला चरण धन और साधन संचय करना था।
लेकिन इस स्तर पर मुझे वह सुख नहीं मिला जो मैं चाहता था।

फिर क़ीमती सामान और वस्तुओं को इकट्ठा करने का दूसरा चरण आया।
लेकिन मैंने महसूस किया कि इस चीज का असर भी अस्थायी होता है और कीमती चीजों की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती।
फिर आया बड़ा प्रोजेक्ट मिलने का तीसरा चरण। वह तब था जब भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% मेरे पास था। मैं भारत और एशिया में सबसे बड़ा इस्पात कारखाने मालिक भी था। लेकिन यहां भी मुझे वो खुशी नहीं मिली जिसकी मैंने कल्पना की थी.

चौथा चरण वह समय था जब मेरे एक मित्र ने मुझे कुछ विकलांग बच्चों के लिए व्हील चेयर खरीदने के लिए कहा। लगभग 200 बच्चे थे। दोस्त के कहने पर मैंने तुरन्त व्हील चेयर खरीद लीं।

लेकिन दोस्त ने जिद की कि मैं उसके साथ जाऊं और बच्चों को व्हील चेयर भेंट करूँ। मैं तैयार होकर उनके साथ चल दिया।
वहाँ मैंने सारे पात्र बच्चों को अपने हाथों से व्हील चेयर दीं। मैंने इन बच्चों के चेहरों पर खुशी की अजीब सी चमक देखी। मैंने उन सभी को व्हील चेयर पर बैठे, घूमते और मस्ती करते देखा।

यह ऐसा था जैसे वे किसी पिकनिक स्पॉट पर पहुंच गए हों, जहां वे बड़ा उपहार जीतकर शेयर कर रहे हों।
मुझे उस दिन अपने अन्दर असली खुशी महसूस हुई। जब मैं वहाँ से वापस जाने को हुआ तो उन बच्चों में से एक ने मेरी टांग पकड़ ली।
मैंने धीरे से अपने पैर को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने मुझे नहीं छोड़ा और उसने मेरे चेहरे को देखा और मेरे पैरों को और कसकर पकड़ लिया।
मैं झुक गया और बच्चे से पूछा: क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?

तब उस बच्चे ने मुझे जो जवाब दिया, उसने न केवल मुझे झकझोर दिया बल्कि जीवन के प्रति मेरे दृष्टिकोण को भी पूरी तरह से बदल दिया।

उस बच्चे ने कहा था-

"मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं,
तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।"

उपरोक्त शानदार कहानी का मर्म यह है कि हम सभी को अपने अंतर्मन में झांकना चाहिए और यह मनन अवश्य करना चाहिए कि, इस जीवन और संसार और सारी सांसारिक गतिविधियों
को छोड़ने के बाद आपको किसलिए याद किया जाएगा?

क्या कोई आपका चेहरा फिर से देखना चाहेगा, यह बहुत मायने रखता है ?
रतन टाटा 25 वर्ष रतन टाटा 84 वर्ष

किसी भी  #लड़की की  #सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है।अशोक भाई ने घर में पैर रखा....‘अरी सुनती हो !'आवाज सुनत...
06/09/2023

किसी भी #लड़की की #सुदंरता उसके चेहरे से ज्यादा दिल की होती है।
अशोक भाई ने घर में पैर रखा....‘अरी सुनती हो !'

आवाज सुनते ही अशोक भाई की पत्नी हाथ में पानी का गिलास लेकर बाहर आई और बोली-

"अपनी बिटिया का रिश्ता आया है, अच्छा-भला इज्जतदार सुखी परिवार है, लड़के का नाम युवराज है। बैंक में काम करता है।

बस बेटी हां कह दे तो सगाई कर देते हैं."

बेटी उनकी एकमात्र लडकी थी. घर में हमेशा आनंद का वातावरण रहता था।

कभी-कभार अशोक भाई की सिगरेट व पान मसाले के कारण उनकी पत्नी और बेटी के साथ कहा-सुनी हो जाती थी, लेकिन अशोक भाई मजाक में टाल देते थे।

बेटी खूब समझदार और संस्कारी थी। S.S.C पास करके टयूशन व सिलाई आदि करके पिता की मदद करने की कोशिश करती रहती थी।

अब तो बेटी ग्रेजुएट हो गई थी और नौकरी भी करती थी, लेकिन अशोक भाई उसकी पगार में से एक रुपया भी नही लेते थे। रोज कहते थे ‘बेटी यह पगार तेरे पास रख तेरे भविष्य में तेरे काम आएगी।'

दोनों घरों की सहमति से बेटी और
युवराज की सगाई कर दी गई और शादी का मुहूर्त भी निकलवा दिया गया.

अब शादी के पन्द्रह दिन और बाकी थे. अशोक भाई ने बेटी को पास में बिठाया और कहा- "बेटा तेरे ससुर से मेरी बात हुई...उन्होने कहा दहेज में कुछ नही लेंगे, ना रुपये, ना गहने और ना ही कोई और चीज, तो बेटा तेरे शादी के लिए मैंने कुछ रुपये जमा किए हैं। यह दो लाख रुपये मैं तुझे देता हूँ।

तेरे भविष्य में काम आएंगे, तू तेरे खाते में जमा करा देना.'
"ठीक है पापा" - बेटी छोटा सा जवाब देकर अपने रुम में चली गई. समय को जाते कहां देर लगती है ? दो महीने पहले शुभ दिन बारात आंगन में आई, पंडितजी ने चंवरी में विवाह-विधि शुरु की।

फेरे का समय आया. कोयल जैसे कुहुकी हो ऐसे बेटी दो शब्दो में बोली -"रुको पंडित जी, मुझे आप सब की उपस्थिति में अपने पापा से बात करनी है।"

“पापा आप ने मुझे लाड-प्यार से बड़ा किया, पढाया-लिखाया, खूब प्रेम दिया इसका कर्ज तो चुका सकती नही, लेकिन युवराज और मेरे ससुर जी की सहमति से आपका दिया दो लाख रुपये का चेक मैं वापस देती हूँ।

इन रुपयों से मेरी शादी के लिए लिये हुए उधार वापस दे देना और दूसरा चेक तीन लाख जो मैंने अपनी पगार में से बचत की है. जब आप रिटायर होंगे तब आपके काम आएंगे।

मैं नहीं चाहती कि आप को बुढापे में किसी के आगे हाथ फैलाना पड़े। अगर मैं आपका लड़का होता तब भी इतना तो करता ना ?"

वहां पर सभी की नजर बेटी पर थी. “पापा अब मैं आपसे जो दहेज में मांगू वह दोगे ?"

अशोक भाई भारी आवाज में -"हां बेटा", इतना ही बोल सके।

"तो पापा मुझे वचन दो" आज के बाद सिगरेट को हाथ नहीं लगाओगे. तबांकू, पान-मसाले का व्यसन आज से छोड़ दोगे। सब की मौजूदगी में दहेज में बस इतना ही मांगती हूँ."
लड़की का बाप मना कैसे करता ?

शादी मे लड़की की विदाई समय कन्या पक्ष को रोते देखा होगा लेकिन आज तो बारातियों की आंखों में भी आँसूओं की धारा बह रही थी।

मैं दूर से उस बेटी को लक्ष्मी रुप में देख रही थी. रुपयों का लिफाफा मैं अपनी पर्स से नही निकाल पा रही थी. साक्षात लक्ष्मी को मैं कैसे लक्ष्मी दूं ?

लेकिन “भ्रूण हत्या करने वाले लोगों को इस जैसी लक्ष्मी मिलेगी क्या" ?

 #चार_साल_की_लंबी लड़ाई के बाद हमारा तलाक हो गया. तलाक के कागज लिए मैं कोर्ट से बाहर आई तो देखा।💙मेरे पति कोर्ट के सामने...
28/08/2023

#चार_साल_की_लंबी लड़ाई के बाद हमारा तलाक हो गया. तलाक के कागज लिए मैं कोर्ट से बाहर आई तो देखा।
💙मेरे पति कोर्ट के सामने लगे एक चाय के ठेले के पास अकेले बैठे हुए थे, पता नही क्यो मैं भी उनके बगल में जाकर बैठ गई।
💙उन्होंने मेरे बिना पूछे चाय वाले से दो कडक अदरक वाली चाय बनाने को कहा,
वो अच्छे से जानते थे कि मुझे अदरक वाली चाय बेहद पसन्द है।
💙थोडी देर बाद मैं सरक कर उनके नजदीक जाकर बैठ गई,
काफी देर की चुप्पी के बाद मैंने पूछा आप दवाई तो रोज ले रहे हो ना,
💙उन्होंने कुछ नही कहा बस सर हिला दिया. और हमारे बीच फिर वही खामोसी छा गई,
💙थोडी देर बाद वह स्वयं बोले कि डॉक्टर ने कहा है कि अब मेरे पास ज्यादा से ज्यादा एक साल बचा है,
💙अगले हफ्ते से मुझे कीमो के लिए बुलाया है...
उनके यह शब्द सुनकर मैं कुछ पल के लिए मानो कोमा में चली गई।
🍂उन्होंने कहा कोर्ट ने मुझे तुमको आठ लाख रुपये देने कहा है अभी तो मेरे पास नही है
🍂तुम रोहिणी वाला फ्लैट ले लो।
और सोने के जेवर भी बिट्टो की शादी में काम आएंगे,तुम्ही रख लेना,मैं अपना घर भी
तुम्हारे नाम कर दूंगा मेरे जाने के बाद वह भी
तुम्हारा हो जाएगा।
#मैने कहा, चुप.. !
अब अगर एक भी शब्द कहा, मैं आपको कही छोड कर नही जाने वाली,
🍂आप समझते क्या हैं सब आपके ही मन का होगा, और जोर जोर से रोने लगी।
☺️मेरे आंसू देखकर मेरे पति भी फूट फूट कर रोने लगे और कहने लगे मुझे अकेले छोड कर मत जाओ, मैं अभी मरना नही चाहता
🤔पति के आंसू देखकर मैंने उन्हें गले से लगा लिया और मैं कोर्ट से ही सीधे अपने ससुराल आ गई..☺️

#विश्वा_भारतीय
✍️

लेख बड़ा हैं लेकिन मणिपुर समस्या की जड़ें जानने की इच्छा है तो पढ़ें 👇वो लोग जो मणिपुर का रास्ता नहीं जानते। पूर्वोत्तर ...
23/07/2023

लेख बड़ा हैं लेकिन मणिपुर समस्या की जड़ें जानने की इच्छा है तो पढ़ें 👇

वो लोग जो मणिपुर का रास्ता नहीं जानते। पूर्वोत्तर के राज्यों की राजधानी शायद जानते हो लेकिन कोई दूसरे शहर का नाम तक नहीं बता सकते उनके ज्ञान वर्धन के लिए बता दूं

"मणिपुर समस्या: एक इतिहास"

जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने पूर्वोत्तर की ओर भी कदम बढ़ाए जहाँ उनको चाय के साथ तेल मिला। उनको इस पर डाका डालना था। उन्होंने वहां पाया कि यहाँ के लोग बहुत सीधे सरल हैं और ये लोग वैष्णव सनातनी हैं। परन्तु जंगल और पहाड़ों में रहने वाले ये लोग पूरे देश के अन्य भाग से अलग हैं तथा इन सीधे सादे लोगों के पास बहुमूल्य सम्पदा है।

अतः अंग्रेज़ों ने सबसे पहले यहाँ के लोगों को देश के अन्य भूभाग से पूरी तरह काटने को सोचा। इसके लिए अंग्रेज लोग ले आए इनर परमिट और आउटर परमिट की व्यवस्था। इसके अंतर्गत कोई भी इस इलाके में आने से पहले परमिट बनवाएगा और एक समय सीमा से आगे नहीं रह सकता। परन्तु इसके उलट अंग्रेजों ने अपने भवन बनवाए और अंग्रेज अफसरों को रखा जो चाय की पत्ती उगाने और उसको बेचने का काम करते थे।

इसके साथ अंग्रेज़ों ने देखा कि इस इलाके में ईसाई नहीं हैं। अतः इन्होने ईसाई मिशनरी को उठा उठा के यहां भेजा। मिशनरीयों ने इस इलाके के लोगों का आसानी से धर्म परिवर्तित करने का काम शुरू किया। जब खूब लोग ईसाई में परिवर्तित हो गए तो अंग्रेज इनको ईसाई राज्य बनाने का सपना दिखाने लगे। साथ ही उनका आशय था कि पूर्वोत्तर से चीन, भारत तथा पूर्वी एशिया पर नजर बना के रखेंगे।

अंग्रेज़ों ने एक चाल और चली। उन्होंने धर्म परिवर्तित करके ईसाई बने लोगों को ST का दर्जा दिया तथा उनको कई सरकारी सुविधाएं दी।

धर्म परिवर्तित करने वालों को कुकी जनजाति और वैष्णव लोगों को मैती समाज कहा जाता है।

तब इतने अलग राज्य नहीं थे और बहुत सरे नगा लोग भी धर्म परिवर्तित करके ईसाई बन गए। धीरे धीरे ईसाई पंथ को मानने वालों की संख्या वैष्णव लोगों से अधिक या बराबर हो गयी। मूल लोग सदा अंग्रेजों से लड़ते रहे जिसके कारण अंग्रेज इस इलाके का भारत से विभाजन करने में नाकाम रहे। परन्तु वो मैती हिंदुओं की संख्या कम करने और परिवर्तित लोगों को अधिक करने में कामयाब रहे। मणिपुर के 90% भूभाग पर कुकी और नगा का कब्जा हो गया जबकि 10% पर ही मैती रह गए। अंग्रेजों ने इस इलाके में अफीम की खेती को भी बढ़ावा दिया और उस पर ईसाई कुकी लोगों को कब्जा करने दिया।

आज़ादी के बाद:

आज़ादी के समय वहां के राजा थे बोध चंद्र सिंह और उन्होंने भारत में विलय का निर्णय किया। 1949 में उन्होंने नेहरू को बोला कि मूल वैष्णव जो कि 10% भूभाग में रह गए है उनको ST का दर्जा दिया जाए। नेहरू ने उनको जाने को कह दिया। फिर 1950 में संविधान अस्तित्व में आया तो नेहरू ने मैती समाज को कोई छूट नहीं दिया। 1960 में नेहरू सरकार द्वारा लैंड रिफार्म एक्ट लाया जिसमे 90% भूभाग वाले कुकी और नगा ईसाईयों को ST में डाल दिया गया। इस एक्ट में ये प्रावधान भी था जिसमे 90% कुकी - नगा वाले कहीं भी जा सकते हैं, रह सकते हैं और जमीन खरीद सकते हैं परन्तु 10% के इलाके में रहने वाले मैती हिंदुओं को ये सब अधिकार नहीं था। यहीं से मैती लोगों का दिल्ली से विरोध शुरू हो गया। नेहरू एक बार भी पूर्वोत्तर के हालत को ठीक करने करने नहीं गए।

उधर ब्रिटैन की MI6 और पाकिस्तान की ISI मिलकर कुकी और नगा को हथियार देने लगी जिसका उपयोग वो भारत विरुद्ध तथा मैती वैष्णवों को भागने के लिए करते थे। मैतियो ने उनका जम कर बिना दिल्ली के समर्थन के मुकाबला किया। सदा से इस इलाके में कांग्रेस और कम्युनिस्ट लोगों की सरकार रही और वो कुकी तथा नगा ईसाईयों के समर्थन में रहे। चूँकि लड़ाई पूर्वोत्तर में ट्राइबल जनजातियों के अपने अस्तित्व की थी तो अलग अलग फ्रंट बनाकर सबने हथियार उठा लिया। पूरा पूर्वोत्तर ISI के द्वारा एक लड़ाई का मैदान बना दिया गया। जिसके कारण Mizo जनजातियों में सशत्र विद्रोह शुरू हुआ। बिन दिल्ली के समर्थन जनजातियों ने ISI समर्थित कुकी, नगा और म्यांमार से भारत में अनधिकृत रूप से आये चिन जनजातियों से लड़ाई करते रहे। जानकारी के लिए बताते चलें कि कांग्रेस और कम्युनिस्ट ने मिशनरी के साथ मिलकर म्यांमार से आये इन चिन जनजातियों को मणिपुर के पहाड़ी इलाकों और जंगलों की नागरिकता देकर बसा दिया। ये चिन लोग ISI के पाले कुकी तथा नगा ईसाईयों के समर्थक थे तथा वैष्णव मैतियों से लड़ते थे। पूर्वोत्तर का हाल ख़राब था जिसका पोलिटिकल सलूशन नहीं निकाला गया और एक दिन इन्दिरा गाँधी ने आदिवासी इलाकों में air strike का आर्डर दे दिया जिसका आर्मी तथा वायुसेना ने विरोध किया परन्तु राजेश पायलट तथा सुरेश कलमाड़ी ने एयर स्ट्राइक किया और अपने लोगों की जाने ली। इसके बाद विद्रोह और खूनी तथा सशत्र हो गया।

1971 में पाकिस्तान विभाजन और बांग्ला देश अस्तित्व आने से ISI के एक्शन को झटका लगा परन्तु म्यांमार उसका एक खुला एरिया था। उसने म्यांमार के चिन लोगों का मणिपुर में एंट्री कराया जिसका कांग्रेस तथा उधर म्यांमार के अवैध चिन लोगों ने जंगलों में डेरा बनाया और वहां ओपियम यानि अफीम की खेती शुरू कर दिया। पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर, मिजोरम और नागालैंड दशकों तक कुकियों और चिन लोगों के अफीम की खेती तथा तस्करी का खुला खेल का मैदान बन गया। मयंमार से ISI तथा MI6 ने इस अफीम की तस्करी के साथ हथियारों की तस्करी का एक पूरा इकॉनमी खड़ा कर दिया। जिसके कारण पूर्वोत्तर के इन राज्यों की बड़ा जनसँख्या नशे की भी आदि हो गई। नशे के साथ हथियार उठाकर भारत के विरुद्ध युद्ध फलता फूलता रहा।

2014 के बाद की परिस्थिति:

मोदी सरकार ने एक्ट ईस्ट पालिसी के अंतर्गत पूर्वोत्तर पर ध्यान देना शुरू किया, NSCN - तथा भारत सरकार के बीच हुए "नागा एकॉर्ड" के बाद हिंसा में कमी आई। भारत की सेना पर आक्रमण बंद हुए। भारत सरकार ने अभूतपूर्व विकास किया जिससे वहां के लोगों को दिल्ली के करीब आने का मौका मिला। धीरे धीरे पूर्वोत्तर से हथियार आंदोलन समाप्त हुए। भारत के प्रति यहाँ के लोगों का दुराव कम हुआ। रणनीति के अंतर्गत पूर्वोत्तर में भाजपा की सरकार आई। वहां से कांग्रेस और कम्युनिस्ट का लगभग समापन हुआ। इसके कारण इन पार्टियों का एक प्रमुख धन का श्रोत जो कि अफीम तथा हथियारों की तस्करी था वो चला गया। इसके कारण इन लोगों के लिए किसी भी तरह पूर्वोत्तर में हिंसा और अशांति फैलाना जरूरी हो गया था। जिसका ये लोग बहुत समय से इंतजार कर रहे थे।

हाल ही में दो घटनाए घटीं:

1. मणिपुर उच्च न्यायालय ने फैसला किया कि अब मैती जनजाति को ST का स्टेटस मिलेगा। इसका परिणाम ये होगा कि नेहरू के बनाए फार्मूला का अंत हो जाएगा जिससे मैती लोग भी 10% के सिकुड़े हुए भूभाग की जगह पर पूरे मणिपुर में कहीं भी रह, बस और जमीन ले सकेंगे। ये कुकी और नगा को मंजूर नहीं।

2. मणिपुर के मुख्यमंत्री बिरेन सिंह ने कहा कि सरकार पहचान करके म्यांमार से आए अवैद्य चिन लोगों को बाहर निकलेगी और अफीम की खेती को समाप्त करेगी। इसके कारण तस्करों का गैंग सदमे में आ गया।

इसके बाद ईसाई कुकियों और ईसाई नगाओं ने अपने दिल्ली बैठे आकाओं, कम्युनिस्ट लुटियन मीडिया को जागृत किया। पहले इन लोगों ने अख़बारों और मैगजीन में गलत लेख लिखकर और उलटी जानकारी देकर शेष भारत के लोगों को बरगलाने का काम शुरू किया। उसके बाद दिल्ली से सिग्नल मिलते ही ईसाई कुकियों और ईसाई नगाओं ने मैती वैष्णव लोगों पर हमला बोल दिया। जिसका जवाब मैतियों दुगुना वेग से दिया और इन लोगों को बुरी तरह कुचल दिया जो कि कुकी - नगा के साथ दिल्ली में बैठे इनके आकाओं के लिए भी unexpected था। लात खाने के बाद ये लोग अदातानुसार विक्टम कार्ड खेलकर रोने लगे।

अभी भारत की मीडिया का एक वर्ग जो कम्युनिस्ट तथा कोंग्रस का प्रवक्ता है अब रोएगा क्योंकि पूर्वतर में मिशनरी, अवैध घुसपैठियों और तस्करों के बिल में मणिपुर तथा केंद्र सरकार ने खौलता तेल डाल दिया है।

और जो मणिपुर मे हुआ है उसके गुनहगार कोई भी हो उसे जीवित रहने का अधिकारी नहीं इस घटना ने पुरे हिंदुस्तान को शर्मसार कर के रख दिया....

भारत में सेवा करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को इंग्लैंड लौटने पर सार्वजनिक पद/जिम्मेदारी नहीं दी जाती थी। तर्क यह था कि उ...
08/06/2023

भारत में सेवा करने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को इंग्लैंड लौटने पर सार्वजनिक पद/जिम्मेदारी नहीं दी जाती थी। तर्क यह था कि उन्होंने एक गुलाम राष्ट्र पर शासन किया है जिसकी वजह से उनके दृष्टिकोण और व्यवहार में फर्क आ गया होगा। अगर उनको यहां ऐसी जिम्मेदारी दी जाए, तो वह आजाद ब्रिटिश नागरिकों के साथ भी उसी तरह से ही व्यवहार करेंगे। इस बात को समझने के लिए नीचे दिया गया वाकया जरूर पढ़ें...

एक ब्रिटिश महिला जिसका पति ब्रिटिश शासन के दौरान पाकिस्तान और भारत में एक सिविल सेवा अधिकारी था। महिला ने अपने जीवन के कई साल भारत के विभिन्न हिस्सों में बिताए, अपनी वापसी पर उन्होंने अपने संस्मरणों पर आधारित एक सुंदर पुस्तक लिखी।

महिला ने लिखा कि जब मेरे पति एक जिले के डिप्टी कमिश्नर थे तो मेरा बेटा करीब चार साल का था और मेरी बेटी एक साल की थी। डिप्टी कलेक्टर को मिलने वाली कई एकड़ में बनी एक हवेली में रहते थे। सैकड़ों लोग डीसी के घर और परिवार की सेवा में लगे रहते थे। हर दिन पार्टियां होती थीं, जिले के बड़े जमींदार हमें अपने शिकार कार्यक्रमों में आमंत्रित करने में गर्व महसूस करते थे और हम जिसके पास जाते थे, वह इसे सम्मान मानता था। हमारी शान और शौकत ऐसी थी कि ब्रिटेन में महारानी और शाही परिवार भी मुश्किल से मिलती होगी।

ट्रेन यात्रा के दौरान डिप्टी कमिश्नर के परिवार के लिए नवाबी ठाट से लैस एक आलीशान कंपार्टमेंट आरक्षित किया जाता था। जब हम ट्रेन में चढ़ते तो सफेद कपड़े वाला ड्राइवर दोनों हाथ बांधकर हमारे सामने खड़ा हो जाता और यात्रा शुरू करने की अनुमति मांगता। अनुमति मिलने के बाद ही ट्रेन चलने लगती।

एक बार जब हम यात्रा के लिए ट्रेन में सवार हुए, तो परंपरा के अनुसार, ड्राइवर आया और अनुमति मांगी। इससे पहले कि मैं कुछ बोल पाती, मेरे बेटे का किसी कारण से मूड खराब था। उसने ड्राइवर को गाड़ी न चलाने को कहा। ड्राइवर ने हुक्म बजा लाते हुए कहा, जो हुक्म छोटे सरकार। कुछ देर बाद स्टेशन मास्टर समेत पूरा स्टाफ इकट्ठा हो गया और मेरे चार साल के बेटे से भीख मांगने लगा, लेकिन उसने ट्रेन को चलाने से मना कर दिया। आखिरकार, बड़ी मुश्किल से, मैंने अपने बेटे को कई चॉकलेट के वादे पर ट्रेन चलाने के लिए राजी किया और यात्रा शुरू हुई।

कुछ महीने बाद, वह महिला अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलने यूके लौट आई। वह जहाज से लंदन पहुंचे, उनकी रिहाइश वेल्स में एक काउंटी में थी जिसके लिए उन्हें ट्रेन से यात्रा करनी थी। वह महिला स्टेशन पर एक बेंच पर अपनी बेटी और बेटे को बैठाकर टिकट लेने चली गई। लंबी कतार के कारण बहुत देर हो चुकी थी, जिससे उस महिला का बेटा बहुत परेशान हो गया था। जब वह ट्रेन में चढ़े तो आलीशान कंपाउंड की जगह फर्स्ट क्लास की सीटें देखकर उस बच्चे को फिर गुस्सा आ गया।

ट्रेन ने समय पर यात्रा शुरू की तो वह बच्चा लगातार चीखने-चिल्लाने लगा। वह ज़ोर से कह रहा था, "यह कैसा उल्लू का पट्ठा ड्राइवर है। उसने हमारी अनुमति के बिना ट्रेन चलाना शुरू कर दी है। मैं पापा को बोल कर इसे जूते लगवा लूंगा।" महिला को बच्चे को यह समझाना मुश्किल हो रहा था कि यह उसके पिता का जिला नहीं है, यह एक स्वतंत्र देश है। यहां डिप्टी कमिश्नर जैसा तीसरे दर्जे का सरकारी अफसर तो क्या प्रधानमंत्री और राजा को भी यह अख्तियार नहीं है कि वह लोगों को अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए अपमानित कर सके।

आज भले ही हमने अंग्रेजों को खदेड़ दिया है लेकिन हमने गुलामी को अभी तक देश बदर नहीं किया। आज भी कई अधिकारी, एसपी, मंत्री, सलाहकार और राजनेता अपने अहंकार को संतुष्ट करने के लिए आम लोगों को घंटों सड़कों पर परेशान करते हैं।

प्रोटोकॉल आम जनता की सुविधा के लिए होना चाहिए, ना कि उनके लिए परेशानी का कारण।
Goswami baba

श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास...
03/06/2023

श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं।
इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा।
जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा।

एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देखकर उसका परिचय पूंछा-
नारद- बालक तुम कौन हो ?
बालक- यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ ।
नारद- तुम्हारे जनक कौन हैं ?
बालक- यही तो मैं जानना चाहता हूँ ।

तब नारद ने ध्यान धर देखा। नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया कि हे बालक ! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो। तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी। नारद ने बताया कि तुम्हारे पिता दधीचि की मृत्यु मात्र 31 वर्ष की वय में ही हो गयी थी।
बालक- मेरे पिता की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ?
नारद- तुम्हारे पिता पर शनिदेव की महादशा थी।
बालक- मेरे ऊपर आयी विपत्ति का कारण क्या था ?
नारद- शनिदेव की महादशा।

इतना बताकर देवर्षि नारद ने पीपल के पत्तों और गोदों को खाकर जीने वाले बालक का नाम पिप्पलाद रखा और उसे दीक्षित किया।
नारद के जाने के बाद बालक पिप्पलाद ने नारद के बताए अनुसार ब्रह्मा जी की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया। ब्रह्मा जी ने जब बालक पिप्पलाद से वर मांगने को कहा तो पिप्पलाद ने अपनी दृष्टि मात्र से किसी भी वस्तु को जलाने की शक्ति माँगी।
ब्रह्मा जी से वरदान मिलने पर सर्वप्रथम पिप्पलाद ने शनि देव का आह्वाहन कर अपने सम्मुख प्रस्तुत किया और सामने पाकर आँखे खोलकर भष्म करना शुरू कर दिया।
शनिदेव सशरीर जलने लगे। ब्रह्मांड में कोलाहल मच गया। सूर्यपुत्र शनि की रक्षा में सारे देव विफल हो गए। सूर्य भी अपनी आंखों के सामने अपने पुत्र को जलता हुआ देखकर ब्रह्मा जी से बचाने हेतु विनय करने लगे।
अन्ततः ब्रह्मा जी स्वयम् पिप्पलाद के सम्मुख पधारे और शनिदेव को छोड़ने की बात कही किन्तु पिप्पलाद तैयार नहीं हुए।ब्रह्मा जी ने एक के बदले दो वरदान मांगने की बात कही। तब पिप्पलाद ने खुश होकर निम्नवत दो वरदान मांगे-

1- जन्म से 5 वर्ष तक किसी भी बालक की कुंडली में शनि का स्थान नहीं होगा।जिससे कोई और बालक मेरे जैसा अनाथ न हो।

2- मुझ अनाथ को शरण पीपल वृक्ष ने दी है। अतः जो भी व्यक्ति सूर्योदय के पूर्व पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाएगा उसपर शनि की महादशा का असर नहीं होगा।

ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह वरदान दिया।तब पिप्पलाद ने जलते हुए शनि को अपने ब्रह्मदण्ड से उनके पैरों पर आघात करके उन्हें मुक्त कर दिया । जिससे शनिदेव के पैर क्षतिग्रस्त हो गए और वे पहले जैसी तेजी से चलने लायक नहीं रहे।अतः तभी से शनि "शनै:चरति य: शनैश्चर:" अर्थात जो धीरे चलता है वही शनैश्चर है, कहलाये और शनि आग में जलने के कारण काली काया वाले अंग भंग रूप में हो गए।

सम्प्रति शनि की काली मूर्ति और पीपल वृक्ष की पूजा का यही धार्मिक हेतु है।आगे चलकर पिप्पलाद ने प्रश्न उपनिषद की रचना की,जो आज भी ज्ञान का वृहद भंडार है.....

जय जय श्री राम 🙏🚩

Goswami Baba

पाँच साल की बेटी बाज़ार में गोल गप्पे खाने के लिए मचल गई। 🍥🌏 “किस भाव से दिए भाई?” पापा नें सवाल् किया। “10 रूपये के 8 द...
03/06/2023

पाँच साल की बेटी बाज़ार में गोल गप्पे खाने के लिए मचल गई। 🍥🌏 “किस भाव से दिए भाई?” पापा नें सवाल् किया। “10 रूपये के 8 दिए हैं। गोल गप्पे वाले ने जवाब दिया…… पापा को मालूम नहीं था गोलगप्पे इतने महँगे हो गये है….जब वे खाया करते थे तब तो एक रुपये के 10 मिला करते थे। . पापा ने जेब मे हाथ डाला 15 रुपये बचे थे। बाकी रुपये घर की जरूरत का सामान लेने में खर्च हो गए थे। उनका गांव शहर से दूर है 10 रुपये तो बस किराए में लग जाने है। “नहीं भई 5 रुपये में 10 दो तो ठीक है वरना नही लेने।

यह सुनकर बेटी नें मुँह फुला लिया…. “अरे अब चलो भी , नहीं लेने इतने महँगे। पापा के माथे पर लकीरें उभर आयीं …. “अरे खा लेने दो ना साहब… अभी आपके घर में है तो आपसे लाड़ भी कर सकती है… कल को पराये घर चली गयी तो पता नहीं ऐसे मचल पायेगी या नहीं. … तब आप भी तरसोगे बिटिया की फरमाइश पूरी करने को… गोलगप्पे वाले के शब्द थे तो चुभने वाले पर उन्हें सुनकर पापा को अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी….

जिसकी शादी उसने तीन साल पहले
एक खाते -पीते पढ़े लिखे परिवार में की थी……

उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी
छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था…..

दो साल तक वह मुट्ठी भरभर के
रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर
उनका पेट बढ़ता ही चला गया ….

और अंत में एक दिन सीढियों से
गिर कर बेटी की मौत की खबर
ही मायके पहुँची….

आज वह छटपटाता है
कि उसकी वह बेटी फिर से
उसके पास लौट आये..?
और वह चुन चुन कर उसकी
सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे…

पर वह अच्छी तरह जानता है
कि अब यह असंभव है.
“दे दूँ क्या बाबूजी

गोलगप्पे वाले की आवाज से
पापा की तंद्रा टूटी…

“रुको भाई दो मिनिट ….
पापा पास ही पंसारी की दुकान थी उस पर गए जहाँ से जरूरत का सामान खरीदा था। खरीदी गई पाँच किलो चीनी में से एक किलो चीनी वापस की तो 40 रुपये जेब मे बढ़ गए।

फिर ठेले पर आकर पापा ने डबडबायी आँखें
पोंछते हुए कहा
अब खिलादे भाई। हाँ तीखा जरा कम डालना। मेरी बिटिया बहुत नाजुक है….
सुनकर पाँच वर्ष की गुड़िया जैसी बेटी की आंखों में चमक आ गई और पापा का हाथ कस कर पकड़ लिया।

जब तक बेटी हमारे घर है
उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करे,…👏👏

क्या पता आगे कोई इच्छा
पूरी हो पाये या ना हो पाये ।

ये बेटियां भी कितनी अजीब होती हैं
जब ससुराल में होती हैं
तब माइके जाने को तरसती हैं….

सोचती हैं
कि घर जाकर माँ को ये बताऊँगी
पापा से ये मांगूंगी
बहिन से ये कहूँगी
भाई को सबक सिखाऊंगी
और मौज मस्ती करुँगी…

लेकिन

जब सच में मायके जाती हैं तो
एकदम शांत हो जाती है
किसी से कुछ भी नहीं बोलती….

बस माँ बाप भाई बहन से गले मिलती है।
बहुत बहुत खुश होती है।
भूल जाती है
कुछ पल के लिए पति ससुराल…..

क्योंकि
एक अनोखा प्यार होता है मायके में
एक अजीब कशिश होती है मायके में…..
ससुराल में कितना भी प्यार मिले…..

माँ बाप की एक मुस्कान को
तरसती है ये बेटियां….

ससुराल में कितना भी रोएँ
पर मायके में एक भी आंसूं नहीं
बहाती ये बेटियां….

क्योंकि
बेटियों का सिर्फ एक ही आंसू माँ
बाप भाई बहन को हिला देता है
रुला देता है…..

कितनी अजीब है ये बेटियां
कितनी नटखट है ये बेटियां
भगवान की अनमोल देंन हैं
ये बेटियां ……

हो सके तो
बेटियों को बहुत प्यार दें
उन्हें कभी भी न रुलाये
क्योंकि ये अनमोल बेटी दो
परिवार जोड़ती है
दो रिश्तों को साथ लाती है।
अपने प्यार और मुस्कान से।

हम चाहते हैं कि
सभी बेटियां खुश रहें
हमेशा भले ही हो वो
मायके में या ससुराल में।

●●●●●●●●
खुशकिस्मत है वो
जो बेटी के बाप हैं,
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Goswami baba

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