The Urban Rishi

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बस सब मन की अभिलाषा है,स्वयं बनाई परिभाषा है,फिर काहे को, कैसा रोना,खुला आसमां,क्षितिज समंदर,वृक्ष तले ही अपना कोना…🙏
19/07/2026

बस सब मन की अभिलाषा है,

स्वयं बनाई परिभाषा है,

फिर काहे को, कैसा रोना,

खुला आसमां,

क्षितिज समंदर,

वृक्ष तले ही अपना कोना…🙏

इस धरनी के बृहद परिधि से, दूर गगन के अनंत क्षितिज तक, कौन सा कोना..? मुक्त भाव से सब कुछ मेरा, मैं सबका हूँ,कैसा कोना, कौन...

24/05/2026

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जहाँ तक छोड़ सकता था वहाँ तक छोड़ आया हूँ.... Join 147 followers for the latest updates.

15/02/2026

16/01/2026
14/01/2026

प्रेत आएगा
किताब से निकाल ले जाएगा प्रेमपत्र

गिद्ध उसे पहाड़ पर नोच-नोच खाएगा
चोर आएगा तो प्रेमपत्र चुराएगा

जुआरी प्रेमपत्र पर ही दाँव लगाएगा
ऋषि आएँगे तो दान में माँगेंगे प्रेमपत्र

बारिश आएगी तो
प्रेमपत्र ही गलाएगी

आग आएगी तो जलाएगी प्रेमपत्र
बंदिशें प्रेमपत्र पर ही लगाई जाएँगी

साँप आएगा तो डँसेगा प्रेमपत्र
झींगुर आएँगे तो चाटेंगे प्रेमपत्र

कीड़े प्रेमपत्र ही काटेंगे
प्रलय के दिनों में

सप्तर्षि, मछली और मनु
सब वेद बचाएँगे

कोई नहीं बचाएगा प्रेमपत्र
कोई रोम बचाएगा,कोई मदीना
कोई चाँदी बचाएगा, कोई सोना

मैं निपट अकेला
कैसे बचाऊँगा तुम्हारा प्रेमपत्र।

-बद्रीनारायण

14/01/2026

17/12/2025

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