19/07/2026
बस सब मन की अभिलाषा है,
स्वयं बनाई परिभाषा है,
फिर काहे को, कैसा रोना,
खुला आसमां,
क्षितिज समंदर,
वृक्ष तले ही अपना कोना…🙏
इस धरनी के बृहद परिधि से, दूर गगन के अनंत क्षितिज तक, कौन सा कोना..? मुक्त भाव से सब कुछ मेरा, मैं सबका हूँ,कैसा कोना, कौन...