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इसी गूढ़ परंपरा को स्वर दियाधर्मध्वजा के संवाहकमहंत मदन गोपाल दास जी महाराज ने।यह आलेख बुंदेलखंड कनेक्ट के“अथ चित्रकूटम्...
30/01/2026

इसी गूढ़ परंपरा को स्वर दिया
धर्मध्वजा के संवाहक
महंत मदन गोपाल दास जी महाराज ने।
यह आलेख बुंदेलखंड कनेक्ट के
“अथ चित्रकूटम्” विशेषांक
(जनवरी 2020) में
संदीप रिछारिया
के संपादकत्व में प्रकाशित हुआ।










🌺 चित्रकूट — आत्मा की परमात्मा से मिलन की यात्रा 🌺चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं, यह आत्मा को शुद्ध कर परमात्मा से जोड़ने क...
24/01/2026

🌺 चित्रकूट — आत्मा की परमात्मा से मिलन की यात्रा 🌺
चित्रकूट केवल एक तीर्थ नहीं, यह आत्मा को शुद्ध कर परमात्मा से जोड़ने की साधना-भूमि है। यहाँ की पारंपरिक पाँच दिवसीय यात्रा योगशास्त्र के पंचकोश सिद्धांत से जुड़ी मानी जाती है — जहाँ शरीर से शुरू होकर आत्मा तक पहुँचा जाता है। 🙏
🔹 पहले स्नान, फिर दर्शन
चित्रकूट में परंपरा है — पहले रामघाट या राघव प्रयाग में मंदाकिनी स्नान, फिर तीर्थाधिपति स्वामी मत्तगयेंद्रनाथ महादेव के दर्शन। लोक में कहा जाता है — “पहले घाट, फिर महादेव।”
🟠 प्रथम दिवस — शरीर और कर्म की शुद्धि
रामघाट स्नान → मत्तगयेंद्रनाथ महादेव दर्शन → रामघाट के मंदिर → ब्रह्मपुरी व सीतापुर दर्शन → कामदगिरि परिक्रमा
(अन्नमय कोश की शुद्धि)
🟡 द्वितीय दिवस — जीवन-शक्ति का जागरण
सूर्यकुण्ड, गणेशबाग, बाँकेसिद्ध, हनुमान धारा, अनुसूया आश्रम, गुप्त गोदावरी, जानकीकुण्ड, स्फटिक शिला आदि
(प्राणमय कोश)
🟢 तृतीय दिवस — मन की शुद्धि
श्रीराम शैय्या, भरतकूप, व्यासकुंड, मड़फा महादेव, कालिंजर
(मनोमय कोश)
🔵 चतुर्थ दिवस — विवेक और ज्ञान का विकास
मार्कण्डेय आश्रम, शबरी प्रपात, सरभंग आश्रम, सुतीक्ष्ण आश्रम, सोमनाथ महादेव आदि
(विज्ञानमय कोश)
🟣 पंचम दिवस — आनंद और भक्ति की पूर्णता
राजापुर (तुलसी जन्मभूमि), वाल्मीकि आश्रम, ब्रह्माकोटरा शिव, दशरथ घाट
(आनन्दमय कोश)
✨ यह यात्रा केवल घूमने की नहीं, भीतर से बदलने की यात्रा है।
जहाँ शरीर शुद्ध होता है, मन शांत होता है, विवेक जागता है और अंत में आत्मा को रामरस का आनंद मिलता है।
इसीलिए कहा गया है —
👉 चित्रकूट = आत्मा की परमात्मा से मिलन की यात्रा। 🚩
🙏 जय श्री राम | जय मंदाकिनी मइया | जय कामदगिरि महाराज 🙏

18/01/2026

मौन की गोद में बैठा चित्रकूट,
मंदाकिनी के जल में बहता अहंकार,
कामदगिरि की छाया में मिलता राम,
यही है मौनी अमावस्या — आत्मा का उत्सव।

इतिहास के नाम पर नक़्शानुमा धोखा — और राम का असली मार्गआजकल सोशल मीडिया पर एक रंगीन, आकर्षक और “श्रद्धा-जागृत” करने वाला...
18/01/2026

इतिहास के नाम पर नक़्शानुमा धोखा — और राम का असली मार्ग
आजकल सोशल मीडिया पर एक रंगीन, आकर्षक और “श्रद्धा-जागृत” करने वाला नक़्शा खूब घूम रहा है,
जिसमें भगवान श्रीराम के 14 वर्षों के वनगमन का तथाकथित “सटीक रूट” दिखाया गया है —
राज्य, ज़िले और पिन लोकेशन के साथ।
पर सच यह है कि यह इतिहास नहीं,
आधुनिक राजनीति की कल्पना है।
प्राचीन भारत में न आज जैसे राज्य थे,
न सीमाएँ, न पिन कोड।
वाल्मीकि रामायण कोई GPS आधारित ट्रैवल गाइड नहीं,
वह तो धर्म, करुणा, त्याग और न्याय का महाकाव्य है।
“दंडक वन” कोई प्रशासनिक ज़िला नहीं था,
वह एक विशाल वन-सांस्कृतिक क्षेत्र था,
जहाँ आश्रम थे, जनजातीय समाज थे,
और जीवन की सहज तपस्वी परंपरा थी।
उसे आज के नक़्शे में बाँध देना
रामायण को राजनीति में कैद करने जैसा है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि
हर घटना को एक सटीक बिंदु पर चिपका दिया जाता है —
यहीं सीता हरण,
यहीं जटायु मोक्ष,
यहीं युद्ध,
मानो कोई CCTV रिकॉर्ड हो।
रामायण भावनात्मक और नैतिक सत्य का ग्रंथ है,
लोकेशन टैगिंग का अभ्यास नहीं।
🌿 और इसी सत्य का सबसे सुंदर रूप है — चित्रकूट।
चित्रकूट केवल एक पड़ाव नहीं था,
वह राम के जीवन का भावनात्मक केंद्र था।
यहीं उन्होंने भरत को राज्य नहीं,
धर्म सौंपा।
यहीं उन्होंने कोल, निषाद, वनवासी समाज से
राजा की तरह नहीं —
पुत्र और भाई की तरह संवाद किया।
चित्रकूट में राम और कोल समाज का संबंध
दया का नहीं,
समानता का था।
यह संवाद बताता है कि राम की राजनीति नहीं,
उनकी करुणा सभ्यता का आधार थी।
चित्रकूट वह भूमि है
जहाँ राम का राजधर्म
मानवधर्म से गले मिलता है।
जहाँ सत्ता मौन होती है
और प्रेम बोलता है।
भगवान राम सीमाओं के नहीं,
समन्वय के देवता हैं।
उन्होंने जीवन में दो महान यात्राएँ कीं —
पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण।
पूर्व में माता सीता के साथ
मिथिला वासियों और अहिल्या माता का हृदय जीता।
उत्तर से दक्षिण की यात्रा में
सुग्रीव और विभीषण के हृदय जीते।
अपने दोनों भाइयों के हृदय तो जीवन भर जीते ही रहे।
राम की सबसे बड़ी शक्ति यह थी कि
वे एक ही परिवार की बुराई को समाप्त करते हुए
अच्छाई को दोनों हाथों से अपने वक्षस्थल से लगा लेते थे।
राम प्रेम के देवता हैं,
समन्वय के देवता हैं,
न्याय के देवता हैं —
सीमा-रेखाओं के देवता नहीं।
इसी भाव को समग्रता के साथ
“राम वन गमन मैप” के रूप में समाज के सामने रखने वाले
डॉ. राम अवतार शर्मा जी को कोटि-कोटि वंदन
जिन्होंने राम को राजनीति नहीं,
सभ्यता के रूप में देखने का साहस दिया।
आज आवश्यकता नक़्शों की नहीं,
राम के मूल विचार को समझने की है।
क्योंकि जब धर्म को नक़्शे में बदला जाता है,
तो अगला क़दम बॉर्डर होता है,
और उसके बाद संघर्ष।
रामायण हमें जोड़ना सिखाती है,
घेरना नहीं।
🙏 मोनी अमावस्या के पावन अवसर पर
संपूर्ण जगत को हार्दिक शुभकामनाएँ।
प्रभु श्रीराम का मार्ग हमें
प्रेम, न्याय और समन्वय की ओर ले जाए। 🙏
#चित्रकूटकीविलक्षणता
#रामऔरकोलसंवाद
#रामसमन्वयकेदेवता
#रामायणकासच्चाअर्थ
#वनगमननक़्शानहींविचारहै
#मोनीअमावस्या
#सभ्यताकासंवाद
#चित्रकूटभाव

वाह रे कर्णधारोंपतित पावनी मां मंदाकिनी को और मैला करने के लिए कितने उपक्रम करोगे भाई,,,,
12/06/2025

वाह रे कर्णधारों

पतित पावनी मां मंदाकिनी को और मैला करने के लिए कितने उपक्रम करोगे भाई,,,,

 #मेरीबेटीश्री चित्रकूटधाम के अधिष्ठाता सभी देवों,देवियों,संतो,ऋषियों,पूर्वजों के आशीर्वाद से मेरी बेटी दीपांशी ने हाईस्...
25/04/2025

#मेरीबेटी
श्री चित्रकूटधाम के अधिष्ठाता सभी देवों,देवियों,संतो,ऋषियों,पूर्वजों के आशीर्वाद से मेरी बेटी दीपांशी ने हाईस्कूल परीक्षा में 80 फीसद से ज्यादा अंक लाकर परिवार का मान बढ़ाया।।।

 #चित्रकूटधाम #मंदाकिनी #श्रीरामजी @सीताराम जी सरकार चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्।एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥...
20/04/2025

#चित्रकूटधाम
#मंदाकिनी
#श्रीरामजी
@सीताराम जी सरकार
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥१॥
श्री रघुनाथजीका चरित्र सौ कोटि विस्तारवाला हैं। उसका एक-एक अक्षर महापातकोंको नष्ट करनेवाला है।

ये थे नाना जी जिन्होंने कभी मोदी जी को 2 रुपए चप्पल खरीदने को दिए थे,,,,, मोदीजी ने उन्हें भारत रत्न देकर चित्रकूट का सम...
15/04/2025

ये थे नाना जी जिन्होंने कभी मोदी जी को 2 रुपए चप्पल खरीदने को दिए थे,,,,, मोदीजी ने उन्हें भारत रत्न देकर चित्रकूट का सम्मान बढ़ाया

04/11/2024

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 #अतुल्य चित्रकूटचिरंजीवियो में सिरमौर ऋषि मार्कण्डेय जी,,,,की तपस्थली में भले ही आज तक प्रशासन ने एक रुपए का काम न किया...
28/08/2024

#अतुल्य चित्रकूट
चिरंजीवियो में सिरमौर ऋषि मार्कण्डेय जी,,,,की तपस्थली में भले ही आज तक प्रशासन ने एक रुपए का काम न किया हो,,,आश्रम तक पहुंचने के मार्ग को बनवाने में भी मानिकपुर ब्लाक में खूब खेल किया हो,,,लेकिन आप जब यहां पर आयेगे तो खुद को प्राकृतिक और आध्यात्म के बाहुपाश में प्रेम पूर्ण ढंग से जकड़ा महसूस करेगे,,,,,,

संदीप रिछारिया

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