27/08/2026
माता पार्वती और भगवान विष्णु का पवित्र रक्षाबंधन प्रसंग
देवताओं के लोक में एक बार सभी देवी-देवता भगवान शिव और माता पार्वती के कैलाश धाम पर एकत्र हुए। माता पार्वती सभी देवताओं को अपने परिवार का ही सदस्य मानती थीं। भगवान विष्णु भी भगवान शिव के अत्यंत प्रिय और घनिष्ठ संबंधी थे।
कहा जाता है कि एक अवसर पर माता पार्वती ने भगवान विष्णु को अपना भाई समान मानकर उनके हाथ पर प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षा सूत्र (राखी) बांधा। माता पार्वती ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की कि यह पवित्र धागा सदैव प्रेम, सम्मान और रक्षा के बंधन को मजबूत बनाए रखे।
भगवान विष्णु माता पार्वती के इस स्नेह से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने माता को आशीर्वाद दिया कि वे सदैव उनके और समस्त संसार के कल्याण के लिए तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा का यह बंधन केवल धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और धर्म की शक्ति है।
माता पार्वती ने भगवान विष्णु को भाई के रूप में सम्मान दिया और भगवान विष्णु ने भी उन्हें बहन समान स्नेह और आदर प्रदान किया। यह प्रसंग हमें सिखाता है कि भाई-बहन का रिश्ता केवल जन्म से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और सम्मान से भी बनता है।
रक्षाबंधन का पर्व इसी भावना को दर्शाता है कि रिश्तों में प्रेम, सुरक्षा और शुभकामनाओं का भाव हमेशा बना रहना चाहिए।
जय माता पार्वती।
जय श्री हरि विष्णु।